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संस्कृत वाक्य

मेरे मित्र ने पुस्तक पढ़ी I मम मित्रं पुस्तकं अपठत् I
वे लोग घर पर क्या करेंगे I ते गृहे किम करिष्यन्ति I
यह गाय का दूध पीता है I सः गोदुग्धम पिवति I
हम लोग विद्यालय जाते है I वयं विद्यालयं गच्छाम: I
तुम शीघ्र घर जाओ I त्वं शीघ्रं गृहम् गच्छ I
हमें मित्रों की सहायता करनी चाहिये I वयं मित्राणां सहायतां कुर्याम I
विवेक आज घर जायेगा I विवेकः अद्य गृहं गमिष्यामि I
सदाचार से विश्वास बढता है I सदाचारेण विश्वासं वर्धते I
वह क्यों लज्जित होता है ? सः किमर्थम् लज्जते ?
हम दोनों ने आज चलचित्र देखा I आवां अद्य चलचित्रम् अपश्याव I
हम दोनों कक्षा में अपना पाठ पढ़ेंगे | आवां कक्षायाम्‌ स्व पाठम पठिष्याव: I
वह घर गई I सा गृहम्‌ अगच्छ्त्‌ I
सन्तोष उत्तम सुख है I संतोषः उत्तमं सुख: अस्ति I
पेड़ से पत्ते गिरते है I वृक्षात्‌ पत्राणि पतन्ति I
मै वाराणसी जाऊंगा I अहं वाराणासीं गमिष्यामि I
मुझे घर जाना चाहिये I अहं गृहं गच्छेयम्‌ I
यह राम की किताब है I इदं रामस्य पुस्तकम्‌ अस्ति I
हम सब पढ़ते हैं I वयं पठामः I
सभी छात्र पत्र लिखेंगे I सर्वे छात्राः पत्रं लिखिष्यन्ति I
मै विद्यालय जाऊंगा I अहं विद्यालयं गमिष्यामि I
प्रयाग में गंगा -यमुना का संगम है | प्रयागे गंगायमुनयो: संगम: अस्ति |
हम सब भारत के नागरिक हैं | वयं भारतस्य नागरिका: सन्ति |
वाराणसी गंगा के पावन तट पर स्थित है | वाराणसी गंगाया: पावनतटे स्थित: अस्ति |
वह गया | स: आगच्छ्त् |
वह किसका घोड़ा है ? स: कस्य अश्व: अस्ति ?
तुम पुस्तक पढ़ो | त्वं पुस्तकं पठ |
हम सब भारत के नागरिक हैं | वयं भारतस्य नागरिका: सन्ति |
देशभक्त निर्भीक होते हैं | देशभक्ता: निर्भीका: भवन्ति |
सिकन्दर कौन था ? अलक्षेन्द्र: क: आसीत् ?
राम स्वभाव से दयालु हैं | राम: स्वभावेन दयालु: अस्ति |
वृक्ष से फल गिरते हैं | वृक्षात् फलानि पतन्ति |
शिष्य ने गुरु से प्रश्न किया | शिष्य: गुरुं प्रश्नम् अपृच्छ्त् |
मैं प्रतिदिन स्नान करता हूँ | अहं प्रतिदिनम् स्नानं कुर्यामि |
मैं कल दिल्ली जाऊँगा | अहं श्व: दिल्लीनगरं गमिष्यामि |
प्रयाग में गंगा-यमुना का संगम है | प्रयागे गंगायमुनयो: संगम: अस्ति |
वाराणसी की पत्थर की मूर्तियाँ प्रसिद्ध हैं | वाराणस्या: प्रस्तरमूर्त्तय: प्रसिद्धा: |
अगणित पर्यटक दूर देशो से वाराणसी आते हैं | अगणिता: पर्यटका: सुदूरेभ्य: देशेभ्य: वाराणसी नगरिम् आगच्छन्ति |
यह नगरी विविध कलाओ के लिए प्रसिद्ध हैं | इयं नगरी विविधानां कलानां कृते प्रसिद्धा अस्ति |
वे यहा नि:शुल्क विद्या ग्रहण करते हैं | ते अत्र नि:शुल्कं विद्यां गृह्णन्ति |
वाराणसी में मरना मंगलमय होता है | वाराणस्यां मरणं मंगलमयं भवति |
सूर्य उदित होगा और कमल खिलेंगे | सूर्य: उदेष्यति कमलानि च हसिष्यन्ति |
रात बीतेगी और सवेरा होगा | रात्रि: गमिष्यति, भविष्यति सुप्रभातम् |
कुँआ सोचता है कि हैं अत्यन्त नीच हूँ | कूप: चिन्तयति नितरां नीचोsस्मीति |
भिक्षुक प्रत्येक व्यक्ति के सामने दीन वचन मत कहो | भिक्षुक! प्रत्येकं प्रति दिन वच: न वद्तु |
हंस नीर- क्षीर विवेक में प्रख्यात हैं | हंस: नीर-क्षीर विवेक प्रसिद्ध अस्ति |
सत्य से आत्मशक्ति बढ़ती है | सत्येन आत्मशक्ति: वर्धते |
अपवित्रता से दरिद्रता बढ़ती है | अशौचेन दारिद्रयं वर्धते|
अभ्यास से निपुणता बढ़ती है| अभ्यासेन निपुणता वर्धते |
उदारता से अधिकतर बढ़ते है | औदार्येण प्रभुत्वं वर्धते |
उपेक्षा से शत्रुता बढ़ती है | उपेक्षया शत्रुता वर्धते|
मानव जीवन को संस्कारित करना ही संस्कृति है | मानव जीवनस्य संस्करणाम् एव संस्कृति: अस्ति
भारतीय संस्कृति सर्वश्रेष्ठ है | भारतीया: संस्कृति: सर्वश्रेष्ठ: अस्ति |
सभी निरोग रहें और कल्याण प्राप्त करें | सर्वे संतु निरामया: सर्वे भद्राणि पश्यंतु च |
काम करके ही फल मिलता है | कर्म कृत्वा एव फलं प्राप्यति |
हमारे पूर्वज धन्य थे | अस्माकं पूर्वजा: धन्या: आसन्|
हम सब एक ही संस्कृति के उपासक हैं| वयं सर्वेsपि एकस्या: संस्कृते: समुपासका: सन्ति |
जन्म भूमि स्वर्ग से भी बड़ी है | जन्मभूमि स्वर्गादपि गरीयसी|
विदेश में धन मित्र होता है| विदेशेषु धनं मित्रं भवति |
विद्या सब धनों में प्रधान है | विद्या सर्व धनं प्रधानम् |
मनुष्य को निर्लोभी होना चाहिये | मनुष्य: लोभहीन: भवेत्|
आज मेरे विद्यालय मे उत्सव होगा| अद्य मम् विद्यालये उत्सव: भविष्यति |
ताजमहल यमुना किनारे पर स्थित है | ताजमहल: यमुना तटे स्थित: अस्ति |
हमे नित्य भ्रमण करना चाहिये | वयं नित्यं भ्रमेम |
गाय का दूध गुणकारी होता है | धेनो: दुग्धं गुणकारी भवति |
जंगल मे मोर नाच रहे हैं | वने मयूरा: नृत्यन्ति |
किसी के साथ बुरा कार्य मत करो | केनापि सह दुष्कृतं मा कुरु|
सच और मीठा बोलो | सत्यं मधुरं च वद |
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Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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