Posted in संस्कृत साहित्य

पंचामृत का सांकेतिक अर्थ  व पूजा में उसका महत्व


#पंचामृत_का_सांकेतिक_अर्थ

#व

#पूजा_में_उसका_महत्व
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भगवान को चढ़ने वाले पंचामृत में भी एक गूढ़ संदेश है…

पंचामृत दूध, दही, शहद व घी को गंगाजल में मिलाकर बनता है …
1. दूधः  – जब तक बछड़ा पास न हो गाय दूध नहीं देती. बछड़ा मर जाए तो उसका प्रारूप खड़ा किए बिना दूध नहीं देती. दूध मोह का प्रतीक है …
2. शहदः  – मधुमक्खी कण-कण भरने के लिए शहद संग्रह करती है. इसे लोभ का प्रतीक माना गया है …
3. दहीः  – इसका तासीर गर्म होता है. क्रोध का प्रतीक है …
4. घीः – यह समृद्धि के साथ आने वाला है, अहंकार का प्रतीक …
5. गंगाजलः – मुक्ति का प्रतीक है. गंगाजल मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार को समेटकर शांत करता है …
पंचामृत से अर्चना का अर्थ हुआ हम मोह, लोभ, क्रोध और अहंकार को समेटकर भगवान को अर्पित करके उनके श्री चरणों में शरणागत हों …
☆☆☆☆☆राधे राधे☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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