Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

आडवाणी जी राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार क्यों नही बन पाए , इसे समझने के लिए महाभारत के एक प्रसंग को समझना जरूरी होगा ।
महाभारत के युद्ध पश्चात श्रीकृष्ण लौटे तो रोष में भरी रुक्मिणी ने पूछा..,

“आपने द्रोणाचार्य और भीष्म पितामह जैसे धर्मपरायण लोगों के वध में क्यों साथ दिया ?”
श्री कृष्ण ने उत्तर दिया.., “ये सही है कि उन दोनों ने जीवनपर्यंत धर्म का पालन किया किन्तु उनके किये एक पाप ने उनके सारे पुण्यों को हर लिया ”

“वो कौन सा पाप था ?”
श्री कृष्ण ने कहा : “भरी सभा में जब द्रौपदी का चीरहरण हो रहा था तब ये दोनों भी वहां उपस्थित थे। बड़े होने के नाते ये दुशासन को आज्ञा भी दे सकते थे किंतु इन्होंने ऐसा नहीं किय। उनके इस एक पाप से बाकी धर्मनिष्ठता छोटी पड गई”
रुक्मिणी ने पूछा, “और कर्ण ? वो अपनी दानवीरता के लिए प्रसिद्ध था ।कोई उसके द्वार से खाली हाथ नहीं गया। उसकी क्या गलती थी ?”

.

श्रीकृष्ण ने कहा, “जब अभिमन्यु सभी वीरों को धूल चटाने के बाद युद्धक्षेत्र में आहत होकर भूमि पर पड़ा था तो उसने करण से पानी माँगा। कर्ण जहाँ खड़ा था उसके पास पानी का एक गड्ढा था किंतु कर्ण ने मरते हुए अभिमन्यु को पानी नहीं दिया। इसलिये उसका जीवन भर दानवीरता से कमाया हुआ पुण्य नष्ट हो गया। बाद में उसी गड्ढे में उसके रथ का पहिया फंस गया और वो मारा गया”

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अब आप लोग खुद अंदाजा लगा सकते हैं कि पाकिस्तान जाकर जिन्ना की मजार पर आडवाणी जी ने जो भाषण दिया , उस भाषण के पाप का वजन कितना था ?

Sanjay dvivedi

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