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29 साल से जैसलमेर के इस शख्स के सिर की हो रही तलाश, हाथ से उठा लेता था ऊंट!

यूं तो राजस्थान के हर इलाके और शहरों में लाखों किस्से कहानियां भरे पड़े हैं, लेकिन यहां जैसलमेर के रेगिस्तान में एक ऐसी कहानी दफन है, जिसे लोग अब भूल चले हैं। इसी खूबसूरत शहर और रेगिस्तान में मौजूद है सोनार किला, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से लाखों टूरिस्ट आते हैं।

इसी सोनार किले के आस-पास के रेगिस्तान में मौजूद रेत के टीलों में एक कहानी छिपी हुई है, जिस पर वक्त की गर्त जम चुकी है और उस कहानी का राज़ आज भी एक राज़ ही बना हुआ है। इस कहानी का किरदार 60 साल का करणाराम है, जिसके इर्द-गर्द इस पूरी कहानी का ताना-बना बुना है। करणाराम के नाम दुनिया की दूसरी सबसे लंबी मूंछे रखने का गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। वही जैसलमेर का मशहूर नड़ वादक था। करणाराम भील 80 के दशक में सोनार किले की शान हुआ करता था।

सोनार किले के पास बंज़र और रेतीली ज़मीन पर करणाराम की कब्र मौजूद है। लेकिन ये क़ब्र किसी आम कब्र की तरह नहीं है। बस कुछ पत्थरों से ढककर करणाराम को उसके बेटों ने इसी जगह दफना दिया था। हिंदू रीति-रिवाज़ के हिसाब से करणाराम का दाह संस्कार होना चाहिए था, लेकिन करणाराम के परिवार ने उसकी मौत के 28 साल गुज़रने के बाद भी आज तक उसका अंतिम संस्कार नहीं किया है। बस यही वो राज़ है जो करणाराम की पूरी कहानी को और उसकी मौत के राज़ को और भी गहरा देता है।

दरअसल करणाराम भील और सोनार किला एक दूसरे से जुड़े हैं। यही सोनार किला 28 साल पहले एक ख़ौफ़नाक, दर्दनाक और एक सनसनीखेज़ बदले का गवाह बना था। 2 जनवरी 1988 को करणाराम भील अपनी ऊंटगाड़ी पर पशुओं के लिए चारा लेने के लिए घर से निकला था। चारा लेने के बाद वो सोनार किले के पास से गुज़र रहा था। तभी अचानक कुछ लोगों ने उस पर हमला कर दिया। चूंकि हमला पीछे से हुआ था, इसलिए करणाराम संभल भी नहीं पाया और मौका देख कर करणाराम के दुश्मनों ने उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। करणाराम के दुश्मनों ने उसकी हत्या करने के बाद जो किया वो और भी हैरान कर देने वाला है। करणाराम के क़त्ल के बाद उसके क़ातिल उसका कटा सिर अपने साथ ले गए, लेकिन उसके धड़ को उसकी ऊंटगाड़ी पर रखकर उसे घर की तरफ रवाना कर दिया।

सिर कट जाने के बाद करणाराम का बेजान जिस्म ऊंट गाड़ी पर उसके एयरफोर्स कोलोनी वाले घर तक पहुंचा। जब घर के पास ऊंटगाड़ी रुकी तो सभी हैरान रह गए। करणाराम की मौत हो चुकी थी, लिहाज़ा उसके परिवार ने उसके सिर की तलाश शुरू कर दी। जब करणामराम के परिवार ने पता करना शुरू किया तो उन्हें पता चला कि कुछ लोगों ने सोनार किले के पास करणाराम की हत्या कर दी थी। इसके बाद करणाराम के परिवार ने किले की बगल की झाड़ियों में इस उम्मीद के साथ करणाराम के सिर को तलाशना शुरू किया कि सिर मिलने के बाद वो अपने रीति-रिवाज़ों से उसका अंतिम संस्कार कर देंगे, लेकिन आज 29 साल बीतने के बाद भी करणाराम के परिवार को उसके सिर की ही तलाश है, ताकि वो करणाराम का अंतिम संस्कार कर सकें।

करणाराम के बेटे बोदूराम ने बताया कि दुनिया कहती है कि तुम्हारे पिता तो बिना सिर के ही दफन है। पुलिस से कह रहे हैं कि सिर ला दो। करणाराम के परिवार का मानना है कि करणाराम के क़ातिल उसका सिर काट कर सरहद पार ले गए थे, लेकिन 28 साल बीत जाने के बाद भी वो इस आस में करणाराम की क़ब्र के आस-पास मौजूद झाड़ियों में करणाराम के सिर की तलाश करते रहते हैं। करणाराम के एक और बेटे लखूराम ने कहा कि उनकी आत्मा भटकती है। हमें सिर ला दो, पाकिस्तान से दिलवा दो, नहीं तो आत्मा भटकती रहेगी।

सूत्रों के मुताबिक करणाराम की हत्या के बाद इंटिलेंस एजेंसिय़ों ने भी ये रिपोर्ट दी थी कि करणाराम का सिर काटने के बाद क़ातिल उसके सिर को धोरों के रास्ते पाकिस्तान ले गए थे, लेकिन एक ही रात में रेत के टीलों के एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट होने के चलते करणाराम का परिवार इस उम्मीद में धोरों के बीच खाली जगह पर सिर की खोज करता है कि हो सकता है कि क़ातिलों ने करणाराम के सिर को इन्हीं टीलों के बीच कहीं फेंक दिया हो। लेकिन करणाराम को जानने वाले लोगों का कहना है कि करणाराम जैसे ताकतवर इंसान को अकेले मारना आसान काम नहीं था। उसे साज़िश करके मारा गया था।

उसके बारे में ये कहा जाता था कि वो ऊंट को भी उठाने की ताकत रखता था। इतना ही नहीं जो शख्स अपने नड़ वादक के लिए दुनियाभर में मशहूर था, आखिर कोई क्यूं उस शख्स का क़त्ल करेगा। करणाराम पैदाइशी कलाकार नहीं था, बल्कि वो एक डकैत था। मीलों फैले रेगिस्तान में उसके नाम का खौफ था। क़ातिलों ने करणाराम का क़त्ल करने के बाद उसका सिर सिर्फ इसलिए कलम किया था कि वो उससे बदला ले सकें। करणाराम भील की छवि रेगिस्तान मे गब्बर सिंह जैसी थी। उसका चेहरा ऐसा था कि बच्चे डर जाते थे। गले में जहरीले सांप को लपेट लेता था। उस दौरान पाकिस्तान के ब्लूचिस्तान औऱ अफगानिस्तान की महिलाएं बड़े शौक से नड़ वादन सुना करती थीं। डकैत करणाराम अफगानिस्तान की लाली नाम की लड़की को दिल दे बैठा। लाली को नड़ वादन सुनाने और उसे अपना बनाने के लिए के लिए वो नड़ वादक बन गया।

साल 1965 में करणाराम ने जैसलमेर और बाड़मेर के बीच एक छोटे से भू गांव में एक जमीन खरीदी, लेकिन जमीन के मालिकाना हक को लेकर करणाराम और इलियास के दरमियान विवाद शुरू हो गया। एक दिन गुस्से में करणाराम ने इलियास को उसके बेटे के सामने ही गोली मार दी, इलियास की मौत हो गई थी, लेकिन इलियास के बेटे ने करणाराम से बदला लेने की कसम खा ली। जिसके बाद करणाराम को गिरफ्तार कर लिया गया और उसे उम्रक़ैद की सजा सुनाई गई थी। लोगों के मुताबिक जेल में अपनी सज़ा काटने के दौरान करणाराम ने जैसलमेर की जेल को अपने नाखूनों से फाड़ दिया था और वहां से फरार हो गया था। जेल से भागने के कुछ ही दिनों बाद करणाराम को दोबारा पकड़ लिया गया, लेकिन मूंछ और नड़वादन की कला के चलते उसे तब पैरौल मिल जाता था, जब भी किसी वीआईपी के सम्मान में लोकसंगीत का कार्यक्रम होता था। उसी दौरान तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह जैसलमेर आए थे।

पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह जब जैसलमेर आए तो करणाराम पैरोल पर बाहर था। उसे नड़वादन के लिए बुलाया गया। कहते हैं कि उसने नड़वादन से जेलसिंह को मंत्रमुग्ध कर दिया था और उसका सजा कम हो गई। पुलिस 28 साल बाद भी ये पता नहीं लगा सकी है कि करणाराम के हत्यारे पाकिस्तान में हैं या हिंदुस्तान में और उसका कटा सिर उन्होंने कहां छिपाया है। अलबत्ता 28 सालों को दौरान इतना ज़रूर हुआ कि पुलिस ने इस केस की फ़ाइल बंद कर दी। यानि करणाराम के कटे सिर का राज़ 28 साल बीत जाने के बाद आज भी एक राज़ ही बना हुआ है। करणाराम राजस्थान में कितना मशहूर है, इस बात का अंदाज़ आप इसी बात से लगा सकते हैं कि करणाराम की मौत के बाद उसकी याद में जैसलमेर में हर साल एक मूंछ प्रतियोगिता आयोजित करवाई जाती है।

मनीश कुमार सोलंकी

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​Arundhati Roy’s 


Arundhati Roy’s mother was a Keralite Christian . Her name was Mary.

She was working in Metal Box , Calcutta as Secretary and met Mr. Roy, a Bengali Hindu who was also with Metal Box, Calcutta. They married and Arundhati was born to them.
Mr. Roy’s elder brother, Mr. P .L Roy, is the father of Prannoy  Roy of NDTV. 

P L Roy too married a christian woman who was wicked enough to make him convert . Or should we say P L Roy was fool enough not to see her hidden agenda. 

That’s how Suzzanna Arundhati Roy  and Prannoy James Roy were born and are first cousins. 
It is interesting to note how both Prannoy (James) Roy and  (Suzzanna) Arundhati Roy have kept their christian names hidden from public and work on a Anti Hindu propaganda and agenda together under their alias Hindu names to deceive Hindus !
Via Sanjana Chopra