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सत्य का भ्रम


सत्य का भ्रम
गलत बात को भी बार-बार सुनने से कैसे भ्रम उत्पन्न होते हैं, इस पर यह रोचक कथा मननीय है।

एक सरल स्वभाव के ग्रामीण ने बाजार से एक बकरी खरीदी। उसने सोचा था कि इस पर खर्च तो कुछ होगा नहीं; पर मेरे छोटे बच्चों को पीने के लिए दूध मिलने लगेगा। इसी सोच में खुशी-खुशी वह बकरी को कंधे पर लिये घर जा रहा था। रास्ते में उसे तीन ठग मिल गये। उन्होंने उसे मूर्ख बनाकर बकरी हड़पने की योजना बनायी और उसके गाँव के रास्ते में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़े हो गये। जब पहले ठग को वह ग्रामीण मिला, तो ठग बोला – “भैया, इस कुतिया को क्यों पीठ पर उठाये ले जा रहे हो ?” ग्रामीण ने उसकी ओर उपेक्षा से देखकर कहा – “अपनी ऑंखों का इलाज करा लो। यह कुतिया नहीं, बकरी है। इसे मैंने आज ही बाजार से खरीदा है।” ठग हँसा और बोला – “मेरी ऑंखें तो ठीक हैं, पर गड़बड़ तुम्हारी ऑंखों में लगती है। खैर, मुझे क्या फर्क पड़ता है। तुम जानो और तुम्हारी कुतिया।”

ग्रामीण थोड़ी दूर और चला कि दूसरा ठग मिल गया। उसने भी यही बात कही – “क्यों भाई, कुतिया को कंधो पर लादकर क्यों अपनी हँसी करा रहे हो। इसे फेंक क्यों नहीं देते ?” अब ग्रामीण के मन में संदेह पैदा हो गया। उसने बकरी को कंधो से उतारा और उलट-पलटकर देखा। पर वह थी तो बकरी ही। इसलिए वह फिर अपने रास्ते पर चल पड़ा।

थोड़ी दूरी पर तीसरा ठग भी मिल गया। उसने बड़ी नम्रता से कहा – “भाई, आप शक्ल-सूरत और कपड़ों से तो भले आदमी लगते हैं; फिर कंधो पर कुतिया क्यों लिये जा रहे हैं ?” ग्रामीण को गुस्सा आ गया। वह बोला – “तुम्हारा दिमाग तो ठीक है, जो इस बकरी को कुतिया बता रहे हो ?” ठग बोला – “तुम मुझे चाहे जो कहो; पर गाँव में जाने पर लोग जब हँसेंगे और तुम्हारा दिमाग खराब बतायेंगे, तो मुझे दोष मत देना।”

जब एक के बाद एक तीन लोगों ने लगातार एक जैसी ही बात कही, तो ग्रामीण को भरोसा हो गया कि उसे किसी ने मूर्ख बनाकर यह कुतिया दे दी है। उसने बकरी को वहीं फेंक दिया। ठग तो इसी प्रतीक्षा में थे। उन्होंने बकरी को उठाया और चलते बने।

यह कथा बताती है कि गलत तथ्यों को बार-बार व बढ़ा चढ़ाकर सुनने में आने से भल-भले विद्वान भी भ्रम में पड़ जाते है।

निसंदेह अपनी कमियों का अवलोकन करना और उन्हें दूर करने के प्रयास करना विकास में सहायक है। किन्तु बार बार उन्ही कमियों की स्मृति में ही डूबे रहना, उन्हें विकराल स्वरूप में पेश करना,समझना और उसी में शोक संतप्त रहना, आशाविहिन अवसाद में जांना है। शोक कितना भी हृदय विदारक हो, आखिर उससे उबरने में ही जीवन की भलाई है। समस्याएं चिंताए कितनी भी दूभर हो, गांठ बांधने, बार बार याद करने से कुछ भी हासिल नहीं होना है। उलट कमियों का निरंतर चिंतन हमें नकारात्मकता के गर्त में गिराता है, सुधार व समाधान तो सकारात्मकता भरी सोच में है, बीती ताहि बिसार के आगे की सुध लेहि!!

भारतीय संस्कृति को आईना बहुत दिखाया जाता है। कुछ तो सूरत सीरत पहले से ही सुदर्शन नहीं थी, उपर से जो भी आया आईना दिखा गया। पहले पहल पाश्चात्य विद्वानों ने वो आईना दिखाया, हमें अपना ही प्रतिबिंब विकृत नजर आया। बाद में पता चला कि वह आईना ही बेडोल था, अच्छा खासा चहरा भी उसमें विकृत नजर आता था, उपर से बिंब के नाक-नक्स की व्याख्या! कोढ़ में खाज की भाषा!! अब उन्ही की शिक्षा के प्रमाण-पत्र में उपहार स्वरूप वही ‘बेडोल आईना’ हमारे अपनों ने पाया है। अब हमारे स्वजन ही उसे लिए घुमते है, सच बताने को अधीर !! परिणाम स्वरूप उत्पन्न होती है कुतिया उठाए घुमने की हीनता ग्रंथी, बेईमान व्याख्या का ग्लानीबोध!! इस प्रकार सकारात्मक सम्भावनाएं क्षीण होती चली जाती है।

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एकत्व में सुख, द्वन्द्व में दु:ख


१. एकत्व में सुख, द्वन्द्व में दु:ख

मिथिला नरेश नमि दाह-ज्वर से पीड़ित थे। उन्हें भारी कष्ट था। भांति-भांति के उपचार किये जा रहे थे। रानियॉँ अपने हाथों से बावना चंदनर घिस-घिस कर लेप तैयार कर रही थीं।

जब मन किसी पीड़ा से संतप्त होता है तो व्यक्ति को कुछ ही नहीं सुहाता। एक दिन रानियां चंदन घिस रही थीं। इससे उनके हाथों के कंगन खनखना रहे थे। उनकी ध्वनि बड़ी मधुर थी, लेकिन राजा का कष्ट इतना बढ़ा हुआ था कि वह ध्वनि उन्हें अखरी। उन्होंने पूछा, “यह कर्कश ध्वनि कहां से आ रही है?”

मंत्री ने जवाब दिया, “राजन, रानियॉँ चंदन घिस रही हैं। हाथों के हिलने से कंगन आपस में टकरा रहे हैं।”

रानियों ने राजा की भावना समझकर कंगन उतार दिये। बस, एक-एक रहने दिया।

जब आवाज बंद हो गई तो थोड़ी देर बाद राजा ने शंकित होकर पूछा, “क्या चंदन घिसना बंद कर दिया गया है?”

मंत्री ने कहा, “नहीं महाराज, आपकी इच्छानुसार रानियों ने अपने हाथों से कंगों को उतार दिया है। सौभाग्य के चिन्ह के रुप में एक-एक कंगन रहने दिया है। राजन, आप चिन्ता मत कीजिये, लेपन बराबर तैयार किया जा रहा है।”

इतना सुनकर अचानक राजा को बोध हुआ, “ओह, मैं कितने अज्ञान में जी रहा हूं। जहॉँ दो हैं, वहीं संघर्ष है, वही पीड़ा है। मैं इस द्वन्द्व में क्यों जीता रहा हूं? जीवन में यह अशांति और मन की यह भ्रांति, एकत्व की साधना से हटकर दूसरे से लगाव के कारण ही हुई है।”

राजा का ज्ञान-सूर्य उचित हो गया। उसने सोचा-दाह-ज्वर के उपशांत होते ही चेतना की एकत्व साधना के लिए मैं प्रयाण कर जाऊंगा।

इसके बाद अपनी भोग-शक्ति को योग-साधना में रुपान्तरित करने के लिए राजा नये मार्ग पर चल पड़ा।

२. माया में डूबा जीवन

हमारे गांव में एक फकीर घूमा करता था, उसकी सफेद लम्बी दाढ़ी थी और हाथ में एक मोटा डण्डा रहता था। चिथड़ों में लिपटा उसका ढीला-ढाला और झुर्रियों से भरा बुढ़ापे का शरीर अपने साथ माया की एक गठरी लिये रहता था। वह बार-बार उस गठरी को

खोलता था। उसमें उसने बड़े जतन से रंगीन कागज लपेटकर रक्खे थे। जिसगली से वह निकलता, उसमें रंगीन कागज दीखता तो बड़ी सावधानी से वह उसे उठा लेता, सिकड़नों पर हाथ फेरता और उसकी गड्डी बना कर रख लेता।

फिर वह किसी दरवाजे पर बैठ जाता और कागजों को दिखाकर कहा करता, “ये मेरे प्राण हैं।” कभी कहता, “ये रुपये हैं। इनसे गांव के गिर रहे अपने किले का पुनर्निर्माण कराऊंगा।” फिर अपनी सफेद दाढ़ी पर हाथ फेरकर स्वाभिमान से कहता, “उस किले पर हमारा झंडा फहरायेगा और मैं राजा बनूंगा।”

गांव के बालक उसे घेरकर खड़े हो जाते और हँसा करते। वयस्क और वृद्ध लोग उसकी खिल्ली उड़ाते। कहते, पागल है, तभी तो रंगीन रद्दी कागजों से किले बनवाने की बात कर रहा है।

एक दिन उसे देखकर मुझे अनुभूति हुई कि फकीर जो कुछ करता था और कहता था, वह अपने लिए नहीं, हमारे लिए था। फकीर को भला किले और राजा बनने से क्या लेना-देना था! लेकिन वह हम संसार के प्राणियों से मानो कहता था, “तुम सब पागल हो, जो माया में लिपटे तरह-तरह के किले बनाते और राजा बनने के सपने देखते रहते हो?” वह फकीर गली-गली, घर-घर, घूमकर कहता था कि इस जीवन में कागज के किले मत बनाओ, उस किले के राजा मत बनो, जीवन के मर्म को समझो।

ऐसे फकीर हमारे गांव में ही नहीं, हर गांव में और हर शहर में घूमते हैं, पर हमने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है और कान बंद कर लिये हैं। इसी से न हम उन्हें देख पाते हैं, न उसकी आवाज सुन पाते हैं। वास्तव में पागल वे नहीं, हम हैं। l

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जानिए महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों के बारें में –


जानिए महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों के बारें में –

पुराण शब्द का अर्थ है प्राचीन कथा। पुराण विश्व साहित्य के प्रचीनत्म ग्रँथ हैं। उन में लिखित ज्ञान और नैतिकता की बातें आज भी प्रासंगिक, अमूल्य तथा मानव सभ्यता की आधारशिला हैं। वेदों की भाषा तथा शैली कठिन है। पुराण उसी ज्ञान के सहज तथा रोचक संस्करण हैं। उन में जटिल तथ्यों को कथाओं के माध्यम से समझाया गया है। पुराणों का विषय नैतिकता, विचार, भूगोल, खगोल, राजनीति, संस्कृति, सामाजिक परम्परायें, विज्ञान तथा अन्य विषय हैं।

महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित किये गये हैं। आइए जानते है 18 पुराणों के बारे में।

1.ब्रह्म पुराण

ब्रह्म पुराण सब से प्राचीन है। इस पुराण में 246 अध्याय तथा 14000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा की महानता के अतिरिक्त सृष्टि की उत्पत्ति, गंगा आवतरण तथा रामायण और कृष्णावतार की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ से सृष्टि की उत्पत्ति से लेकर सिन्धु घाटी सभ्यता तक की कुछ ना कुछ जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

2.पद्म पुराण

पद्म पुराण में 55000 श्र्लोक हैं और यह ग्रंथ पाँच खण्डों में विभाजित है जिन के नाम सृष्टिखण्ड, स्वर्गखण्ड, उत्तरखण्ड, भूमिखण्ड तथा पातालखण्ड हैं। इस ग्रंथ में पृथ्वी आकाश, तथा नक्षत्रों की उत्पति के बारे में उल्लेख किया गया है। चार प्रकार से जीवों की उत्पत्ति होती है जिन्हें उदिभज, स्वेदज, अणडज तथा जरायुज की श्रेणा में रखा गया है। यह वर्गीकरण पुर्णत्या वैज्ञायानिक है। भारत के सभी पर्वतों तथा नदियों के बारे में भी विस्तरित वर्णन है। इस पुराण में शकुन्तला दुष्यन्त से ले कर भगवान राम तक के कई पूर्वजों का इतिहास है। शकुन्तला दुष्यन्त के पुत्र भरत के नाम से हमारे देश का नाम जम्बूदीप से भरतखण्ड और पश्चात भारत पडा था।

3.विष्णु पुराण

विष्णु पुराण में 6 अँश तथा 23000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु, बालक ध्रुव, तथा कृष्णावतार की कथायें संकलित हैं। इस के अतिरिक्त सम्राट पृथु की कथा भी शामिल है जिस के कारण हमारी धरती का नाम पृथ्वी पडा था। इस पुराण में सू्र्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास है। भारत की राष्ट्रीय पहचान सदियों पुरानी है जिस का प्रमाण विष्णु पुराण के निम्नलिखित शलोक में मिलता हैःउत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्। वर्षं तद भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः।(साधारण शब्दों में इस का अर्थ है कि वह भूगौलिक क्षेत्र जो उत्तर में हिमालय तथा दक्षिण में सागर से घिरा हुआ है भारत देश है तथा उस में निवास करने वाले सभी जन भारत देश की ही संतान हैं।) भारत देश और भारत वासियों की इस से स्पष्ट पहचान और क्या हो सकती है? विष्णु पुराण वास्तव में ऐक ऐतिहासिक ग्रंथ है।

4.शिव पुराण

शिव पुराण में 24000 श्र्लोक हैं तथा यह सात संहिताओं में विभाजित है। इस ग्रंथ में भगवान शिव की महानता तथा उन से सम्बन्धित घटनाओं को दर्शाया गया है। इस ग्रंथ को वायु पुराण भी कहते हैं। इस में कैलाश पर्वत, शिवलिंग तथा रुद्राक्ष का वर्णन और महत्व, सप्ताह के दिनों के नामों की रचना, प्रजापतियों तथा काम पर विजय पाने के सम्बन्ध में वर्णन किया गया है। सप्ताह के दिनों के नाम हमारे सौर मण्डल के ग्रहों पर आधारित हैं और आज भी लगभग समस्त विश्व में प्रयोग किये जाते हैं।

5.भागवत पुराण

भागवत पुराण में 18000 श्र्लोक हैं तथा 12 स्कंध हैं। इस ग्रंथ में अध्यात्मिक विषयों पर वार्तालाप है। भक्ति, ज्ञान तथा वैराग्य की महानता को दर्शाया गया है। विष्णु और कृष्णावतार की कथाओं के अतिरिक्त महाभारत काल से पूर्व के कई राजाओं, ऋषि मुनियों तथा असुरों की कथायें भी संकलित हैं। इस ग्रंथ में महाभारत युद्ध के पश्चात श्रीकृष्ण का देहत्याग, द्वारिका नगरी के जलमग्न होने और यदु वंशियों के नाश तक का विवरण भी दिया गया है।

6.नारद पुराण

नारद पुराण में 25000 श्र्लोक हैं तथा इस के दो भाग हैं। इस ग्रंथ में सभी 18 पुराणों का सार दिया गया है। प्रथम भाग में मन्त्र तथा मृत्यु पश्चात के क्रम आदि के विधान हैं। गंगा अवतरण की कथा भी विस्तार पूर्वक दी गयी है। दूसरे भाग में संगीत के सातों स्वरों, सप्तक के मन्द्र, मध्य तथा तार स्थानों, मूर्छनाओं, शुद्ध एवं कूट तानो और स्वरमण्डल का ज्ञान लिखित है। संगीत पद्धति का यह ज्ञान आज भी भारतीय संगीत का आधार है। जो पाश्चात्य संगीत की चकाचौंध से चकित हो जाते हैं उन के लिये उल्लेखनीय तथ्य यह है कि नारद पुराण के कई शताब्दी पश्चात तक भी पाश्चात्य संगीत में केवल पाँच स्वर होते थे तथा संगीत की थ्योरी का विकास शून्य के बराबर था। मूर्छनाओं के आधार पर ही पाश्चात्य संगीत के स्केल बने हैं।

7.मार्कण्डेय पुराण

अन्य पुराणों की अपेक्षा यह छोटा पुराण है। मार्कण्डेय पुराण में 9000 श्र्लोक तथा 137 अध्याय हैं। इस ग्रंथ में सामाजिक न्याय और योग के विषय में ऋषिमार्कण्डेय तथा ऋषि जैमिनि के मध्य वार्तालाप है। इस के अतिरिक्त भगवती दुर्गा तथा श्रीक़ृष्ण से जुड़ी हुयी कथायें भी संकलित हैं।

8.अग्नि पुराण

अग्नि पुराण में 383 अध्याय तथा 15000 श्र्लोक हैं। इस पुराण को भारतीय संस्कृति का ज्ञानकोष (इनसाईक्लोपीडिया) कह सकते है। इस ग्रंथ में मत्स्यावतार, रामायण तथा महाभारत की संक्षिप्त कथायें भी संकलित हैं। इस के अतिरिक्त कई विषयों पर वार्तालाप है जिन में धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद मुख्य हैं। धनुर्वेद, गान्धर्व वेद तथा आयुर्वेद को उप-वेद भी कहा जाता है।

9.भविष्य पुराण

भविष्य पुराण में 129 अध्याय तथा 28000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में सूर्य का महत्व, वर्ष के 12 महीनों का निर्माण, भारत के सामाजिक, धार्मिक तथा शैक्षिक विधानों आदि कई विषयों पर वार्तालाप है। इस पुराण में साँपों की पहचान, विष तथा विषदंश सम्बन्धी महत्वपूर्ण जानकारी भी दी गयी है। इस पुराण की कई कथायें बाईबल की कथाओं से भी मेल खाती हैं। इस पुराण में पुराने राजवँशों के अतिरिक्त भविष्य में आने वाले नन्द वँश, मौर्य वँशों, मुग़ल वँश, छत्रपति शिवा जी और महारानी विक्टोरिया तक का वृतान्त भी दिया गया है। ईसा के भारत आगमन तथा मुहम्मद और कुतुबुद्दीन ऐबक का जिक्र भी इस पुराण में दिया गया है। इस के अतिरिक्त विक्रम बेताल तथा बेताल पच्चीसी की कथाओं का विवरण भी है। सत्य नारायण की कथा भी इसी पुराण से ली गयी है।

10.ब्रह्म वैवर्त पुराण

ब्रह्माविवर्ता पुराण में 18000 श्र्लोक तथा 218 अध्याय हैं। इस ग्रंथ में ब्रह्मा, गणेश, तुल्सी, सावित्री, लक्ष्मी, सरस्वती तथा क़ृष्ण की महानता को दर्शाया गया है तथा उन से जुड़ी हुयी कथायें संकलित हैं। इस पुराण में आयुर्वेद सम्बन्धी ज्ञान भी संकलित है।

11.लिंग पुराण

लिंग पुराण में 11000 श्र्लोक और 163 अध्याय हैं। सृष्टि की उत्पत्ति तथा खगौलिक काल में युग, कल्प आदि की तालिका का वर्णन है। राजा अम्बरीष की कथा भी इसी पुराण में लिखित है। इस ग्रंथ में अघोर मंत्रों तथा अघोर विद्या के सम्बन्ध में भी उल्लेख किया गया है।

12.वराह पुराण

वराह पुराण में 217 स्कन्ध तथा 10000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में वराह अवतार की कथा के अतिरिक्त भागवत गीता महामात्या का भी विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। इस पुराण में सृष्टि के विकास, स्वर्ग, पाताल तथा अन्य लोकों का वर्णन भी दिया गया है। श्राद्ध पद्धति, सूर्य के उत्तरायण तथा दक्षिणायन विचरने, अमावस और पूर्णमासी के कारणों का वर्णन है। महत्व की बात यह है कि जो भूगौलिक और खगौलिक तथ्य इस पुराण में संकलित हैं वही तथ्य पाश्चात्य जगत के वैज्ञिानिकों को पंद्रहवी शताब्दी के बाद ही पता चले थे।

13.स्कन्द पुराण

स्कन्द पुराण सब से विशाल पुराण है तथा इस पुराण में 81000 श्र्लोक और छः खण्ड हैं। स्कन्द पुराण में प्राचीन भारत का भूगौलिक वर्णन है जिस में 27 नक्षत्रों, 18 नदियों, अरुणाचल प्रदेश का सौंदर्य, भारत में स्थित 12 ज्योतिर्लिंगों, तथा गंगा अवतरण के आख्यान शामिल हैं। इसी पुराण में स्याहाद्री पर्वत श्रंखला तथा कन्या कुमारी मन्दिर का उल्लेख भी किया गया है। इसी पुराण में सोमदेव, तारा तथा उन के पुत्र बुद्ध ग्रह की उत्पत्ति की अलंकारमयी कथा भी है।

14.वामन पुराण

वामन पुराण में 95 अध्याय तथा 10000 श्र्लोक तथा दो खण्ड हैं। इस पुराण का केवल प्रथम खण्ड ही उपलब्ध है। इस पुराण में वामन अवतार की कथा विस्तार से कही गयी हैं जो भरूचकच्छ (गुजरात) में हुआ था। इस के अतिरिक्त इस ग्रंथ में भी सृष्टि, जम्बूदूीप तथा अन्य सात दूीपों की उत्पत्ति, पृथ्वी की भूगौलिक स्थिति, महत्वशाली पर्वतों, नदियों तथा भारत के खण्डों का जिक्र है।

15.कुर्मा पुराण

कुर्मा पुराण में 18000 श्र्लोक तथा चार खण्ड हैं। इस पुराण में चारों वेदों का सार संक्षिप्त रूप में दिया गया है। कुर्मा पुराण में कुर्मा अवतार से सम्बन्धित सागर मंथन की कथा विस्तार पूर्वक लिखी गयी है। इस में ब्रह्मा, शिव, विष्णु, पृथ्वी, गंगा की उत्पत्ति, चारों युगों, मानव जीवन के चार आश्रम धर्मों, तथा चन्द्रवँशी राजाओं के बारे में भी वर्णन है।

16.मतस्य पुराण

मतस्य पुराण में 290 अध्याय तथा 14000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मतस्य अवतार की कथा का विस्तरित उल्लेख किया गया है। सृष्टि की उत्पत्ति हमारे सौर मण्डल के सभी ग्रहों, चारों युगों तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास वर्णित है। कच, देवयानी, शर्मिष्ठा तथा राजा ययाति की रोचक कथा भी इसी पुराण में है

17.गरुड़ पुराण

गरुड़ पुराण में 279 अध्याय तथा 18000 श्र्लोक हैं। इस ग्रंथ में मृत्यु पश्चात की घटनाओं, प्रेत लोक, यम लोक, नरक तथा 84 लाख योनियों के नरक स्वरुपी जीवन आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। इस पुराण में कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का वर्णन भी है। साधारण लोग इस ग्रंथ को पढ़ने से हिचकिचाते हैं क्योंकि इस ग्रंथ को किसी परिचित की मृत्यु होने के पश्चात ही पढ़वाया जाता है। वास्तव में इस पुराण में मृत्यु पश्चात पुनर्जन्म होने पर गर्भ में स्थित भ्रूण की वैज्ञानिक अवस्था सांकेतिक रूप से बखान की गयी है जिसे वैतरणी नदी आदि की संज्ञा दी गयी है। समस्त यूरोप में उस समय तक भ्रूण के विकास के बारे में कोई भी वैज्ञानिक जानकारी नहीं थी।

18.ब्रह्माण्ड पुराण

ब्रह्माण्ड पुराण में 12000 श्र्लोक तथा पू्र्व, मध्य और उत्तर तीन भाग हैं। मान्यता है कि अध्यात्म रामायण पहले ब्रह्माण्ड पुराण का ही एक अंश थी जो अभी एक पृथक ग्रंथ है। इस पुराण में ब्रह्माण्ड में स्थित ग्रहों के बारे में वर्णन किया गया है। कई सूर्यवँशी तथा चन्द्रवँशी राजाओं का इतिहास भी संकलित है। सृष्टि की उत्पत्ति के समय से ले कर अभी तक सात मनोवन्तर (काल) बीत चुके हैं जिन का विस्तरित वर्णन इस ग्रंथ में किया गया है। परशुराम की कथा भी इस पुराण में दी गयी है। इस ग्रँथ को विश्व का प्रथम खगोल शास्त्र कह सकते है। भारत के ऋषि इस पुराण के ज्ञान को इण्डोनेशिया भी ले कर गये थे जिस के प्रमाण इण्डोनेशिया की भाषा में मिलते है।

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क्या सोनिया गाँधी को हिन्दुओ से नफरत है ?


क्या सोनिया गाँधी को हिन्दुओ से नफरत है ?
मै कुछ तथ्य पेश कर रहा हूँ और आप लोग भी सोचिये कि क्या सोनिया गाँधी सच में हिन्दुओ से नफरत करती है ?
1 – सोनिया  ने विसेंट जार्ज को अपना निजी सचिव बनाया है जो ईसाई है ..
विसेंट जार्ज के पास 1500 करोड़ कि संपत्ति है 2001 में सीबीआई ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया उस वक्त सीबीआई ने विसेंट के 14 बैंक खातो को सील करते हुए कड़ी करवाई करने के संकेत दिए थे फिर सोनिया के इशारे पर मामले को दबा दिया गया ..
मैंने सीबीआई को विसेंट जार्ज के मामले में 4 मेल किया था जिसमे सिर्फ एक का जबाब आया कि जार्ज के पास अमेरिका और दुसरे देशो से ए पैसे के स्रोत का पता लगाने के लिए अनुरोध पत्र भेज दिया गया है ..
वह रे सीबीआई १० साल तक सिर्फ अनुरोध पत्र टाइप करने में लगा दिए !
2 – सोनिया ने अहमद पटेल को अपना राजनैतिक सचिव बनाया है जो मुस्लमान है. और कट्टर सोच वाले मुस्लमान है ..
3 – सोनिया ने मनमोहन सिंह कि मर्जी के खिलाफ पीजे थोमस को cvc बनाया जो ईसाई है ..

और सिर्फ सोनिया की पसंद से cvc बने .जिसके लिए भारतीय इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को माफ़ी मागनी पड़ी ..
4 – सोनिया जी ने अपनी एकमात्र पुत्री प्रियंका गाँधी की शादी एक ईसाई राबर्ट बढेरा से की ..
5 – अजित जोगी को छातिसगड़ का मुख्यमंत्री सिर्फ उनके ईसाई होने के कारण बनाया गया जबकि उस वक़्त कई कांग्रेसी नेता दबी जबान से इसका विरोध कर रहे थे ..

अजित जोगी इतने काबिल मुख्यमंत्री साबित हुए की छातिसगड़ में कांग्रेस का नामोनिशान मिटा दिया ..
अजित जोगी पर दिसम्बर 2003 से बिधायको को खरीदने का केस सीबीआई ने केस दर्ज किया है. सीबीआई ने पैसे के स्रोत को भी ढूड लिया तथा टेलीफोन पर अजित जोगी की आवाज की फोरेंसिक लैब ने प्रमडित किया इतने सुबूतो के बावजूद सीबीआई ने आजतक सोनिया के इशारे पर चार्जशीट फाइल नहीं किया ..
6 – सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस केजी बालाकृष्णन भी ईसाई धर्म अपना चुके है.

3 जजों की बरिस्टता को दरकिनार करके सुप्रीम कोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया गया जो की एक परिवर्तित ईसाई थे …
7 – राजशेखर रेड्डी को आँध्रप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने में उनका ईसाई होना और उसका बेटा अनिल जो की ईसाई मिशनरी समाज का सबसे बड़ा माफिया है,

इसी अनिल पर यह भी आरोप है की धर्म परिवर्तन के लिए जो कमीशन बाहर से आता है

उसके लेनदेन संबंधी बँटवारे को लेकर अनिल ने वाई एस आर के  हत्या का षड्यंत्र रचा था । इसी अनिल ने पूरे भारत के जनमानस को ईसाई बनाने का ठेका लिया है ।
इसके पास 21 निजी हेलीकाप्टर है व खरबो रुपये की संपति है इसने केवल हैदराबाद मे ही 100 से ज्यादा conversion workshops लगा रखी है धर्म परिवर्तन के लिए । इसका ढांचा किसी बहुत बड़ी एमएनसी कंपनी द्वारा बनाया गया।

जिसमे सीईओ से लेकर मार्केटिंग professionals तक भर्ती किए जाते है । प्रत्येक ईसाई मिशनरी को टार्गेट दिया जाता है की प्रति सप्ताह 10 हिन्दुओ को ईसाई बनाने का और कमीशन दिया जाता है ।
आंध्र प्रदेश के 150 से ज्यादा मंत्री ईसाई बन चुके है इसलिए आंध्र प्रदेश मे सारे मंदिरो को तोड़ा जा चुका है, बाकी बचे नेता मुस्लिम है
8 – मधु कोड़ा भी निर्दल होते हुए अपने ईसाई होने के कारण कांग्रेस के समर्थन से झारखण्ड के मुख्यमंत्री बने …
9 – अभी केरल विधान सभा के चुनाव में कांग्रेस ने 92 % टिकट ईसाई और मुस्लिमो को दिया है
10 – जिस कांग्रेस में सोनिया की मर्जी के बिना कोई पे …….ब तक नहीं कर सकता वही दिग्विजय सिंह किसके इशारे पर 10 सालो से हिन्दू बिरोधी बयानबाजी करते है ये हम सब अछि तरह जानते है …
11 – हिन्दुओ की आवाज़ बन रही बैबसाइट हिन्दूयुनिटी डाट काम पर ऐसे षडयन्त्रों की सच्चाई को जन जन तक पहुँचाने का प्रयत्न किया जाता है उसे किसके इशारे पर बलाकॅ कर दिया जाता है !
12 -यदि हमारा देश धर्मं निरपेच्छ है तो पोप जान पॉल के निधन पर तीन दिन का राष्ट्रीय शोक क्यों और किसके इशारे पर घोषित किया गया ?
13 -आप सबको याद होगा श्रीमति प्रतिभा पाटिल जी राष्ट्रपति कैसे चुनी गईं लेकिन एंटोनियो [सोनिया गाँधी ] को उन पर भी भरोसा नहीं इसलिए उनका निजी सचिव भी ईसाई बनवाया। समझने वालों को संदेश बिल्कुल साफ है कि या तो ईसाई बनो या गुलाम नहीं तो कांग्रेस के कोर ग्रुप या सरकार के मालदार पदों को भूल जाओ ।
14 – हिमाचल कांग्रेस में ताकतवर हिन्दूनेता राजा वीरभद्र सिंह जी की जगह ईसाई विद्या सटोक्स को विपक्ष का नेता बनाया गया ..
क्योंकि राजा वीरभद्र सिंह जी छल कपट व आर्थिक लालच

से करवाए जा रहे धर्मांतरण के विरूद्ध थे । ऊपर से हिन्दुओं के वापिस अपने हिन्दू धर्म में लौटने के घर वापसी अभियान की सफलता से धर्मांतरण के दलाल देशी विदेशी ईसाई मिशनरी छटपटाए हुए थे।
15 – छतीसगढ और आंध्रप्रदेश में हिन्दुओं की संख्या 90% से अधिक होने के बावजूद एंटोनिया ने ईसाई मुख्यमन्त्री बनवाए ।

आंध्रप्रदेश में यह ईसाई मुख्यमन्त्री मुसलमानों को संविधान के विरूद्ध जाकर आरक्षण देता है ।
16 – हिन्दू श्री प्रणवमुखर्जी को रक्षामन्त्री के पद से हटवाकर ईसाई एन्टनी को रक्षामन्त्री बनवाया ।
17 – पूर्व चुनाव आयुक्त नवीन चावला, भी ईसाई धर्म अपना चुके है.2जी घोटाले का आरोपी ए राजा ईसाई है.
18 – कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदम्बरम ईसाई बन चुके है और उनकी पत्नी नलिनी 167

ईसाई मिशनरी एनजीओ की मालकिन है.

द्रमुक प्रमुख एम के करुणानिधि व उनका पूरा खानदान ईसाई बन चुका है.
19 – वरिष्ठ कांग्रेसी नेता  सुबोध कान्त सहाय, कपिल सिब्बल, सत्यव्रत चतुर्वेदी, अंबिकासोनी,पीवी थामस, ए के एन्टोनी, जनार्दन दिवेदी, मनीष तिवारी ये सभी ईसाई धर्म अपना चुके है
20 – धर्म को अफीम मनाने वाले कम्युनिस्ट सीताराम येचूरी, प्रकाश करात, विनायक सेन ईसाई है. अरुंधति राय, स्वामी अग्निवेस, सारे कांग्रेसी पत्रकार ईसाई हो चुके है.
इस देश मे रहने वाली इटली की मैडम ने हिंदुस्तान को दूसरा इटली बनाने की ठान राखी है॥

सोनिया गांधी पुर-ज़ोर तरीके से बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाना चाहती है, हाल मे यह खुलासा wikileaks के दवारा किया गया॥
ओर जब की कर्नाटक मे हुई धार्मिक हिंसा मे गलत तरीके से केवल बीजेपी ओर अन्य हिन्दू दलो को ही दोषी ठहराया गया॥
कर्नाटक मे कई चर्च हिन्दुओ का जबरन धर्म परिवर्तन भी करवा रहे है.
65 सालो से भारत में राज करती आई (कांग्रेस सरकार)  सोनिया गांधी का चर्च को बचाने के लिये हिन्दु संगठन बजरंग दल पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास किया था ।

विकीलीक्स का बडा खुलासा ।
क्या सोनिया देश को इसाई राष्ट्र बनाना चाहती है ? क्या अब भी आप कांग्रेस को लाना चाहेंगे  ?

इसे हम क्या कहेंगे संयोग ?

या कुछ और ?

अगर ये संयोग है तो सच में बहुत ही “खुबसूरत “संयोग है .
Vande Mataram- Jai Hind Jai Bharat

Posted in જાણવા જેવું

જુઓ ગુજરાતી ભાષા નો વૈભવ.


💕જુઓ ગુજરાતી ભાષા નો વૈભવ…..💕
આશા અમર છે.

અમર પ્રેમ છે.

પ્રેમ સાગર છે.

સાગર કુંવારો છે.

કુંવારો સુખી છે.

સુખી ગાયક છે.

ગાયક ગાય છે.

ગાય માતા છે.

માતા સ્ત્રી છે.

સ્ત્રી શક્તિ છે.

શક્તિ દુધ છે.

દુધ સફેદ છે.

સફેદ કલર છે.

કલર ચેનલ છે.

ચેનલ ચાલુ છે.

ચાલુ આઇટમ છે.

આઇટમ હોટ છે.

હોટ સમર છે.

સમર વેકેશન છે.

વેકેશન લાંબું છે.

લાંબું જીવન છે.

જીવન યાત્રા છે.

યાત્રા સાહસ છે.

સાહસ વીર છે.

વીર જવાન છે.

જવાન અમર છે

અને

અમર તો આશા છે.
સાલુ…જબરૂ છે નઈ…..
મજા આવી ને વાંચવાની ….તો….. ગુજરાતીઓ ને મોકલો આગળ.

આ પાછુ નવુ આવ્યું મારકેટ માં….🔸🔸🔸🔸🔸

આનંદ કરે અંબાણી

જલસા કરે અદાણી

રૂપાણી ને મળ્યા વાઘાણી

કરસે ભાજપ ને ધુળધાણી

સમજો હવે સરકાર વીખાણી

લી. ઉપર થી

ધીરુભાઈ અંબાણી

😜😂😜😂😃

💙💙?💙💙💙*ઝોકું* “જલેબી” નથી, તો ય “ખવાય” જાય છે.
*આંખો* “તળાવ” નથી, તોય “ભરાય” જાય છે.
*ઇગો* “શરીર” નથી, તોય “ઘવાય” જાય છે.
*દુશ્મની* “બીજ” નથી, તોય “વવાય” જાય છે.
*હોઠ* “કપડું” નથી, તોય “સિવાઈ” જાય છે.
*કુદરત* “પત્ની” નથી, તોય “રિસાઈ” જાય છે.
*બુદ્ધિ* “લોખંડ” નથી, તોય “કટાઇ” જાય છે.
અને *માણસ* “હવામાન” નથી, તોય “બદલાઈ” જાય છે.👌🏻👌🏻

🔹શબ્દ ૧ જ મુકાય

ને અર્થ ફરી જાય છે,

🔹આંકડો ૧ જ મુકાય

ને દાખલો ફરી જાય છે,

🔹પગલુ ૧ જ મુકાય

ને દિશા ફરી જાય છે,

 

સાથ અગર સારી,

૧ જ વ્યક્તિનો મળે ને સાહેબ,

આખી જિંદગી બદલાઈ જાય છે.

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस मॅनेजमेंट के बारे में, अपने


एक मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस मॅनेजमेंट के बारे में, अपने

दर्शकों से मुखातिब था.. उसने पानी से भरा एक ग्लास उठाया.., सभी ने समझा की अब “आधा खाली या आधा भरा है”..
यही पुछा और समझाया जाएगा.. मगर मनोवैज्ञानिक ने पूछा..
कितना वजन होगा इस ग्लास में भरे पानी का..?? सभी ने.. 300 से 400 ग्राम तक अंदाज बताया.. मनोवैज्ञानिक ने कहा.. कुछ भी वजन मान लो.. फर्क

नहीं पड़ता…
फर्क इस बात का पड़ता है.. की मैं कितने देर तक इसे उठाए
रखता हूँ. । अगर मैं इस ग्लास को एक मिनट तक उठाए रखता हूँ..
तो क्या होगा? शायद कुछ भी नहीं.. अगर मैं इस ग्लास को एक घंटे तक उठाए रखता हूँ..
तो क्या होगा? मेरे हाथ में दर्द होने लगे.. और शायद अकड़ भी जाए. अब अगर मैं इस ग्लास को एक दिन तक उठाए रखता हूँ..

तो ? ? मेरा हाथ.. यकीनऩ, बेहद दर्दनाक हालत में होगा, हाथ

पॅरालाईज भी हो सकता है और मैं हाथ को हिलाने तक में

असमर्थ हो जाऊंगा.. लेकिन.. इन तीनों परिस्थिति में ग्लास के

पानी का वजन न कम हुआ.. न ज्यादा.

.

.

हीनता का भाव  का भी जीवन में यही परिणाम है। यदि आप अपने मन में इन्हें एक मिनट के लिए रखेंगे.. आप पर कोई दुष्परिणाम नहीं होगा.. यदि आप अपने मन में इन्हें एक घंटे के लिए रखेंगे.. आप दर्द और परेशानी महसूस करने लगोगे.. लेकिन यदि आप अपने मन में इन्हें पुरा पुरा दिन बिठाए

रखेंगे.. ये हीनता .

हमारा जीना हराम कर देगा..

हमें पॅरालाईज कर के कुछ भी सोचने – समझने में हमें असमर्थ

कर देगा.. और याद रहे..

इन तीनों परिस्थितियों में हीनता का भाव ..

जितना था.., उतना ही रहेगा..

.

.

इसलिए.. यदि हो सके तो.. अपने हीनता के भाव से भरे “ग्लास” को…

.

जितना जल्दी हो फेंक दें
हीनता का भाव आपमे कमतर बातों को रोपित करके फेलाया जाता है

.

नीचे रखना न भुलें.
राजेन्द्र गौर

Posted in लक्ष्मी प्राप्ति - Laxmi prapti

मान सम्मान प्राप्ति के कुछ उपाय


मान सम्मान प्राप्ति के कुछ उपाय 🌻

👉 मान-सम्मान, प्रतिष्ठा व लक्ष्मी प्राप्ति के लिए किए

जाने वाली पूजा,उपाय / टोटकों के लिए पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठना शुभ होता है।

👉 गुरु ग्रह को सौभाग्य, सम्मान और समृद्धि नियत करने वाला माना गया है।शास्त्रों में यश व सफलता के इच्छुक हर इंसान के लिये गुरु ग्रह दोष शांति का एक बहुत ही सरल उपाय बताया गया है।यह उपाय औषधीय स्नान के रूप में प्रसिद्ध है इसे हर

इंसान दिन की शुरुआत में नहाते वक्त कर सकता है। नहाते वक्त नीचे लिखी चीजों में से थोड़ी मात्रा में कोई भी एक चीज जल में डालकर नहाने से गुरु दोष शांति होती है और व्यक्ति को समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

👇 👇 👇

गुड़, सोने की कोई वस्तु ,हल्दी, शहद, शक्कर, नमक, मुलेठी, पीले फूल, सरसों।

👉 समाज में उचित मान सम्मान प्राप्ति के लिए रात में सोते समय सिरहाने ताम्बे के बर्तन में जल भर कर उसमें थोड़ा शहद के साथ कोई भी सोने /चाँदी का सिक्का या अंगूठी रख लें फिर सुबह उठकर प्रभु का स्मरण करने के बाद सबसे पहले बिना कुल्ला

किये उस जल को पी लें …जल्दी ही आपकी यश ,कीर्ति बड़ने लगेगी।

👉 रात को सोते समय अपने पलंग के नीचे एक बर्तन में थोड़ा सा पानी रख लें, सुबह वह पानी घर के बाहर डाल दें इससे रोग, वाद- विवाद, बेइज्जती, मिथ्या लांछन आदि से सदैव बचाव होता रहेगा।

👉 दुर्गा सप्तशती के द्वादश (12 वें ) अध्याय के नियमित पाठ करने से व्यक्ति को समाज में मान सम्मान और मनवांछित लाभ की प्राप्ति होती है ।

👉 समाज में मान सम्मान की प्राप्ति के लिये कबूतरों/

चिड़ियों को चावल-बाजरा मिश्रित कर के डालें, बाजरा शुक्रवार को खरीदें व शनिवार से डालना शुरू करें

👉 अपने बच्चे के दूध का प्रथम दाँत संभाल कर रखे, इसे चाँदी के यंत्र में रखकर गले या दाहिनी भुजा में धारण करने से व्यक्ति को समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

👉 यदि आप चाहते हैं कि आपके कार्यों की सर्वत्र सराहना हो, लोग आपका सम्मान करें, आपकी यश कीर्ति बड़े तो रात को सोने से पूर्व अपने सिरहाने तांबे के बर्तन में जल भरकर रखें और प्रात:काल इस जल को अपने ऊपर से सात बार उसार करके किसी

भी कांटे वाले पेड़ की जड़ में डाल दें। ऐसा नियमित 40 दिन तक करने से आपको अवश्य ही लाभ होगा।

👉 ज्येष्ठा नक्षत्र में जामुन के वृक्ष की जड़ लाकर अपने पास संभाल कर रखने से उस व्यक्ति को समाज से / प्रसाशन से अवश्य ही मान सम्मान की प्राप्ति होती है।

👉 गले, हाथ या पैर में काले डोरे को पहनने से व्यक्ति को समाज में सरलता से मान सम्मान की प्राप्ति होती है, उसे हर क्षेत्र में विजय मिलती है।नोट – अपना भुत-भविष्य जानने के लिए और सटीक उपायो के लिए सम्पर्क करे मगर ध्यान रहे ये सेवाएं सशुल्क और पेड़ कंसल्टिंग के तहत है , जानने के लिए अपनी फ़ोटो, वास्तु की फ़ोटो, दोनों हथेलियो की फ़ोटो और बर्थ डिटेल्स भेजे

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Posted in रामायण - Ramayan

रामायण अनेको है जिन्हें अलग अलग विद्वानों ने अलग अलग काल में लिखा ।


रामायण अनेको है जिन्हें अलग अलग विद्वानों ने अलग अलग काल में लिखा । इन सब में बहुत बहुत भेद है । यहाँ तक की कथा के कुछ भाग किसी में है और किसी में नहीं ।
इन सभी में किसे प्रमाणिक माना जाए ।

इस निर्णय की  2 ही कसोटी हो सकती है ।

पहली कसोटी रामायण के लेखक का काल । यानी जो लेखक श्री राम के जीवन काल के सबसे निकट वही सबसे ज्यादा सत्य जानता है अतः सबसे ज्यादा प्रमाणिक । इस आधार पर वाल्मीकि कृत रामायण सबसे ज्यादा प्रमाणिक व तुलसीदास कृत रामचरित मानस सबसे कम प्रमाणित ।
दूसरी कसोटी विज्ञान : ईश्वर ने ही विज्ञान के नियमो को बनाया और उन्ही का पालन करते हुए श्रष्टी की उत्पत्ति की ।

किसी भी घटना व कथा में जितनी ज्यादा अवैज्ञानिक बाते होंगी वह उतनी ही कम प्रमानिक होगी।
तुलसीदास जी की रामायण श्री राम के प्रति अगाध भक्ति में लिखी प्रेम व सौंदर्य में डूबि कृति है जिसमे उन्होंने अज्ञानता या मोह वश विज्ञान के नियमो की धज्जियाँ ही उड़ा दी है ।
जैसे रावण के दस सर का होना । रामसेतु का तैरने वाले पथरो से निर्माण । रावण की नाभि में अम्रत होना और सर कटने पर भी ना मरना। सीता माँ की अग्नि परीक्षा और उनका ना जलना। हनुमान जी के पूँछ होना ।
परंतु वाल्मीकि रामायण पढ़ने से स्पस्ट होता है की श्री राम वैद विद्वान थे और कोई भी घटना विज्ञान विरुद्ध नहीं घटि।
अतः वाल्मीकि रामायण ही सबसे ज्यादा प्रमाणिक है ।
अतः वही पढ़िए और श्री राम की तरह वैद विद्या प्राप्त कीजिये शारीरिक व मानसिक बल बढाए और समाज में पुनः धर्म की स्थापना कीजिये ।
नुराज आर्य अँधेड़ी

Posted in आयुर्वेद - Ayurveda

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🔴 *गर्भ-निरोधक गोलियों का सच:- राजीव दीक्षित / Rajiv Dixit*

🔴 *क्या आप वो दवा तो नही खा रहे जो विदेशो में बैन है*

🔴 *प्रैशर-कुकर का सच*

🔴 *क्या आपके टूथपेस्ट में जहर तो नही*

🔴 *लाल दंतमंजन बनाने की विधि*

🔴 *वात-पित्त-कफ को कैसे संतुलित रखे*

🔴 *चिकनगुनिया का रामबाण इलाज:- राजीव दीक्षित*

🔴 *थायराइड का उपचार*

🔴 *गौमूत्र से गंभीर बिमारिओ का इलाज:- राजीव दीक्षित*

🔴 *मिट्टि के बर्तनों का महत्व:- राजीव दीक्षित*

🔴 *देश की दुर्दशा जानकर आप भी रोयेंगे*

🔴 *शहीद भगत सिंह जी की भविष्यवाणी*

🔴 *Pre-Documentary Rajiv Dixit*

Regards

harshad30.wordpress.com

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दस पवित्र पक्षी और उनका रहस्य


दस पवित्र पक्षी और उनका रहस्य

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आइये जाने उन दस दिव्य और पवित्र पक्षीयों के बारे मैं जिनका हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व माना गया है…
हंस:- जब कोई व्यक्ति सिद्ध हो जाता है तो उसे कहते हैं कि इसने हंस पद प्राप्त कर लिया और जब कोई समाधिस्थ हो जाता है, तो कहते हैं कि वह परमहंस हो गया। परमहंस सबसे बड़ा पद माना गया है।
हंस पक्षी प्यार और पवित्रता का प्रतीक है। यह बहुत ही विवेकी पक्षी माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि मनुष्य के नि:श्वास में ‘हं’ और श्वास में ‘स’ ध्वनि सुनाई पड़ती है। मनुष्य का जीवन क्रम ही ‘हंस’ है क्योंकि उसमें ज्ञान का अर्जन संभव है। अत: हंस ‘ज्ञान’ विवेक, कला की देवी सरस्वती का वाहन है। यह पक्षी अपना ज्यादातर समय मानसरोवर में रहकर ही बिताते हैं या फिर किसी एकांत झील और समुद्र के किनारे।
हंस दांप‍त्य जीवन के लिए आदर्श है। यह जीवन भर एक ही साथी के साथ रहते हैं। यदि दोनों में से किसी भी एक साथी की मौत हो जाए तो दूसरा अपना पूरा जीवन अकेले ही गुजार या गुजार देती है। जंगल के कानून की तरह इनमें मादा पक्षियों के लिए लड़ाई नहीं होती। आपसी समझबूझ के बल पर ये अपने साथी का चयन करते हैं। इनमें पारिवारिक और सामाजिक भावनाएं पाई जाती है।
हिंदू धर्म में हंस को मारना अर्थात पिता, देवता और गुरु को मारने के समान है। ऐसे व्यक्ति को तीन जन्म तक नर्क में रहना होता है।
मोर :- मोर को पक्षियों का राजा माना जाता है। यह शिव पुत्र कार्तिकेय का वाहन है। भगवान कृष्ण के मुकुट में लगा मोर का पंख इस पक्षी के महत्व को दर्शाता है। यह भारत का राष्ट्रीय पक्षी है।
अनेक धार्मिक कथाओं में मोर को बहुत ऊंचा दर्जा दिया गया है। हिन्दू धर्म में मोर को मार कर खाना महापाप समझा जाता है।
कौआ :- कौए को अतिथि-आगमन का सूचक और पितरों का आश्रम स्थल माना जाता है। इसकी उम्र लगभग 240 वर्ष होती है। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बहुत महत्व माना गया है। इस पक्ष में कौओं को भोजना कराना अर्थात अपने पितरों को भोजन कराना माना गया है। कौए को भविष्य में घटने वाली घटनाओं का पहले से ही आभास हो जाता है।
उल्लू : – उल्लू को लोग अच्छा नहीं मानते और उससे डरते हैं, लेकिन यह गलत धारणा है। उल्लू लक्ष्मी का वाहन है। उल्लू का अपमान करने से लक्ष्मी का अपमान माना जाता है। हिन्दू संस्कृति में माना जाता है कि उल्लू समृद्धि और धन लाता है।
भारत वर्ष में प्रचलित लोक विश्वासों के अनुसार भी उल्लू का घर के ऊपर छत पर स्थि‍त होना तथा शब्दोच्चारण निकट संबंधी की अथवा परिवार के सदस्य की मृत्यु का सूचक समझा जाता है। सचमुच उल्लू को भूत-भविष्य और वर्तमान में घट रही घटनाओं का पहले से ही ज्ञान हो जाता है।
वाल्मीकि रामायण में उल्लू को मूर्ख के स्थान पर अत्यन्त चतुर कहा गया। रामचंद्र जी जब रावण को मारने में असफल होते हैं और जब विभीषण उनके पास जाते हैं, तब सुग्रीव राम से कहते हैं कि उन्हें शत्रु की उलूक-चतुराई से बचकर रहना चाहिए। ऋषियों ने गहरे अवलोकन तथा समझ के बाद ही उलूक को श्रीलक्ष्मी का वाहन बनाया था।
गरूड़ : – इसे गिद्ध भी कहा जाता है। पक्षियों में गरूढ़ को सबसे श्रेष्ठ माना गया है। यह समझदार और बुद्धिमान होने के साथ-साथ तेज गति से उड़ने की क्षमता रखता है। गरूड़ के नाम पर एक पुराण भी है गरूड़ पुराण। यह भारत का धार्मिक और अमेरिका का राष्ट्रीय पक्षी है।
गरूड़ के बारे में पुराणों में अनेक कथाएं मिलती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु की सवारी और भगवान राम को मेघनाथ के नागपाश से मुक्ति दिलाने वाले गरूड़ के बारे में कहा जाता है कि यह सौ वर्ष तक जीने की क्षमता रखता है।
नीलकंठ :- नीलकंड को देखने मात्र से भाग्य का दरवाजा खुल जाता है। यह पवित्र पक्षी माना जाता है। दशहरा पर लोग इसका दर्शन करने के लिए बहुत ललायित रहते हैं।
तोता :- तोते का हरा रंग बुध ग्रह के साथ जोड़कर देखा जाता है। अतः घर में तोता पालने से बुध की कुदृष्टि का प्रभाव दूर होता है। घर में तोते का चित्र लगाने से बच्चों का पढ़ाई में मन लगता है।
आपने बहुत से तोता पंडित देखें होंगे जो भविष्यवाणी करते हैं। तोते के बारे में बहुत सारी कथाएं पुराणों में मिलती है। इसके अलवा, जातक कथाओं, पंचतंत्र की कथाओं में भी तोते को किसी न किसी कथा में शामिल किया गया है।
कबूतर :- इसे कपोत कहते हैं। यह शांति का प्रतीक माना गया है। भगवान शिव ने जब अमरनाथ में पार्वती को अजर अमर होने के वचन सुनाए थे तो कबतरों के एक जोड़े ने यह वचन सुन लिए थे तभी से वे अजर-अमर हो गए। आज भी अमरनाथ की गुफा के पास ये कबूतर के जोड़े आपको दिखाई दे जाएंगे। कहते हैं कि सावन की पूर्णिमा को ये कबूतर गुफा में दिखाई पड़ते हैं। इसलिए कबूतर को महत्व दिया जाता है।
बगुला :- आपने कहावत सुनी होगी बगुला भगत। अर्थात ढोंगी साधु। धार्मिक ग्रंथों में बगुले से जुड़ी अनेक कथाओं का उल्लेख मिलता है। पंत्रतंत्र में एक कहानी है बगुला भगत। बगुला भगत पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानियों में से एक है जिसके रचयिता आचार्य विष्णु शर्मा हैं।
बगुला के नाम पर एक देवी का नाम भी है जिसे बगुलामुखी कहते हैं। बगुला ध्यान भी होता है अर्थात बगुले की तरह एकटक ध्यान लगाना। बगुले के संबंध में कहा जाता है कि ये जिस भी घर के पास ‍के किसी वृक्ष आदि पर रहते हैं वहां शांति रहती है और किसी प्रकार की अकाल मृत्यु नहीं होती।
गोरैया:- भारतीय पौराणिक मान्यताओं अनुसार यह चिड़ियां जिस भी घर में या उसके आंगन में रहती है वहां सुख और शांति बनी रहती है। खुशियां उनके द्वार पर हमेशा खड़ी रहती है और वह घर दिनोदिन तरक्की करता रहता है।✍☘💕