Posted in छोटी कहानिया - Chooti Kahaniya

कमल vs🌷बुर्का की कहानी….

कमल vs🌷बुर्का की कहानी….

दरवाजे पे साँकल खड़खड़ाने लगी ..
खड़…खड़ खड़ंंडड
दरवाजे पे पड़ रही साँकल की चोट से सीलन भरी दीवारों से कच्चे हरे रंग की पपड़ी झड़ने लगी ..
और कील पर टँगा उर्दू का काबा बना कैलेंडर भी थरथराने लगा….
अब दरवाजे पर पान भरे मुँह से निकली आवाज ..
रेहाना….
ऐ रेहाना ..

अभी आई और सिलबट्टे पे मसाला पिसती रेहाना ..
हाथ दुपट्टे से पोंछ के दरवाजा खोलने भागी ..
और ..
इतने में बकरी से टकराते और मुर्गी को पैर से बचा कर ..
बकरी की लेंड़ियों पे पैर रख दौड़कर ..
अंदर से साँकल खोल कर बोली ..
“..कि आफत आ गयी है ..
क्या आसमान टूट पड़ा है ..?

जुम्मन फुर्ती से कोने में रखे सींक के मूढे पर बैठ कर धँसा हुआ ..
लंबी- लंबी साँसे ले रहा था …..
रेहाना ..पानी पिला …

रेहाना ,पानी लेकर आई ….
जुम्मन ने मुहँ से पान की पिसी हुई गिलोरी ..
पास में रखे तसले में थूकी और एक साँस में पानी गटक गया ..
फिर गले के हरे गमछे से पसीना पोंछ कर …बोला ..
“…रेहाना ..
अल्लाह का कहर टूट गया ..
पूरी की पूरी कौम ही काफिरी में तब्दील हो गयी ..
लगता है ..
साले खबीस ..
गद्दार ..हैं ..”

रेहाना ..को सब कुछ समझ आ गया था ..
वो अपनी खुशी को बनावटी चिंता में लपेट कर ..बोली

“….क्या हुआ ..
आज तो काउंटिंग थी ..
असलम भाई नहीं जीते क्या ?..”..

अरे तू जीत छोड़ ..
पूरे सूबे के लगभग सब ही हार गए हैं ..
कमल वाले जीत गए हैं ..
हमारी सीट पे हमारी कौम के वोट ज्यादा होने पर भी कमल वाले जीत गए हैं..
हाती वाली भेन जी कह रही थी के मुए अमेत साऐ ने मसीनों में ..
दखलन्दाजी करी हे ..
या अल्लाह यकीन नहीं होता …
इंतिखाब तो संजीदगी से हुए थे ..
अकलेस भाईजान ने ..सारे बंदोबस्त चाक-चोबन्द किए थे …

जुम्मन मियाँ के निकाह तो चार हुए थे पर ..
पेहले वालियों ने कोई बच्चा नहीं जना..
सो तलाकएसुन्ना से तुराह के बाद ..
पीछा छुड़ाया ..
बाद वालियों में तीसरी का इंतकाल हो गया था ..

चौथी रेहाना थी …
जिससे एक लड़के और एक लड़की शबनम थी ..

जिसका निकाह ..
..उसके मौसेरे भाई सईद से हुआ था ..
जो तुनक मिजाज था और आये दिन तलाक की धमकी दिये रहता था ..
इसलिए एतिहातन कुछ दिनों से शबनम मायके में ही थी ….
जुम्मन अब सामान्य होकर भी ..
पेशानी ..पे लकीरे ला के सबको समझा रहे थे ..

देखो अब कमल वाले जीत गए हैं ..
उनकी सरकारे बनेगी ….
तुम लोग सबर करना ..
बिलावजह मत उलझना….
अबी होली आ रही है ..
बर्दाश्त न हो तो घर में रहना ..
फ़सादी दोनों तरफ हे ..

इतने में शबनम आ गयी ..
चिकन बिरयानी ..का थाल लेकर ..
जुम्मन ने ..आँखे तरेर कर कहा ..
सूबे में हमारे तरफदार हार गए हैं ..
और …और
तुम ..दावती खाना ..बना बैठी ..

रेहाना ..ने पानी का टोंटी वाला जग ..रखते हुए जवाब दिया ..

सुबु- सुबु तुम नये कुर्ते पजामे में इतर लगा के चले थे..
तो हम ने सोचा कि जश्न होगा ही ..
कुछ खास बना ले ..
अब हमें भी कोन सा पता था ..
ये खबर आएगी ..

जुम्मन ..सहमत था …..
बाप बेटे थाल के चारों और बैठकर एक ही थाल से बिरयानी खाने में मशगूल हो गए …..

उधर.रसोई में रेहाना ने शबनम को बाहों में भरकर कहा ..
मेरी बच्ची अल्लाह तआला ने हमारी सुन ली अब ..
तुझे तलाक देने के पहले उसे 10 बार सोचना पड़ेगा ..
अब तलाक उल बिद्दत पे रोक लग ही जायेगी ..
उधर आड़ में जाकर शबनम ने बुर्के के अंदर जेब से #कमल_चुनाव_चिन्ह_का_बिल्ला निकाल कर चुम लिया ..
या अल्लाह ..तेरी मेहरबानी ……
गली में बीजेपी के उम्मीदवार के विजयी जुलुस के नगाड़े बज चुके थे …
और भारत माता की जय के नारे में
रेहाना और शबनम भी मन ही मन “#जय” के नारे दोहरा रही थी ..
भारत माता की जय
भारत माता की जय जय ..

.. इति ..
कहानी कैसी लगी कमेंट्स में जरूर बताना ..
धन्यवाद

विष्णु अरोड़ाजी

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

One thought on “कमल vs🌷बुर्का की कहानी….

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s