Posted in छोटी कहानिया - ९०० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक राजा था बहुत प्रतापी और ज्ञानी।

एक राजा था बहुत प्रतापी और ज्ञानी। एक बार उसने अपने राज्य के सभी धर्मगुरुओं और ज्योतिषियों को बुलाया। सभा बैठी और उसमें सभी ज्ञानी महापुरुष पधारे। राजा आए और सिंहासन पर बैठकर उन्होंने सभी का आदर सत्कार किया। सभी सोच रहे थे कि राजा को ऐसा क्या काम आ गया कि उन्होंने सभी साधु, मुनि और ज्योतिषियों को एक साथ बुलवा लिया। राजा ने सभी की जिज्ञासा को शांत करते हुए कहा कि मैं एक सवाल का जवाब बरसों से तलाश रहा हूं। मुझे उम्मीद है कि इस सभा में कोई न कोई मुझे आज उस सवाल का जवाब दे देगा। यह सुनकर सभी स्तब्ध रह गए। राजा ने कहा जब मेरा जन्म हुआ उसी घड़ी में और भी कई लोग जन्मे। मैं राजा बना, कोई भिखारी बना तो कोई बनिया। जब समय एक था मुहूर्त एक था तो लोगों को अलग अलग किस्मत क्यों मिली। राजा का यह प्रश्न सुनकर सभी चुप हो गए। किसी को कोई जवाब नहीं सूझा। सभा में सन्नाटा पसर गया।

कुछ देर के बाद एक बुजुर्ग खड़ा हुआ और हाथ जोड़कर बोला महाराज आपके प्रश्न का उत्तर एक ही साधु दे सकते हैं और वे यहां से बहुत दूर जंगलों में रहते हैं। आप उनसे मिलने जाएंगे तभी आपकी जिज्ञासा शांत हो सकेगी। यह सुनकर राजा और रोमांचित हो गए। वे तुरंत अपने घोड़े को लेकर जंगल की ओर निकल गए और उस साधु के पास पहुंच कर उसे अपनी परेशानी बताई। साधु उस वक्त गरम गरम कोयला खा रहा था यह सुनकर वह गुस्सा हो गया और बोला मैं अभी बहुत भूखा हूं और मुझे यह कोयला खाना है। तू सूर्योदय से पहले यहां से आगे एक आदिवासी गांव में जा वहां एक बच्चा जन्म लेने वाला है वही तेरे प्रश्न का उत्तर देगा। यह सोचकर राजा ने अपना घोड़ा दौड़ाया और गांव पहुंचे। वहां पहुंच कर पता किया कि किस घर में बच्चा जन्म लेने वाला है और तुरंत उस आदिवासी के घर पहुंचे। जैसे ही बच्चे ने जन्म लिया पिता ने बच्चे को राजा की गोद में दे दिया। राजा को देखते ही बच्चा हंसने लगा और बोला कि मेरे पास समय नहीं है मुझे इस दुनिया से जाना है लेकिन मैं आपके सवाल का उत्तर दे जाता हूं। बच्चे ने कहा महाराज पिछले जन्म में आप, मैं और वह साधु जो कोयले खा रहा था हम तीनों भाई थे। एक बार शिकार खेलते खेलते हम जंगल गए और वहां भटक गए। दो दिन भटकने के बाद हमें आटे की पोटली मिली। हम तीनों बहुत भूखे थे और हमने उसकी तीन बाटियां बनाई। आग पर बाटी सेकने के बाद जैसे ही हम उसे खाने बैठे एक महात्मा वहां आ गए। वे बहुत भूखे थे और हमसे बाटी देने की याचना करने लगे। सबसे पहले वे तीसरे और हमारे सबसे बड़े भाई के पास गए और बाटी मांगी। इस पर हमारे भाई ने कहा कि तुझे अपनी बाटी दे दूंगा तो क्या मैं अंगारे खाऊंगा। यह सुनकर महात्मा बहुत दु:खी हुए और मेरे पास आए। मैंने उनसे कहा कि आपको बाटी दे दी तो क्या मैं भूखा मरूंगा। इसके बाद वे आपके पास गए और आपने दयापूर्वक उन्हें आधी बाटी देकर उनका आदर किया। उस वक्त उन महात्मा ने आपको आशीर्वाद दिया और कहा कि तुम्हारा भविष्य तुम्हारे कर्मों से ही स्वर्णिम बनेगा।

अब बच्चे ने राजा को बताया कि इस तरह से आप इस जन्म में राजा बने। हम तीनों इस जन्म में अपने पिछले जन्म के कर्मों को ही भोग रहे हैं। जंगल में आपको अंगारे खाते जो साधु मिले थे ये हमारे वही भाई हैं जिन्होंने बाटी के बदले अंगार खाने की बात कही थी। आपने पिछले जन्म में महात्मा को दयापूर्वक बाटी दी इसलिए आप राजा बने और मैंने उस महात्मा को बाटी न देकर भूखा मरने की बात कही तो इस जन्म में मैं पैदा होते ही शरीर त्याग रहा हूं। आज मेरे जन्म पर भी वही समय और मुहूर्त है जिसमें आप और वह कोयले खाने वाले साधु जन्मे लेकिन हम तीनों की किस्मत अलग है क्योंकि हमारे कर्म अलग थे।

तो दोस्तों आपके कर्म ही तय करते हैं कि आपका भविष्य कैसा होगा। अगर आप खुशियां बांटेंगे तो बदले में खुशियां ही मिलेंगी। हम भी छोटी छोटी कहानियों के माध्यम से दुनिया में खुशियां बांटने का काम कर रहे हैं। आप भी हमारे दोस्त बनिए और इस नेक काम में हमारा साथ दीजिए।

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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