Posted in छोटी कहानिया - ९०० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

वे दिन वे लोग

वे दिन वे लोग——-

अमरसर (शेखावाटी)के राजा सूजाजी  की राठौड़ रानी से रायसल जी का जन्म फाल्गुन बदि 8 वि.1595 को हुआ।सूजाजी के बाद उनके बड़े पुत्र राव लूणकर्ण ने अमरसर की राजगद्दी संभाली । रायसल जी को अन्य भाइयों की तरह 7 गांवों की जमीदारी मिली और ये जमीदारी के गांव लाम्या आकर रहने लगे ।

सूजाजी के विद्वान दीवान देवी दास अब राव लूणकर्ण के पास रहने लगे । किसी बात पर दीवानजी अमरसर से रायसलजी के पास आ गए । दीवानजी ने रायसलजी को पिता के गुप्त खजाने के बारे में बताया । रायसलजी ने उस धन से 200 घुड़सवार लिए और देवीदास की सलाह से बादशाह अकबर के पास चले गए । वहां कई युद्धों में पराक्रम दिखलाया और मनसब प्राप्त किया ।

रायसलजी अद्भुत वीर उदार धार्मिक प्रवृति के और चरित्रवान शासक थे । ये युद्धों में बादशाह के साथ छाया की तरह रहते हुए अनेक बार उसकी प्राणरक्षा की । इसलिए बादशाह के ख़ास व्यक्ति थे । अकबर ने राज्य की अन्य जिम्मेदारियों के अलावा हरम की व्यवस्था सौंप राखी थी । उज्ज्वल चरित्र के बावजूद देवीदास दीवान हरम में होनेवाली गड़बड़ियों को जानता था । उसने रायसलजी की सलाह सेे पीतल का एक कच्छा बनवाया। जब ये जनानखाने की  व्यवस्था में जाते तब दीवान जी रायसलजी के कच्छे को ताला लगा देते और चाबी अपने पास रखते । लौटने पर ताला खोल देते।

धन्य है ऐसे चरित्रवान राजा और धन्य है ऐसे दीवान सलाहकार।

मनोहर सी ग राठौर

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