Posted in કવિતા - कविता - Kavita

मैं रूठा , तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ?


मैं रूठा ,
तुम भी रूठ गए
फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है ,
कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप ,
तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से ,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर ,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी ,
न तुम राजी ,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन
दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी ,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?

एक अहम् मेरे ,
एक तेरे भीतर भी ,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला
रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन
एक ने आँखें….
तो कल इस बात पर फिर
पछतायेगा कौन ?

अमीत पाठक

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Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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