Posted in हिन्दू पतन

*गहराई से सोचिए❓❓*जिसने भी मुझे यह संदेश भेजा है,उसको धन्यवाद।कृपया आप भी आगे भेजें।
सैनिको पर पत्थर –           अहिंसक आंदोलन 
लव जिहाद पर कार्यवाही-  गुंडागर्दी
पत्थरबाज-                       भटके हुए नौजवान
भारत तेरे टुकडे –              अभिव्यक्ति आजादी
भंसाली को थप्पड़ –           हिन्दू आतंकवाद 
गौमांस भक्षण    –              भोजन का अधिकार 
ईद पर बकरा काटना –      धार्मिक स्वतंत्रता 
तीन तलाक हलाला   –      धार्मिक अंदरूनी मामला 
दीवाली पटाखे         –        पर्यावरण प्रदूषण 
न्यू इयर पटाखे         –       जश्न का माहौल
मटकी फोड में बच्चे –        असंवैधानिक
खतना मे बच्चे    –       धार्मिक अंदरूनी मामला 
प्लेटफार्म पर नमाज –        धार्मिक अधिकार 
सड़क पर पंडाल –             सड़क जाम का केस
मस्जिद लाउडस्पीकर   –   धार्मिक स्वतंत्रता 
मंदिर मे लाउडस्पीकर –     ध्वनि प्रदूषण 
करवाचौथ         –               ढकोसला 
वैलेंटाइनडे         –              प्यार का पर्व 
चार शादियां        –             धार्मिक स्वतंत्रता
हिन्दू दो शादी       –            केस दर्ज 
गणेश विसर्जन, होली  –     जल प्रदूषण 
ताजिया विसर्जन   –            संविधान अधिकार 
आजम,ओवैसी,केजरी-      राष्ट्र पुरुष
मोदी,योगी,स्वामी-             हिन्दू आतंकवादी
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु- आतंकवादी
अफजल,कसाब,बुरहान-     शहीद
15 मिनिट पुलिस हटालो-     सहिष्णुता
भाजपा चुनाव जीती-             असहिष्णुता
कश्मीर,असम केरल दंगे-      देश शांत
अख़लाक़,गुजरात दंगे-      अवार्ड वापसी,असहिष्णु देश
शिव लिंग पर दूध चढ़ाना-      दूध की बर्बादी
बकरे काटना,चादर चढ़ाना-  धार्मिक मान्यता
भारत की सच्चाई

वाह मीडिया वाह

वाह कांग्रेसियों​ वाह

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मीरा कुमार ने ब्राह्मण से शादी की वह अब भी “दलित” हैं, प्रो विवेक कुमार, भीमराव सकपाल जी सहित कईयों ने ब्राह्मण से विवाह किया, लेकिन “दलित” ही बने रहे, यह “दलित” बनना कौन से जमाने में लिखी मनुस्मृति के कानून से चल रहा है?  
क्योंकि मनुस्मृति में शूद्र का वर्णन है न कि मिशनरियों के “पंचम वर्ण”, “अछूत”, और फुले के “आदिशूद्र” व संविधान के “अनुसूचित जाति” का!!
एक व्यक्ति जो 1978 में भारत के सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकार्ड बन गया , दो बार राज्य सभा का सांसद रह लिया , पूरी उम्र एक काबिल वकील के जैसे जिया और वर्तमान में गवर्नर के पद पर मनोनीत हो कर देश सेवा  में रत है आज उसका नाम राष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत हुआ है तो उसका परिचय एक दलित के जैसे करवाया जा रहा है | 
शेम ऑन अस | आम भारतीय कभी एक न हो पाएं इसके लिए संस्थान गढ़ लिए हैं, टर्मिनोलॉजी गढ़ ली है | एक दलित व्यक्ति कब सामान्य बनेगा इसके लिए कितना समय चाहिए या वो अपनी तमाम उपलब्धियों के बावजूद भी क्या दलित ही गिना जाएगा ?
ईसाई जान दयाल भी खुद को दलित बताता है जबकि अनुसूचित जाति का व्यक्ति हिंदु,  बौद्ध,  सिक्ख के अलावा कानूनी रूप से कोई अन्य नहीं हो सकता। 
मूल संविधान में केवल हिंदू अनुसूचित जाति की मान्यता है।  यह सब ढपोरशंख “दलित” बन कर जोशुआ प्रोजेक्ट के एजेंट हैं।
कांचा इलैया की जाति कुरूमा गोल्ला,  भेड़पालक, तेलंगाना में ओबीसी है, यह फर्जी रोहित वेमुला की तरह अनुसूचित जाति का आभास देता है छद्म-ईसाई एजेंडा के तहत।
दिलीप मंडल ने भी ब्राह्मण अनुराधा से विवाह किया लेकिन यह भी दलित-बहुजन राग ही टर्राता है, …. इन सब कठपुतलियों के पीछे है जोशुआ प्रोजेक्ट।
भारत के सर्वोच्च न्यायालय के लिए जिसकी अंतिम ज्ञात व्यवस्था के अनुसार सामान्य वर्ग में आरक्षित पुरूष विवाह करेगा तो वह पुरूष व संतति आरक्षित माने जायेंगे व विवाह करने वाली सामान्य महिला ही रहेगी। तथा कोई आरक्षित महिला यदि अनारक्षित सामान्य वर्ग में विवाह करे तो महिला को आरक्षित दर्जा मिलता रहेगा परंतु विवाहित पुरूष व संतति अनारक्षित सामान्य वर्ग के माने जायेंगे।
अब दलित शब्द की सरकारी व्याख्या की जानी अत्यंत आवश्यक है नहीं तो समाज कभी एक नहीं हो पायेगा , आगे नहीं बढ़ पायेगा |
आदर