Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

लुप्त होने की कगार पर ये किला, पृथ्वीराज चौहान ने इस किले से लड़े थे 17 युद्ध

लुप्त होने की कगार पर ये किला, पृथ्वीराज चौहान ने इस किले से लड़े थे 17 युद्ध

http://hindi.news18.com/haryana/karnal-news-the-fort-made-by-pritviraj-chauhan-on-the-verge-of-extinction-983153.html

लुप्त होने की कगार पर ये किला, पृथ्वीराज चौहान ने इस किले से लड़े थे 17 युद्ध

बचपन से ही पराक्रमी योद्धा रहे पृथ्वीराज चौहान का जन्म अजमेर में सन 1149 में हुआ था. पृथ्वीराज चौहान ने तरावड़ी में अपना किला बनवाया था. करनाल के कस्बा तरावड़ी जिसका पहला नाम तराईन था. धीरे धीरे इसका नाम तरावड़ी पड़ गया. इस किले में प्रवेश के दो रास्ते थे.
बचपन से ही पराक्रमी योद्धा रहे पृथ्वीराज चौहान का जन्म अजमेर में सन 1149  में हुआ था. पृथ्वीराज चौहान ने तरावड़ी में अपना किला बनवाया था. करनाल के कस्बा तरावड़ी जिसका पहला नाम तराईन था. धीरे धीरे इसका नाम तरावड़ी पड़  गया.  इस किले में प्रवेश के दो रास्ते थे.

पृथ्वीराज चौहान के पास एक  बड़ी सेना थी जिसे कोई भी पराजित नहीं कर सकता था. क्योकि इस सेना का नेतृत्व पृथ्वीराज चौहान खुद करते थे. तरावड़ी के किले से पृथ्वीराज ने लगभग सत्रह युद्ध लड़े जिनमे सोलह बार पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई. आखिर में धोखे से मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान  को मात दी. क्योकि पृथ्वीराज चौहान गउओं  की पूजा करता था मुहम्मद गोरी ने युद्ध में सैकड़ों गउओं  को खड़ा कर दिया .

पृथ्वीराज चौहान ने गौ  माता को युद्ध में देखकर अपने हथियार डाल  दिए और इस तरह पृथ्वीराज चौहान इस युद्ध में हार गया और पृथ्वीराज चौहान को सन 1192 में इसी किले में मौत  के  घाट  उतार  दिया गया. इस तरह एक महान पराक्रमी शूरवीर योद्धा का अंत हुआ.

उसके बाद मुहम्मद गोरी ने इस किले पर राज किया. पृथ्वीराज का यह किला अब खंडर हो चूका है किले के नाम पर केवल दो द्वार ही बचे है . अंदर क्लॉनिया काट कर लोग रह रहे हैं. सन 1947 में भारत पाकिस्तान बनने के बाद इस किले को पाकिस्तान से आये हिन्दू शरणार्थियों के लिए कैम्प के रूप में प्रयोग किया गया था जिसके बाद से यह लोग यही पर रह रहे है.

किले को पूरी तरह से लोगों ने ध्वस्त कर दिया है. परन्तु मुख्य गेट के द्वार पर आज भी गोलियों के निशान  देखे जा सकते है. किले की दीवारे जो थोड़ी बहुत बची है आज भी वह उस महान योद्धा के इतिहास को संजोये हुए है.

स्थानीय लोग बताते है की पुरातत्व विभाग की लापरवाही के कारण एक एतिहासिक धरोवर लुप्त होने के कगार पर है. हर पार्टी और सरकार ने वोट बैंक की खातिर इस ऐतिहासिक धरोहर को लुप्त होने की कगार पर पहुंचा दिया.

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