Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

His Highness कॉपी-पेस्टिया बाबा के सूत्रों द्वारा चीन का सन्


His Highness कॉपी-पेस्टिया बाबा के सूत्रों द्वारा चीन का सन् 1962 में भारत पर आक्रमण करने का वास्तविक कारण का रहस्योद्घाटन ******************************** सन् 1962 के भारत और चीन के बीच युद्ध का एक ऐसा कारण है जिसे तत्कालीन भारत सरकार नहीं जानती थी। हो सकता कि परिवर्ती सरकारें भी न जानती हों। आज की N D A सरकार भी जानती है यह बात भी आवश्यक नहीं। सन् 1962 के चीन के भारत पर आक्रमण का वास्तविक कारण था–‘सांग्रीला घाटी’। सांग्रीला घाटी तवांग मठ के निकट वह घाटी है जहां तृतीय और चतुर्थ आयामों की संधि स्थली है। यह वह दिव्य घाटी है जहाँ कोई साधारण व्यक्ति भी अचानक पहुंच जाए तो वह अमर हो जाता है। उस सांग्रीला घाटी की दिव्यता का रहस्य चीन के शासकों को ‘हिब्रू’ ग्रंथों और ‘भारतीय ग्रंथों’ से पता चल गया था। तिब्बत्त पर अधिकार करना चीन की उसी मंशा का परिणाम था। जब तिब्बत्त पर अधिकार करने के बाद वहां वह घाटी नहीं मिली तो सन् 1962 में अरुणांचल प्रदेश स्थित तवांग मठ के नजदीक हमला करना, वहां के भूभाग पर कब्जा करना उनकी उसी योजना का हिस्सा था। लेकिन उन्हें तब भी सांग्रीला घाटी नहीं मिलनी थी, नहीं मिली। आज जो चीन भारत को आंखें दिखा रहा है, उसके पीछे भी वही एकमात्र कारण वही सांग्रीला घाटी है। भूटान के पास का वह क्षेत्र तो मात्र बहाना है। उसे तो वही दिव्य सांग्रीला घाटी चाहिए। सांग्रीला घाटी वह घाटी है जहां भारत के 64 तंत्र, योग और भारत की प्राच्य विद्यायों को सिखाने के लिए संसार के कोने कोने से पात्र व्यक्तियों को खोज खोज कर बुलाया जाता है और शिक्षा-दीक्षा देने के बाद उसके विस्तार के लिए आचार्यों को घाटी के बाहर भेज दिया जाता है। उस घाटी की सबसे बड़ी विशेषता है कि वह चतुर्थ आयाम में स्थित होने के कारण इन चर्म चक्षुओं से दृष्टिगोचर नहीं होती। वहां उस घाटी में सैकड़ों हज़ारों की संख्या में उच्चकोटि योगी, साधक, सिद्ध तपस्यारत हैं। वहां हमारे इस तीन आयामों वाले संसार की तरह समय की गति तेज नहीं है, बल्कि वह समय मन्द है। वहाँ पहुंच जाने वाला व्यक्ति हज़ारों साल तक वैसा का वैसा ही बना रहता है युवा, स्वस्थ और अक्षुण्ण। यही कारण है कि उस विशेषता के कारण चीनियों की नीयत उस क्षेत्र के लिये हमेशा से कब्जा करने की रही है और आज भी वह भूटान के बहाने से वही निशाना साधने पर आमादा है।

अविनाश कुमार सिंग

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