Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

हैफा (इजराइल) हीरो – N S Shekhawat


हैफा (इजराइल) हीरो

मेजर ठाकुर दलपत सिंह शेखावत

1918 के प्रथम विश्व युद्ध में जोधपुर लांसर्स के घुड़सवार शूरवीरों ने जर्मन सेना की मशीनगनों का मुकाबला करते हुए इजरायल के हैफा शहर पर महज एक घंटे में कब्जा कर लिया था…. नेतृत्व कर रहे थे जोधपुर लांसर के मेजर ठाकुर दलपतसिंह शेखावत और कैप्टन अमान सिंह
जोधा। 23 सितंबर 1918 को हुए इस युद्ध में मेजर दलपतसिंह समेत सात हिन्दुस्तानी शहीद हुए।

दिल्ली स्थित तीन मूर्ति स्मारक इसी युद्ध के दौरान शहीद मेजर ठाकुर दलपत सिंह शेखावत शहीदों को समर्पित है।

खास बात यह है कि एक मूर्ति मेजर दलपत सिंह शेखावत की है, इजरायल 2018 में इस विजय
दिवस की शताब्दी मनाएगा। गौर करने लायक तथ्य है कि इस विजय गाथा को इजराइली
बच्चे अपने स्कूली पाठ्यक्रम में पढ़ते हैं।

इनकी याद में आज भी इजराइल और भारतीय सेना हर साल 23 सितम्बर को हैफा दिवस मनाती है।

प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) आटोमन यानी उस्मानी तुर्क सेनाओं ने इजराइल के हैफा शहर पर कब्जा कर लिया , तुर्किश सेना वहां के यहूदियों पर अत्याचार कर रही थी। भारतीय सेना को इसे मुक्त कराने की जिम्मेदारी मिली। जोधपुर लांसर के मेजर दलपत सिंह शेखावत अपनी टुकड़ी के साथ निकल पड़े। युद्ध में जर्मन सेना लगातार उन पर तोप व मशीनगनों से गोले दागती रही। इस दौरान मेजर दलपत सिंह शेखावत शहीद हो गए। जोधपुर लांसर के कैप्टन अमान सिंह जोधा ने कमान संभालते हुए जर्मन सेना का मुकाबला किया, एक घंटे के भीतर हैफा शहर उनके कब्जे में था, जर्मन मशीनगनों पर हौसला पड़ा भारी, उस वक्त जोधपुर रियासत के घुड़सवारों के पास हथियार के नाम पर मात्र बंदूकें थी। वहीं, जर्मन सेना तोपों तथा मशीनगनों से लैस थी। लेकिन राजपुताना के रणबांकुरों के हौसले के आगे दुश्मन पस्त हो गया।

23 सितम्बर 1918 को इजराइल से तुर्की सेना को खदेड़कर मेजर ठाकुर दलपत सिंह शेखावत के बहादुर जवानों ने इजराइल के हैफा शहर को मुक्त कराया।

हैफा के युद्ध में ब्रिटिश सेना ने उन्हें कमान
सौंपी दलपत सिंह शेखावत को मिलिट्री क्रॉस, अमान सिंह को इंडियन आर्डर ऑफ मेरिट मेजर
दलपत सिंह को मिलिट्री क्रॉस जबकि कैप्टन अमान सिंह जोधा को सरदार बहादुर की
उपाधि देते हुए आईओएम (इंडियन आर्डर ऑफ मेरिट) तथा ओ.बी.ई (ऑर्डर ऑफ ब्रिटिश
इंपायर) से सम्मानित किया गया था। 700 सैनिक बंदी बनाए, असलहा कब्जे में किया
23 सितंबर, 1918 को दिन में 2 बजे जोधपुर लांसर व मैसूर लांसर के घुड़सवारों ने हैफा
शहर पर चढ़ाई की और एक घंटे में ही हैफा शहर के दुर्ग पर विजय पताका फहरा दी।
भारतीय शूरवीरों ने जर्मन- तुर्की सेना के 700 सैनिकों को युद्धबंदी बना लिया। इनमें
23 तुर्की तथा 2 जर्मन अफसर भी थे। वहीं, 17 तोपें, 11 मशीनगन व हजारों की संख्या
में जिंदा कारतूस भी जब्त किए गए।

जय राजपुताना…..

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