Posted in संस्कृत साहित्य

ब्राह्मण का परिचय !


Alok_Shukla,,

ब्राह्मण का परिचय !

ब्राह्मण को जानना चाहता है ?

मैं तुझे बताता हूँ कि ब्राह्मण कौन है।

ब्राह्मण वह है जो वशिष्ठ के रूप
में केवल अपना एक दंड जमीन
में गाड़ देता है,जिससे विश्वामित्र
के समस्त अस्त्र शस्त्र चूर हो जाते
हैं और विश्वामित्र लज्जित होकर
कह पड़ते हैं-

धिक बलं क्षत्रिय बलं,
ब्रह्म तेजो बलं बलं।
एकेन ब्रह्म दण्डेन,
सर्वस्त्राणि हतानि में।

(क्षत्रिय के बल को धिक्कार है।
ब्राह्मण का तेज ही असली बल है।
ब्राह्मण वशिष्ठ का एक ब्रह्म दंड
मेरे समस्त अस्त्र शस्त्र को निर्वीर्य
कर दिया।)

ब्राह्मण वह है जो परशुराम के रूप
में एक बार नहीं,21 बार आततायी
राजाओं का संहार करता है।

जिसके लिए भगवान राम भी
कहते हैं-

विप्र वंश करि यह प्रभुताई।
अभय होहुँ जो तुम्हहिं डेराई।

ब्राह्मण वह है,जो दधीचि के रूप
में अपनी हड्डियों से वज्र बनवाकर,
वृत्तासुर का अंत कराता है।

ब्राह्मण वह है,जो चाणक्य के रूप में,
अपना अपमान होने पर धनानन्द को
चुनौती देकर कहता है कि अब यह
शिखा तभी बँधेगी जब तुम्हारा नाश
कर दूंगा और ऐसा करके ही शिखा
बाँधता है।

ब्राह्मण वह है जो अर्थ शास्त्र की
ऐसी पुस्तक देता है,जो आज तक
अद्वितीय है।

ब्राह्मण वह है जो पुष्य मित्र शुंग के
रूप में मौर्य वंश के अंतिम सम्राट
बृहद्रथ को,उठाता है तलवार और
स्वाहा कर देता है।

भारत को बौद्ध होने से बचा लेता है।
यवन आक्रमण की ऐसी की तैसी कर
देता है।

ब्राह्मण वह है जो मण्डन मिश्र के
रूप में जन्म लिया और जिसके
घर पर तोता भी संस्कृत में दर्शन
पर वाद विवाद करते थे।

अगर पता नहीं है तो यह श्लोक
पढो,जो आदि शंकर के मण्डन
मिश्र के घर का पता पूछने पर
उनकी दासियों ने कहा था-

स्वतः प्रमाणं परतः प्रमाणं,
कीरांगना यत्र गिरा गिरंति।
द्वारस्थ नीण अंतर संनिरुद्धा,
जानीहि तंमण्डन पंडितौकः।

(जिस घर के दरवाजे पर पिंजरे में
बन्द तोता भी वेद के स्वतः प्रमाण
या परतः प्रमाण की चर्चा कर रहा
हो,उसे ही मण्डन मिश्र का घर
समझना।)

ब्राह्मण वह है जो शंकराचार्य के रूप
में 32 वर्ष की उम्र तक वह सब कर
जाता है,जिसकी कल्पना भी सम्भव
नहीं है।
अद्वैत वेदान्त,दर्शन का शिरोमणि।

ब्राह्मण वह है जो अस्त व्यस्त
अनियंत्रित भाषा को व्याकरण
बद्ध कर पाणिनि के रूप में
अष्टाध्यायी लिख देता है।

ब्राह्मण वह है,जो पतंजलि के रूप
में अश्वमेध यज्ञ कराता है और
महाभाष्य लिख देता है।

जयति पुण्य सनातन संस्कृति,
जयति पुण्य भूमि भारत,

सदा सर्वदा सुमंगल,
हर हर महादेव,
जय भवानी,
जय श्री राम,

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