Posted in हिन्दू पतन

1200 साल की गुलामी में हमें सबसे बड़ा नुकसान मानसिक तौर पे गुलाम बनाने का हुआ हमारी धरती सिकुड़ी


1200 साल की गुलामी में हमें सबसे बड़ा नुकसान मानसिक तौर पे गुलाम बनाने का हुआ हमारी धरती सिकुड़ी, अपमानित हुए और यकीन मानिए आज जितने भी हिन्दू हैं उन्हें अपने पुरखों के पौरुष पर गर्व होना चाहिए कि उन्होंने तब अपना धर्म नहीं छोड़ा जब इस्लामी तलवार लगभग पूरे आर्यावर्त पर राज कर रही थी,

जब इस देश में श्री राम के मंदिर की निर्माण की बात चलती है तब तुरन्त विकास का लबादा ओढ़ लिया जाता है जबकि राम मंदिर सीधे सीधे विकास से सम्बंधित है इतिहास के गौरव को संजोकर रख नहीं सकते विकास को ध्वस्त होने में कितनी देर लगेगी 80% की आबादी की इच्छा से एक ज़मीन का टुकड़ा अपना नहीं सकते बड़ी-बड़ी इंडस्ट्री सम्भाल पाओगे?

बहन-बेटियों की रक्षा कर नहीं सकते व्यापार बचा पाओगे?

हज़ारों मंदिर तोड़े गए तब असुरक्षा नहीं आई एक मंदिर के बन जाने से देश का सेक्युलर ढांचा चटक जाएगा?

अरे लात मारिये ऐसे सद्भाव को जो एक ज़मीन के टुकड़े से खतरे में आ जा रहा है 1000 साल बाद भी इस सद्भाव की सारी कुर्बानी क्या हम ही देंगे?

मंदिर छोड़िये असली चरित्र समझना है तो बस 2 डायलॉग याद रखिए

“15 मिनट के लिए पुलिस हटा लो” और “जिस दिन हम 42% हो गए हिन्दुओ की बोटी-बोटी कर देंगे”

जब मज़हबी विस्तार का भेड़िया आप पे झपटेगा तो विकास की मखमली चादर तो आपको कम से कम बचा नहीं पाएगी।

बाकि मैं तो लिख कर सोये हुए हिन्दू को जगा ही सकता हूँ अब हिन्दू कितने समझदार है या मेरी बात को कितना समझते है ये देखने वाली बात है।

 

जय श्री राम।

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