Posted in आओ संस्कृत सीखे.

महाराष्ट्र मराठी के साथ हिंदी बोलता है ।


महाराष्ट्र मराठी के साथ हिंदी बोलता है ।

गुजरात गुजराती के साथ हिंदी बोलता है ।

पंजाब पंजाबी के साथ हिंदी बोलता है ।

जम्मू कश्मीर में भी हिंदी में बात लोग करते हैं ।

अरुणाचल, असम में भी लोग हिंदी में बात करते हैं ।

इसके अलावा मध्य प्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड, हरियाणा, हिमाचल, दिल्ली आदि में अपनी क्षेत्रीय भाषाओं/ बोलियों के होते हुए भी लोग हिंदी में काम करते हैं तथा हिंदी अच्छे से समझते हैं ।

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अब दिक्कत बस तमिलनाडु, कर्नाटक, केरला और बंगाल के कुछ राजनैतिक लोगों को ही हैं क्योंकि उन्हें लगता है के उनकी जनता यदि हिंदी सीख गई तो वो अलगाववाद की राजनीति से दूर होकर बाकी के भारत के साथ एकाकार हो जाएगी , इससे क्षेत्रीय नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी ।

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कुछ लोगो को अंग्रेजो की गुलामी की भाषा अंग्रेजी से कोई दिक्कत नही है । पर देश के अधिकतर क्षेत्रो तथा 60 % से ज्यादा लोगो द्वारा बोली जाने वाली भाषा हिंदी से इन्हें नफरत है । अजीब लोग हैं, इनमे से कुछ अभी भी कमेंट में मुझे ज्ञान बांटने आ सकते हैं । पर हिंदी का विरोध करने वाले स्वयं ही अपने आप को देश की आधी जनता से काटने का कार्य कर रहे हैं , यह एक तथ्य है जिसे नकारा नही जा सकता ।

आर्य शुभम वर्मा

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