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कश्मीर यात्रा के दौरान वहां के बच्चो के साथ बातचीत करने का दिल किया ।


कश्मीर यात्रा के दौरान वहां के बच्चो के साथ बातचीत करने का दिल किया । बातचीत हैरान परेशान करने के साथ साथ भविष्य के प्रति भी अनिश्चितता दिखाती है । 10 साल के बच्चे भी आंतकवाद की तरफ आकर्षित नजर आ रहे हैं । अब ये सोचने वाली बात है कि उनको किस प्रकार से इस रास्ते पर जाने से रोक जा सकता है। पूरी यात्रा के दौरान सकारात्मकता भी देखने को मिली जहां ज़्यादातर जवान और बुजुर्ग ये भी कह रहे थे कि ये (आंतकवाद) सबका नज़रिया नहीं है। लेकिन दबी जुबान में ही ये बोला जाता है। मीडिया को भी लोग जमकर कोसते हैं कि अगर मीडिया खबरों को इतनी सनसनी के साथ न दिखाये तो भी नकारात्मकता कम फैलती है। लेकिन इस बात में सच्चाई नज़र आई कि केवल 5% लोग ही इस तरह की हरकतों को अंजाम देते हैं और अशांति चाहते हैं । यात्रा के दौरान ही लेफ्टिनेंट उम्मर फ़ैयाज़ की शहादत की खबर आई। इस दुर्घटना के बारे में भी स्थानीय लोगों के मन मे बहुत बहुत दुख देखने को मिला। गाड़ी का चालक जो 5 दिन तक लगातार साथ था ने भी बताया कि किस प्रकार से उसने भी अपने बच्चों को कश्मीर से बाहर ही भेज रखा है ताकि वो इस सब से बच के रहे और अपना काम सही रास्ते पर चलकर करें। चालक साहब ने ये बताया कि कैसे वो लोग 90 के दशक से पहले रात को 1-2 बजे तक बाहर घूमते रहते थे और आजकल तो बीवी 6 बजे ही फ़ोन करके पूछ लेती हैं कि कितनी देर में आ रहे हो। लोगों को ये भी लगता है कि अलगाववादी खुद कोई ड्रामा करके अपने आपको नज़रबंद करने के लिए प्रशासन को बोलते हैं ताकि उनको कोई खतरा ना रहे। ज़्यादातर लोग चाहते हैं कि हालात जल्दी सामानय हों और वो भी अपना जीवन अच्छे ढंग से जियें ।

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