Posted in छोटी कहानिया - ९०० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

निर्मल चित्त

निर्मल चित्त
बड़ी पुरानी कहानी है। महाराष्ट्र में संत हुए रामदास। उन्होंने राम की कथा लिखी। वे लिखते जाते, और रोज लोगो को सुनाते जाते। कहते हैं, कथा इतनी प्यारी थी कि खुद हनुमान भी सुनने आते थे। छिपकर बैठ जाते भीड़ में। जब हनुमान सुनने आए तो बात कुछ राज की ही होगी, क्योंकि हनुमान ने तो कथा खुद ही देखी थी। अब कुछ इसमें देखने जैसा नहीं था। लेकिन रामदास कह रहे थे तो बात ही कुछ थी कि खुद देखनेवाला मौजूद जो था, चश्मदीद गवाह, वह भी यह कहानी सुनने आता था। लेकिन जब एक जगह हनुमान को बरदाश्त न हुआ। क्योंकि हनुमान का ही वर्णन हो रहा था। और रामदास ने कहा, हनुमान गए अशोक—वाटिका में, लंका में। और उन्होंने देखा कि चारों तरफ सफेद फूल खिले हैं। हनुमान ने कहा, ठहरो। सुधार कर लो। फूल लाल थे, सफेद नहीं थे। रामदास ने कहा कि कौन नासमझ बीच में सुधार करवा रहा है? तब हनुमान ने अपने को प्रकट कर दिया। उन्होंने कहा कि अब प्रकट करना ही पड़ेगा कि मैं खुद ही हनुमान हूं, जिसकी तुम कथा कह रहे हो। और मैं कहता हूं कि वहां फूल लाल थे, सफेद नहीं। रामदास ने कहा, कोई भी हो, चुप बैठो! फूल सफेद थे।
झगड़ा बहुत बड़ा हो गया। और तब एक ही उपाय था कि अब राम के पास जाया जाए। हनुमान ने कहा, तो चलो राम के पास। वे जो कह देंगे वही निर्णय। क्योंकि यह हद हो गई! मैं जब खुद चश्मदीद आदमी हूं और कह रहा हूं कि मैंने फूल देखे! तुम मेरी कथा कह रहे हो—और वह भी हजारों साल बाद कह रहे हो। और एक सी बात पर जिद्द कर रहे हो। क्या बिगड़ता है कि तुम हूल लिख दो कि लाल थे?
पर रामदास ने कहा, बिगाड़ने का सवाल नहीं; जो सच है, सच है। फूल सफेद थे।
झगड़ा राम के पास गया, और राम ने हनुमान से कहा, तुम चुप रहो। रामदास जो कहते हैं, ठीक कहते हैं। तुम उस समय इतने क्रोध में थे, आंखें खून से भरी थीं, तुम्हें लाल दिखाई पड़े होंगे। रामदास को कोई क्रोध नहीं है। वह दूर तटस्थ भाव से देख रहा है! फूल सफेद ही थे। मुझे भी पता है?
जब तुम क्रोध से देखोगे तो चीजें और हो जाएगी। स्वभावतः जब तुम लोभ से देखोगे तो चीजें और हो जाएंगी। जब तुम वासना, कामना से भरकर देखोगे तो चीजों में एक सौंदर्य आ जाएगा, जो है ही नहीं। देखनेवाला अपने को ही फैलाकर देखता है। इसलिए तुम्हारी दृष्टि ही तुम्हारी सृष्टि हो जाती है। जब तुम बदलोगे और तुम्हारी दृष्टि बदलेगी, तत्क्षण सारी सृष्टि बदल जाएगी। जहां तुम्हें बहुमूल्य दिखाई पड़ता था वहां कचरा दिखाई पड़ेगा। जिससे तुमने असार समझकर छोड़ दिया था, हो सकता था वहां सार दिखाई पड़े; और जिसे तुमने सार समझकर छाती से लगा रखा था वहां तुम्हें असार दिखाई पड़े
भगवती कालिया

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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