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Bollywood Rascals – बॉलीवुड का इस्लामीकरण कैसे हुआ?


Bollywood Rascals:

बॉलीवुड का इस्लामीकरण कैसे हुआ?

सभी जानते हैं कि संजय दत्त के पिता सुनील दत्त एक हिंदू थे और उनकी पत्नी फातिमा राशिद यानी नर्गिस एक मुस्लिम थीं। लेकिन दुर्भाग्य देखिए कि संजय दत्त ने हिंदू धर्म को छोड़कर इस्लाम कबूल कर लिया लेकिन वह इतना चतुर भी है कि अपना फिल्मी नाम नहीं बदला।

एक विचारणीय बिन्दू यह भी है कि बाॅलीवुड में शादियों का तरीका ऐसा क्यों है कि: शाहरुख खान की पत्नी गौरी छिब्बर एक हिंदू है। आमिर खान की पत्नियां रीमा दत्ता /किरण राव और सैफ अली खान की पत्नियाँ अमृता सिंह / करीना कपूर दोनों हिंदू हैं। (इसके पिता नवाब पटौदी ने भी हिंदू लड़की शर्मीला टैगोर से शादी की थी)

फरहान अख्तर की पत्नी अधुना भवानी और फरहान आजमी की पत्नी आयशा टाकिया भी हिंदू हैं। अमृता अरोड़ा की शादी एक मुस्लिम से हुई है जिसका नाम शकील लदाक है। सलमान खान के भाई अरबाज खान की पत्नी मलाइका अरोड़ा हिंदू हैं और उसके छोटे भाई सुहैल खान की पत्नी सीमा सचदेव भी हिंदू हैं। अनेक उदाहरण ऐसे हैं कि हिंदू अभिनेत्रियों को अपनी शादी बचाने के लिए धर्म परिवर्तन भी करना पड़ा है। आमिर खान के भतीजे इमरान की हिंदू पत्नी का नाम अवंतिका मलिक है। संजय खान के बेटे जायद खान की पत्नी मलिका पारेख है। फिरोज खान के बेटे फरदीन की पत्नी नताशा है। इरफान खान की बीवी का नाम सुतपा सिकदर है। नसरुद्दीन शाह की हिंदू पत्नी रत्ना पाठक हैं।

*एक समय था जब मुसलमान एक्टर हिंदू नाम रख लेते थे क्योंकि उन्हें डर था कि अगर दर्शकों को उनके मुसलमान होने का पता लग गया तो उनकी फिल्म देखने कोई नहीं आएगा।*

उदाहरण: ऐसे लोगों में सबसे मशहूर नाम *युसूफ खान* का है जिन्हें दशकों तक हम दिलीप कुमार समझते रहे। महजबीन अलीबख्श मीना कुमारी बन गई और मुमताज बेगम जहाँ देहलवी *मधुबाला बनकर हिंदू ह्रदयों पर राज करतीं रहीं। बदरुद्दीन जमालुद्दीन काजी को हम *जॉनी वाकर समझते रहे और हामिद अली खान विलेन *अजित* बनकर काम करते रहे। हममें से कितने लोग जान पाए कि अपने समय की मशहूर अभिनेत्री रीना राय का असली नाम *सायरा खान* था। आज के समय का एक सफल कलाकार *जॉन अब्राहम* भी दरअसल एक मुस्लिम है जिसका असली नाम फरहान इब्राहिम है।

क्योंकि ऐसा फिल्म उद्योग का सबसे बड़ा फाइनेंसर दाऊद इब्राहिम चाहता है। टी-सीरीज के मालिक गुलशन कुमार ने उसकी बात नहीं मानी और नतीजा सबने देखा। आज भी एक फिल्मकार को मुस्लिम हीरो साइन करते ही दुबई से आसान शर्तों पर कर्ज मिल जाता है।

सलमान खान, शाहरुख खान, आमिर खान, सैफ अली खान, नसीरुद्दीन शाह, फरहान अख्तर, नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फवाद खान जैसे अनेक नाम हिंदी फिल्मों की सफलता की गारंटी बना दिए गए हैं।

अक्षय कुमार, मनोज कुमार और राकेश रोशन जैसे फिल्मकार इन दरिंदों की आंख के कांटे हैं।

फिल्मों के गीतकार और संगीतकार भी मुस्लिम हों तभी तो एक गाना मौला के नाम का बनेगा और जिसे गाने वाला पाकिस्तान से आना जरूरी है। आज अधिकांश हिंदी गानों में अल्ला या खुदा शब्द को लिखा जा रहा है, और हमारी नई पीढ़ी सुबह-शाम राम और गोविन्द की जगह अल्ला-अल्ला रटती है। यह नई हिन्दू पीढ़ी का मन से इस्लामीकरण करने की साजिश है।

इन अंडरवर्ड के हरामखोरों की असलियत को पहचानो और हिन्दू समाज को संगठित करना होगा तभी धर्म की रक्षा होगी। आप अपने बच्चों को इस साजिश से अवगत करायें और *मुस्लिम हीरो की फिल्मों का बहिष्कार करें।

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एक अल्लाह की बात करने वाले मुसलमानो का इस्लाम खुद 73 टुकड़ो मे बंटा हुआ है ,जरूर पढ़ें । मुसलमानों की सामाजिक सरंचना धर्म और कुरआन के निर्देशों पर आधारित है, इस्लाम जाति व्यवस्था को स्वीकार नहीं करता और यह बतलाता है की जन्म, वंश और स्थान के आधार पर सभी मुसलमान बराबर हैं | […]

via एक अल्लाह की बात करने वाले मुसलमानो का इस्लाम खुद 73 टुकड़ो मे बंटा हुआ है ,जरूर पढ़ें । — પ્રહલાદ પ્રજાપતિ

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जीना इसी का नाम है


जीना इसी का नाम है
एक समारोह में 20वीं सदी के महान हास्य अभिनेता ‘चार्ली चैपलिन’ ने ऐसा उम्दा joke सुनाया कि देर तक श्रोताओं की हसीं थमने का नाम नहीं ले रही थी. जब हसीं थमी तो देर तक तालियों का दौर चला. शांति होने पर चैपलिन ने दोबारा वही joke दोहरा दिया. इस बार केवल गिने चुने लोग ही हँसे और ताली तो किसी ने नहीं बजाई. तीसरी बार श्रोताओं के अनुरोध पर जब उन्होंने फिर वहीँ joke सुनाया तो अधिकांश के मुंह पर खीज स्पष्ट रूप से देखने को मिली. यह देखकर जिन शब्दों में चैपलिन ने अपने भाव व्यक्त किये वे कुछ इस प्रकार हैं- यदि आप एक ही joke पर बार बार हंस नहीं सकते, तो किसी एक दुःख को पकड़ कर सदा क्यों रोते रहते हैं? अच्छा तो यह है आप अपने जीवन के हर एक पल का आनंद लें, क्योंकि जिंदगी बहुत खूबसूरत है. स्थाई इस जीवन में कुछ भी नहीं है, न सुख न दुःख. मुसीबतें जैसे आई है वैसे ही चली भी जाएँगी.

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क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा प्रारंभ की।


क्लास रूम में प्रोफेसर ने एक सीरियस टॉपिक पर चर्चा
प्रारंभ की।
.
जैसे ही वे ब्लैकबोर्ड पर कुछ लिखने के लिए पलटे तो तभी
एक शरारती छात्र ने सीटी बजाई।
.
प्रोफेसर ने पलटकर सारी क्लास को घूरते हुए “सीटी
किसने मारी” पूछा,
लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
.
प्रोफेसर ने शांति से अपना सामान समेटा और आज की
क्लास समाप्त बोलकर, बाहर की तरफ बढ़े।
.
स्टूडेंट्स खुश हो गए कि, चलो अब फ्री हैं।
.
अचानक प्रोफेसर रुके, वापस अपनी टेबल पर पहुँचे और
बोले—” चलो, मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूँ ,
इससे हमारे बचे हुए समय का उपयोग भी हो जाएगा। ”
.
सभी स्टूडेंट्स उत्सुकता और इंटरेस्ट के साथ कहानी सुनने
लगे।
.
प्रोफेसर बोले—” कल रात मुझे नींद नहीं आ रही
थी तो मैंने सोचा कि, कार में पेट्रोल भरवाकर ले आता हूँ
जिससे सुबह मेरा समय बच जाएगा।
.
पेट्रोल पम्प से टैंक फुल कराकर मैं आधी रात को
सूनसान पड़ी सड़कों पर ड्राइव का आनंद लेने लगा।
.
अचानक एक चौराहे के कार्नर पर मुझे एक बहुत खूबसूरत
लड़की शानदार ड्रेस पहने हुए अकेली खड़ी नजर आई।
.
मैंने कार रोकी और उससे पूछा कि,
क्या मैं उसकी कोई सहायता कर सकता हूँ तो उसने कहा
कि,
उसे उसके घर ड्रॉप कर दें तो बड़ी मेहरबानी होगी।
.
मैंने सोचा नींद तो वैसे भी नहीं आ रही है ,
चलो, इसे इसके घर छोड़ देता हूँ।
.
वो मेरी बगल की सीट पर बैठी।
रास्ते में हमने बहुत बातें कीं।
वो बहुत इंटेलिजेंट थी, ढेरों
टॉपिक्स पर उसका कमाण्ड था।
.
जब कार उसके बताए एड्रेस पर पहुँची तो उतरने से
पहले वो बोली कि,
वो मेरे नेचर और व्यवहार से बेहद प्रभावित हुई है और
मुझसे प्यार करने लगी है।
.
मैं खुद भी उसे पसंद करने लगा था।
मैंने उसे बताया कि, ” मैं यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हूँ। ”
.
वो बहुत खुश हुई
फिर उसने मुझसे मेरा मोबाइल नंबर लिया और
अपना नंबर दिया।
.
अंत में उसने बताया की, उसका भाई भी
यूनिवर्सिटी में ही पढ़ता है और उसने मुझसे
रिक्वेस्ट की कि,
मैं उसके भाई का ख़याल रखूँ।
.
मैंने कहा कि, ” तुम्हारे भाई के लिए कुछ भी करने पर
मुझे बेहद खुशी होगी।
क्या नाम है तुम्हारे भाई
का…?? ”
.
इस पर लड़की ने कहा कि, ” बिना नाम बताए भी
आप उसे पहचान सकते हैं क्योंकि वो सीटी बहुत
ज्यादा और बहुत बढ़िया बजाता है। ”
.
जैसे ही प्रोफेसर ने सीटी वाली बात की तो,
तुरंत क्लास के सभी स्टूडेंट्स उस छात्र की तरफ
देखने लगे, जिसने प्रोफ़ेसर की पीठ पर सीटी
बजाई थी।
.
प्रोफेसर उस लड़के की तरफ घूमे और उसे घूरते हुए बोले-
” बेटा, मैंने अपनी पी एच डी की डिग्री,
मटर छीलकर हासिल नहीं की है,
हरामखोर निकल क्लास से अभी बाहर…!!
हँसते रहिये ।

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एक मारवाडी रोज़ बैंक


एक मारवाडी रोज़ बैंक
जाया करता था,
कभी
2 लाख तो कभी
3 लाख और
ऐसी बड़ी-बड़ी रकम
जमा किया करता था।

बैंक का मैनेजर उसे हमेशा संशय
की दृष्टि से देखता था।

उसे
समझ
नहीं आता था कि यह
मारवाडी रोज़
इतना पैसा कहाँ से लाता है।

अंत में एक दिन उसने उस
व्यक्ति को बुलाया और
कहा,
“ लाला तुम रोज़
इतना पैसा कहाँ से लाते हो,
आखिर
क्या काम करते हो तुम?”
,
मारवाडी ने कहा
“भाई
मेरा तो बस एक ही काम है,
मैं शर्त लगाता हूँ और
जीतता हूँ”
,
मैनेजर को यक़ीन नहीं हुआ
तो उसने कहा,
“ऐसा कैसे
हो सकता है कि आदमी रोज़
कोई शर्त जीते?”
,
मारवाडी . ने कहा,
“चलिए मैं
आपके साथ एक शर्त
लगाता हूँ कि आपके कुले पर
एक फोड़ा है,

अब शर्त यह
है कि कल सुबह मैं अपने साथ
दो आदमियों को लाऊँगा और
आपको अपनी पैंट उतार कर
उन्हें अपने कूल्हे दिखाने होंगे,
,
यदि आपके कुले पर
फोड़ा होगा तो आप मुझे 10
लाख दे दीजिएगा,

और
अगर नहीं हुआ तो मैं

आपको 10 लाख दे दूँगा,
बताइए मंज़ूर है?”

मैनेजर जानता था कि उसके
कूल्हों पर फोड़ा नहीं है,
इसलिए उसे शर्त जीतने
की पूरी उम्मीद थी,

लिहाज़ा वह तैयार हो गया।

अगली सुबह
मारवाडी दो व्यक्तियों के
साथ बैंक आया।
,
उन्हें देखते ही मैनेजर की बाँछें
खिल गईं और वह उन्हें झटपट
अपने केबिन में ले आया।
,
इसके
बाद मैनेजर ने उनके सामने
अपनी पैंट उतार दी और
मारवाडी से कहा “देखो मेरे
कूल्हों पर कोई
फोड़ा नहीं है,
,
तुम शर्त हार
गए अब निकालो 10
लाख रुपए”।

मारवाडी के साथ आए
दोनों व्यक्ति यह दृश्य देख
बेहोश हो चुके थे।

मारवाडी ने हँसते हुए मैनेजर
को 10 लाख
रुपयों से भरा बैग
थमा दिया और ज़ोर-ज़ोर से
हँसने लगा।

मैनेजर को कुछ समझ
नहीं आया तो उसने पूछा.
“तुम तो शर्त हार गए फिर
क्यों इतना हँसे जा रहे हो?”

मारवाडी ने कहा, “तुम्हें
पता है,
ये
दोनों आदमी इसलिए बेहोश
हो गए क्योंकि मैंने इनसे 40
लाख रूपयों की शर्त लगाई
थी कि बैंक का मैनेजर तुम्हारे
सामने पैंट उतारेगा,

इसलिए अगर मैंने तुम्हें 10
लाख दे भी दिए
तो क्या फ़र्क पड़ता है, 30
तो फिर भी बचे न…!

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निर्मल बाबा


निर्मल बाबा एक दिन बाबा दरबार में बैठे थे और भक्त अपनी दुखभरी कहानियाँ सुनाकर बाबासे सलाह मांग रहे थे ।

पप्पू : ” बाबा की जय हो एक । बाबा मुझे कोई रास्ता दिखाओ , मेरी शादी तय नहीं हो रही , आपकी शरण में आया हूँ ।”

निर्मल बाबा: ” आप काम क्या करते हो ?”

पप्पू : ” शादी होने के लिए कौनसा काम करना उचित रहेगा ? ”

बाबा – ” तुम मिठाई की दूकान खोल लो। ”

पप्पू – ” बाबा , वो तो ३० सालों से खुली हुई है, मेरे पिताजी की मिठाई की ही दुकान है ।”

बाबा : ” शनिवार को सुबह ९ बजे दुकान खोला करो ।”

पप्पू – “शनि मंदिर के बगल में ही मेरी दूकान है और मैं रोज ९ बजे ही खोलता हूँ ।”

बाबा : ” काले रंग के कुत्ते को मिठाई खिलाया करो ।”

पप्पू – ” मेरे घर दो काले कुत्ते ही है, टोनी और बंटी . सुबह शाम मिठाई खिलाता हूँ ।”

बाबा : ” सोमवार को शिवमंदिर जाया करो ।”

पप्पू – ” मैं केवल सोमवार ही नहीं , रोज शिवमंदिर जाता हूँ । दर्शन के बगैर मैं खाने को छूता तक नहीं ।”

बाबा : ” कितने भाई बहन हो ?”

पप्पू – ” बाबा आपके हिसाब से शादी तय होने के लिए कितने भाई बहन होने चाहिए ? ”

बाबा – ” दो भाई एक बहन होनी चाहिए । ”

पप्पू – ” बाबा , मेरे असल में दो भाई एक बहन ही है । प्रकाश, दीपक और मीना । ”

बाबा : ” दान किया करो ।”

पप्पू – “बाबा मैंने अनाथ आश्रम खोल रखा है, रोज दान करता हूँ ।”

बाबा : ” एक बार बद्रीनाथ हो आओ ।”

पप्पू : ” बाबा आप के हिसाब से शादी होने के लिए कितने बार बद्रीनाथ जाना जरुरी है ?”

बाबा: “जिंदगी में एक बार हो आओ ।”

पप्पू : “मैं तीन बार जा चूका हूँ ।”

बाबा – “नीले रंग की शर्ट पहना करो ।”

पप्पू – “बाबा मेरे पास सिर्फ नीले रंग के ही कुर्ते है , कल सारे धोने के लिए दिए हैं , वापस मिलेंगे तो सिर्फ वही पहनूंगा! ”

बाबा शांत होकर जप करने लगते हैं ।
इस हरामजादे को क्या बोलू जो इसने नही किया हो

पप्पू ” बाबा , एक बात कहूँ ?”

बाबा ; “हां जरूर, बोलो बेटा जो बोलना है ।”

पप्पू : “मैं पहले से शादी शुदा हूँ ,
और तीन बच्चों का बाप भी हूँ
इधर से गुजर रहा था ,
सोचा कुचरनी करता चलूँ।

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क्या आप जानते है,नराधम नरपिशाच जेहादी गोरी द्वारा छलपूर्वक पृथ्वीराज चौहान की हत्या के बाद क्या हुआ था!


क्या आप जानते है,नराधम नरपिशाच जेहादी गोरी द्वारा छलपूर्वक पृथ्वीराज चौहान की हत्या के बाद क्या हुआ था!

दरअसल जब नराधम जेहादी गोरी हमारे हिंदुस्तान में जिहाद फैलाकर एवं लूट-खसोट कर जब वह अपने वतन गजनी गया तो वो अपने साथ बहुत सारी हिन्दू लड़कियों और महिलाओं के साथ-साथ बेला और कल्याणी को भी ले गया था!

असल में बेला हिन्दू सम्राट पृथ्वीराज चौहान की बेटी और कल्याणी जयचंद की पौत्री थी!

ध्यान देने की बात है कि जहाँ पृथ्वीराज चौहान महान देशभक्त थे, वहीँ जयचंद ने देश के साथ गद्दारी की थी लेकिन , उसकी पौत्री कल्याणी एक महान राष्ट्रभक्त थी।

खैर जब वो जेहादी गोरी अपने गजनी पहुंचा तो उसके गुरु ने “काजी निजामुल्क” ने उसका भरपूर स्वागत किया और, उससे कहा कि आओ गौरी आओ हमें तुम पर नाज है कि तुमने हिन्दुस्तान पर फतह करके इस्लाम का नाम रोशन किया है!

कहो सोने की चिड़िया हिन्दुस्तान के कितने पर कतर कर लाए हो!

’’इस पर जेहादी गोरी ने कुटिलता से मुस्कुराते हुए कहा कि ‘‘काजी साहब! मैं हिन्दुस्तान से सत्तर करोड़ दिरहम मूल्य के सोने के सिक्के, पचास लाख चार सौ मन सोना और चांदी, इसके अतिरिक्त मूल्यवान आभूषणों, मोतियों, हीरा, पन्ना, जरीदार वस्त्र और ढाके की मल-मल की लूट-खसोट कर भारत से गजनी की सेवा में लाया हूं।

’’काजी :‘‘बहुत अच्छा! लेकिन वहां के लोगों को कुछ दीन-ईमान का पाठ पढ़ाया या नहीं?

’’गोरी :‘‘बहुत से लोग इस्लाम में दीक्षित हो गए हैं।’’

काजी : ‘‘और बंदियों का क्या किया?

’’गोरी : ‘‘बंदियों को गुलाम बनाकर गजनी लाया गया है और, अब तो गजनी में बंदियों की सार्वजनिक बिक्री की जा रही है।

रौननाहर, इराक, खुरासान आदि देशों के व्यापारी गजनी से गुलामों को खरीदकर ले जा रहे हैं।

एक-एक गुलाम दो-दो या तीन-तीन दिरहम में बिक रहा है।

’’काजी : ‘‘हिन्दुस्तान के मंदिरों का क्या किया?

’’गोरी : ‘‘मंदिरों को लूटकर 17000 हजार सोने और चांदी की मूर्तियां लायी गयी हैं, दो हजार से अधिक कीमती पत्थरों की मूर्तियां और शिवलिंग भी लाए गये हैं और बहुत से पूजा स्थलों को नेप्था और आग से जलाकर जमीदोज कर दिया गया है।

काजी..’’‘‘ये तो तुमने बहुत ही रहमत का काम किया है!’’फिर मंद-मंद मुस्कान के साथ बड़बड़ाया ‘‘गोरे और काले धनी और निर्धन गुलाम बनने के प्रसंग में सभी भारतीय एक हो गये हैं।

जो भारत में प्रतिष्ठित समझे जाते थे, आज वे गजनी में मामूली दुकानदारों के गुलाम बने हुए हैं।

’’फिर थोड़ा रुककर कहा : ‘‘लेकिन हमारे लिए कोई खास तोहफा लाए हो या नहीं?

’’गोरी : ‘‘लाया हूं ना काजी साहब!

’’काजी :‘‘क्या!

’गोरी :‘‘जन्नत की हूरों से भी सुंदर जयचंद की पौत्री कल्याणी और पृथ्वीराज चौहान की पुत्री बेला।

’’काजी :‘‘तो फिर देर किस बात की है?

’’गोरी :‘‘बस आपके इशारे भर की।

’’काजी :‘‘माशा अल्लाह! आज ही खिला दो ना हमारे हरम में नये गुल।

’’गोरी :‘‘ईंशा अल्लाह!

’’और तत्पश्चात्, काजी की इजाजत पाते ही शाहबुद्दीन गौरी ने कल्याणी और बेला को काजी के हरम में पहुंचा दिया।

जहाँ कल्याणी और बेला की अदभुत सुंदरता को देखकर काजी अचम्भे में आ गया और, उसे लगा कि स्वर्ग से अप्सराएं आ गयी हैं।

तथा, उस काजी ने उसने दोनों राजकुमारियों से विवाह का प्रस्ताव रखा तो बेला बोली-‘‘काजी साहब! आपकी बेगमें बनना तो हमारी खुशकिस्मती होगी, लेकिन हमारी दो शर्तें हैं!

’’काजी :‘‘कहो..कहो क्या शर्तें हैं तुम्हारी!

तुम जैसी हूरों के लिए तो मैं कोई भी शर्त मानने के लिए तैयार हूं।

बेला : ‘‘पहली शर्त से तो यह है कि शादी होने तक हमें अपवित्र न किया जाए क्या आपको मंजूर है?

’’काजी : ‘‘हमें मंजूर है! दूसरी शर्त का बखान करो।’’बेला : ‘‘हमारे यहां प्रथा है कि लड़की के लिए लड़का और लड़के लिए लड़की के यहां से विवाह के कपड़े आते हैं।

अतः , दूल्हे का जोड़ा और जोड़े की रकम हम भारत भूमि से मंगवाना चाहती हैं।

’’काजी :‘‘मुझे तुम्हारी दोनों शर्तें मंजूर हैं।’’और फिर बेला और कल्याणी ने कविचंद के नाम एक रहस्यमयी खत लिखकर भारत भूमि से शादी का जोड़ा मंगवा लिया और, काजी के साथ उनके निकाह का दिन निश्चित हो गया साथ ही , रहमत झील के किनारे बनाये गए नए महल में विवाह की तैयारी शुरू हुई।निकाह के दिन वो नराधम काजी कवि चंद द्वारा भेजे गये कपड़े पहनकर काजी साहब विवाह मंडप में आया और, कल्याणी और बेला ने भी काजी द्वारा दिये गये कपड़े पहन रखे थे।

इस निकाह के बारे में सबको इतनी उत्सुकता हो गई थी कि शादी को देखने के लिए बाहर जनता की भीड़ इकट्ठी हो गयी थी।

लेकिन तभी बेला ने काजी साहब से कहा-‘‘हमारे होने वाले सरताज , हम कलमा और निकाह पढ़ने से पहले जनता को झरोखे से दर्शन देना चाहती हैं, क्योंकि विवाह से पहले जनता को दर्शन देने की हमारे यहां प्रथा है और ,फिर गजनी वालों को भी तो पता चले कि आप बुढ़ापे में जन्नत की सबसे सुंदर हूरों से शादी रचा रहे हैं।

और, शादी के बाद तो हमें जीवन भर बुरका पहनना ही है, तब हमारी सुंदरता का होना न के बराबर ही होगा क्योंकि नकाब में छिपी हुई सुंदरता भला तब किस काम की।

’’‘‘हां..हां क्यों नहीं।’’काजी ने उत्तर दिया और कल्याणी और बेला के साथ राजमहल के कंगूरे पर गया, लेकिन वहां पहुंचते-पहुंचते ही उस “”नराधम जेहादी”” काजी के दाहिने कंधे से आग की लपटें निकलने लगी, क्योंकि क्योंकि कविचंद ने बेला और कल्याणी का रहस्यमयी पत्र समझकर बड़े तीक्ष्ण विष में सने हुए कपड़े भेजे थे।

इस तरह वो “”नराधम जेहादी”” काजी विष की ज्वाला से पागलों की तरह इधर-उधर भागने लगा,तब बेला ने उससे कहा-‘‘तुमने ही गौरी को भारत पर आक्रमण करने के लिए उकसाया था ना इसीलिए ,हमने तुझे मारने का षड्यंत्र रचकर अपने देश को लूटने का बदला ले लिया है।

हम हिन्दू कुमारियां हैं और, किसी नराधम में इतनी साहस नहीं है कि वो जीते जी हमारे शरीर को हाथ भी लगा दे।

’’कल्याणी ने कहा, ‘‘नालायक! बहुत मजहबी बनते हो, और जेहाद का ढोल पीटने के नाम पर लोगों को लूटते हो और शांति से रहने वाले लोगों पर जुल्म ढाहते हो,थू!

धिक्कार है तुम पर।’’इतना कहकर उन दोनों बालिकाओं ने महल की छत के बिल्कुल किनारे खड़ी होकर एक-दूसरी की छाती में विष बुझी कटार जोर से भोंक दी और उनके प्राणहीन देह उस उंची छत से नीचे लुढ़क गये।

वही दूसरी तरफ उस विष के प्रभाव से “”नराधम जेहादी”” काजी पागलों की तरह इधर-उधर भागता हुआ भी तड़प-तड़प कुत्ते की मौत मर गया।

इस तरह भारत की इन दोनों बहादुर सनातनी बेटियों ने विदेशी धरती पराधीन रहते हुए भी बलिदान की जिस गाथा का निर्माण किया, वह सराहने योग्य है और, आज सारा भारत इन बेटियों के बलिदान को श्रद्धा के साथ याद करता है।

नमन है ऐसी हिन्दू वीरांगनाओं को!

आज के परिदृश्य में जबकि लव जिहाद अपने चरम पर है अगर कुछेक सौ भी हमारी हिन्दू युवतियां….. उन लव जेहादियों के सम्मुख समर्पण करने की जगह बेला और कल्याणी सरीखे ही हिम्मत और साहस से काम लेते हुए उन जेहादियों को सबक सिखा दें!

तो फिर , मुल्ले तो मुल्ले उनके अल्लाह की भी हिम्मत नहीं पड़ेगी हमारी हिन्दू युवतियों की ओर बुरी नजर डालने की!