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नक्सलवाद

इसे जरूर पढ़े :- मेरा निवेदन
Writer :- Prashant Dave (7597954747)

नक्सलवाद :-50 साल:- भारत का बौद्धिक विनाश करने का असफल प्रयास,25 मई 1967 को हुई थी शुरूआत
दिनांक :-24/05/2017

राजस्थान पत्रिका के आज के अंश में नक्सलवाद को जड़ से जानने का हर किसी को मौका मिल सकता है। भारत में रहकर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिंसक विरोध ही नक्सलवाद (communalism) है। लेकिन इन सब कुकृत्यों को करने के लिए आम नागरिक की मानसिकता में किस तरह नकारात्मक परिवर्तन लाया गया होगा ये चिंता का विषय है। आज से ठीक 50 साल पहले जब ये चिंगारी उठी तब ये इतना भयंकर विनाश लाएगी ऐसा किसी ने नहीं सोचा था। नक्सलवाद को पैदा करने वाले दल का श्रेय Communist Party Of India (भारतीय वाम दल) को जाता है। अर्थात यह कहना उचित रहेगा कि भारत में नक्सली, भारतीय वाम दल (CPI) के कार्यकर्ता ही हैं। पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के पास स्थित कस्बा “नक्सलबाड़ी” जहाँ नक्सलवाद शुरू हुआ तो उसका मकसद दमनकारी विचारधारा का विरोध करना था लेकिन कब ये मकसद स्वयं दमनकारी गतिविधियों का जनक हो जाएगा ये कालखंड की समझ से परे था। 24 मई 1967 को प्रशासन के दमनकारी रवैये के विरोध में झड़ूजोत ग्राम में गुस्साए ग्रामीणों ने पुलिस निरीक्षक सोनम वाग्दी की हत्या कर दी। जवाबी कार्यवाही में तथाकथित तौर पर पुलिस ने उस क्षेत्र के 11 ग्रामीणों जिनमें 8 महिलाएँ व 2 बच्चे थे को मौत के घाट उतार दिया, बस इसी चिंगारी ने विनाशकारी आग का रूप ले लिया। भारतीय वाम दल (CPI) के नेता चारू मजूमदार व कानू सान्याल ने चीनी वामपंथी माओत्से तुंग से प्रभावित होकर विद्रोह का अभियान छेड़ दिया। इस अभियान का प्रतीक लाल रंग के झंडे को बनाया गया,संदेश दिया गया कि दमनकारियों का रक्त बहा दो लेकिन इस दमन के विरोध की विचारधारा को सियासी रंग लेने में केवल 4 वर्ष लगे और 4 वर्ष के भीतर ही नक्सलवाद की इस विचारधारा में आंतरिक विद्रोह हो गया। और इस चिंगारी से कई चिंगारियां पैदा हुई जिन्होंने लक्ष्य को पूर्णतः तोड़कर दमन का दामन थाम लिया। भारत में इस विचारधारा के घिनौने रूप से 10 राज्य सीधे सीधे गंभीर रूप से प्रभावित हो गए। पं.बंगाल,छत्तीसगढ़,आंध्रप्रदेश,बिहार,झारखंड प्रमुखता से प्रभावित हुए। सबसे ज्यादा हमले नक्सलीयों द्वारा छत्तीसगढ़ में किए गए। 25 मई 2013 को नक्सलियों ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र सुकमा समेत 27 कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को मार डाला। 11 मई 2014 को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में 7 जवानों को लाल बंदूक का निशाना बनाया गया। 30 मार्च 2016 को दंतेवाडा़ में नक्सलियों ने CRPF के 7 जवानों की हत्या की। इसी तरह हाल ही में नक्सलीयों ने 24 अप्रैल 2017 को 25 CRPF जवानों को मार दिया। इस तरह इस गंदी अमानवीय विचारधारा ने ” 802″ पुलिस व CRPF तथा जवानों को मारा साथ ही उनके बीच ही रहने वाले “2112” आम नागरिकों को भी मार दिया ये आँकड़ा 2010 से 2015 के बीच का है मतलब 50 साल के काले इतिहास में सिर्फ 5 वर्ष का आँकड़ा तो आप समझिए कि इन नक्सलीयों ने 50 वर्ष में कैसा रक्त रंजित बवंडर मचाया होगा। तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद इन्होंने कई जवानों के सीनों को छलनी कर उनकी पत्नीयों को विधवा कर दिया। विश्व में, भारत में पनपे इस आंतरिक विद्रोह को आतंकवाद तक कहा जाने लगा। भारत की शांतिपूर्ण छवि को खराब करने में नक्सलवाद ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
-:सरकार द्वारा इस Movement को रोकने के लिए किए गए योजनाबद्ध प्रयास :-
नक्सलवाद के इन 50 वर्षों में भारत में 12 लोकतांत्रिक सरकारें आई। इस विद्रोह को रोकने के कई प्रयास किए गए लेकिन नक्सलियों का ये विद्रोह सरकारी प्रयासों की विफलता के कारण बदस्तूर जारी है। सरकार की सोच रही कि प्रभावित इलाकों में जितना विकास करवाया जाएगा नक्सलवाद में उतनी ही कमी आएगी लेकिन सरकार के इस integrated action plan for development को नक्सली वामपंथी नेताओं ने नाकारा (unuseful) करार दे दिया। नक्सल सड़कों की सुलभता, शैक्षिक गुणवत्ता व मोबाइल नेटवर्क से विकसित नहीं होना चाहता तभी तो ये चिंगारी शिक्षा के क्षेत्र में भी युवाओं की मानसिकता को खराब करने में पीछे नहीं रही जिसका उदाहरण JNU दिल्ली,HCU हैदराबाद जैसे विश्वविद्यालयों में हुए देश विरोधी प्रदर्शनों ने दिया।
नक्सलियों की नाजायज माँगें :-
हर नक्सली को नक्सलवाद छोड़ने के बदले कम से कम 1.5 लाख रूपये, तीन वर्ष तक 2000 रूपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता, घर में एक सरकारी नौकरी व जमीन दी जाए। नक्सली को दूसरे कैदियों की तरह बंद जेल नहीं बल्कि खुली जेल में रखी जाए,ऐसी निरर्थक माँगे हैं। झारखंड हाइकोर्ट ने नक्सली कुंदन पाहन के समर्पण पर सरकार द्वारा दिए गए 15 लाख रूपयों पर कड़ा एतराज जताया व कहा कि इतने पैसे अगर स्वतंत्रता सैनानी या शहीद परिवारों को दिए जाते तो देश तरक्की करता।
नक्सलवाद समाप्त हो किंतु किस तरह जबकि ना तो ये (नक्सली) विकास चाहते हैं ना शुद्धिकरण ये सरकार के लिए प्रश्नवाचक चिन्ह है बस मैं एक बात से सहमत हूँ कि यदि मानसिक तौर पर भारत की जनता द्वारा नक्सलियों का विरोध अर्थात Mental boycott किया जाएगा तभी सफलता प्राप्त हो पाएगी। अंत तो सुनिश्चित है लेकिन जल्द हो इसमें हमारी मानसिक भागीदारी अपेक्षित व निहीत है।
लेखक :- प्रशांत दवे(महानगर मंत्री, ABVP, Ajmer)
मो. नं./whatsapp :- 7597954747
फेसबुक आईडी :- प्रशांत दवे
ट्विटर :- @prashantdavej
ईमेल आईडी :- daveprashant54@gmail.com

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