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आरक्षण और शोषण – Sanjay Dwivedy


आरक्षण और शोषण
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शिक्षा और सरकारी रोजगार के क्षेत्र में सवर्णों के लिए शून्य प्रतिशत सीटें हैं ,चौकिये नहीं , यह सच्चाई है। इस देश में किसी भी सरकारी महकमें में सवर्ण को तभी तक प्रवेश मिल रहा हैं जब तक वो सबसे ज्यादा नंबर ला रहे हैं । जब कभी भी कोई आरक्षित श्रेणी का व्यक्ति सवर्ण के बराबर या सवर्ण से ज्यादा नंबर प्राप्त करता हैं तो वह सवर्ण/सामान्य श्रेणी के कोटे से चुना जाता हैं न की आरक्षित श्रेणी से । मतलब ये की सामान्य वर्ग के लिए इस देश में कोई सीट नहीं है।

मान लीजिये किसी नौकरी के लिए 100 सीटें निकली । भारत के आरक्षण के हिसाब से 50 सीटें आरक्षित होगी और 50 सामान्य कोटे की होगी । अब परीक्षा के बाद मान लीजिये सामान्य वर्ग का कटऑफ 90 नंबर , OBC का कटऑफ 70 नंबर , SC का 40 नंबर और ST का 30 नंबर बनता हैं ।

असली शोषण का खेल अब शुरू होता है । 50 सीटों पर आरक्षित वर्ग के वे लोग चयनित होंगे जिनके नंबर 90 से कम होंगे । बाकी बचे 50 सीटों पर उन लोगो को लिया जायेगा जिनके नंबर 90 या ज्यादा होंगे लेकिन वरीयता पहले आरक्षित वर्ग के लोगो को मिलेगी । मतलब अगर आरक्षित श्रेणी के 50 लोग 90 या उससे ज्यादा नंबर लाते हैं तो सामान्य वर्ग से किसी का चयन नहीं होगा ।

सामान्य वर्ग को वही मिलता हैं जिसे आरक्षित वर्ग छोड़ देता हैं । कानून 50% बस कहने का हैं आज 80 से 90 % तक सीटें आरक्षित लोगो को मिल रही हैं ।

इस देश में सवर्णों को दोयम दर्जे की भी नागरिकता नहीं हैं । इस देश की कानून और सरकार सबसे ज्यादा जुल्म और शोषण सवर्ण का कर रही हैं । अगर विश्वास न हो तो किसी भी परीक्षा का परिणाम जातिगत आधार पर RTI डाल कर निकलवा ले ।

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