Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।


*एक बच्चे को आम का पेड़ बहुत पसंद था।* *जब भी फुर्सत मिलती वो आम के पेड के पास पहुच जाता।* *पेड के उपर चढ़ता,आम खाता,खेलता और थक जाने पर उसी की छाया मे सो जाता।* *उस बच्चे और आम के पेड के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।* *बच्चा जैसे-जैसे बडा होता गया वैसे-वैसे उसने पेड के पास आना कम कर दिया।* *कुछ समय बाद तो बिल्कुल ही बंद हो गया।* *आम का पेड उस बालक को याद करके अकेला रोता।* *एक दिन अचानक पेड ने उस बच्चे को अपनी तरफ आते देखा और पास आने पर कहा,* *”तू कहां चला गया था? मै रोज तुम्हे याद किया करता था। चलो आज फिर से दोनो खेलते है।”* *बच्चे ने आम के पेड से कहा,* *”अब मेरी खेलने की उम्र नही है* *मुझे पढना है,लेकिन मेरे पास फीस भरने के पैसे नही है।”* *पेड ने कहा,* *”तू मेरे आम लेकर बाजार मे बेच दे,* *इससे जो पैसे मिले अपनी फीस भर देना।”* *उस बच्चे ने आम के पेड से सारे आम तोड़ लिए और उन सब आमो को लेकर वहा से चला गया।* *उसके बाद फिर कभी दिखाई नही दिया।* *आम का पेड उसकी राह देखता रहता।* *एक दिन वो फिर आया और कहने लगा,* *”अब मुझे नौकरी मिल गई है,* *मेरी शादी हो चुकी है,* *मुझे मेरा अपना घर बनाना है,इसके लिए मेरे पास अब पैसे नही है।”* *आम के पेड ने कहा,* *”तू मेरी सभी डाली को काट कर ले जा,उससे अपना घर बना ले।”* *उस जवान ने पेड की सभी डाली काट ली और ले के चला गया।* *आम के पेड के पास अब कुछ नहीं था वो अब बिल्कुल बंजर हो गया था।* *कोई उसे देखता भी नहीं था।* *पेड ने भी अब वो बालक/जवान उसके पास फिर आयेगा यह उम्मीद छोड दी थी।* *फिर एक दिन अचानक वहाँ एक बुढा आदमी आया। उसने आम के पेड से कहा,* *”शायद आपने मुझे नही पहचाना,* *मैं वही बालक हूं जो बार-बार आपके पास आता और आप हमेशा अपने टुकड़े काटकर भी मेरी मदद करते थे।”* *आम के पेड ने दु:ख के साथ कहा,* *”पर बेटा मेरे पास अब ऐसा कुछ भी नही जो मै तुम्हे दे सकु।”* *वृद्ध ने आंखो मे आंसु लिए कहा,* *”आज मै आपसे कुछ लेने नही आया हूं बल्कि आज तो मुझे आपके साथ जी भरके खेलना है,* *आपकी गोद मे सर रखकर सो जाना है।”* *इतना कहकर वो आम के पेड से लिपट गया और आम के पेड की सुखी हुई डाली फिर से अंकुरित हो उठी।* *वो आम का पेड़ हमारे माता-पिता हैं।* *जब छोटे थे उनके साथ खेलना अच्छा लगता था।* *जैसे-जैसे बडे होते चले गये उनसे दुर होते गये।* *पास भी तब आये जब कोई जरूरत पडी,* *कोई समस्या खडी हुई।* *आज कई माँ बाप उस बंजर पेड की तरह अपने बच्चों की राह देख रहे है।* *जाकर उनसे लिपटे,* *उनके गले लग जाये* *फिर देखना वृद्धावस्था में उनका जीवन फिर से अंकुरित हो उठेगा।*

सयानी कमल

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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