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पूर्ण आस्तिक भगत सिंह एतिहासिक तथ्य


पूर्ण आस्तिक भगत सिंह एतिहासिक तथ्य
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भगत सिंह की फांसी के बाद भारत के लोगों के लिए भगत सिंह हीरो बन गए थे जगह जगह उनके नाम के साथ लोग अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हो रहे थे और अंग्रेजी सत्ता हिलने लगी थी तब अंग्रेजों ने इस ज्वाला को रोकने के लिए एक षणयंत्र रचा ,उन्होंने भगत सिंह के नाम का झूठा निबंध एक अंग्रेजी पत्रिका The People में 27 सितंबर 1931 को “Why I am an Atheist” ( मैं नास्तिक क्यों हूँ ) छपा ये निबंध उनकी फांसी के लगभग छः माह बाद छापा गया इस निबंध में एक बात विशेष थी कि ये अंग्रेजों का लिखा हुआ और अंग्रेजी पत्रिका The People में ही छापा गया था जिसमें ईश्वर की आस्था को नकारने के साथ ईश्वर के अस्तित्व पर कई प्रश्न खड़े किये गए थे जिससे सामान्य हिन्दू और सिखों में भगत के प्रति नफ़रत भर जाए और भगत सिंह को अपना हीरो मानना बंद कर दें और इतिहास साक्षी है कि इस लेख के बाद ही भगत सिंह की चर्चा कम होती गयी और जो आन्दोलन अंगेजों के विरुद्ध खडा हो रहा था वह बंद हो गया अंग्रेजों ने अपनी बात को सही सिद्ध करने के लिए भगत सिंह को वामपंथ ,साम्यवाद और समाजवाद से भी जोड़ दिया तथा अन्य कई जगह भी इसी प्रयोग को दोहराया. The People में छपने वाले इस लेख को भगत सिंह ने कब लिखा और ये किसको दिया इस बात का कोई प्रमाण नहीं है,इसी तरह चंद्रशेखर को भी समाजवाद,वामपंथ और नास्तिकवाद से जोड़ते हैं जबकि वे कट्टर धार्मिक व्यक्ति थे उन्होंने जीवन भर जनेऊ का त्याग नहीं किया जो उनके वास्तविक चित्र में भी देखा जा सकता है जबकि NCERT में छपे एक चित्र में उनके जनेऊ को ही हटा दिया गया था क्योंकि वामपंथियों को भगत सिंह और चंद्रशेखर को वामपंथी और नास्तिक घोषित करना है और हम आँखें बंद करके उनके द्वारा प्रचारित झूठ को स्वीकार कर लेते हैं
भगत सिंह पूर्ण आस्तिक और वैदिक थे तथा आर्य समाज को अपना गुरु मानते थे,सत्यार्थ प्रकाश उनकी प्रिय पुस्तक थी
जय श्रीराम
विवेकानंद आर्य

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