Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

​अम्बेडकर मौत का रहस्य

अम्बेडकर मौत का रहस्य

कृपया पढ़ें व सच्चाई को जाननें के बाद ही आगे बढ़ाये

इस पोस्ट को सच्चाई जानने के लिये ही आपके पास भेजा है….

‘ब्रिटिश के प्यारे’ बॉब साब आंडबेकर की मृत्यु की असलियत

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सरकार ने इतिहास की किताबों में वैसे तो कई सारे तथ्य गढ़ रखे हैं कि आंडबेकर ऐसे मरा था वैसे मरा था लेकिन एक RTI याचिका लगाने पर सरकार की पूरी पोल खुल गयी

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दरअसल आंडबेकर ने अपने जीवन में ऐसे ऐसे नीच कर्म किये थे उसे सामान्य मौत तो कभी मिलनी नहीं थी

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वास्तविकता यह है कि आंडबेकर को भरी संसद में भरतपुर के राजा बच्चू सिंह ने गोली मारी थी जिससे उसकी मृत्यु हुयी थी, यह घटना तब की है जब एक और ब्रिटिश दल्ला देश का प्रधानमंत्री हुआ करता था, बात कुछ ऐसी थी कि,

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संसद सत्र के एक दिन जब भरतपुर के राजा चौधरी बच्चू सिंह संसद पहुँचेे और वहाँ पर जाकर जब वह अपनी सीट पर बैठे, तभी थोड़ी देर पश्चात आंडबेकर ने नेहरु के साथ संसद में प्रवेश किया

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सभी ने अपनी सीट से खड़े होकर आंडबेकर और नेहरु का अभिवादन किया परन्तु एक व्यक्ति जो भरतपुर के राजा चौधरी बच्चू सिंह थे, अपनी सीट पर बैठे रहे

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यह देखकर ‘घमंड में चूर’ आंडबेकर ने नेहरु से पूछा कि यह कौन हैं, जो खड़ा नही हुआ ???

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नेहरु ने भरतपुर के राजा के रूप में उनका परिचय करवाया, यह सुनकर कि बच्चू सिंह जी भरतपुर के राजा हैं, आंडबेकर ने उन पर तीक्ष्ण कटाक्ष करते हुए कहा कि “अच्छा ! रजवाड़े चले गये, मगर अकड़ नहीं गयी”

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इतना सुनते ही चौधरी बच्चू सिंह ने भरी संसद में अपनी रिवाल्वर निकाली और आंडबेकर पर ठीक पास से ही गोलियां दाग डाली, बच्चू सिंह यहीं नहीं रुके बल्कि इसके बाद उन्होंने वही रिवाल्वर नेहरु की छाती से सटाकर पूछा- मैंने कुछ गलत किया मिस्टर नेहरु ???

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डरा सहमा नेहरु : नही राजा साहब, आपने कुछ गलत नही किया

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यह सुनकर भरतपुर के राजा संसद से बाहर चले गये

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इसके पश्चात् शुरू हुआ खेल आंडबेकर की मौत के असल कारणों पर पर्दा डालने का, भारतीय जनता भी वही जानती है जो बताया गया हालांकि देश में ऐसे लोगों की कमी नहीं जो इस काण्ड के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं

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हमें भी सोशल मीडिया के माध्यम से व कुछ प्रबुद्धजनों से इस बारे में पता चला था, एक आदरणीय ने यह भी बताया कि, वर्ष 1980 तक भरतपुर में आंडबेकर की भरतपुर में एक भी मूर्ति नही थी, क्योंकि राजपरिवार का कहना था कि यदि सरकार ने भरतपुर में आंडबेकर की मूर्ति लगायी तो ठीक उसके सामने हम राजा बच्चू सिंह की मूर्ति रिवाल्वर से आंडबेकर को निशाना लगते हुए लगा देंगे

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ज्ञात हो कि उस समय अंग्रेजों का साथ देने के कारण राजाओं के सात खून माफ़ हुआ करते थे और उन्हें रिवाल्वर वगैरह संसद में लेकर आने की अनुमति होती थी

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भारतवर्ष से अंग्रेजों को खदेड़ने के बजाय अंग्रेजों के साथ मिलकर अपने महलों में अय्याशी करने वाले भारतीय राजाओं के प्रति हमारे मन में वैसे तो अंश मात्र भी सम्मान नहीं है लेकिन राजा बच्चू सिंह इस कार्य के लिए सदा याद किये जाएंगे

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कुछ वर्ष पहले आंडबेकर की हत्या के संबंध में आर.एच. बंसल नामक एक RTI कार्यकर्ता द्वारा लगाई गयी RTI से भी सरकार के सारे फर्जी दावों की हवा निकल गयी

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बंसल जी ने राष्ट्रपति सचिवालय में RTI आवेदन दायर कर पूछा था कि,

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1. आंडबेकर की मौत कैसे और किस स्थान पर हुई थी?

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2.क्या मृत्यु उपरांत उनका पोस्टमॉर्टम कराया गया था ?

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3. पोस्टमॉर्टम की स्थिति में उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट की एक प्रति उपलब्ध कराई जाय ?

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4. संविधान निर्माता की मृत्यु प्राकृतिक थी या फिर हत्या ?

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5. उनकी मौत किस तारीख को हुई थी ?

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6. क्या किसी आयोग या समिति ने उनकी मौत की जांच की थी?

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सरकार या फिर राष्ट्रपति की तरफ से बंसल जी के इस RTI का कोई जवाब नहीं दिया गया बल्कि राष्ट्रपति सचिवालय ने यह आवेदन गृह मंत्रालय के पास भेज दिया जिस पर गृह मंत्रालय द्वारा आवेदक को दी गई सूचना में बताया गया कि, आंडबेकर की मृत्यु और उससे संबंधित तथ्यों के बारे में मांगी गई जानकारी मंत्रालय के किसी भी विभाग, प्रभाग और इकाई में उपलब्ध नहीं है

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तो ये थी ब्रिटिशों के प्यारे बॉब साब आंडबेकर की मृत्यु की असलियत

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आंडबेकरवादियों से निवेदन है कि, वो भी RTI लगाएं या कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने आराध्य ‘जे बीम’ की मौत की असलियत के बारे में पता लगाएं, कम से कम इतना जानने का तो हक़ है ही उन्हें, और अगर उनकी RTI पर सरकार जवाब ना दे तो समझ लें वही सही है जो हमने ऊपर बताया है  ।

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(नोट : सत्य वो स्प्रिंग है जिसे कोई कितना भी चाह ले दबा नहीं सकता, वो एक ना एक दिन उछलकर बाहर आ ही जाता है)

दूसरे ग्रुप से कॉपी पेस्ट किया है

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Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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