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विजय माल्या

#तनिक_इधर_भी_गौर_फरमाये ..

#कांग्रेस द्वारा बार बार मोदी सरकार पर उद्योगपतियों को संरक्षण दिये जाने का आरोप लगाया जाता रहा है, जबकि सच्चाई इससे ठीक विपरीत है, आओ कुछ आकडो द्वारा यह जानने का प्रयास करते हैं कि उन उद्योगपतियों को हजारों हजार करोड के ऋण आखिरकार किसने दिया..?
सिर्फ एक विजय माल्या ही नहीं थे जिसको कांग्रेस सरकार ने 9000 करोड़ का लोन दिया और वो फुर्र हो गए । कांग्रेस ने अपने मित्र उद्योगपतियों को किस दरियादिली से लोन बांटे एक बानगी देखिए –

1. भूषण स्टील 90,000 करोड़
2. वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज 58,000 करोड़
3.जेपी ग्रुप 55,000 करोड़
4 एस्सार लिमिटेड 50,000 करोड़
5.जिंदल ग्रुप 38,000 करोड़
6.आलोक इंडस्ट्रीज 25,000 करोड़
7. लैंको 19,000 करोड़
8. एबीजी शिपयार्ड 15,000 करोड़
9.पुंज लॉयड 14,000 करोड़
10. इलेक्ट्रोस्टील 14,000 करोड़
11. अबान होल्डिंग 13,000 करोड़
12. मोंनेट इस्पात 12,000 करोड़
13.प्रयागराज पावर 12,000 करोड़
14.एरा ग्रुप। 7,000 करोड़

अपनी करनी को छुपाने के लिए #कांग्रेस के युवराज चीख चीख कर देश को गुमराह कर रहे हैं कि देश की सारी पूंजी सिर्फ कुछ उद्योगपतियों के हाथ मे है और उन्हें बचाया जा रहा है और किसानों का कर्ज माफ नही किया जा रहा । कितनी बेशर्मी से कांग्रेस अपनी करनी का हिसाब मोदी सरकार से मांग रही है ।देखिए इन शैतानो ने देश की अर्थव्यवस्था के साथ कितना बड़ा खिलवाड़ किया ।
पर फिर भी सरकार चुप नहीं बैठी है और पूर्ववर्ती सरकार द्वारा मित्र उद्योगपतियों को कर्ज़ के रूप में दिए गए हज़ारों करोड़ रुपये जो एनपीए बन चुके हैं , को वापस वसूलने का खाका बना चुकी है । सरकार हाल ही में बनाये गए नए बैंकरप्सी इंसाल्वेंसी कानून के मदत से कुल 30 ऐसे डिफॉल्टरों,जो 95% एनपीए के जिम्मेदार हैं, से फ़ेज्ड मैनर में वसूली करने जा रही है ।
आज प्रथम चरण में 12 ऐसे लोगों के खिलाफ जो 25 % कुल एनपीए के जिम्मेदार हैं से वसूली के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया गया है ।
अगले चरण में बाकियों पर शिकंजा कसने जा रहा है । बचेगा कोई नहीं चाहे कितनी कोशिश कर ले ।

#ग़द्दार_घोटालेबाज़_कांग्रेस
1987 – बोफोर्स तोप घोटाला, 960 करोड़
1992 – शेयर घोटाला, 5,000 करोड़।।
1994 – चीनी घोटाला, 650 करोड़
1995 – प्रेफ्रेंशल अलॉटमेंट घोटाला, 5,000 करोड़
1995 – कस्टम टैक्स घोटाला, 43 करोड़
1995 – कॉबलर घोटाला, 1,000 करोड़
1995 – दीनार / हवाला घोटाला, 400 करोड़
1995 – मेघालय वन घोटाला, 300 करोड़
1996 – उर्वरक आयत घोटाला, 1,300 करोड़
1996 – चारा घोटाला, 950 करोड़
1996 – यूरिया घोटाला, 133 करोड
1997 – बिहार भूमि घोटाला, 400 करोड़
1997 – म्यूच्यूअल फण्ड घोटाला, 1,200 करोड़
1997 – सुखराम टेलिकॉम घोटाला, 1,500 करोड़
1997 – SNC पॉवेर प्रोजेक्ट घोटाला, 374 करोड़
1998 – उदय गोयल कृषि उपज घोटाला, 210 करोड़
1998 – टीक पौध घोटाला, 8,000 करोड़
2001 – डालमिया शेयर घोटाला, 595 करोड़
2001 – UTI घोटाला, 32 करोड़
2001 – केतन पारिख प्रतिभूति घोटाला, 1,000 करोड़
2002 – संजय अग्रवाल गृह निवेश घोटाला, 600 करोड़
2002 – कलकत्ता स्टॉक एक्सचेंज घोटाला, 120 करोड़
2003 – स्टाम्प घोटाला, 20,000 करोड़
2005 – आई पि ओ कॉरिडोर घोटाला, 1,000 करोड़
2005 – बिहार बाढ़ आपदा घोटाला, 17 करोड़
2005 – सौरपियन पनडुब्बी घोटाला, 18,978 करोड़
2006 – पंजाब सिटी सेंटर घोटाला, 1,500 करोड़
2008 – काला धन, 2,10,000 करोड
2008 – सत्यम घोटाला, 8,000 करोड
2008 – सैन्य राशन घोटाला, 5,000 करोड़
2008 – स्टेट बैंक ऑफ़ सौराष्ट्र, 95 करोड़
2008 – हसन् अली हवाला घोटाला, 39,120 करोड़
2009 – उड़ीसा खदान घोटाला, 7,000 करोड़
2009 – चावल निर्यात घोटाला, 2,500 करोड़
2009 – झारखण्ड खदान घोटाला, 4,000 करोड़
2009 – झारखण्ड मेडिकल उपकरण घोटाला, 130 करोड़
2010 – आदर्श घर घोटाला, 900 करोड़
2010 – खाद्यान घोटाला, 35,000 करोड़
2010 – बैंड स्पेक्ट्रम घोटाला, 2,00,000 करोड़
2011 – 2जी स्पेक्ट्रम घोटाला, 1,76,000 करोड़
2011 – कॉमन वेल्थ घोटाला, 70,000 करोड़
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जय हिन्द ..🇮🇳

जय हिन्द ..🇮🇳

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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