Posted in Media

एनडीटीवी


एनडीटीवी पर सीबीआई छापे के विरोध में उसके बकैत एंकर रवीश कुमार ने अपने फेसबुक पोस्ट के जरिए फिर से लफ्फाजी कर शहीद बनने की कोशिश की है! वह NDTV पर सवाल उठाने वाले सोशल मीडिया के लोगों को चंपू कह रहा है! जो मीडिया एनडीटीवी के मालिक प्रणव राय/ राधिका राय व चैनल के शेयर होल्डर्स पर छापे की खबर दिखा रही है, उसे ‘गोदी मीडिया’ कह रहा है! कार्रवाई करने वाली सरकार को आमने-सामने लाइव बहस की चुनौती दे रहा है! लाइव बहस कर तो रहे थे भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा, फिर इस बकैत के एनडीटीवी को बर्दाश्त क्यों नहीं हुआ? इसे सोशल मीडिया द्वारा सवाल पूछना मंजूर नहीं, क्योंकि 10 साल से NDTV के भ्रष्टाचार पर कोई सवाल नहीं पूछता था! इसे वो मीडिया हाउस पसंद नहीं जो इसके खिलाफ खबर दिखाते हैं, क्योंकि इससे पहले मीडिया के नाम पर पावर ब्रोकिंग का पूरा नेक्सस चल रहा था! इसके फेसबुक पोस्ट का Point-To-Point मैंने जवाब दिया है! यदि वास्तव में यह पत्रकार है तो लाइव कर ले और केवल लफ्फाज है तो ‘फ्री स्पीच’ के पेटिकोट घुस जाए! वामपंथी पत्रकारों और अवार्ड वापसी बुद्धिजीवी गिरोह का दोगलापन अब जनता बर्दाश्त नहीं करेगी!
1) रब्बिश-तो आप डराइये, धमकाइये, आयकर विभाग से लेकर सबको लगा दीजिये। ये लीजिये हम डर से थर थर काँप रहे हैं!
जवाबः क्या तुम्हें देश की अदालत पर भरोसा नहीं है जो डरने का नाटक कर रहे हो? अभी तक कार्रवाई नहीं हो रही थी तो कहते थे सरकार तुम्हारी है कार्रवाई क्यों नहीं करते? आज सीबीआई ने छापा मारा है तो कह रहे हो कि एजेंसियों को पीछे लगाकर डरा रहे हैं! अरे जब इस देश की सरकार से तुम अफलज, याकूब, कन्हैया, उमर खालिद जैसे भारत के टुकड़े करने वालों के लिए लड़ लेते हो तो इतनी भी कूबत नहीं है कि अपने लिए अदालत में लड़ सको? इसलिए यह दोगलापंथी छोड़ो और कानून का सम्मान करो।
सरकार गलत है या तुम्हारा टीवी यह अदालत तय करेगी, तुम्हारी बकैती नहीं! शहीद बनने की कोशिश मत करो। हम बनने नहीं देंगे! याद रखना, एनडीटीवी का मतलब इंडिया नहीं होता, पत्रकारिता नहीं होता! पिछले एक दशक में एनडीटीवी का मतलब हो गया है- पावर ब्रोकिंग, हवाला करोबार और मनी लाउंड्रिंग! इन आरोपों को मिटाने के लिए अदालत पर भरोसा करो! रात के दो बजे अदालत खुलवाने वाले लोग जब बकैती करें तो समझ में आ जाता है कि उनके मन में चोर छिपा है।
VIDEO : CBI conducts raid at NDTV co-founder Prannoy Roy’s residence in alleged bank default case
News
2) रब्बिश- सोशल मीडिया और चंपुओं को लगाकर बदनामी चालू कर दीजिये लेकिन इसी वक्त में जब सब ‘गोदी मीडिया’ बने हुए हैं , एक ऐसा भी है जो गोद में नहीं खेल रहा है। आपकी यही कामयाबी होगी कि लोग गीत गाया करेंगे- गोदी में खेलती हैं इंडिया की हजारों मीडिया।
जवाब- सोनिया, राहुल और चिदंबरम की गोद में जब 10 साल खेलते रहे तो याद नहीं आ रहा था- ‘गोदी में खेलती है इंडिया की हजारों मीडिया!’ कितने बड़े दोगले और मक्कार हो तुम! एनडीटीवी पर केवल वामपंथियों को बोलने की आजादी थी, आज सोशल मीडिया ने जब हर किसी को बोलने की आजादी दी है तो तुम इन्हें चंपू कह रहे हो! क्या तुम्हें केवल अपने लिए अभिव्यक्ति की आजादी चाहिए थी? देश की बांकी जनता क्या गूंगी है?
यूपीए सरकार की ‘गोदी मीडिया’ तो तुम थे! 4 जून 2011 को रामलीला मैदान में एक शांतिपूर्ण ढंग से हो रहे बाबा रामदेव के आंदोलन को यूपीए सरकार ने कुचल दिया था और तुम या तुम्हारा चैनल 4 जून की रात और पूरे 5 जून को इस पर एक खबर तक नहीं दिखाया। एक बाप की औलाद हो तो 4-5 जून 2011 का एक भी फुटेज दिखा दो जिसमें तुमने रामदेव के आंदोलन को कुचलने वाली यूपीए सरकार के खिलाफ एक भी खबर का प्रसारण किया हो। सोनिया गांधी और अहमद पटेल की गोदी तब तुम्हें कितनी प्यारी थी, इससे बड़ा दूसरा उदाहरण और क्या होगा?
यूपीए सरकार की ‘गोदी मीडिया’ तो तुम हो रब्बिश, जिसने 2जी में यूपीए सरकार के साथ मिलकर देश लूटा। पहले सीएजी और बाद में सुप्रीम कोर्ट तक ने 2जी में लूट को स्वीकार किया है। अरे तुम तो संवैधनिक संस्थाओं द्वारा सर्टिफाई कांग्रेस की ‘गोदी मीडिया’ हो! 2जी ही क्यों, कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में तो सीएजी ने एक तरह से लिखित रूप से एनडीटीवी को कांग्रेस की यूपीए सरकार का चंपू व ‘गोदी मीडिया’ करार दिया था। 2011 में संवैधनिक संस्था सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि करीब 37 करोड़ की खैरात तुम्हारे चैनल ने कांग्रेस की यूपीए सरकार से कॉमनवेल्थ की लूट में हासिल किया था। अपने दोगलेपन को कहां-कहां छुपाओगे? तुम्हारा और तुम्हारे चैनल का चरित्र ही कांग्रेस की गोदी में बैठना रहा है!
यूपीए सरकार के दौरान पी.चिदंबरम के 5000 करोड़ के हवाला मनी की ‘गोदी’ का आनंद तुम्हारे चैनल ने उठाया! विदेश में फर्जी कंपनियां बनाकर करोड़ों-अरबों के काले धन को सफेद करने का ‘गोदी आनंद’ तुम्हारे मालिक ने लिया! और आज दूसरों को ‘गोदी मीडिया’ कह रहे हो? अरे पहले गिरेबान में झांकना सीखो! शर्म आती है या नहीं? और हां, यह मत कहना कि यह सब आरोप हैं, अभी तक साबित कुछ नहीं हुआ! आरोपमुक्त तो कन्हैया, उमर भी नहीं हुआ था, अफजल को तो अदालत ने फांसी की सजा दे दी थी, लेकिन इनके लिए तो तुमने पूरे चैनल को ‘पंचायत’ बना रखा था!
कांग्रेस-कम्युनिस्टों का चंपू पत्रकार तो तुम हो! अपनी मालनिक राधिका राय की बहन वृंदाकरात के कहने पर बाबा रामदेव की फैक्टरी के खिलाफ खबर चलाई। दवा में मानव खोपड़ी की हडडी बताया था, लेकिन जब कांग्रेस की ही उत्तराखंड सरकार की जांच रिपोर्ट इस बारे में आई और पतंजलि को क्लिन चिट मिली तो तुमने खबर ही दबा दिया! इससे भी बड़ी चंपूगिरी की मिसाल होती है क्या?
चंपू तो तुम हो रब्बिश, जो अफजल गिरोह को अदालत से क्लिन चिट मिले बगैर हीरो बनाने पर तुले हुए थे। शायद अपने पाकिस्तानी आकाओं की ‘गोदी में खेलने’ को आतुर तुम और तुम्हारी बरखा बहन ने कन्हैया और उमर जैसों को हीरो बनाने के लिए जेएनयू में डेरा डाल दिया था! आतंकी हाफिज सईद ने तुम्हारी बहन बरखा दत्त की खुलेआम तारीफ भी की थी! पाकिस्तानी चंपू तो तुम और तुम्हारा पूरा चैनल रहा है! कारगिल और 26/11 में सैनिकों को मरवाने और पठानकोट में आतंकियों को सूचना पहुंचाने तक का आरोप तुम्हारे चैनल पर है! दोगले शर्म नहीं आती बकैती करते हुए?
तुमने अपने भाई पर लगे बलात्कार की खबर को दबाया और बहन पर लगे भ्रष्टाचार के खबर को भी! देखो न तुम्हारी सैलरी भी तो 2जी, चिदंबरम की 5000 करोड़ की हवाला मनी, कॉमनवेल्थ लूट, टैक्स चोरी, मनी लाउंडरिंग जैसे कमाई से ही आई होगी न? खून फिर कहां से साफ होगा! खून की जांच कराओ! कहीं गटर न हो गया हो!
3) रब्बिश- एन डी टी वी इतनी आसानी से नहीं बना है, ये वो भी जानते हैं।
जवाब- यह बात तुमने बिल्कुल सही कहा है। दूरदर्शन पर डाका डालकर एनडीटीवी बना है, यह वो भी और हम भी जानते हैं! प्रणव राय, दूरदर्शन के पूर्व महानिदेशक आर.बसु और डीडी के ही पांच अन्य अधिकारियों की लूट और भ्रष्टाचार से एनडीटीवी का साम्राज्य खड़ा हुआ है, यह इस देश का पूरा मीडिया बिरादरी जानता है!
20 जनवरी 1998 को सीबीआई ने आपराधिक षड़यंत्र रचने और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत तुम्हारे वर्तमान मालिक प्रणव राय सहित दूरदर्शन के कई अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज किया था। दूरदर्शन को लूट कर और उसका टेप चुरा कर एनडीटीवी बना है! इतना बेईमानी और डाका डालकर कोई न्यूज चैनल आज तक खड़ा नहीं हुआ! इसलिए तुम्हारी इस बात से तो हम सब सहमत हैं कि एनडीटीवी इतनी आसानी से नहीं बना है! इसे बनने में बड़े पैमाने पर लूट का खेल रचा गया और दूरदर्शन को बर्बाद किया गया! तुम्हारा ही मालिक प्रणव राय था न जो दूरदर्शन के लिए ‘वर्ल्ड दिस वीक’ बनाता था और यही बनाते-बनाते NDTV चैनल का मालिक हो गया! देश को मूर्ख समझते हो क्या जो एक प्रोडक्शन हाउस के इतने बड़े चैनल बनने के पीछे की वह कहानी को न समझें?
4) रब्बिश- मिटाने की इतनी ही खुशी हैं तो हुजूर किसी दिन कुर्सी पर आमने सामने हो जाइयेगा। हम होंगे, आप होंगे और कैमरा लाइव होगा।
जवाब- कुर्सी पर भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा आमने-सामने ही तो थे, लेकिन जब तुम्हारे एनडीटीवी की पोल खुलने लगी, गाय को बैल बता कर NDTV की कांग्रेस की चंपूगिरी का एजेंडा खुलने लगा तो तुम्हारी एंकर बहन निधि राजदान ने उन्हें अपमानित करके भगा दिया। निष्पक्ष बहस करने की हैसियत नहीं और बात करते हो आमने-सामने कैमरा लाइव की?
दुनिया ने देखा है तुम एनडीटीवी वालों को कि किस तरह से बहस में एजेंडा सेट करते हो, उसे एकतरफा रखते हो और जब विरोधी पक्ष कुछ भी बोलने लगता है तो उसे बोलने से पहले ही चुप करा देते हो! तुम चैनल का पर्दा काला कर, केवल लफ्फाजी में ही माहिर हो! ढंग का पत्रकार होते तो दशकों से एक ही चैनल में पड़े सड़ नहीं रहे होते? ढंग का सवाल-जवाब करना आता तो इतने लंबे पत्रकारिता के करियर में तुम्हारे हाथ भी कोई न कोई भ्रष्टाचार खोलने की रिपोर्ट होती? माफ करना, रिपोर्ट पत्रकारों के हाथ मे होती है, दलालों के हाथ में नहीं! इसीलिए तो न तो तुम्हारे हाथ आज तक एक भी भ्रष्टाचार की रिपोर्ट लगी और न ही पूरे एनडीटीवी के हाथ!
अफसोस, रवीश पांडे, तुम्हारे पास बकैती करने के अलावा कुछ नहीं है! मुंह बिचकाते, कुटिल मुस्कान लिए लफ्फाजी करते यह सब अपने मालिक प्रणय व राधिका राय के लिए लिखते रहो, नौकरी से नहीं भगाएगा! क्योंकि तुम भी जानते हो कि एनडीटीवी के अलावा तुम जैसे लफ्फाज को कोई और नौकरी नहीं देगा! इसलिए प्रणव राय को तेल लगाते रहना तुम्हारी मजबूरी है! आखिर पापी पेट का जो सवाल है! इतना दोगलपन लाते कहां से हो?

Sandeep Deo जी का लेख–

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s