Posted in हास्यमेव जयते

कल मेरा एक जिगरी यार मुझ से नाराज़ हो गया.


कल मेरा एक जिगरी यार मुझ से नाराज़ हो गया….. बेतहाशा नाराज़।।।😡😡😡 गलती मेरी ही थी ….. वजह भी बड़ी वाजिब थी। 😬😬 बात ये हुई कि उनकी पत्नी यानी हमारी प्रिय भाभी जी दुर्घटनाग्रस्त हो गईं। एक कोई अस्थि (हड्डी) टूट गयी थी। एक प्रसिद्ध अस्थिरोग विशेषज्ञ से संपर्क व परामर्श हुआ। आपरेशन होगा ये तय हो गया। दोस्त टेंशन में था । मैंने पूछा खर्चा तो काफ़ी हो जाएगा ना ? हां… दोस्त ने सर हिलाया।। मैंने फिर पूछा : लाखों में ? दोस्त ने फिर हाँ कहा…..। बस यहीं मैं गड़बड़ कर बैठा ….. जब मज़ाक में ….. दोस्त का टेंशन दूर कर के उसे हंसाने के लिए मुंह से निकल गया कि …… इतने में तो दूसरी आ जाती यार ।। मेरा दोस्त भड़क गया । यार का गुस्सा होना तो बनता ही है….ऐसे टेंशन वाले माहौल में….. और दांत भींच के बोला ” .. कमीने…… . . . . . . . अब बता रहा है जब 50% एडवांस जमा करवा दिये हैं 😛😝😜

कमल सयानी

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एक बार कक्षा छठी में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले,


एक बार कक्षा छठी में चार बालकों को परीक्षा मे समान अंक मिले, अब प्रश्न खडा हुआ कि किसे प्रथम रैंक दिया जाये । स्कूल प्रबन्धन ने तय किया कि प्राचार्य चारों से एक सवाल पूछेंगे, जो बच्चा उसका सबसे सटीक जवाब देगा उसे प्रथम घोषित किया जायेगा । चारों बच्चे हाजिर हुए, प्राचार्य ने सवाल पूछा – दुनिया में सबसे तेज क्या होता है ? पहले बच्चे ने कहा, मुझे लगता है -“विचार”सबसे तेज होता है, क्योंकि दिमाग में कोई भी विचार तेजी से आता है, इससे तेज कोई नहीं । प्राचार्य ने कहा – ठीक है, बिलकुल सही जवाब है । दूसरे बच्चे ने कहा, मुझे लगता है – “पलक झपकना” सबसे तेज होता है, हमें पता भी नहीं चलता और पलकें झपक जाती हैं और अक्सर कहा जाता है,”पलक झपकते”कार्य हो गया । प्राचार्य बोले – बहुत खूब, बच्चे दिमाग लगा रहे हैं । तीसरे बच्चे ने कहा – “बिजली”, क्योंकि मेरे यहाँ गैरेज, जो कि सौ फ़ुट दूर है, में जब बत्ती जलानी होती है, हम घर में एक बटन दबाते हैं, और तत्काल वहाँ रोशनी हो जाती है,तो मुझे लगता है बिजली सबसे तेज होती है.. अब बारी आई चौथे बच्चे की । सभी लोग ध्यान से सुन रहे थे, क्योंकि लगभग सभी तेज बातों का उल्लेख तीनो बच्चे पहले ही कर चुके थे । चौथे बच्चे ने कहा – सबसे तेज होते हैं “दस्त”… सभी चौंके प्राचार्य ने कहा – साबित करो कैसे ? बच्चा बोला, कल मुझे दस्त हो गए थे, रात के दो बजे की बात है, जब तक कि मैं कुछ ” विचार ” कर पाता, या “पलक झपकाता” या कि “बिजली” का स्विच दबाता दस्त अपना “काम” कर चुका था । कहने की जरूरत नहीं कि इस असाधारण सोच वाले बालक को ही प्रथम घोषित किया गया। दुनिया आज इस तेजस्वी बालक को अरविंद केजरीवाल के नाम से जानती है।

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सबेरे जब बाजार से लौट रहा था काफी दिनों बाद


सबेरे जब बाजार से लौट रहा था काफी दिनों बाद आज चाय दुकान पे रुक गया आज ड्यूटी जरा आराम से थी तो दोस्तो संग बैठ गया चाय वाला और एक बंदा आपस में किसी बात के लिए “अच्छे दिन” पर तंज कस रहै थे तो चाय वाला भी हां में हां मिला दिया उसकी मजबूरी है व्यापारी है ना, क्या करें ! चाय वाले कि सहमति से बंदा और फूल गया फिर बंदा बोला, भाई 19 तक तो झेलना ही पड़ेगा इतना सुनने के बाद, अब मैं कहाँ चुप रहने वाला था ? अपनी टोन बनाई और चेहरे पे बनावटी हंसी के भाव लेकर बंदे से पूछ लिया, ऐ भाई, तो का 2019 में हटा लोगे ? माने खाली पूछ रहा हूँ ऐसे ही ! बंदा भी आत्मविश्वास के साथ पलटा और मेरे नजर में नजर डाल के कह डाला जब 35 साल की सी.पी.एम. चली गयी तो ये क्या ? मैं बोला उसका नाम मोदी है, वो आया नही है, लाया गया है भाई और अगर उससे किसी तकलीफ में हो, तो भी, अभी और झेलना होगा, अभी और इस बहस में मेरी चाय ठंढ़ी हो रही थी चाय पीते हुए उसे हाँथ से रुकने को इशारा किया और एक गटके में चाय पी के ग्लास रखते हुए उससे बोला भाई मोदी बाद में हटा लेना पहले दीदी को तो बचा लो अब मेरे चेहरे पे कुटिल मुस्कान थी, जैसे मैं विजय घोषित हो गया क्योंकि उसके चेहरे की रंगत उदासी लिए हुए उतनरे लगी थी 😊 अब बात सार की करें ? ये वही जनता है जो वोट देती है उस बंदे के जैसे ही तो होती है जनता जिसे देश की सम्मान, मर्यादा का महत्व नही ये जनता सिर्फ अपनी 4₹ की सब्सिडी देखती है देश में हो रहे लाखो करोड़ के घोटाले नही देखती है मानसिकता ही कैंसरमयी हो गयी है घँटा यूँ देश बढ़ेगा ? (पर एक बात का दावा कर रहा हूँ बंदा मुझे सोचेगा जरूर 😊)

अजय सिंग

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एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद,


💕💘एक दिन रुक्मणी ने भोजन के बाद,💘💕 💘💕श्री कृष्ण को दूध पीने को दिया।💕💘 💘💕दूध ज्यदा गरम होने के कारण श्री कृष्ण के हृदय में लगा💕💘 और उनके श्रीमुख से निकला- ” हे राधे ! “😀💕💘 💕💘सुनते ही रुक्मणी बोली- प्रभु ! ऐसा क्या है राधा जी में, जो आपकी हर साँस पर उनका ही नाम होता है ?💕💘 💕💘मैं भी तो आपसे अपार प्रेम करती हूँ… फिर भी, आप हमें नहीं पुकारते !!💕💘 👩‍❤‍👩💘💕श्री कृष्ण ने कहा -देवी ! आप कभी राधा से मिली हैं ? और मंद मंद मुस्काने लगे…💕💘 💕💘अगले दिन रुक्मणी राधाजी से मिलने उनके महल में पहुंची ।💕💘 💕राधाजी के कक्ष के बाहर अत्यंत खूबसूरत स्त्री को देखा…💘 और, उनके मुख पर तेज होने कारण उसने सोचा कि- 💕💘ये ही राधाजी है और उनके चरण छुने लगी !💕💘 💕💘तभी वो बोली -आप कौन हैं ?💕💘 💕💘 रुक्मणी ने अपना परिचय दिया और आने का कारण बताया…💕💘 💘💕तब वो बोली- मैं तो राधा जी की दासी हूँ।💘💕 💘💕राधाजी तो सात द्वार के बाद आपको मिलेंगी !!💘💕 💕💘रुक्मणी ने सातो द्वार पार किये… और,💕💘 💕💘हर द्वार पर एक से एक सुन्दर और तेजवान दासी को देख सोच रही थी क़ि-💕💘 💕💘अगर उनकी दासियाँ इतनी रूपवान हैं…💕💘 तो, राधारानी स्वयं कैसी होंगी ?💕💘 💕💘सोचते हुए राधाजी के कक्ष में पहुंची…💕💘 कक्ष👩 में राधा जी को देखा- अत्यंत रूपवान तेजस्वी जिसका मुख सूर्य से भी तेज चमक रहा था।💕💘 रुक्मणी सहसा ही उनके चरणों में गिर पड़ी…💘 पर, 💕ये क्या राधा जी के पुरे शरीर पर तो छाले पड़े हुए है !👩 👩💕रुक्मणी ने पूछा- देवी आपके शरीर पे ये छाले कैसे ?💘 💘तब👩 राधा जी ने कहा- देवी !💕 कल आपने कृष्णजी को जो दूध दिया…💕💘 वो ज्यदा गरम था !💘 💕💘जिससे उनके ह्रदय पर छाले पड गए…💘 और, उनके💘 ह्रदय में तो सदैव मेरा ही वास होता है..!!👩 💕इसलिए कहा जाता है-💘 💕बसना हो तो… ‘ह्रदय’ में बसो किसी के..!👩 ‘💕💘दिमाग’ में तो.. लोग खुद ही बसा लेते है..!!👩 ❄❄❄❄❄❄❄ ╔══════════════════╗ ║ ❤ प्रेम से कहिये जय श्री राधे ❤ ║

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दान देते वक्त नजरें क्यों झुकाते थे राजा हरिश्चंद्र – Sanjay Arun Arora


Sanjay Arun Arora

दान देते वक्त नजरें क्यों झुकाते थे राजा हरिश्चंद्र😌*

*राजा हरिश्चंद्र एक बहुत बड़े दानवीर थे। उनकी ये एक खास बात थी कि जब वो दान देने के लिए हाथ आगे बढ़ाते तो अपनी नज़रें नीचे झुका लेते थे।*

*ये बात सभी को अजीब लगती थी कि ये राजा कैसे दानवीर हैं। ये दान भी देते हैं और इन्हें शर्म भी आती है।*

*ये बात जब तुलसीदासजी तक पहुँची तो उन्होंने राजा को चार पंक्तियाँ लिख भेजीं जिसमें लिखा था* –

*ऐसी देनी देन जु*
*कित सीखे हो सेन।*
*ज्यों ज्यों कर ऊँचौ करौ*
*त्यों त्यों नीचे नैन।।*

*इसका मतलब था कि राजा तुम ऐसा दान देना कहाँ से सीखे हो? जैसे जैसे तुम्हारे हाथ ऊपर उठते हैं वैसे वैसे तुम्हारी नज़रें तुम्हारे नैन नीचे क्यूँ झुक जाते हैं?*

*राजा ने इसके बदले में जो जवाब दिया वो जवाब इतना गजब का था कि जिसने भी सुना वो राजा का कायल हो गया।*
*इतना प्यारा जवाब आज तक किसी ने किसी को नहीं दिया।*

*राजा ने जवाब में लिखा* –

*देनहार कोई और है*
*भेजत जो दिन रैन।*
*लोग भरम हम पर करैं*
*तासौं नीचे नैन।।*

*मतलब, देने वाला तो कोई और है वो मालिक है वो परमात्मा है वो दिन रात भेज रहा है। परन्तु लोग ये समझते हैं कि मैं दे रहा हूँ राजा दे रहा है। ये सोच कर मुझे शर्म आ जाती है और मेरी आँखें नीचे झुक जाती हैं।*

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चार_पनिहारिन


भबेन्द्र मोहन मिश्र 

#चार_पनिहारिन

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एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया….!!!
पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं!!!
तो आईं तो एक ने कहा- “आहा! साधु हो गया, फिर भी तकिए का मोह नहीं गया…
पत्थर का ही सही, लेकिन रखा तो है।”
पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली…
उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया…
दूसरी बोली–
“साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई..
अभी रोष नहीं गया,तकिया फेंक दिया।”
तब साधु सोचने लगा, अब वह क्या करें ?
तब तीसरी बोली-
“बाबा! यह तो पनघट है,यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी, बोलती ही रहेंगी, उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?”
लेकिन चौथी ने
बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी-
“क्षमा करना,लेकिन हमको लगता है,तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है,अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है।
दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे, तूम जैसे भी हो,हरिनाम लेते रहो।”
सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना…
आप ऊपर देखकर चलोगे तो कहेंगे…
“अभिमानी हो गए।”
नीचे दखोगे तो कहेंगे…
“बस किसी के सामने देखते ही नहीं।”
आंखे बंद करोगे तो कहेंगे कि…
“ध्यान का नाटक कर रहा है।”
चारो ओर देखोगे तो कहेंगे कि…
“निगाह का ठिकाना नहीं। निगाह घूमती ही रहती है।”
और परेशान होकर आंख फोड़ लोगे तो यही दुनिया कहेगी कि…
“किया हुआ भोगना ही पड़ता है।”
ईश्वर को राजी करना आसान है,
लेकिन संसार को राजी करना असंभव है….
दुनिया क्या कहेगी, उस पर ध्यान दोगे तो….????
आप अपना ध्यान नहीं लगा पाओगे !!.

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सूर्य के बारे में 30 रोचक जानकारियां ।


।।ओम सूर्याय नमः।।
डा.अजय दीक्षित
🔛🔛🔛🔛🔛🔛सूर्य के बारे में 30 रोचक जानकारियां ।
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1. सूर्य का जन्म 4.6 बिलियन साल पहले हुआ। यह ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम गैस से बना हुआ है।

2. सूर्य के केंद्र में हर सेकंड 700 मिलियन टन हाइड्रोजन न्यूक्लियर विखंडन के कारण हीलियम में बदल जाता है। जिससे एक ऐसी शक्ति उत्पन्न होती है जिसे फोटोन कहा जाता है। इससे ही सूर्य का प्रकाश बनता है। यह सूर्य के केंद्र में बनता है।

3. सूर्य के केंद्र में बना हुआ प्रकाश रुपी फोटोन कई हजारों और लाखों सालों तक सूर्य के अन्दर ही घूमता रहता है और एक दिन निकल कर मात्र 8.18 मिनट में धरती पर पहुँच जाता है।

4. धरती की तरह सूर्य पर भी मौसम बदलता है।

5. सूर्य का व्यास 1,391,400 कि.मी. है जो कि धरती के व्यास से 109 गुना ज्यादा है।

6. सूर्य धरती से 1,300,000 गुना बड़ा है।

7. 100% सौर मंडल में सूर्य का द्रव्यमान 99.86% है।

8. सूर्य में 73% हाइड्रोजन है और 25% हीलियम के साथ बाकी ऑक्सीजन,निकेल, सिलिकन, सल्फर, मैग्निसियम, कार्बन, नियोन, कैल्सियम, क्रोमियम है।

9. सूर्य का वजन धरती के वजन से 330,000 गुणा ज्यादा है।

10. सूर्य इतना बड़ा है कि अगर इसे खोखला कर इसमें धरती को डाला जाये तो 103 मिलियन धरती इसमें समा जाएँ।

11. एक सेकंड में चमकने वाला सूर्य 1 मिलियन हाइड्रोजन बम जितनी शक्ति छोड़ता है।

12. सूर्य कि गुरुत्वाकर्षण शक्ति के कारण ही सारे ग्रह अपने परिक्रमापथ ( Orbit ) पर घुमते हैं।

13. सूर्य के सबसे उपरी सतह को फोटोस्फीयर ( Photosphere ), बीच वाली सतह को क्रोमोस्फीयर ( Chromosphere ) और सबसे अंदरूनी सतह को कोरोना ( Corona ) कहा जाता है।

14. सूर्य में काले धब्बे हैं जो कि हजारों मील बड़े होते हैं। वहां का तापमान 1000 डिग्री फ़ारेनहाइट होता है। यह सूर्य का सबसे ठंडा हिस्सा होता है। ये ऊपरी सतह पर होते हैं जो आसानी से देखे जा सकते हैं।

15. सूर्य के कृत्रिम ( Artificial ) ग्रहण के अध्ययन को कोर्नोग्राफ ( Cornograph ) कहा जाता है।

16. 2003 में सूर्य ने एक ऐसी शक्ति छोड़ी थी जो 200 बिलियन हाइड्रोजन बम के विस्फोट के बराबर था। इस विस्फोट में बहुत गरम चार्जड कण निकले जिसकी गति 6 मिलियन मील प्रति घंटा थी। यह आज तक का सबसे बड़ा सौर तूफ़ान था। खगोलशास्त्री सुरक्षित यान में चले गए। धरती पर संपर्क के सरे साधन अवरोधित कर दिए गए लेकिन कोई हानि नहीं हुयी।

17. 1973 में Skylab पहला मानव अन्तरिक्ष स्टेशन बना।इसने सूर्य की फोटो धरती पर भेजी। Skylab Mission पहली लेबोरेटरी थी जो सिर्फ सूर्य पर अनुसन्धान के लिए बनाया गया था। इसे आज चलने वाले नए मिशनों का दादा भी कहा जाता है।

18. सूर्य आकाशगंगा में 2000 बिलियन तारों में से एक है। ये हमारे सबसे पास है। यह दूरी है 93मिलियन मील। यह उतनी ही दूरी है जितनी धरती के 4000 चक्कर लगाने पर हो। इतनी दूरी होने के बाद भी सूर्य का प्रकाश बस 8 मिनट 18 सेकंड में धरती पर पहुँच जाता है।

19. सूर्य के संस्कृत में 108 नाम हैं।

20. सूर्य लगातार एक ऐसी शक्ति बनता रहता है जिसे सौर पवन कहते हैं। यह शक्ति पूरे सौर मंडल में फैलती है। यह 9.3 ट्रिलियन मील दूर तक पहुँचती है। जो कि यम ( Pluto ) ग्रह से भी आगे है।

21. सूर्य के ऊपरी सतह का तापमान 5500 डिग्री सेल्सिअस है।

22. सूर्य के केंद्र में तापमान 15 मिलियन डिग्री सेल्सिअस होता है।

23. सूर्य में सारे रंग समाहित हैं परन्तु यह हमें सफ़ेद नजर आता है।

24. एक समय ऐसा आएगा जब सूर्य में मौजूद सारा हाइड्रोजन जल जाएगा। उसके बाद हीलियम जलना आरंभ होगा। इससे सूर्य का आकार बड़ा होता जाएगा और यह इतना बड़ा हो जाएगा कि शुक्र, बुध और धरती को समाप्त कर देगा। यह एक लाल दानव का रूप धारण कर लेगा।

25. सूर्य के प्रकाश की गति 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड होती है।

26. सूर्य आकाशगंगा का एक चक्कर 225-250 मिलियन वर्ष में पूरा करता है।

27. सूर्य की आकाशगंगा के केंद्र से दूरी 27,000 प्रकाश वर्ष है।
28. सूर्य का प्रकाश एक वर्ष में 9.5 ट्रिलियन किलोमीटर दूरी तय करता है।

29. पृथ्वी पर हर साल अधिकतम 5 बार सूर्य ग्रहण लगता है। यह ग्रहण 7 मिनट 40 सेकंड्स से लेकर 20 मिनट तक चल सकता है।

30. यदि धरती से 17 प्रकाश वर्ष की दूरी के 50 सबसे ज्यादा चमकने वाले तारों से तुलना कि आये तो सूर्य चौथा सबसे ज्यादा चमकने वाला तारा है।

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जानिए क्यों भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से जला कर भस्म कर दिया था काशी को – डा.अजय दीक्षित


डा.अजय दीक्षित

जानिए क्यों भगवान श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से जला कर भस्म कर दिया था काशी को
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यह कथा द्वापरयुग की है जब भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र ने काशी को जलाकर राख कर दिया था। बाद में यह वाराणसी के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यह कथा इस प्रकार हैः

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मगध का राजा जरासंध बहुत शक्तिशाली और क्रूर था। उसके पास अनगिनत सैनिक और दिव्य अस्त्र-शस्त्र थे। यही कारण था कि आस-पास के सभी राजा उसके प्रति मित्रता का भाव रखते थे। जरासंध की अस्ति और प्रस्ति नामक दो पुत्रियाँ थीं। उनका विवाह मथुरा के राजा कंस के साथ हुआ था।

कंस अत्यंत पापी और दुष्ट राजा था। प्रजा को उसके अत्याचारों से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने उसका वध कर दिया। दामाद की मृत्यु की खबर सुनकर जरासंध क्रोधित हो उठा। प्रतिशोध की ज्वाला में जलते जरासंध ने कई बार मथुरा पर आक्रमण किया। किंतु हर बार श्रीकृष्ण उसे पराजित कर जीवित छोड़ देते थे।

एक बार उसने कलिंगराज पौंड्रक और काशीराज के साथ मिलकर मथुरा पर आक्रमण किया। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें भी पराजित कर दिया। जरासंध तो भाग निकला किंतु पौंड्रक और काशीराज भगवान के हाथों मारे गए।

काशीराज के बाद उसका पुत्र काशीराज बना और श्रीकृष्ण से बदला लेने का निश्चय किया। वह श्रीकृष्ण की शक्ति जानता था। इसलिए उसने कठिन तपस्या कर भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें समाप्त करने का वर माँगा। भगवान शिव ने उसे कोई अन्य वर माँगने को कहा। किंतु वह अपनी माँग पर अड़ा रहा।

तब शिव ने मंत्रों से एक भयंकर कृत्या बनाई और उसे देते हुए बोले-“वत्स! तुम इसे जिस दिशा में जाने का आदेश दोगे यह उसी दिशा में स्थित राज्य को जलाकर राख कर देगी। लेकिन ध्यान रखना, इसका प्रयोग किसी ब्राह्मण भक्त पर मत करना। वरना इसका प्रभाव निष्फल हो जाएगा।” यह कहकर भगवान शिव अंतर्धान हो गए।

इधर, दुष्ट कालयवन का वध करने के बाद श्रीकृष्ण सभी मथुरावासियों को लेकर द्वारिका आ गए थे। काशीराज ने श्रीकृष्ण का वध करने के लिए कृत्या को द्वारिका की ओर भेजा। काशीराज को यह ज्ञान नहीं था कि भगवान श्रीकृष्ण ब्राह्मण भक्त हैं। इसलिए द्वारिका पहुँचकर भी कृत्या उनका कुछ अहित न कर पाई। उल्टे श्रीकृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र उसकी ओर चला दिया। सुदर्शन भयंकर अग्नि उगलते हुए कृत्या की ओर झपटा। प्राण संकट में देख कृत्या भयभीत होकर काशी की ओर भागी।

सुदर्शन चक्र भी उसका पीछा करने लगा। काशी पहुँचकर सुदर्शन ने कृत्या को भस्म कर दिया। किंतु फिर भी उसका क्रोध शांत नहीं हुआ और उसने काशी को भस्म कर दिया।

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कालान्तर में वारा और असि नामक दो नदियों के मध्य यह नगर पुनः बसा। वारा और असि नदियों के मध्य बसे होने के कारण इस नगर का नाम वाराणसी पड़ गया। इस प्रकार काशी का वाराणसी के रूप में पुनर्जन्म हुआ।

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।। जय सियाराम।।

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तस्य नो चलते मनः


 

Shreemad Bhagvat Rahasya “श्रीमद् भागवत रहस्य”

तस्य नो चलते मनः

वनवास की अवधि में एकबार सीता और लक्ष्मण एकान्त में बैठे हुए थे। दोनों ही युवावस्था में थे। सीता का सौंदर्य अद्भुत था। आसपास का वातावरण सौंदर्य से भरपूर था। इतने में श्रीराम वहाँ आते हैं। सीता और लक्ष्मण को एकान्त में बैठे हुए देखकर लक्ष्मण से पूछते हैं,

पुष्पं दृष्ट्वा फलं दृष्ट्वा दृष्ट्वा स्त्रीणां च यौवनम्।
त्रीणि रत्नानि दृष्ट्वैव कस्य नो चलते मनः।।

– पुष्प, फल और स्त्री के यौवन- इन तीन रत्नों को देखकर ही किसका मन चलित नहीं होता है?

तब लक्ष्मण ने उत्तर दिया:-

पिता यस्य शुचिर्भूतो माता यस्य पतिव्रता।
उभाभ्यामेव संभूतो तस्य नो चलते मनः।।

– जिसका पिता पवित्र जीवनवाला हो, और जिसकी माता पतिव्रता हो, उनसे उत्पन्न पुत्र का मन चलित नहीं होता है।

राम ने पुनः पूछा:-

अग्निकुण्डसमा नारी घृतकुम्भसमः पुमान्।
पार्श्वे स्थिता सुन्दरी चेत् कस्य नो चलते मनः।

– सुन्दर स्त्री अग्निकुण्ड के समान होती है और पुरुष घी के कुम्भ के समान होता है। । ऐसी स्थिति में यदि सुंदरी समीप में हो, तो किस का मन चलित नहीं होता है?

लक्ष्मण:-

मनो धावति सर्वत्र मदोन्मत्तगजेन्द्रवत्।
ज्ञानाङ्कुशसमा बुद्धिस्तस्य नो चलते मनः।।

– उन्मत्त हाथी की तरह मन सर्वत्र दौड़ता है किन्तु ज्ञानरूपी अंकुश के समान जिस की बुद्धि हैं – उसका मन चलित नहीं होता हैं।

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हनुमान जी की भक्ति …


Shreemad Bhagvat Rahasya “श्रीमद् भागवत रहस्य”

हनुमान जी की भक्ति …

जब रामजी के राज्यअभिषेक का कार्य निपट गया तब सभी अतिथिविदा हो गये पर हनुमानजी ने कहा मेरा जन्म तो राम सेवा के लिए हुआ है मै यही प्रभु चरणों मै रहूँगा और वो रुक गये |
राजा बन जाने के बाद उनके सभी भाइयो ने अपने लिये कोई न कोई सेवा लेली |
तब हनुमानजी भी कहने लगे मुझे भी कोई सेवा दो |
तो माता सीता कहने लगी प्रभु की सेवा भार तो सबने ले लिया अब तो कुछ भी सेवा शेष नहीं बची तब हनुमान जी जिद करने लगे तो सीताजी ने कहा तुम चुटकी बजाने की सेवा लेलो जब रामजी को जंभाई आये तब तुम चुटकी बजाना |

जंभाई आये तो चुटकी बजाना चाहिए अन्यथा आयुष्य क्षीण होता है |

तो हनुमान जी ने कहा ठीक है माता जी और रामजी के पीछे पीछे डोलने लगे |
रात हुई तब माता कहने लगी बेटा अब तुम भी आराम करो पर वो कहने लगे यदि रात मै उन्हें जंभाई आये तो मै तो यही कमरे मै रहता हू |
तब माताजी रामजी से कहा आपही अपने भक्त को समझाओ रामजी क्या कहते वो चुप ही रहे पर सीताजी ने हनुमान से कहा आप ऐसा करो कमरे के बाहर जाओ और वहाँ चुटकी बजाते रहना |
हनुमानजी कमरे से बाहर आ गये और सोचने लगे प्रभु को पता नही कभी जंभाई आ जाये तो वे सारी
रात कीर्तन करते हुए चुटकी बजाने लगे |
अब वहाँ रामजी की नींद उड़ गयी उनके भक्त को उनकी पत्नी ने बाहर निकाल दिया वो जाग रहा तो में सोऊ कैसे अब तो रामजी जंभाई पे जंभाई लेने लगे |
ये सब देखकर सीताजी घबरा गयी और वो माताओ से जाकर कहने लगी |
आज तो आप के पुत्र को किसी की नजर लग गयी है |
वो तो जंभाई लिये ही जा रहे है तब गुरु वसिष्ठ को बुलाया गया |
वो समझ गये की आज भगवान का कोई भक्त परेशान है |
तभी ये हो रहा है |
तब वो सीताजी से कहने लगे आज दिन मै क्या-क्या हुआ हमें बताओ |
उन्होंने सब बात बता दी और अब तो सभी हनुमानजी के कक्ष मै गये वो वहाँ चुटकी बजा कर प्रभु कीर्तन मै मस्त थे |
तब गुरूजी ने कहा हनुमान तुम कीर्तन करो चुटकी मत बजाओ हनुमानजी मान गये तब कही जाकर प्रभु को नीद आयी |
कैसी हनुमानजी की सेवा के प्रति निष्ठा रही होगी |