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सिकंदर भी हार गया था नागा साधुओं से!

सिकंदर भी हार गया था नागा साधुओं से!

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करने योग्य कहानियों से भरा पड़ा है. एक खूबसूरत तिलिस्म है जो आपको अपनी ओर खींचता है और उसमें आप खो जाते हैं. एक सिरा पकड़िए और उसके सहारे अतीत के सुहाने सफर पर निकल जाइए. इतिहास के मोतियों से वर्तमान की माला सजा सकते हैं आप.
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ये किस्सा है नागा साधुओं का. सिकंदर महान से उनकी मुलाकात का. यूनानी राजा सिकंदर पूरी दुनिया को जीतने के इरादे से अपनी सेना लेकर निकला. तुर्की, ईरान को जीतकर आगे बढ़ते हुए वह 326 ईसा पूर्व में भारत आ पहुंचा. सिकंदर ने प्रण किया था कि वह दुनिया के आखिरी छोर तक अपना राज कायम करेगा, भले उसकी सेना उसका साथ न दे. खैर, उसकी ये महत्वकांक्षा कभी पूरी नहीं हो पाई. भारत में युद्ध के दौरान घायल सिकंदर बेबीलोन में एक दर्दनाक मौत मर गया, 323 ईसा पूर्व में.

अपने पूरे शरीर पर भभूत लगाए, बिना वस्त्र के घूमने वाले नागाओं को आपने जरूर देखा होगा. कुंभ के मेले में, तस्वीरों में या खबरों में. दुनियावी झमेलों से कोसों दूर ये नागा साधु परमात्मा की तलाश में अपना जीवन गुजार देते हैं.

इतिहास में भी इन नागा साधुओं का जिक्र आया है. चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में, सिकंदर के भारत आक्रमण के दौरान, सिकंदर की मुलाक़ात नागा साधुओं से हुई थी और वह उनके ज्ञान, दर्शन और जीवन के प्रति समझ को देखकर हैरान रह गया था.

प्लूटार्क, एक ग्रीक जीवनी लेखक और निबंधकार था. बाद में उसने रोम की नागरिकता ले ली. उसने नागा साधुओं के लिए ‘Gymnosophists’ शब्द का प्रयोग सबसे पहले किया. इसका अर्थ होता है ‘ज्ञानी नागा’. प्लूटार्क ने सिकंदर और दस नागा दार्शनिकों के बीच सिंधु नदी के तट पर हुई मुलाकात का जिक्र किया है.

उसने लिखा है कि सिकंदर ने दस नागाओं को गिरफ्तार किया जिन्होंने यूनानी सेना के खिलाफ विद्रोह को बढ़ावा दिया था. ये नागा चालाक थे और किसी भी तरह के सवालों के जवाब देने के लिए प्रसिद्ध थे. इसलिए सिकंदर उनसे मुश्किल सवाल पूछना चाहता था. सिकंदर ने शर्त रखी थी कि गलत जवाब देने वाले को तुरंत ही मार दिया जाएगा. नागाओं ने सभी सवालों के सही जवाब दिए. सिकंदर अचंभित था. उसने सभी नागाओं को इनाम देकर विदा किया.

एक और किस्सा है, सिकंदर को सिंधु के तट पर एक नागा वैरागी मिला. बहुत देर से वह एक पत्थर पर बैठकर आसमान की तरफ देख रहा था. सिकंदर ने पूछा, ‘तुम क्या कर रहे हो?’
जवाब मिला, ‘शून्य को महसूस कर रहा हूं.’
साधु ने वही सवाल सिकंदर से पूछा. सिकंदर ने कहा कि मैं दुनिया जीत रहा हूं. दोनों जोर से हंसे. सिकंदर को लगा कि ये संन्यासी मुर्ख है जो एक जगह बैठा हुआ है. संन्यासी इसलिए हंसा क्योंकि दुनिया में अंतिम तो कुछ भी नहीं.

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सिकंदर की मौत की भविष्यवाणी भी कालानोस नामक एक नागा साधु ने ही की थी. उसी ने सिकंदर को डंडमिस नामक नागा दार्शनिक के बारे में बताया. सिकंदर ने अपने नौकर को डंडमिस को बुलाने के लिए भेजा. डंडमिस बेफिक्र होकर पत्तों के बिस्तर सोया हुआ था. नौकर ने धन का लालच और मारने का डर दिखाया. लेकिन डंडमिस ने सिकंदर के पास जाने से साफ़ मना कर दिया. कहते हैं कि सिकंदर खुद डंडमिस के पास जंगल में आया. इस मुलाकात को यूनानी साहित्य में सिकंदर-डंडमिस वार्तालाप के नाम से जाना जाता है.

सिकंदर से मिलने वाले नागाओं के बारे में अक्सर कहा जाता है कि वे जैन दिगंबर या फिर ब्राह्मण थे. लेकिन इसका पुख्ता सबूत प्राप्त नहीं होता. भारत की इस पावन भूमि को अपने वैराग्य, ज्ञान, चातुर्य से परिपूर्ण बनाने वाले इन नागा दार्शनिकों का इतिहास पढ़ने और ग्रहण करने योग्य है.

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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