Posted in કવિતા - कविता - Kavita

सारे रिश्ते देह के , मन का केवल यार| यारी जब से हो गई , जीवन है गुलज़ार||


सारे रिश्ते देह के ,
मन का केवल यार|
यारी जब से हो गई ,
जीवन है गुलज़ार||

 

मन ने मन से कर लिया आजीवन अनुबन्ध|
तेरी मेरी मित्रता स्नेहसिक्त सम्बन्ध||

मित्र सरीखा कौन है,
इस दुनिया में मर्द|
बाँट सके जो दर्द को
बन कर के हमदर्द||

 

मीत बनो तो यूँ बनो,
जैसे शिव और राम |
इक दूजे का रात दिन ,
जपे निरन्तर नाम ||

 

मेरी हर शुभकामना ,
फले तुझे ऐ यार
यश धन बल आरोग्य से ,
दमके तेरा घर संसार ||

 

चाहे दुःख का रुदन हो ,
चाहे सुख के गीत
रहना मेरे साथ में,
हर दम मेरे मीत||

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Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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