Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अपने-अपने मन एयरपोर्ट पर एक लड़की हाथ में ट्रे लेकर खड़ी थी।


अपने-अपने मन एयरपोर्ट पर एक लड़की हाथ में ट्रे लेकर खड़ी थी। ट्रे में कई छोटे-छोटे कप थे। दिल्ली से लखनऊ की मेरी उड़ान में अभी समय था। मैं जब भी एयरपोर्ट पहले पहुंच जाता हूं, वहां मौजूद एक-एक दुकान में झांकता हूं। समझने की कोशिश करता हूं कि आख़िर कोई एयरपोर्ट जाकर शॉपिंग क्यों करता है। अपनी जिज्ञासा की इसी कड़ी में मेरी निगाह वहां मौजूद कॉफी की दुकान ‘स्टारबक्स’ के बाहर खड़ी लड़की पर पड़ी। कई लोग आते, लड़की से कुछ पूछते, कप उठा कर कॉफी पीते और चलते बनते। ये हैरानी की बात नहीं थी। आज बहुत से विकसित देशों में देखा गया है कि बड़े-बड़े मॉल में खाने पीने की चीजों का प्रचार ऐसे ही किया जाता है। पहले लोगों को मुफ्त में खिलाया जाता है और पसंद आने पर खरीदने को कहा जाता है। पर दिल्ली एयरपोर्ट पर ये प्रयोग कुछ हैरान करने वाला लगा। काफी देर तक सब देखने के बाद मैं उस लड़की के पास गया। लड़की मेरी ओर देख कर मुस्कुराई। फिर उसने कहा कि सर, आप कॉफी पी कर देखिए। कोल्ड कॉफी में नया फ्लेवर है। मुझे हल्की सी प्यास भी लग रही थी, मैंने कॉफी का कप उठाया और धीरे-धीरे पीने लगा। कॉफी वाकई अच्छी थी। अब कॉफी पी कर बिना कुछ बोले तो लौट नहीं सकते थे। अतः लड़की से बातचीत शुरू कर दी। “आप लोगों को मुफ्त में कॉफी क्यों पिला रही हैं?” “सर, लोग कॉफी पीने के बाद खरीदेंगे। ये कंपनी की ओर से प्रमोशन है।” “तो क्या आप यहां एयरपोर्ट पर कॉफी के पैकेट बेच रही हैं, जिसे खरीद कर हम घर ले जा सकते हैं?” “नहीं सर। हम तो कॉफी बना कर बेचते हैं। आप कॉफी यहीं पी सकते हैं।” “कमाल है। आप यहां मुफ्त कॉफी लोगों को पिला रही हैं और चाह रही हैं कि कॉफी पीने के बाद लेग दुबारा खरीद कर पिएं?” “पर सर, ये तो बहुत कम है। इतनी सी कॉफी से क्या होगा? अगर आपको पसंद आए तो आप और कॉफी खरीद कर पी सकते हैं।” बातचीत दिलचस्प मोड़ पर थी। मैंने देखा कि कई लोग यहां से मुफ्त कॉफी पीने के बाद दुकान के भीतर जा कर कॉफी खरीद कर भी पी रहे थे। पर ढेरों लोग वहां आते, लड़की से पूछते कि ये क्या है, और जैसे ही पता चलता कि ये प्रमोशनल कॉफी है, चुपचाप उठा कर उसे पीते और धीरे से खिसक लेते। मैंने बात आगे बढ़ाई। लड़की से कहा कि इस तरह मुफ्त में अगर आप कॉफी पिलाएंगी तो मुझे नहीं लगता कि कोई खरीद कर पीना चाहेगा। और आप जो कह रही हैं कि ये कप छोटे हैं, इतने से क्या होगा, तो क्या कोई दो कप मुफ्त में पीना चाहेगा तो आप मना करेंगी? लड़की ने बहुत गंभीर हो कर कहा, “मैं क्यों मना करूंगी। ये कंपनी का प्रमोशनल ऑफर है, मैं किसी को मना नहीं करूंगी।” मैंने मस्कुराते हुए कहा कि फिर तो यही समझिए कि बहुत से लोग मुफ्त में कॉफी पीकर ही खिसक जाएंगे, खरीद कर पीने वाले कुछ ही लोग होंगे। अब लड़की मुस्कुराने लगी। उसने धीरे से कहा, “सर, ये तो अपना-अपना मन है।” “मन?” ये छोटी सी लड़की और इतना बड़ा शब्द? बात मेरी नहीं, कोई भी ये सुन कर रुक जाता। लड़की कह रही थी कि ये तो अपना मन है कि कोई मुफ्त में दो-तीन कॉफी पी कर खुश हो रहा है और चालाक बन कर खिसक जा रहा है। मैंने बहुत गौर से उस लड़की की ओर देखा। उसकी आंखों में एक पूरी कहानी तैर रही थी। मैंने धीरे से पूछा, “तुम इस शब्द का अर्थ भी समझती हो?” “जी सर, मन कुछ नहीं, बस चेतना में तैरता हुआ बादल भर है। सच कहू तो मन ही आदमी की मुक्ति में रुकावट है। जो मन पर नियंत्रण करना सीख लेता है, वही तन पर भी नियंत्रण कर पाता है।” मैं हैरान निगाहों से लड़की को देख रहा था। हाथ में कॉफी की ट्रे। कुछ हज़ार रुपयों की नौकरी। और ज्ञान इतना विस्तृत? लड़की कह रही थी, “एक-दो कप कॉफी मुफ्त में पीकर कोई खुश हो जाए, तो हमें अफसोस नहीं। ये तो बिजनेस है। आज मुफ्त पीकर जाएगा, अगली बार खरीद कर पिएगा। या हो सकता है दो घूंट कॉफी पी कर उसे अच्छा लगे और वो फिर अभी ही खरीद कर कॉफी पी ले। पर जो लोग मुफ्त की दो-तीन कप कॉफी पीकर चले जा रहे हैं, उनके बारे में सोचिए। उन्हें लग रहा होगा कि उनका तन तृप्त हो गया। असल में वो अतृप्त मन है। जिन्हें कुछ भी मुफ्त पाने की आदत पड़ जाती है, वो कभी तृप्त नहीं होते। वो कभी मुक्त भी नही होते। आप अधिक मत सोचिए, एक कप कॉफी और पीजिए, खुश रहिए।” फ्लाइट में बैठ कर सोच रहे थे कि सचमुच जो मन पर नियंत्रण करना सीख लेता है, वही तन पर नियंत्रण कर पाता है। मन का क्या है, वो तो चेतना में तैरता हुआ बादल भर है। बढ़े हुए #मन_की_सज़ा तो बेचारा तन ही भुगतता है। सत्य है शिव है सुन्दर है

K S Sexsena

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