Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

दुरजन जण बबूल-वन, जे सींचै अभियेण। तोइस कांटा बींधणा, जाती तणै गुणेण।।


दुरजन जण बबूल-वन, जे सींचै अभियेण।
तोइस कांटा बींधणा, जाती तणै गुणेण।।

अर्थ- दुर्जन तो बबलू के वन समान होते हैं यदि उसे अमृत से भी सींचा जाए, तो भी उसके तो बींधने वाले कांटे ही होंगे क्योंकि यह उनका जातीय गुण है।
एक शिकारी ने सोचा कि क्यों न तजकीब भिड़ा कर एक जीवित सिंह पकड़ा जाए और एक पिंजरे में बंद करके रखा जाए, जिससे कि उसे देखने के लिए आस पास के और दूर दूर के लोगों की भीड़ अपने घर में बनी रहे। शिकारी ने युक्ति विचारी और उसके अनुसार खूब मोटी मोटी लोहे की छडें चारों ओर लगाकर एक बड़ा सा पिंजरा बनवाया। पिंजरे का दरवाजा इतनी कारीगरी से बनाया गया था कि उसमें घुसते ही प्राणी अपने आप बंद हो जाए। पिंजरा कोई बाहर से ही खोले तो खुले। पिंजरे में एक जीवित बैल बांधकर तथा उसका दरवाजा खुला छोड़कर उस पिंजरे को ऐसे स्थान पर रख दिया, जहां से होकर अक्सर शेर शेरनियां पानी पीने के लिए झरने पर जाया करते थे। शिकारी तो पिंजरा रखकर अपने घर चला गया और वह बैल मस्ती से हरी भरी घास चरने लगा, जो कि पर्याप्त मात्रा में उसके सामने डाली हुई थी। उसे पता नहीं था कि मौत उसे किसी भी क्षण आ दबोचने वाली है। थोडी ही रात बीती होगी कि झरने पर पानी पीने के लिए जाती हुई एक शेरनी उधर से निकली। शेरनी की नजर बैल पर पडी तो उसके मुंह में पानी भर आया। वह दौड़ कर पिंजरे में घुसी और उसने बैल पर झपटटा मारा। बैल को तो वह आनन फानन में चट गई, लेकिन पिंजरे का दरवाजा बंद हो चुका था। अब शेरनी के निकलने का कोई मार्ग नहीं रहा था। वह तो पिंजरे में इधर से उधर और उधर से इधर दहाड़ मारती और सिर पटकती फिरने लगी। सारी रात बीत गई, शेरनी सिर पटकते पटकते लहुलुहान हो गई लेकिन दरवाजा तो नहीं खुला। वह थक कर और निराश होकर बैठ गई कि इतने में सवेरा हुआ। सवेरे एक ब्राह्मण उस रास्ते से गुजर रहा था। शेरनी ने गिड़गिड़ाकर उस ब्राह्मण से कहा कि हे ब्राह्मण देवता, अगर तू य पिंजरा खोलकर मुझे बाहर निकाल दे तो तेरा अहसान जन्म जन्मान्तर नहीं भूलूं। ब्राह्मण ने कहा कि तू हिंसक जीव है, जीवित प्राणी देखते ही तेरी तो जीभ लपलपाती है। मैं दरवाजा खोलूं और तू मुझे ही गटक जाए तो क्या भरोसा। शेरनी ने कहा कि भोले ब्राह्मण, तुम भी कैसी नादानी की बातें करती हो? तुम जो मेरा इतना उपकार करोगे मेरे प्राणों की रक्षा करोगे,उसी को मैं खा जाऊं। भला यह भी कोई सोचने की बात है? ब्राह्मण को दया आ गई और वह दरवाजा खोलने वाला ही था कि उसे नीति के वचन याद आ गए और वह ठिठक कर रूक गया।
ब्राह्मण को रूकते देखकर शेरनी ने कहा कि ब्राह्मण देवता, तू जरा भी मत डर। नि: शंक होकर पिंजरा खोल दे। एक क्षण के लिए भी मत सोच कि मैं तेरा अपकार या अहित करूंगी। तुझे वचन देती हूं, मेरे से बनेगा सो तेरा प्रत्युपकार ही करूं गी। अपने दिये हुए वचन का मैं पालन करूंगी। ब्राह्मण पढा लिखा तो था, लेकिन था भोला। अत चिकनी चुपड़ी बातों द्वारा शेरनी ने उसे विश्वास दिला दिया कि उसने पिंजरा खोल दिया। पिंजरा खुलने की देर थी शेरनी तो अपना दिया हुआ वचन भूल गई और ब्राह्मण से बोली कि मैं तुझे खाऊंगी। अब गिड़गिड़ाने की बारी ब्राह्मण की थी। वह बहुत रोया गिड़गिड़ाया शेरनी को अपने द्वारा किये गए उपकार की बात याद दिराई, शेरनी द्वारा किये हुए वायदे की याद दिराई, लेकिन चिकने घड़े पर पानी का असर हो तो शेरनी के मन पर ब्राह्मण के वचनों का असर हो। आखिर ब्राह्मण ने यह कहा कि तू तेरे जचे जिस जीव से पंचायती करा ले, कोई भी कहे कि तुम्हें मुझको खाना चाहिए तो तुम ऐसा कर सकती हो। शेरनी ने सोचा कि इसमें अपना कोई कर्ज नहीं है, क्योंकि कोई भी जीव मेरे खिलाफ फैसला देने का साहस नहीं कर सकेगा। शेरनी ने ब्राह्मण की यह बात मान ली और दोनों ने मिलकर एक लोमड़ी को पंच बनाया। भाग्य की बात कि इतने में ही उधर से गुजरती हुई एक लोमड़ी दीख पडी। ब्राह्मण ने उसे पुकारा। लोमडी डरते डरते वहां आई तो शेरनी और ब्राह्मण ने सारी बात बताई। लोमडी चतुर तो थी ही, साथ ही चालाक भी। उसने भोली बनते हुए कहा कि देखो, यों तो मैं समझूंगी नहीं, क्योंकि यह बात मेरी बुद्धि में ही नहीं आती कि शेरनी जैसा जीव भी कभी पिंजरें में बंद हो सकता है। अतः पहले यथास्थिति करो। शेरनी कहां थी, ब्राह्मण कहां था, फिर मैं पूछूं उस उस तरह बताते जाओ। मैं कभी तुरंत तुहारे झगड़े का फैसला किये देती हूं। शेरनी पिंजरे में घुसी और बोली कि में यहां थी कि इतने में पिंजरे का दरवाजा फिर बंद हो गया। तब लोमडी ने कहा कि यहां थी तो यहीं रह। और ब्राह्मण से बोली कि तू अपने घर चला जा। न्याय हो चुका। इस शेरनी को पिंजरे में भूखी-प्यासी मरने दे। भविष्य में अनहोनी बात पर कभी विश्वास मत करना। शेर शेरनी जैसा हिंसक जीव कोई विश्वास करने लायक होता है क्या? शेरनी बहुत चिल्लाई, लोमडी को बहुत भला बुरा कहा, लेकिन अब क्या होना था।

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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