Posted in संस्कृत साहित्य

महिलाएं भी करा सकती हैं उपनयन संस्कार


http://inextlive.jagran.com/upnayan-sanskar-of-womens-78681

http://www.ignca.nic.in/coilnet/ruh0028.htm

 

 

महिलाओं को पुरुषों के समान बराबरी का अधिकार वैदिक काल से प्राप्त है। तभी तो वैदिक रीति में महिलाओं को भी उपनयन संस्कार की इजाजत दी गई है। मातृ शक्ति वैदिक काल से सर्वोपरि और पूजी जाति रही है। महिलाओं को केवल भोग का साधन मानने वालों ने इस वैदिक रीति को दबाना शुरू किया और पूरी तरह दबाते हुए महिलाओं के उपनयन प्रक्रिया को प्रतिबंधित कर दिया। लेकिन, जब पूरे भारत में महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिए जाने की लहर चल रही है तो फिर महिलाएं उपनयन संस्कार प्रक्रिया से दूर कैसे रह सकती हैं। श्री- श्री रवि शंकर और उनके शिष्य इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं और महिलाओं का उपनयन संस्कार करा रहे हैं.

महिलाओं में जमा रहे हैं अलख

आर्ट ऑफ लिविंग के जरिये रविशंकर महाराज पूरे देश में महिलाओं को जगा रहे हैं कि पुरुषों की तरह उन्हें भी वैदिक काल से उपनयन संस्कार कराने का अधिकार प्राप्त है। उत्तर प्रदेश में भी जगह- जगह आयोजन हो रहा है। अब तक यूपी में ख्भ्0 महिलाएं उपनयन करा चुकी हैं। इलाहाबाद में आयोजित शिविर में ख्7 महिलाएं उपनयन संस्कार हासिल कर रही हैं। श्रीश्री रविशंकर महाराज के शिष्य स्वामी ब्रह्माचित्य द्वारा उपनयन संस्कार कराया जा रहा है.

जिम्मेदारियों का अहसास कराता है जनेऊ

– उपनयन संस्कार के बाद धारण किया जाता है जनेऊ

– जनेऊ केतीन धागे हैं तीन जिम्मेदारियों के प्रतीक

क्। परिवार के प्रति जिम्मेदारी

ख्। अपना ज्ञानवर्धन करने की जिम्मेदारी

फ्। समाज के प्रति जिम्मेदारी

उपनयन संस्कार से लाभ

– कंट्रोल में रहेगी शारीरिक व मनोस्थिति

– सकारात्मक ऊर्जा का होगा संचार

– मन रहेगा एकाग्रचित

– फोकस प्वाइंट, कंसंट्रेशन होगा बेहतर

– ध्यान की गहराई में जाने में मददगार साबित होगा उपनयन संस्कार

उपनयन के बाद ये करना होगा

– महिलाओं को भी जनेऊ पहनना पड़ेगा

– जनेऊ धारण करने के बाद पुरुषों के लिए जो नियम है, महिलाओं को भी उन्हीं नियमों का पालन करना होगा

– तामसिक भोजन, मांस आदि से रहना होगा दूर

– सात्विक प्रक्रिया का ही करना होगा पालन

– प्रतिदिन करना होगा गायत्री मंत्र का जाप

– जागृत, स्वप्न, सुसुप्ता, तुरया- अवस्था में ध्यान से ज्यादा शांति मिलती है

– मन स्थिर रहेगा तो ऊर्जा का संचार होगा

उपनयन का अर्थ

उपनयन का अर्थ है पास या सन्निकट ले जाना। किसके पास ले जाना? सम्भवत: आरम्भ में इसका तात्पर्य था आचार्य के पास (शिक्षण के लिए) ले जाना। हो सकता है, इसका तात्पर्य रहा हो नवशिष्य को विद्यार्थीपन की अवस्था तक पहुँचा देना।

ये है उपनयन संस्कार की प्रक्रिया-

– उपनयन संस्कार के लिए आने- वाले महिला- पुरुष या फिर बटुक की कराई जाती है जल से शुद्धि

– फिर सभी दिशाओं में कराया जाता है प्रणाम

– प्रणाम के बाद होता है मंत्र का आह्वान

– मंत्रों के आह्वान के बाद गायत्री मंत्र का जाप, फिर प्राणायाम और हवन

– चार दिन की प्रक्रिया के बाद पूरा हो जाता है उपनयन संस्कार

गायत्री मंत्र जाप से मिलती है अद्भुत शक्ति

ऊं भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात

प्राचीन काल में उपनयन संस्कार की तरह ही गायत्री मंत्र उच्चारण महिलाओं के लिए वर्जित कर दिया गया था। गायत्री मन्त्र एक अपूर्व शक्तिशाली मंत्र है, जिसे रक्षा कवच मन्त्र भी कहा गया है। यह वैज्ञानिक कसौटी पर खरा उतरता है, इसीलिए उपनयन संस्कार के दौरान गायत्री मंत्र का जाप कराया जाता है.

वेद शास्त्र महिलाओं और पुरुषों में भेद नहीं करते हैं। उपनयन गुरु के पास जाने और शिक्षा प्राप्त करने का एक संस्कार है। आर्ट ऑफ लिविंग में चल रहे उपनयन संस्कार के जरिए हमें ये जानकारी मिल रही है कि मन को कैसे एकाग्र किया जा सकता है। जीवन को किस तरह और बेहतर बनाया जा सकता है.

डा। रत्ना शर्मा

असिस्टेंट प्रोफेसर, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी

महिलाएं पुरुषों के साथ हर क्षेत्र में कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं, तो फिर उपनयन संस्कार क्यों नहीं? उपनयन का मतलब होता है अपना उन्नयन करना। जब पुरुष उन्नयन कर सकते हैं तो महिलाएं क्यों नहीं? महिलाओं को भी पूर्णता चाहिए.

श्रीमती शशि

सीएटी

यहां आकर पता चला कि हिंदू धर्म में वर्णित क्म् संस्कारों में एक उपनयन संस्कार महिलाएं भी करा सकती हैं, तो काफी खुशी हुई। मेडिटेशन और गायत्री मंत्र जाप के साथ कराए जा रहे संस्कार से मन को काफी शांति मिल रही है।

सरोज मौर्या

रेलवे इम्प्लाई

श्रीश्री रविशंकर गुरु जी ने महिलाओं के लिए उपनयन संस्कार प्रक्रिया प्रारंभ कराकर उन्हें एक कदम आगे बढ़ा दिया। उपनयन प्रक्रिया में शामिल होने के बाद मुझे एक अलग तरह की शांति और एनर्जी का एहसास हो रहा है।

सुरभि गुप्ता

बीटेक स्टूडेंट

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Author:

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