Posted in छोटी कहानिया - ९०० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मङ्गलं भगवान् विष्णुः

मङ्गलं भगवान् विष्णुः

मङ्गलं गरूडध्वजः।

मङ्गलं पुण्डरीकाक्षः

मंगलायतनो हरिः॥
भगवान् विष्णु मंगल हैं,गरुड वाहन वाले

मंगल हैं,कमल केसमान नेत्र वाले मंगल हैं,

हरि मंगल के भंडार हैं ।

मंगल अर्थात् जो मंगलमय हैं,शुभ हैं,

कल्याणप्रद हैं,जैसे समझ लें ।
भगवान विष्णु का एक नाम चक्रधर है।
इनका यह नाम इसलिए है क्योंकि इनकी

उंगली में सुदर्शन नामक चक्र घूमता रहता है।
इस चक्र के विषय में कहा जाता है कि यह

अमोघ है और जिस पर भी इसका प्रहार

होता है उसका अंत करके ही लौटता है।
भगवान विष्णु ने जब श्री कृष्ण रुप में

अवतार लिया था तब भी उनके पास

यह चक्र था।

इसी चक्र से इन्होंने जरासंध को पराजित

किया था,शिशुपाल का वध भी इसी चक्र

से किया गया था।
श्री कृष्ण अवतार में यह चक्र भगवान श्री

कृष्ण को परशुराम जी से प्राप्त हुआ था

क्योंकि रामावतार में परशुराम जी को

भगवान राम ने चक्र सौंप दिया था और

कृष्णावातार में वापस करने के लिए

कहा था।
लेकिन भगवान विष्णु के पास यह चक्र

कैसा इसकी बड़ी ही रोचक कथा है।
वामन पुराण में बताया गया है श्रीदामा

नामक एक असुर था।

इसने सभी देवताओं को पराजित कर

दिया था।
इसके बाद भगवान विष्णु के श्रीवत्स को

छीनने की योजना बनाई।
इससे भगवान विष्णु क्रोधित हो गए और

श्रीदामा को दंडित करने के लिए भगवान

शिव की तपस्या में करने लगे।
भगवान विष्णु की तपस्या से प्रसन्न होकर

शिव जी ने भगवान विष्णु को एक चक्र प्रदान

किया जिसका नाम सुदर्शन चक्र था।
भगवान शिव ने कहा कि यह अमोघ है,

इसका प्रहार कभी खाली नहीं जाता।
भगवान विष्णु ने कहा कि प्रभु यह अमोघ

है इसे परखने के लिए मैं सबसे पहले इसका

प्रहार आप पर ही करना चाहता हूं।
भगवान शिव ने कहा अगर आप यह चाहते

हैं तो प्रहार करके देख लीजिए।
सुदर्शन चक्र के प्रहार से भगवान शिव के

तीन खंड हो गए।

इसके बाद भगवान विष्णु को अपने किए

पर प्रयश्चित होने लगा और शिव की

आराधना करने लगे।
भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने कहा

कि सुदर्शन चक्र के प्रहार से मेरा प्राकृत

विकार ही कटा है।

मैं और मेरा स्वभाव क्षत नहीं हुआ है।

यह तो अच्छेद्य और अदाह्य है।
भगवान शिव विष्णु से कहा कि आप निराश

न होइये।

मेरे शरीर के जो तीन खंड हुए हैं अब वह

हिरण्याक्ष,सुवर्णाक्ष और विरूपाक्ष महादेव

के नाम से जाना जाएगा।
भगवान शिव अब इन तीन रुपों में भी पूजे

जाते हैं।
इसके बाद भगवान विष्णु ने श्रीदामा से युद्घ

किया और सुदर्शन चक्र से उसका वध कर

दिया।

इसके बाद से सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु के

साथ सदैव रहने लगा।
विष्णु वंदना ;
प्रवक्ष्याम्यधुना ह्येतद्वैष्णवं पञ्जरं शुभम्।

नमो नमस्ते गोविन्द चक्रं गृह्य सुदर्शनम्।।

प्राच्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।

गदां कौमोदकीं गृह्य पद्मनाभ नमोस्तु ते।।
याम्यां रक्षस्व मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।

हलमादाय सौनन्दं नमस्ते पुरुषोत्तम।।

प्रतीच्यां रक्ष मां विष्णो त्वामहं शरणं गत:।

मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम्।।
उत्तरस्यां जगन्ननाथ भवन्तं शरणं गत:।

खड्गमादाय चर्माथ अस्त्रशस्त्रादिकं हरे।।

नमस्ते रक्ष रक्षोघ्र ऐशान्यां शरणं गत:।

पाञ्चजन्यं महाशङ्खमनुघोष्यं च पङ्कजम्।।
प्रगृह्य रक्ष मां विष्णो आग्रेय्यां यज्ञशूकर।

चन्द्रसूर्य समागृह्य खड्गं चान्द्रमसं तथा।।

नैर्ऋत्यां मां च रक्षस्व दिव्यमूर्ते नृकेसरिन्।

वैजयन्ती सम्प्रगृह्य श्रीवत्संकण्ठभूषणम्।।
वायव्यां रक्ष मां देव हयग्रीव नमोस्तुते।

वैनतेयं समरुह्य त्वन्तरिक्षे जनार्दन।।

मां रक्षस्वाजित सद नमस्तेस्त्वपराजित।

विशालाक्षं समारुह्य रक्ष मां तवं रसातले।।
अकूपार नमस्तुभ्यं महामीन नमोस्तु ते।

करशीर्षाद्यङ्गलीषु सत्य त्वंबाहुपञ्जरम्।।

कृत्वा रक्षस्व मां विष्णो नमस्ते पुरुषोत्तम।

एतदुक्तं शङ्काराय वैष्णवं पञ्जरं महत्।।
पुरा रक्षार्थमीशान्यां: कात्यायन्या वृषध्वज।

नाशयामास सा येन चामरं महिषासुरम्।।

दानव रक्तबीजं च अन्यांश्च सुरकण्टकान्।

एतज्जपन्नरो भक्तया शत्रून् विजयते सदा।।
समस्त चराचर प्राणियों एवं सकल

विश्व का कल्याण करो प्रभु,,,,
अधर्म का नाश हो,,

धर्म की स्थापना हो,,,,

ॐ नमो नारायणाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
जयति पुण्य सनातन संस्कृति,,

जयति पुण्य भूमि भारत,,,
सदा सर्वदा सुमंगल,,

हर हर महादेव,,

ॐ विष्णवे नम:

जय लक्ष्मी भवानी,,,

जय श्री राम —
विजय कृष्णा पांडेय

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Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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