Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

औरंगज़ेब


 

कभी कभी कुछ शेखुलर धूर्त औरंगज़ेब को जिन्दा पीर घोषित करते भी पाए जाते हैं | ऐसे मौकों के लिए दिल्ली का प्रसिद्ध कालकाजी मंदिर याद कीजिये | चूँकि ये दिल्ली में ही है और प्रसिद्ध बहाई धर्म के स्थल लोटस टेम्पल के ठीक पीछे है इसलिए कई लोगों ने इसे देखा भी होगा |

इसे तोड़ने का आदेश औरंगज़ेब ने 3 सितम्बर 1667 को दिया था | काम हो गया या नहीं इसकी जांच के लिए उसने फिर 12 सितम्बर 1667 को फरमान जारी किया गया था | मंदिर को तोड़ने का हुक्म काज़ी अब्दुल मुकर्रम की शिकायत पर दिया गया था जिनका कहना था की मूर्ती पूजा के लिए हिन्दुओं का इकठ्ठा होना ‘बिद्दत’ यानि इस्लामिक उसूलों के खिलाफ एक बहुत बड़ा गुनाह है |

शेखुलर मक्कारी भरे दुष्प्रचार जैस मंदिर में कोई खजाना नहीं था | फिरमानों से स्पष्ट है कि इसे तोड़ने वाले सय्यद फौलाद खान को कोई पैसे ना मंदिर से मिले ना सरकार से | ये सीधा इस्लामिक ‘बिद्दत’ के खिलाफ हुक्म था |

“शरियत की पनाह काज़ी अब्दुल मुकर्रम ने ये अर्ज़ी भेजते हुए बताया है कि हिन्दू भारी संख्या में कालका मंदिर के इलाके में बरहपुले में इकठ्ठा होते हैं | ऐसा ही ख्वाजा मुइनुद्दीन, शाह मदार और सलार मसूद गाजी के मकबरे पर भी होता है | ये ‘बिद्दत’ है और इसपर तुरंत ध्यान दिए जाने की जरुरत है |”

इसके जवाब में शहंशाह ने सैय्यद फौलाद खान को हुक्म दिया है की सौ बेलदारों को भेजकर फ़ौरन कालका मंदिर को और उसके आस पास के मंदिरों को तोड़ दिया जाए | ये इलाका खान की फौजदारी में है, इसलिए सैय्यद फौलाद खान को फ़ौरन वहां पहुंचकर बिना रुके इस काम को अंजाम देना है |

आज जो आप कालकाजी मंदिर देखते हैं वो औरंगज़ेब की मौत के तुरंत बाद दोबारा बनवाया गया था ( 1707 A.D. में) | इसे पुराने काली मंदिर के अवशेषों पर भी दोबारा बनवाया गया था | सन 1764 से इस मंदिर में कई बार पुनःनिर्माण का काम हुआ है | लेकिन 18वीं शताब्दी वाली नींव वही है | मराठा दस्तावेजों में इसके दोबारा और बेहतर बनाने का उल्लेख सन 1738 से पाया जाता है | ये स्थल कितना पुराना है इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि तीसरी सदी में अशोक के राज्य में भी यहाँ मंदिर था |

बाकी ‘जिन्दा पीर’ के नाम से कुख्यात औरंगज़ेब के समर्थकों से कभी उसके मंदिर बनवाने के सबूत मांग के देखिये | सुनी सुनाई बातों के बदले फरमानों और दस्तावेज़ों पर ज्यादा यकीन करना चाहिए |

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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