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भगवान शिव के जीवन में ज्ञान का सागर छिपा है


भगवान शिव के जीवन में ज्ञान का सागर छिपा है. शिवजी विवाह के लिए बैल पर सवार होकर गए. पंचामृत उनका प्रिय प्रसाद है. इन दोनों के महत्व को समझेंगे. आमजन विवाह के लिए घोड़ी पर जाते हैं. घोड़ी सर्वाधिक कामुक जीव है. उस पर सवार होकर जाने में संदेश है कि दूल्हा काम के वश में होने के लिए नहीं बल्कि घोड़ी रूपी कामवासना को अपने वश में करने को विवाह बंधन में बंधने जा रहा है. शिवजी ने काम को भस्म किया था. काम उनके जीवन में महत्वहीन है. इसलिए वह विवाह के लिए धर्म रूपी बैल पर सवार होकर गए. इससे शिक्षा मिलती है कि विवाह का पवित्र बंधन नवदंपती को धर्म के मार्ग पर अग्रसर करता है. सावन में कामदेव की सेना वर्षा की बौछारें व सुगंधित पवन कामवासना जागृत करती है. सावन में शिव की पूजा का विशेष महत्व इसलिए हो जाता हैं क्योंकि शिव काम की प्रबलता का नाश करके पतन से बचाते हैं. शिवजी को चढ़ने वाले पंचामृत में भी एक गूढ़ संदेश है.पंचामृत दूध, दही, शहद व घी को गंगाजल में मिलाकर बनता है. 1.दूधः जब तक बछड़ा पास न हो गाय दूध नहीं देती. बछड़ा मर जाए तो उसका प्रारूप खड़ा किए बिना दूध नहीं देती. दूध मोह का प्रतीक है. 2.शहदः मधुमक्खी कण-कण भरने के लिए शहद संग्रह करती है. इसे लोभ का प्रतीक माना गया है. 3.दहीः इसका तासीर गर्म होता है. क्रोध का प्रतीक है. 4. घीः यह समृद्धि के साथ आने वाला है, अहंकार का प्रतीक. 5. गंगाजलः मुक्ति का प्रतीक है. गंगाजल मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार को समेटकर शांत करता है. पंचामृत से स्नान का अर्थ हुआ हम मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार को समेटकर शिवजी के शरणागत हों। आशा है विवाह और पंचामृत का गूढ़ अर्थ आपको पसंद आया होगा। आपको काशी विश्वनाथ के विश्वेशर महादेव के दर्शन भी कराते हैं जहाँ पंचामृत स्नान का बड़ा महत्व है। इसे मुक्ति का क्षेत्र माना जाता है। जय बाबा की

बृजमोहन ओजा दधीच

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संस्कृत : कुछ रोचक तथ्य


*संस्कृत : कुछ रोचक तथ्य* ================ संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा। आज हम आपको संस्कृत के बारे में कुछ ऐसे तथ्य बता रहे हैं,जो किसी भी भारतीय का सर गर्व से ऊंचा कर देंगे;; .1. संस्कृत को सभी भाषाओं की जननी माना जाता है। 2. संस्कृत उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा है। 3. अरब लोगो की दखलंदाजी से पहले संस्कृत भारत की राष्ट्रीय भाषा थी। 4. NASA के मुताबिक, संस्कृत धरती पर बोली जाने वाली सबसे स्पष्ट भाषा है। 5. संस्कृत में दुनिया की किसी भी भाषा से ज्यादा शब्द है। वर्तमान में संस्कृत के शब्दकोष में 102 अरब 78 करोड़ 50 लाख शब्द है। 6. संस्कृत किसी भी विषय के लिए एक अद्भुत खजाना है। जैसे हाथी के लिए ही संस्कृत में 100 से ज्यादा शब्द है। 7. NASA के पास संस्कृत में ताड़पत्रो पर लिखी 60,000 पांडुलिपियां है जिन पर नासा रिसर्च कर रहा है। 8. फ़ोबर्स मैगज़ीन ने जुलाई,1987 में संस्कृत को Computer Software के लिए सबसे बेहतर भाषा माना था। 9. किसी और भाषा के मुकाबले संस्कृत में सबसे कम शब्दो में वाक्य पूरा हो जाता है। 10. संस्कृत दुनिया की अकेली ऐसी भाषा है जिसे बोलने में जीभ की सभी मांसपेशियो का इस्तेमाल होता है। 11. अमेरिकन हिंदु युनिवर्सिटी के अनुसार संस्कृत में बात करने वाला मनुष्य बीपी, मधुमेह,कोलेस्ट्रॉल आदि रोग से मुक्त हो जाएगा। संस्कृत में बात करने से मानव शरीरका तंत्रिका तंत्र सदा सक्रिय रहता है जिससे कि व्यक्ति का शरीर सकारात्मक आवेश (PositiveCharges) के साथ सक्रिय हो जाता है। 12. संस्कृत स्पीच थेरेपी में भी मददगार है यह एकाग्रता को बढ़ाती है। 13. कर्नाटक के मुत्तुर गांव के लोग केवल संस्कृत में ही बात करते है। 14. सुधर्मा संस्कृत का पहला अखबार था, जो 1970 में शुरू हुआ था। आज भी इसका ऑनलाइन संस्करण उपलब्ध है। 15. जर्मनी में बड़ी संख्या में संस्कृतभाषियो की मांग है। जर्मनी की 14 यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत पढ़ाई जाती है। 16. नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार जब वो अंतरिक्ष ट्रैवलर्स को मैसेज भेजते थे तोउनके वाक्य उलट हो जाते थे। इस वजह से मैसेज का अर्थ ही बदल जाता था। उन्होंले कई भाषाओं का प्रयोग किया लेकिन हर बार यही समस्या आई। आखिर में उन्होंने संस्कृत में मैसेज भेजा क्योंकि संस्कृत के वाक्य उल्टे हो जाने पर भी अपना अर्थ नही बदलते हैं। जैसे अहम् विद्यालयं गच्छामि। विद्यालयं गच्छामि अहम्। गच्छामिअहम् विद्यालयं । उक्त तीनो के अर्थ में कोई अंतर नहीं है। 17. आपको जानकर हैरानी होगी कि Computer द्वारा गणित के सवालो को हल करने वाली विधि यानि Algorithms संस्कृत में बने है ना कि अंग्रेजी में। 18. नासा के वैज्ञानिको द्वारा बनाए जा रहे 6th और 7th जेनरेशन Super Computers संस्कृतभाषा पर आधारित होंगे जो 2034 तक बनकर तैयार हो जाएंगे। 19. संस्कृत सीखने से दिमाग तेज हो जाता है और याद करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसलिए London और Ireland के कई स्कूलो में संस्कृत को Compulsory Subject बना दिया है। 20. इस समय दुनिया के 17 से ज्यादा देशो की कम से कम एक University में तकनीकी शिक्षा के कोर्सेस में संस्कृत पढ़ाई जाती है। संस्कृत के बारे में ये 20 तथ्य जान कर आपको भारतीय होने पर गर्व होगा। *संस्कृत दिवस की शुभकामना* *ग्रहदृष्टी सूर्यसिद्धांतीय पंचांग नागपूर*

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तुलसी की दो प्रमुख सेवायें हैं——


तुलसी की दो प्रमुख सेवायें हैं——

प्रथम सेवा–तुलसी की जड़ो में
प्रतिदिन जल अर्पण करते रहना।

द्वतीय सेवा–तुलसी की मंजरियों को
तोड़कर तुलसी को पीढ़ा मुक्त करते रहना,
क्योंकि ये मंजरियाँ तुलसी जी
को बीमार करके सुखा देती हैं,
जबतक ये मंजरियाँ तुलसी जी की शीश पर रहती है
तबतक तुलसीमाता घोर कष्ट पातीं है।

ये दो सेवायें
श्री ठाकुर जी की सेवा से कम नहीं माना गया है,

इनमें कुछ सावधानियां रखने की भी अवश्यक्तायें हैं–

जैसे–तुलसीदल तोड़ने से पहले
तुलसीजी की आज्ञा ले लेनी चाहिए,
सच्चा वैष्णव बिना आज्ञा लिए
तुलसीदल को स्पर्श भी नहीं करता है,
बुधवार,रविवार और द्वादशी के दिन
कभी भी तुलसी दल को नहीं तोड़ना चाहिए,
तथा कभी भी नाखूनों से तुलसीदल को नहीं तोड़ना चाहिए,
महापाप लगता है।

कारण–तुलसी जी श्री ठाकुर जी की
आज्ञा से केवल इन्ही तीन दिनों विश्राम और निंद्रा लेंती हैं,
बाकी के दिनों में वो एक छण के लिए भी सोती नही हैं
और ना ही विश्राम लेंती हैं,
आठो पहर ठाकुर जी की ही सेवा में लगी रहती है !!

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एक चूहे ने हीरा (diamond) निगल लिया


एक चूहे ने हीरा (diamond) निगल लिया तो हीरे के मालिक ने उस चूहे को मारने के लिये एक शिकारी को ठेका दिया। जब शिकारी चूहे को मारने पहुँचा तो वहाँ हजारों चूहे झूँड बनाकर एक दूजे पर चढे हुए थे मगर एक चूहा उन सबसे अलग बेठा था। शिकारी ने सीधा उस चूहे को पकङा जिसने डायमन्ड निगला था। अचम्भित डायमन्ड के मालिक ने शिकारी से पूछा, हजारों चूहों में से इसी चूहे ने डायमन्ड निगला यह तुम्हें केसे पता लगा ? शिकारी ने जवाब दिया बहुत ही आसान था, जब मूर्ख धनवान बन जाता है तब अपनों से भी मेल-मिलाप छोङ देता है।

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मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत के टॉप मोस्ट 5 गद्दार..


मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत के टॉप मोस्ट 5 गद्दार…..*

 

यू तो हमारे बच्चों के इतिहास की किताबों में यह चैप्टर होना चाहिए था…

ताकि आने वाली पीढ़ी इन गद्दारो को जान पाती समझ पाती…

खैर …छोड़िये

आप इस आर्टिकल को पढ़िए और अपने बच्चों को बताइये।

 

 

❌भारतीय इतिहास के ये #5 गद्दार कभी भुलाए नहीं जा सकते

 

 

 

#712 AD में इस्लामिक आक्रमणकारी भारत में आने शुरू हुए और #1600 में अंग्रेज व्यापार के नाम पर भारत आये.

जिस कारण भारत लगातार विदेशियों के निशाने पर था.

 

बेशक भारत पूर्ण गुलाम कभी न हुआ और कभी कोई क्षेत्र गुलाम होता था तो कभी कोई आजाद भी करवा लिया जाता था.

 

मगर इस दौरान विदेशियों को समर्थन मिला भारत के अंदर छिपे बैठे कुछ गद्दारों का,

जिन्होंने अपना जमीर गिरवी रख कर अपने ही देश के साथ गद्दारी की.

 

कहा जा सकता है कि अगर ये गद्दार न होते तो आज भारत का इतिहास गुलामी की जंजीरों की बजाय समृद्धि की कथा कहता. इन्हीं में से 5 गद्दारों के बारे में आज हम जानेंगे ….!!

 

 

❌1) *#जयचंद*

जब-जब इतिहास के पन्नों में राजा पृथ्वीराज चौहान का नाम लिया जाता है,

तब-तब उनके नाम के साथ एक नाम और जुड़ता है, वो नाम है जयचंद. किसी भी धोखेबाज, गद्दार या देश द्रोही के लिए जयचंद का नाम तो मानो मुहावरे की तरह प्रयोग किया जाता है.

 

साथ ही जयचंद को लेकर तो एक मुहावरा खूब चर्चित है कि… “जयचंद तुने देश को बर्बाद कर दिया गैरों को लाकर हिंद में आबाद कर दिया…”

 

बता दें कि जयचंद कन्नौज का साम्राज्य का राजा था.

बेशक पृथ्वीराज चौहान और राजा जयचंद की दुश्मनी बहुत पुरानी थी और उन दोनों के बीच कई बार भयंकर युद्ध भी हो चुके थे.

बावजूद इसके पृथ्वीराज ने जयचंद की पुत्री संयोगिता से विवाह रचाया था.

मगर जयचंद अब भी अंदर ही अंदर पृथ्वीराज को दुश्मन मानता था और मौके की तलाश में रहता था.

एक बार जयचंद को पता चला कि मोहम्मद गौरी भी पृथ्वीराज से अपनी हार का बदला लेना चाहता है.

 

जयचंद ने दिल्ली की सत्ता के लालच में मोहम्मद गौरी का साथ दिया और युद्ध में गौरी को अपनी सेना देकर पृथ्वीराज को हरा दिया.

मगर युद्ध जीतने के बाद गौरी ने राजा जयचंद को भी मार दिया✔

और उसके बाद गौरी ने कन्नौज और दिल्ली समेत कई अन्य राज्यों पर कब्जा कर लिया. जयचंद ने सिर्फ पृथ्वी राज को ही धोखा नहीं दिया

बल्कि समस्त भारत को धोखा दिया क्यूंकि गौरी के के बाद देश में इस्लामिक आक्रमणकारी हावी होते चले गये थे.

 

 

 

❌2) *#मानसिंह*

पृथ्वी राज चौहान और महाराणा प्रताप में कौन अधिक महान इस पर चर्चाएँ कितनी भी हो सकती है,

वहीं उनके समकालीन राजद्रोही मानसिंह और जयचंद के बीच भी गद्दारी की क्षमता में मुकाबला कड़ा मिलेगा.

 

एक तरफ जहाँ महाराणा प्रताप संपूर्ण भारत वर्ष को आज़ाद कराने के लिए दर-दर भटक रहे थे और जंगलो में रहकर घास की रोटियां खाकर देश को मुगलों से बचाने की कोशिश कर रहे थे तो

वहीं मानसिंह मुगलों का साथ दे रहे थे.

 

राजा मानसिंह मुगलों के सेना प्रमुख थे और वह आमेर के राजा थे.

यही नहीं महाराणा प्रताप और मुगलों की सेना के बीच लड़े गए हल्दी घाटी के युद्ध में वो मुगल सेना के सेनापति भी बने थे,

मगर महाराणा ने मान सिंह को मार कर उसकी गद्दारी की सजा उसे दी थी.

 

मानसिंह की गद्दारी के कारण एक बार महाराणा इतने घायल हो गये थे कि उन्हें बचकर जंगलों में काफी समय गुजारना पड़ा था. मगर इस दौरान एक वीर योद्धा की तरह उन्होंने अपने अंदर ज्वाला जलाए रखी थी.

 

उन्होंने घास की रोटी तक खानी पड़ी, मगर उनके अंदर अकबर के साथ मानसिंह को लेकर भी ज्वाला भभक रही थी. बस जब वो योजनाबद्ध तरीके के साथ जंगल से बाहर आये और अपनी सेना को इक्कठा कर फिर से युद्ध किया तो उन्होंने हल्दी घाटी में अकबर को पटखनी दे दी,

जिसके बाद अकबर कई साल तक छिप कर रहा था.

 

 

 

❌3) *#मीर जाफ़र, #मीर कासिम, #टीपू सुल्तान और #मीर सादिक*

वैसे तो किसी को गद्दार कहने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथी काफी है,

मगर मीर जाफ़र कहना भी कम नहीं होता है.

क्यूंकि उसी के राज को भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवाद की शुरुआत माना जाता है.

 

मीर जाफर ने अंग्रेजों की मदद से बैटल ऑफ़ प्लासी में रोबर्ट क्लाइव के साथ मिल कर जाफ़र ने अपने ही राजा सिराजुद्दौला को धोखा दिया था

और भारत में अंग्रेजों की पूर्ण नींव रखी थी.

 

मीर जाफ़र वर्ष #1757 से #1760 तक बंगाल के नवाब रहा था.

माना जाता है कि इसी घटना के बाद भारत में ब्रिटिश राज की स्थापना की शुरुआत माना जाता है.

 

मगर मीर जाफर को हटाने के लिए अंग्रेजों ने एक और गद्दार का सहारा लिया,

वो था मीर कासिम.

 

मगर मीर कासिम जब तक समझ पता कि उसने अंग्रेजों का साथ देकर गलती की,

तब तक उसे भी मार दिया गया.

 

मीर कासिम को #1764 में बक्सर के युद्ध में अंग्रेजों ने मार गिराया.

 

टीपू सुल्तान दक्षिण भारत का औरंगजेब था.

वो हिन्दुओं पर बहुत अत्याचार करता था. ✔

 

मगर हर बार की तरह एक इस्लामिक शासन में एक मुस्लिम द्वारा ही खंजर घोंपने की प्रथा जारी थी

और मीर सादिक नामक उसके एक मंत्री ने अंग्रेजों का साथ देकर उसके साथ गद्दारी की.

और दक्षिण भारत में अंग्रेजों का आगमन हुआ क्यूंकि मीर सादिक को अंग्रेजों ने आसानी से अपने रास्ते से हटा दिया.

 

 

 

❌4) *#फणीन्द्र नाथ घोष*

वैसे इस कड़ी में फणीन्द्र नाथ घोष नामक उस गद्दार का नाम सबसे ऊपर माना जायेगा जिसने सैण्डर्स-वध कांड और असेम्बली बम कांड में

भगत सिंह के खिलाफ गवाही दी थी

और *इसी गवाही के आधार पर*

*भगत सिंह,*

*राजगुरू एवं*

*सुखदेव को*

*आरोपी बनाकर उन्हें फांसी की सज़ा सुनाई गई.*

 

फणीन्द्र नाथ घोष ने ही *सरकारी गवाह के तौर पर पंडित आज़ाद के शव की शिनाख्त* की थी.

लेकिन घोष की गद्दारी से गुस्साए भगत सिंह के साथी जो जेल में डाल दिए गये,

योगेन्द्र शुक्ल व

गुलाब चन्द्र गुलाली #1932 में दीवाली की रात खुफिया तरीक़े से भाग निकले.

 

जेल से निकलते ही उन्होंने गद्दार फणीन्द्र नाथ घोष को सज़ा देने की क़सम खा ली.

 

इस क़सम को पूरा किया योगेन्द्र शुक्ल के भतीजे बैकुंठ शुक्ल ने, जिसने खुखरी से घोष को मार डाला.

वार इतने जानलेवा थे कि घोष चीखें मारता ज़मीन पर लोट गया.

बेतिया अस्पताल में क़रीब सप्ताह भर ज़िन्दगी व मौत के बीच जूझते हुए फणीन्द्र नाथ घोष की कहानी ख़त्म हो गयी.

 

बेशक बैकुंठ शुक्ल #6 जुलाई, #1933 को हाजीपुर पुल के सोनपुर वाले छोर से गिरफ़्तार कर लिए गए और

फांसी पर लटका दिए गये.

मगर वे अपना काम बखूबी कर चुके थे.

 

 

 

❌5) *#कांग्रेस👹*

गद्दारी की बात हो और भारत की सबसे पुरानी पार्टी को भूल जाएँ, ऐसा असंभव है.

कोई एक नेता की बात हो तो नाम लिया जाए,

मगर जिस पार्टी के नेताओं ने समय समय पर देश और हिन्दुओं की पीठ में खंजर घोंपा,

 

उसमें किसी एक व्यक्ति का नाम लेना बाकियों के साथ अन्याय होगा.

 

*इसलिए #1885 में स्थापना से लेकर आज तक कांग्रेस के नेताओं का इतिहास दागदार रहा है,*

जिसमें नेहरु से लेकर गांधी तक सब नेताओं के दामन हिन्दुओं और देशवासियों के खून से सटे हुए हैं…

 

कांग्रेस की देश को जो देन है वह मुख्यतः

यह है –

  1. 1947 में देश विभाजन,
  2. कश्मीर समस्या और
  3. 1962 में चीन से लड़ाई में भारत की पराजय…

 

*देश के बँटवारे वाले प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर नेहरू के थे,*

सुभाष चंद्र बोस की गुमनामी पर चुप्पी साधने वाले नेहरू थे

और इतिहास में कहा तो ये भी जाता है कि

*चंद्रशेखर आजाद को यदि किसी नें छल से मरवाया तो वे नेहरू ही थे,*

क्यूंकि माना जाता है कि अंत समय में आजाद नेहरु से ही मिले थे जिसके बाद अंग्रेजो ने उन्हें घेर लिया और जिसके बाद उन्हें खुद को गोली मारनी पड़ी.. !!

 

*जागो भारत जागो !! 🚩🚩*

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गंगा लगातार सिकुड़ रही है जो कि बेहद चिंता का बिषय है


गंगा लगातार सिकुड़ रही है जो कि बेहद चिंता का बिषय है
यदि हम और हमारा समाज इसी तरह गंगा को लेकर अचेतन अवस्था मे रहे तो आने वाला भविष्य में यह भी सरस्वती नदी की तरह बिलुप्त हो जाएगी गंगा की ऊपर वाली तस्वीर 1984 की है और नीचे वाली तस्वीर 2016 की है ।
भारत लोकतांत्रिक देश है, जहां किसी भी बड़ी समस्या का समाधान राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के प्रथम व द्वितीय चरण में करीब 1500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। बेसिन प्राधिकरण के गठन के बाद वर्ल्ड बैंक की सहायता से 300 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सात हजार करोड़ रुपए की परियोजना प्रस्तावित है परंतु इतने के बावजूद गंगा के संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदम सार्थक नजर नहीं आ रहे..
दुनिया की सबसे पवित्र नदियों में एक है – गंगा। माना जाता है कि गंगा जल के स्पर्श मात्र से समस्त पापों से छुटकारा मिल जाता है। गोमुख में अपने मूल से शुरू होकर बंगाल की खाड़ी तक गंगा 2525 किमी से अधिक की यात्रा तय करती है। गंगा के मुहाने पर विशाल डेल्टा-सुंदरवन डेल्टा-है, जो दुनिया में सबसे बड़ा डेल्टा है। दुनिया में हिंदू धर्म मानने वाला हर व्यक्ति अपने जीवन में कम-से-कम एक बार गंगा स्नान की इच्छा रखता ही है। यकीनन दुनिया में यह सबसे पवित्र नदी है और गहराई से इस देश के लोगों द्वारा प्रतिष्ठित है। गंगा में स्नान करने के लिए कई लोग कुम्भ मेला और कई त्योहारों में बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं।

गंगा नदी देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं जन-जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है। 2071 किमी तक भारत तथा उसके बाद बांग्लादेश में अपनी लंबी यात्रा करते हुए यह सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किमी क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक व आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण गंगा का यह मैदान अपनी घनी जनसंख्या के कारण भी जाना जाता है। सौ फीट की अधिकतम गहराई वाली यह नदी भारतीय पुराण और साहित्य में अपने सौंदर्य और महत्व के कारण बार-बार आदर के साथ वंदित है। इसके प्रति विदेशी साहित्य में भी प्रशंसा और भावकतापूर्ण वर्णन किए गए हैं।

पहली बार संसद में जब उठा सवाल

1975 में पहली बार गंगा के प्रदूषित होने की बात सामने आने पर संसद में एमएस कृष्णा द्वारा यह सवाल उठाया गया, ‘गंगा प्रदूषण के बारे में सरकार को क्या जानकारी है और इसे रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है?’ संसद में सवाल का जवाब देने के लिए बीएचयू से उत्तर मांगा गया जिसका टेलीग्राम आया तो भूचाल मच गया। इसके बाद से गंगा प्रदूषण के बारे में चर्चा तेज हो गई। 21 जुलाई, 1981 को पहली बार भारतीय संसद में इस बात को स्वीकार किया गया कि गंगा जल प्रदूषित हो रहा है। यदि इसे रोका नहीं गया तो भविष्य में इसके गंभीर परिणाम होंगे।

पिछले दो दशक के शोधों के दौरान पाया गया है कि गंगा जल के प्रदूषण की समस्या दूसरे स्तर की हो गई है। आज हमें सोचना होगा कि आगामी दो दशकों में गंगा में पानी बहेगा कि नहीं क्योंकि गंगा में तेजी से सिल्टेशन के कारण उसकी गहराई निरंतर कम हो रही है।

सभी बड़े शहरों के आसपास गंगा के दोनों तरफ की भूमि पर अतिक्रमण होने के कारण गंगा सिकुड़ रही है। पानी का प्रवाह निरंतर कम होने से तनुता कम हो रही है और प्रदूषण की तीव्रता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

गंगा को बचाने के लिए निम्न बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा-
1. गंगा के पानी के प्रवाह को बढ़ाना,
2. गंगा की जल धारण क्षमता में वृद्धि करना और 3. गंगा जल के प्रदूषण नियंत्रण के दृष्टिगत सीवेज और कारखानों से निकले विषाक्त पदार्थों के शोधन और पुनर्चक्रण के साथ-साथ नई तकनीकों के माध्यम से उनकी मात्रा को कम करना।

गंगा-समस्या को निम्नलिखित कार्यक्रमों से हल किया जा सकता है-
1. गंगा नीति निर्धारण :

नीति ऐसी हो जो नदी में जल की मात्रा बढ़ाने के साथ ही पारिस्थितिक प्रवाह को भी कायम रख सके। वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, प्राकृतिक सफाई, भूजल व नदियों के जल का दोहन, नदी के तट की भूमि का प्रयोग, मृत शरीरों का दाह संस्कार, भस्मीकरण सयंत्र, जल के उपभोग, पीने, नहाने, कपड़े धोने, नेविगेशन, जलीय कृषि, पौधरोपण, फसलों की सिंचाई, अपशिष्ट जल निस्तारण, प्रदूषण नियंत्रण तकनीक, एसटीपी के लिए भूमि चयन, जल संग्रह क्षेत्रों में प्रमुख निर्माण, विभिन्न परियोजनाओं में लोगों की भागीदारी, परियोजनाओं की निगरानी, परियोजना प्रमुख की जवाबदेही, संबंधित पक्षों को साथ लेना, जैव विविधता संरक्षण, युवा शक्ति का उपयोग व जनजागरुकता।

2. गंगा संरक्षण योजना :

जल संरक्षण के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजना, पुनर्जनन क्षमता आधारित पर्यावरण प्रबंधन, गंगा बेसिन में सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक विकास समुदाय उपचार सुविधाओं सहित विशिष्ट उपचार।

3. राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति का आह्वान

भारत लोकतांत्रिक देश है, जहां किसी भी बड़ी समस्या का समाधान राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना संभव नहीं है। इतिहास गवाह है कि गंगा प्रदूषण नियंत्रण कार्यक्रम के प्रथम व द्वितीय चरण में करीब 1500 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण के 2008 में गठन के बाद वर्ल्ड बैंक की सहायता से 300 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। सात हजार करोड़ रुपए की परियोजना प्रस्तावित है परंतु इतने के बावजूद गंगा के संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदम सार्थक नजर नहीं आ रहे हैं। गंगा के संरक्षण का कार्य राजनीतिक दृढ़ इच्छाशक्ति के बिना पूरा नहीं हो सकता।

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हिन्दुओ के लिए कुछ पूजन की जानकारी


हिन्दुओ के लिए कुछ पूजन की जानकारी
🌸1. घर में सेवा पूजा करने वाले जन भगवान के एक से अधिक स्वरूप की सेवा पूजा कर सकते हैं ।

🌸2. घर में दो शिवलिंग की पूजा ना करें तथा पूजा स्थान पर तीन गणेश जी नहीं रखें।

🌸3. शालिग्राम जी की बटिया जितनी छोटी हो उतनी ज्यादा फलदायक है।

🌸4. कुशा पवित्री के अभाव में स्वर्ण की अंगूठी धारण करके भी देव कार्य सम्पन्न किया जा सकता है।

🌸5. मंगल कार्यो में कुमकुम का तिलक प्रशस्त माना जाता हैं।

🌸6. पूजा में टूटे हुए अक्षत के टूकड़े नहीं चढ़ाना चाहिए।

🌸7. पानी, दूध, दही, घी आदि में अंगुली नही डालना चाहिए। इन्हें लोटा, चम्मच आदि से लेना चाहिए क्योंकि नख स्पर्श से वस्तु अपवित्र हो जाती है अतः यह वस्तुएँ देव पूजा के योग्य नहीं रहती हैं।

🌸8. तांबे के बरतन में दूध, दही या पंचामृत आदि नहीं डालना चाहिए क्योंकि वह मदिरा समान हो जाते हैं।

🌸9. आचमन तीन बार करने का विधान हैं। इससे त्रिदेव ब्रह्मा-विष्णु-महेश प्रसन्न होते हैं।

🌸10. दाहिने कान का स्पर्श करने पर भी आचमन के तुल्य माना जाता है।

🌸11. कुशा के अग्रभाग से दवताओं पर जल नहीं छिड़के।

🌸12. देवताओं को अंगूठे से नहीं मले।

🌸13. चकले पर से चंदन कभी नहीं लगावें। उसे छोटी कटोरी या बांयी हथेली पर रखकर लगावें।

🌸15. पुष्पों को बाल्टी, लोटा, जल में डालकर फिर निकालकर नहीं चढ़ाना चाहिए।

🌸16. श्री भगवान के चरणों की चार बार, नाभि की दो बार, मुख की एक बार या तीन बार आरती उतारकर समस्त अंगों की सात बार आरती उतारें।

🌸17. श्री भगवान की आरती समयानुसार जो घंटा, नगारा, झांझर, थाली, घड़ावल, शंख इत्यादि बजते हैं उनकी ध्वनि से आसपास के वायुमण्डल के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। नाद ब्रह्मा होता हैं। नाद के समय एक स्वर से जो प्रतिध्वनि होती हैं उसमे असीम शक्ति होती हैं।

🌸18. लोहे के पात्र से श्री भगवान को नैवेद्य अपर्ण नहीं करें।

🌸19. हवन में अग्नि प्रज्वलित होने पर ही आहुति दें।

🌸20. समिधा अंगुठे से अधिक मोटी नहीं होनी चाहिए तथा दस अंगुल लम्बी होनी चाहिए।

🌸21. छाल रहित या कीड़े लगी हुई समिधा यज्ञ-कार्य में वर्जित हैं।

🌸22. पंखे आदि से कभी हवन की अग्नि प्रज्वलित नहीं करें।

🌸23. मेरूहीन माला या मेरू का लंघन करके माला नहीं जपनी चाहिए।

🌸24. माला, रूद्राक्ष, तुलसी एवं चंदन की उत्तम मानी गई हैं।

🌸25. माला को अनामिका (तीसरी अंगुली) पर रखकर मध्यमा (दूसरी अंगुली) से चलाना चाहिए।

🌸26.जप करते समय सिर पर हाथ या वस्त्र नहीं रखें।

🌸27. तिलक कराते समय सिर पर हाथ या वस्त्र रखना चाहिए।

🌸28. माला का पूजन करके ही जप करना चाहिए।

🌸29. ब्राह्मण को या द्विजाती को स्नान करके तिलक अवश्य लगाना चाहिए।

🌸30. जप करते हुए जल में स्थित व्यक्ति, दौड़ते हुए, शमशान से लौटते हुए व्यक्ति को नमस्कार करना वर्जित हैं।

🌸31. बिना नमस्कार किए आशीर्वाद देना वर्जित हैं।

🌸32. एक हाथ से प्रणाम नही करना चाहिए।

🌸33. सोए हुए व्यक्ति का चरण स्पर्श नहीं करना चाहिए।

🌸34. बड़ों को प्रणाम करते समय उनके दाहिने पैर पर दाहिने हाथ से और उनके बांये पैर को बांये हाथ से छूकर प्रणाम करें।

🌸35. जप करते समय जीभ या होंठ को नहीं हिलाना चाहिए। इसे उपांशु जप कहते हैं। इसका फल सौगुणा फलदायक होता हैं।

🌸36. जप करते समय b दाहिने हाथ को कपड़े या गौमुखी से ढककर रखना चाहिए।

🌸37. जप के बाद आसन के नीचे की भूमि को स्पर्श कर नेत्रों से लगाना चाहिए।

🌸38. संक्रान्ति, द्वादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, रविवार और सन्ध्या के समय तुलसी तोड़ना निषिद्ध हैं।

🌸39. दीपक से दीपक को नही जलाना चाहिए।

🌸40. यज्ञ, श्राद्ध आदि में काले तिल का प्रयोग करना चाहिए, सफेद तिल का नहीं।

🌸41. शनिवार को पीपल पर जल चढ़ाना चाहिए। पीपल की सात परिक्रमा करनी चाहिए। परिक्रमा करना श्रेष्ठ है, किन्तु रविवार को परिक्रमा नहीं करनी चाहिए।

🌸42. कूमड़ा-मतीरा-नारियल आदि को स्त्रियां नहीं तोड़े या चाकू आदि से नहीं काटें। यह उत्तम नही माना गया हैं।

🌸43. भोजन प्रसाद को लाघंना नहीं चाहिए।

🌸44. देव प्रतिमा देखकर अवश्य प्रणाम करें।

🌸45. किसी को भी कोई वस्तु या दान-दक्षिणा दाहिने हाथ से देना चाहिए।

🌸46. एकादशी, अमावस्या, कृृष्ण चतुर्दशी, पूर्णिमा व्रत तथा श्राद्ध के दिन क्षौर-कर्म (दाढ़ी) नहीं बनाना चाहिए ।

🌸47. बिना यज्ञोपवित या शिखा बंधन के जो भी कार्य, कर्म किया जाता है, वह निष्फल हो जाता हैं।

🌸48. यदि शिखा नहीं हो तो स्थान को स्पर्श कर लेना चाहिए।

🌸49. शिवजी की जलहारी उत्तराभिमुख रखें ।

🌸50. शंकर जी को बिल्वपत्र, विष्णु जी को तुलसी, गणेश जी को दूर्वा, लक्ष्मी जी को कमल प्रिय हैं।

🌸51. शंकर जी को शिवरात्रि के सिवाय कुंुकुम नहीं चढ़ती।

🌸52. शिवजी को कुंद, विष्णु जी को धतूरा, देवी जी को आक तथा मदार और सूर्य भगवानको तगर के फूल नहीं चढ़ावे।

🌸53 .अक्षत देवताओं को तीन बार तथा पितरों को एक बार धोकर चढ़ावंे।

🌸54. नये बिल्व पत्र नहीं मिले तो चढ़ाये हुए बिल्व पत्र धोकर फिर चढ़ाए जा सकते हैं।

🌸55. विष्णु भगवान को चांवल, गणेश जी को तुलसी, दुर्गा जी और सूर्य नारायण को बिल्व पत्र नहीं चढ़ावें।

🌸56. पत्र-पुष्प-फल का मुख नीचे करके नहीं चढ़ावें, जैसे उत्पन्न होते हों वैसे ही चढ़ावें।

🌸57. किंतु बिल्वपत्र उलटा करके डंडी तोड़कर शंकर पर चढ़ावें।

🌸58. पान की डंडी का अग्रभाग तोड़कर चढ़ावें।

🌸59. सड़ा हुआ पान या पुष्प नहीं चढ़ावे।

🌸60. गणेश को तुलसी भाद्र शुक्ल चतुर्थी को चढ़ती हैं।

🌸61. पांच रात्रि तक कमल का फूल बासी नहीं होता है।

🌸62. दस रात्रि तक तुलसी पत्र बासी नहीं होते हैं।

🌸63. सभी धार्मिक कार्यो में पत्नी को दाहिने भाग में बिठाकर धार्मिक क्रियाएं सम्पन्न करनी चाहिए।

🌸64. पूजन करनेवाला ललाट पर तिलक लगाकर ही पूजा करें।

🌸65. पूर्वाभिमुख बैठकर अपने बांयी ओर घंटा, धूप तथा दाहिनी ओर शंख, जलपात्र एवं पूजन सामग्री रखें।

🌸66. घी का दीपक अपने बांयी ओर तथा देवता को दाहिने ओर रखें एवं चांवल पर दीपक रखकर प्रज्वलित करें।
🌿🌸आप सभी से प्रार्थना है अगर हो सके तो और लोगों को भी आप इन महत्वपूर्ण बातों से अवगत करा सकते हे 🌿जय जय श्री राधे कृष्णा 🌹🌷🌹🌷🌹🙏🙏