Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

लिज्जत पापड़-जसवंती बेन


80 रूपये उधार लेकर सात महिलाओं ने शुरू किया था ‘लिज्जत पापड़’ का कारोबार

http://topyaps.com/lijjat-papad-story?utm_source=Facebook&utm_medium=Social&utm_campaign=TYABHUK

“बहुत सी महिलाओं को अपनी खुद की ताकत बनते देख मुझे ऐसा लगता है की मेरा जीवन सफल हो गया। मैं यह महसूस करती हूँ कि मेरी सारी कोशिशों का प्रतिफल मुझे मिल गया।”-जसवंती बेन

15 मार्च 1959 की गर्मियों की दोपहर में जब साफ आसमान में सूरज अपनी चमक बिखेर रहा था। तब दक्षिणी मुंबई के एक भीड़-भाड़ वाले इलाके गिरगोम के एक पुराने घर की छत पर जसवंती बेन अन्य छह महिलाओं के साथ मिलकर महिला सशक्तिकरण की एक नयी इबारत लिखने को तैयार थी। यह सात महिलाएं उस दोपहर छत पर जो काम कर रही थीं, उसका अंजाम चार पैकेट पापड़ के रूप में सामने आया और सामने आया एक संकल्प की ये काम वो करती रहेंगी।

90 का दशक वह दौर था जब पापड़ का समानअर्थी शब्द लिज्जत पापड़ माना जाता था। आइए आज जानते हैं कि आखिर कैसे जसवंती बेन के साथ मिलकर अन्य छह ग्रामीण महिलाओं ने नारी सशक्तिकरण की एक बेमिसाल गाथा लिख डाली।

शुरुआत से जसवंती बेन ने प्रण किया था कि वो अपने इस व्यवसाय के लिए किसी से चंदा नही मांगेगी, चाहे उनका वो व्यवसाय घाटे में ही क्यों ना चला जाये।

सात महिलाओं द्वारा 80 रुपये कर्ज लेकर शुरू किया गया लिज्जत पापड़ का सफर आज 301 करोड़ रुपये तक के सालाना कारोबार की एक बेमिसाल कहानी कहती है। इस व्यवसाय के माध्यम से आज 40000 से ज्यादा महिलाओं को अपनी पहचान प्राप्त हुई है।  इन महिलाओं का आभा भारतभर में 81 शाखाओं और 27 डिविजनों से छनकर दूर विदेश तक नारी सशक्तिकरण को रोशनी प्रदान कर रही है।

जसवंती बेन

जसवंती बेन के उद्योग का नाम श्री महिला गृह उद्योग है। इसमें काम करने वाली अधिकतर महिलाएं गरीब, अशिक्षित हैं और अपने परिवारों की आमदनी बढ़ाती हैं। पापड के अलावा इस उद्योग से अप्पालम, मसाला, गेंहू आटा, चपाती, कपड़ा धोने का पाउडर और साबुन, और लिक्विड  डिटरजेंट आदि उत्पाद भी तैयार किया जाता है।

सात बहनों से शुरू हुआ ये सफर आज देश भर में 43 हजार बहनों तक फैल गया है।

संस्थान अपनी बहनों की कठिन मेहनत से लगातार आगे बढ़ रहा है जो कठिन से कठिन समय में महिलाओं की शक्ति पर विश्वास करते हुए उन्हे मजबूती प्रदान कर रहा है।

जसवंती बेन की उपलब्धी इसलिए भी खास मानी जाती है क्योंकि वो न केवल गरीब परिवार से ताल्लुकात रखती हैं, बल्कि उनकी शिक्षा भी कुछ खास नहीं थी।

संस्थान के सफर में पहला महत्वपूर्ण पड़ाव 1966 में तब आया, जब संस्था को बांबे पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 के तहत और सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकरण प्राप्त हुआ और खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग ने कुटीर उद्योग के तौर पर संस्थान को मान्यता दी।

इस संगठन की खूबी यह है कि हर कोई सबसे नीचे वाले स्तर से काम शुरु करता है और सहकारिता के आधार पर काम करते हुए तरक्की पाता है।

संस्था का मकसद महिलाओं को रोजगार देना और अच्छी आय के जरिए सम्मानित आजीविका उपलब्ध कराना है। कोई भी महिला किसी भी जाति, वंश या रंग की हो, जो संस्थान के मूल्यों और मकसद के साथ खुद को खड़ा करती है, उस दिन से ही इस संस्थान की सदस्य हो जाती है, जिस दिन वो यहां काम की शुरूआत करती है। सुबह साढ़े चार बजे पापड़ उत्पादन का काम शुरू होता है।

लिज्जत अपनी सदस्य बहनों की बच्चों को दसवीं और बारहवीं परीक्षा पास करने के बाद स्कॉलरशिप भी प्रदान करती है।

संगठन की कार्यशैली और उनके उत्पाद की गुणवत्ता को खादी एवं कुटीर उद्योग आयोग ने साल 1998-99 और साल 2000-01 में सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के अवार्ड से भी सम्मानित किया है। यही नहीं कॉर्पोरेट एक्सीलेंस के लिए साल 2002 का इकानॉमोकि टाइम्स का बिजनेसवुमन ऑफ द इयर अवार्ड भी मिला। साल 2003 में देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सर्वोत्तम कुटीर उद्योग के सम्मान से संस्था को सम्मानित किया। 2005 में देश के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने दिल्ली के विज्ञान भवन में संस्थान को ब्रांड इक्विटी अवार्ड से भी सम्मानित किया। भारत के उपभोक्ताओं ने 2010-11 में लिज्जत पापड को पॉवर ब्रांड के रूप में चयनित किया, जिसका सम्मान संस्थान को नई दिल्ली में प्रदान किया गया।

टॉपयाप्स जसवंती बेन और उनकी इस संस्था को सलाम करती है, जो सालों से अपने बेहतरीन कार्यों के जरिए देश की महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाने की दिशा में रोशनी दिखाती है। निसंदेह लिज्जत ने देश की तमाम महिलाओं को समाज में अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाने और सम्मान से जीने का अवसर प्रदान किया है।

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s