Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

संस्कार


#संस्कार
घर के बाहर अकेली खेल रही वंशिका को देख कर पड़ौस में रहने वाले नाज़िम ने मुस्कुरा कर पूछा 

” आज स्कूल नहीं गयी वंशी ?

वंशी ने भी चहकते हुए जवाब दिया 

“नहीं भैया, पता है आज बड़े बच्चे टूर पर गये हैं इसलिये मेरी छुट्टी हो गयी, अौर अब मैं पूरा दिन खेलूंगी “।

” अरे वाह फिर तो इस खुशी में एक चॉकलेट तो बनती है,… है ना ”

“तो फिर लाओ दो ना चॉकलेट, वो मेरी फेवरेट है !” वंशिका ने बाल सुलभ जिद करते हुए कहा।

नाजिम ने इधर उधर देखा और वंशिका के करीब जाकर बोला “यहां नहीं मेरे साथ चलना पड़ेगा, वहां उस मकान के पास!” 

नाजिम ने थोड़ी दूर दिख रहे टूटे फूटे से खन्डहर नुमा घर की ओर इशारा करते हुए कहा ” वहां बबलू की दुकान है, उसी पर “।

चॉकलेट के नाम से छोटी सी वंशिका के मुंह में पानी आ रहा था और वह नाज़िम के पीछे चल पड़ी।

अभी कुछ ही कदम बढ़ाये थे कि सहसा वह ठिठक रुक गयी और कुछ सोचने लगी।

” नहीं भैया मुझे आपके साथ कहीं नहीं जाना, मेरी मम्मा कहती हैं चॉकलेट के बहाने से अपने साथ ले जाने वाले रावण होते हैं, 

और मैंने टीवी पर भी देखा है कि रावण बहुत बुरा था, वो सीता मैया को किडनैप कर उठा कर ले गया था और “।

बेटी के छोटे से मुख से बड़ी बातें सुन कर बालकनी में खड़ी मां के चेहरे पर संतुष्टि के भाव साफ झलक रहे थे 

कि हर तरफ घूम रहे इन्सानी भेड़ियों से बचने कि लिये वंशी को दिये जा रहे संस्कार सही आकार ले रहे है।

अपने बच्चो को #अच्छे_संस्कार दे।

धन्यवाद

बात समझ आयी हो तो #शेयर करना ना भूले।

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