Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

प्रारब्ध


*PRARABDH (प्रारब्ध)*

Bodh kathaa..
    एक गुरूजी थे । हमेशा ईश्वर के नाम का जाप किया करते थे । काफी बुजुर्ग हो गये थे । उनके कुछ शिष्य साथ मे ही पास के कमरे मे रहते थे ।
     जब भी गुरूजी को शौच; स्नान आदि के लिये जाना होता था; वे अपने शिष्यो को आवाज लगाते थे और शिष्य ले जाते थे ।
    धीरे धीरे कुछ दिन बाद शिष्य दो तीन बार आवाज लगाने के बाद भी कभी आते कभी और भी देर से आते ।
    एक दिन रात को निवृत्त होने के लिये जैसे ही गुरूजी आवाज लगाते है, तुरन्त एक बालक आता है और बडे ही कोमल स्पर्श के साथ गुरूजी को निवृत्त करवा कर बिस्तर पर लेटा जाता है । अब ये रोज का नियम हो गया ।
    एक दिन गुरूजी को शक हो जाता है कि, पहले तो शिष्यों को तीन चार बार आवाज लगाने पर भी देर से आते थे । लेकिन ये बालक तो आवाज लगाते ही दूसरे क्षण आ जाता है और बडे कोमल स्पर्श से सब निवृत्त करवा देता है ।
    एक दिन गुरूजी उस बालक का हाथ पकड लेते है और पूछते कि सच बता तू कौन है ? मेरे शिष्य तो ऐसे नही हैं ।
    वो बालक के रूप में स्वयं ईश्वर थे; उन्होंने गुरूजी को स्वयं का वास्तविक रूप दिखाया।
     गुरूजी रोते हुये कहते है : हे प्रभु आप स्वयं मेरे निवृत्ती के कार्य कर रहे है । यदि मुझसे इतने प्रसन्न हो तो मुक्ति ही दे दो ना ।
     प्रभु कहते है कि जो आप भुगत रहे है वो आपके प्रारब्ध है । आप मेरे सच्चे साधक है; हर समय मेरा नाम जप करते है इसलिये मै आपके प्रारब्ध भी आपकी सच्ची साधना के कारण स्वयं कटवा रहा हूँ ।
     गुरूजी कहते है कि क्या मेरे प्रारब्ध आपकी कृपा से भी बडे है; क्या आपकी कृपा, मेरे प्रारब्ध नही काट सकती है ।
     प्रभु कहते है कि, मेरी कृपा सर्वोपरि है; ये अवश्य आपके प्रारब्ध काट सकती है; लेकिन फिर अगले जन्म मे आपको ये प्रारब्ध भुगतने फिर से आना होगा । यही कर्म नियम है । इसलिए आपके प्रारब्ध स्वयं अपने हाथो से कटवा कर इस जन्म-मरण से आपको मुक्ति देना चाहता हूँ ।
     ईश्वर कहते है: प्रारब्ध तीन तरह के होते है । मन्द, तीव्र तथा तीव्रतम ।

मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते है । तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है । पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है।

लेकिन जो हर समय श्रद्धा और विश्वास से मुझे जपते हैं; उनके प्रारब्ध मैं स्वयं साथ रहकर कटवाता हूँ और तीव्रता का अहसास नहीं होने देता हूँ ।
  *प्रारब्ध पहले रचा, पीछे रचा शरीर ।*

  *तुलसी चिन्ता क्यो करे, भज ले श्री रघुबीर।।
संकलन— सुनीता लुल्ला

Posted in रामायण - Ramayan

श्री राम कथा


मंगल  भवन  अमंगल   हारी ।
द्रवउ सो दशरथ अजिर बिहारी ।।
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाड़्ग  सीतासमारोपितवामभागम् ।
  पाणौ  महासायकचारूचापं नमामि   रामं  रघुवंशनाथम् ।।
रामायण प्रभु श्रीराम की कथा है, जिन्हें श्रवण करने से या पाठ करने से पाप ताप संताप (त्रयताप ) का नाश होता है।रामायण को राम रूप भी कहा गया है।रामायण में सात काण्ड हैं। ये सात काण्ड सात सुन्दर सीढ़ियाँ हैं, जो श्रीरघुनाथजी की भक्ति को प्राप्त करने के मार्ग हैं।जिस पर श्रीहरि की अत्यन्त कृपा होती है, वही इस मार्ग पर पैर रखता है।
बाल काण्ड—–रामायण का प्रथम अध्याय बालकाण्ड है ।प्रभु श्रीराम के चरण समान हैं।जहाँ प्रभु के चरण पड़ते हैं, वहाँ जय जयकार होती है।बालक के समान निश्छल, निष्कपट तथा अभिमान रहित जिसका मन है अर्थात जिसका मन सरल है, वही प्रभु को पा सकता है।प्रभु ने रामायण में स्वयं कहा है—–निर्मल मन जन सो मोहे पावा। मोहे कपट छल छिद्र न भावा ।।
अयोध्याकाण्ड—– श्रीराम का अवतार अयोध्या में हुआ।अयोध्या का अर्थ है न  युद्धा भवति अर्थात जहाँ युद्ध न हो।जैसे राम सबसे प्रेम करते हैं, यदि हम भी इसी तरह सबसे प्रेम करें तो प्रभु श्रीराम जैसे अयोध्या में प्रकट हुए वैसे ही हमारे अंदर भी प्रकट होंगे।अपना सर्वस्व प्रभु के चरणों में अर्पित कर हमें प्रेमपूर्वक जीवन निर्वाह करना चाहिए।
अरण्यकाण्ड ———अरण्यकाण्ड में प्रभु श्रीराम ने अयोध्या के महल तथा वहाँ का वैभव का त्याग कर वन गमन किया।मन में सन्यास धारण किया। पिता की आज्ञा से उन्होंने चौदह वर्षों तक का वनवास स्वीकार किया।वन जाते समय उनके मुख पर कोई दु:ख नहीं था ।श्रीराम तो पिता के वचन का मान रख रहे थे। मन से सन्यासी प्रभु श्री राम के चरणों में हमें भी उनकी भक्ति के सिवा और कोई इच्छा नहीं होनी चाहिये। माया मोह स्वार्थ लोभ अहंकार को तजकर अपना सर्वस्व प्रभु को समर्पित कर उनकी शरण ग्रहण करना चाहिये।
वनवासी सीताराम को, लक्ष्मण सहित प्रणाम ।
जिनके सुमिरन भजन से , होत सफल सब काम ।।
किष्किन्धाकान्ड ——–किष्किन्धाकाण्ड जहाँ प्रभु श्रीराम की मुलाकात हनुमान से हुई।हनुमान ने सुग्रीव को प्रभु से मिलाया तथा सुग्रीव का दु:ख मिटाया था।किष्किन्धाकाण्ड प्रभु का कंठ स्वरूप है।प्रभु जिसे अपना जानकर गले से लगा लेते हैं,उसके सारे दु:ख दूर कर, जन्म मरण के चक्र से भी मुक्त कर देते हैं।
हनुमान सुसंयम ब्रह्मचारी, प्रभु को निज पीठ पर बिठाया था ।
राम सुकंठ पास पहुँचाय उनको, सुग्रीव का दु:ख मिटाया था ।।
सुन्दरकाण्ड ——-सुन्दरकाण्ड का रहस्य है , हनुमान जी के तरह सुन्दर और निर्मल हृदय बनें ,हनुमान जैसे हृदय में सीता रामजी को धारण करते हैं, हर पल हर क्षण सुमिरन करते रहते हैं , वैसे ही हमें भी प्रभु को अपने मन मंदिर मे बिठाकर उनका सुमिरन करते रहना चाहिये।सुन्दरकाण्ड मे हनुमानजी की लीलाओं का वर्णन है। राम चरित मानस का पाठ करने से प्रभु श्रीरामजी के साथ- साथ हनुमानजी भी प्रसन्न होते हैं।
 
सुन्दरकाण्ड रामायण का सबसे सुन्दर काण्ड।
पढ़े सुने जो सादर सदा , पाप ताप हो नाश ।।
सुन्दर श्री हनुमान के , सुन्दर ही सब खेल ।
पावन सीता राम का ,  करवाते हैं  मेल    ।।
लंकाकाण्ड ——–लंकाकाण्ड में प्रभु श्रीराम ने रावण का वध कर समस्त संसार को सुखी किया । रावण अर्थात काम, क्रोध, मोह तथा अहंकार का नाश कर शांति स्थापित किया।रावण मोह रूपी अविद्या का नाम है जो हर मनुष्य के अंदर है।इसे समाप्त किये बिना सच्ची शांति नहीं मिल सकती है।
उत्तरकाण्ड——-प्रभु श्रीराम ने रावण का संहार कर राम राज्य स्थापित किया । जब मन से सारे विकार दूर हो जाते हैं तभी ज्ञान तथा भक्ति का प्रकाश उदित होता है और जीवात्मा तथा परमात्मा दोनों एक स्वरूप होते हैं।
   दोहा-       राम चरन रति जो चह अथवा पद निर्बान ।
                  भाव सहित सो यह कथा करउ श्रवन पुट पान ।।
जो श्रीरामजी के चरणों में प्रेम चाहता हो या मोक्ष पद चाहता हो , वह इस कथारूपी अमृत को  प्रेम पूर्वक अपने कान रूपी दोने से                             पिये ।जो मनुष्य रघुवंश के भूषण श्रीरामजी का यह चरित्र कहते हैं , सुनते हैं और गाते हैं, वे कलियुग के पाप और मन के मल को धोकर बिना ही परिश्रम श्रीरामजी के परम धाम को चले जाते हैं।श्रीराम का स्मरण करने वाला परम गति को सहज ही प्राप्त कर लेता है।इसलिये एक नाम श्रीराम , एक ही व्रत है –उनका पूजन , एक ही मन्त्र है– उनका नाम जप । एेसा करने वाले भवसागर से सहज ही गाय के खुर के समान पार उतर जाते है।
Posted in हिन्दू पतन

हमें विश्व के #_57_मुस्लिम_देशों से कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको विश्व में सिर्फ एक #हिंदू_राष्ट्र देश बनने से खतरा है


हमें विश्व के #_57_मुस्लिम_देशों से कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको विश्व में सिर्फ एक #हिंदू_राष्ट्र देश बनने से खतरा है ———-

हमें 57 देशों के #मुस्लिम_कट्टरवाद से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें सिर्फ #हिंदूवाद_की_कट्टरता से खतरा है ——–

हमें विश्व में बनने वाली #लाखों_करोड़ों_मस्जिदों से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें अयोध्या में बनने वाले #श्रीराम_के_एक_मंदिर से खतरा है——–

अगर भारत का #राष्ट्रपति_मुस्लिम और #उपराष्ट्रपति_मुस्लिम बनता है तो हमें उससे कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें किसी राज्य का #मुख्यमंत्री_सन्यासी बन जाए तो भी खतरा है ——–

वो घर-घर से #अफजल निकालते है , हमें फिर भी उनसे कोई खतरा नहीं है लेकिन हमारे घर से एक #योगी निकलता है, तो भी उनको खतरा है ————

हमें माशाल्लाह, अल्लाह-हू-अकबर, नमाज, काबा, रमजान आदि से कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको #जयश्रीराम के जयकारे से खतरा है ———

हमें हरे कपडे, बुर्के, जालीदार टोपी से कोई खतरा नहीं है लेकिन उन्हें #भगवे रंग के कपड़ों से और #गेरुए रंग के तिलक से खतरा है ———

चार शादी करके 60 बच्चे पैदा करने वालों से हमें कोई खतरा नहीं है लेकिन उनको #RSS_केअविवाहित_सदस्यों से खतरा है ———-

उनको #हजयात्रा में मिलने वाली #सब्सिडी से हमें कोई खतरा नहीं है लेकिन अगर हम टैक्स देकर भी #तीर्थयात्रा करें तो भी उनको खतरा है ———

हमें सुन्नी, शिया, अहमदिया किसी से खतरा नहीं है लेकिन उनको #हिन्दू नाम से ही खतरा है ॥

#अजीब_मानसिकता है ॥

#हिन्दू# ॥

Posted in गौ माता - Gau maata

कत्लखाने बन्द होने पर करोड़ो का होगा नुकसान, बोलने वाली मीडिया पढ़े #सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर…


कत्लखाने बन्द होने पर करोड़ो का होगा नुकसान, बोलने वाली मीडिया पढ़े #सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर…

देखिये वीडियो

योगी #आदित्यनाथ ने यूपी के मुख्यममंत्री बनने के बाद कई कत्लखाने बन्द करवा दिए पर इस कार्य की सराहना करने की बजाय मीडिया की सुर्खियों में कुछ नया विवाद ही देखने को मिल रहा है। जैसे कि कत्लखाने बंद होने से करोड़ों का नुकसान होगा, कई लोग #बेरोजगार हो जाएंगे आदि ।

लेकिन ऐसा ही मामला #स्वर्गीय श्री राजीव दीक्षित सुप्रीम कोर्ट में लेकर गए थे ।

आइये जानते है क्या कहा था राजीव दीक्षित ने और क्या था सुप्रीम कोर्ट का आर्डर !!

राजीव दीक्षित ने सुप्रीम कोर्ट के मुकदमें मे कसाईयों द्वारा गाय काटने के लिए वही सारे कुतर्क रखे जो कभी शरद पवार द्वारा बोले गए या इस देश के ज्यादा पढ़ें लिखे लोगों द्वारा बोले जाते हैं या देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू द्वारा कहे गए थे और आज जो मीडिया द्वारा कहे जा रहे हैं ।

#कसाईयो के कुतर्क

1) गाय जब बूढ़ी हो जाती है तो बचाने मे कोई लाभ नहीं उसे कत्ल करके बेचना ही बढ़िया है

और हम भारत की अर्थ व्यवस्था को मजबूत बना रहे हैं क्योंकि गाय का मांस एक्सपोर्ट कर रहे हैं ।

2) भारत में गाय के चारे की कमी है । वह भूखी मरे इससे अच्छा ये है कि हम उसका कत्ल करके बेचें ।

3) भारत में लोगो को रहने के लिए जमीन नहीं है गाय को कहाँ रखें ?

4 ) इससे विदेशी मुद्रा मिलती है और सबसे खतरनाक कुतर्क जो कसाइयों की तरफ से दिया गया है कि गाय की हत्या करना हमारे इस्लाम धर्म में लिखा हुआ है कि हम गायों की हत्या करें (this is our religious right )

श्री राजीव दीक्षित की तरफ से बिना क्रोध प्रकट किए बहुत ही धैर्य से इन सब कुतर्को का तर्कपूर्वक जवाब दिया गया।

उनका पहला कुतर्क गाय का मांस बेचते हैं तो आमदनी होती है देश को ।

राजीव भाई ने सारे आंकड़े सुप्रीम कोर्ट में रखे कि एक गाय को जब काट देते हैं तो उसके शरीर में से कितना मांस निकलता है?

कितना खून निकलता है??

कितनी हड्डियाँ निकलती हैं ??

एक स्वस्थ्य गाय का वजन कमसे कम 3 से साढ़े तीन कवींटल होता है उसे जब काटे तो उसमे से मात्र 70 किलो मांस निकलता है एक किलो गाय का मांस जब भारत से एक्सपोर्ट (Export )होता है तो उसकी कीमत है लगभग 50 रुपए ! तो 70 किलो का 50 से गुना को ! 70 x 50 = 3500 रुपए !

खून जो निकलता है वो लगभग 25 लीटर होता है ! जिससे कुल कमाई 1500 से 2000 रुपए होती है !

फिर #हड्डियाँ निकलती है वो भी 30-35 किलो हैं ! जो 1000 -1200 के लगभग बिक जाती है !!

तो कुल मिलकर एक गाय का जब कत्ल करें और मांस ,हड्डियाँ खून समेत बेचें तो सरकार को या कत्ल करने वाले कसाई को 7000 रुपए से ज्यादा नहीं मिलता !!

फिर राजीव भाई द्वारा कोर्ट के सामने उल्टी बात रखी गई कि यदि गाय को कत्ल न करें तो क्या मिलता है ? हमने कत्ल किया तो 7000 मिलेगा और अगर इसको जिंदा रखे तो कितना मिलेगा ?

तो उसका कैलकुलेशन (Calculation) ये है !!

एक गाय एक दिन मे 10 किलो #गोबर देती है और ढाई से 3 लीटर #मूत्र देती है । गाय के एक किलो गोबर से 33 किलो Fertilizer (खाद ) बनती है ।जिसे organic खाद कहते हैं तो कोर्ट के जज ने कहा how it is possible ??

राजीव भाई द्वारा कहा गया कि आप हमें समय और स्थान दीजिये हम आपको यही सिद्ध करके बताते हैं ।

कोर्ट ने आज्ञा दी तो राजीव भाई ने उनको पूरा करके दिखाया और कोर्ट से कहा कि आई. आर. सी. के वैज्ञानिक को बुला लो और टेस्ट करा लो । जब गाय का गोबर कोर्ट ने भेजा टेस्ट करने के लिए तो वैज्ञानिकों ने कहा कि इसमें 18 micronutrients (पोषक तत्व ) हैं। जो सभी खेत की मिट्टी को चाहिए जैसे मैगनीज है ! फोस्फोरस है ! पोटाशियम है, कैल्शियम,आयरन, #कोबाल्ट, सिलिकोन ,आदि आदि । रासायनिक खाद में मुश्किल से तीन होते हैं । तो गाय का खाद #रासायनिक खाद से 10 गुना ज्यादा ताकतवर है । ये बात कोर्ट को माननी पड़ी !

#राजीव भाई ने कहा अगर आपके र्पोटोकोल के खिलाफ न जाता हो तो आप चलिये हमारे साथ और देखे कहाँ – कहाँ हम 1 किलो #गोबर से 33 किलो खाद बना रहे हैं राजीव भाई ने कहा मेरे अपने गाँव में मैं बनाता हूँ ! मेरे माता पिता दोनों किसान हैं पिछले 15 साल से हम गाय के गोबर से ही खेती करते हैं !

1 किलो गोबर है तो 33 किलो खाद बनता है और 1 किलो खाद का जो #अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भाव है वो 6 रुपए है ! तो रोज 10 किलो गोबर से 330 किलो #खाद बनेगी ! जिसे 6 रुपए किलो के हिसाब से बेचें तो 1800 से 2000 रुपए रोज का गाय के गोबर से मिलता है !

और गाय के गोबर देने मे कोई सन्डे (Sunday) नहीं होता Weekly Off नहीं होता ! हर दिन मिलता है ।

साल में कितना?

1800 x 365 = 657000 रुपए साल का !

और गाय की सामान्य उम्र 20 साल है और वो जीवन के अंतिम दिन तक #गोबर देती है ।

तो 1800 गुना 365 गुना 20 कर लो आप !! 1 करोड़ से ऊपर तो मिल जाएगा केवल गोबर से !

अब बात करते हैं #गौ मूत्र की । रोज का 2 – सवा दो लीटर देती है । इसमें सुवर्ण क्षार होता है जो वैज्ञानिकों ने भी सिद्ध करके दिखाया है और इससे औषधियां बनती है

Diabetes Arthritis

Bronkitis, Bronchial Asthma, Tuberculosis, Osteomyelitis ऐसे करके 48 रोगो की #औषधियां बनती हैं और गाय के एक लीटर मूत्र का बाजार में दवा के रूप मे कीमत 500 रुपए है । वो भी भारत के बाजार में, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तो इससे भी ज्यादा है ।

अमेरिका में गौ मूत्र #Patent हैं और अमरीकी सरकार हर साल भारत से गाय का मूत्र Import करती है और उससे कैंसर की Medicine बनाते हैं।diabetes की दवा बनाते हैं और अमेरिका मे गौ मूत्र पर एक दो नहीं तीन patent है । #अमेरिकन market के हिसाब से calculate करें तो 1200 से 1300 रुपए लीटर बैठता है एक लीटर मूत्र, तो गाय के मूत्र से लगभग रोज की 3000 की आमदनी

और एक साल का 3000 x 365 =1095000

और 20 साल का 300 x 365 x 20 = 21900000

इतना तो गाय के #गोबर और #मूत्र से हो गया एक साल का ।

और इसी #गाय के गोबर से एक गैस निकलती है जिसे मैथेन कहते हैं और मैथेन वही गैस है जिससे आप अपने रसोई घर का सिलंडर चला सकते हैं और जरूरत पड़ने पर गाड़ी भी चला सकते हैं ।

जैसे #LPG गैस से गाड़ी चलती है वैसे मैथेन गैस से भी गाड़ी चलती है तो न्यायधीश को विश्वास नहीं हुआ तो #राजीव भाई ने कहा आप अगर आज्ञा दो तो आपकी कार में मेथेन गैस का सिलंडर लगवा देते हैं ।आप चला के देख लो उन्होने आज्ञा दी और राजीव भाई ने लगवा दिया और जज साहब ने 3 महीने गाड़ी चलाई और उन्होने कहा Its #Excellent

क्यूंकि इसका खर्चा आता है मात्र 50 से 60 पैसे किलोमीटर और डीजल से आता है 4 रुपए किलो मीटर ।

मेथेन गैस से गाड़ी चले तो #धुआँ बिलकुल नहीं निकलता । डीजल गैस से चले तो धुआँ ही धुआँ । मेथेन से चलने वाली गाड़ी में शोर बिलकुल नहीं होता और डीजल से चले तो इतना शोर होता है कि कान के पर्दे फट जाएँ तो ये सब जज साहब की समझ में आया ।

तो फिर हम (राजीव भाई ने कहा ) अगर रोज का 10 किलो गोबर इकट्ठा करें तो एक साल में कितनी मेथेन #गैस मिलती है? 20 साल में कितनी मिलेगी और भारत मे 17 करोड़ गाय हैं सबका गोबर एक साथ इकठ्ठा करें और उसका ही इस्तेमाल करे तो 1 #लाख 32 हजार करोड़ की बचत इस देश को होती है ।बिना डीजल ,बिना पट्रोल के हम पूरा ट्रांसपोटेशन इससे चला सकते हैं । अरब देशो से भीख मांगने की जरूरत नहीं और पट्रोल डीजल के लिए #अमेरिका से डालर खरीदने की जरूरत नहीं । अपना रुपया भी मजबूत ।

तो इतने सारे #Calculation जब राजीव भाई ने दिए सुप्रीम कोर्ट में तो जज ने मान लिया कि गाय की हत्या करने से ज्यादा उसको बचाना आर्थिक रूप से लाभकारी है ।

जब कोर्ट की #Opinion आई तो ये मुस्लिम कसाई लोग भड़क गए उनको लगा कि अब केस उनके हाथ से गया क्योंकि उन्होने कहा था कि गाय का कत्ल करो तो 7000 हजार की इन्कम और इधर #राजीव भाई ने सिद्ध कर दिया कत्ल ना करो तो लाखो करोड़ो की इन्कम । और फिर उन्होने ने अपना Trump Card खेला । उन्होंने कहा कि गाय का कत्ल करना हमारा धार्मिक अधिकार है (this is our religious right )

तो राजीव भाई ने कोर्ट में कहा कि अगर ये इनका धार्मिक अधिकार है तो #इतिहास में पता करो कि किस – किस मुस्लिम राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का प्रयोग किया? तो कोर्ट ने कहा ठीक है एक कमीशन बैठाओ हिस्टोरीयन को बुलाओ और जितने मुस्लिम राजा भारत में हुए, सबकी #History निकालो दस्तावेज़ निकालो और किस किस राजा ने अपने इस धार्मिक अधिकार का पालन किया ?

कोर्ट के आदेश अनुसार पुराने दस्तावेज जब निकाले गए तो उससे पता चला कि भारत में जितने भी मुस्लिम राजा हुए एक ने भी गाय का कत्ल नहीं किया । इसके उल्टा कुछ राजाओ ने गायों के कत्ल के खिलाफ कानून बनाए । उनमे से एक का नाम था बाबर । बाबर ने अपनी पुस्तक बाबर नामा में लिखवाया है कि मेरे मरने के बाद भी गाय के कत्ल का कानून जारी रहना चाहिए । तो उसके पुत्र #हुमायु ने भी उसका पालन किया और उसके बाद जितने मुगल राजा हुए सबने इस कानून का पालन किया Including औरंगजेब ।

फिर दक्षिण भारत में एक राजा था हेदर आली टीपू सुल्तान का बाप । उसने एक कानून बनवाया था कि अगर कोई गाय की हत्या करेगा तो हैदर उसकी गर्दन काट देगा और हैदर अली ने ऐसे #सैकंडो कसाइयों की गर्दन काटी थी जिन्होंने गाय को काटा था फिर हैदर अली का बेटा आया टीपू सुलतान तो उसने इस कानून को थोड़ा हल्का कर दिया तो उसने कानून बना दिया की हाथ काट देना ।

तो टीपू सुलतान के समय में कोई भी अगर गाय काटता था तो उसका हाथ #काट दिया जाता था |

तो ये जब दस्तावेज जब कोर्ट के सामने आए तो राजीव भाई ने जज #साहब से कहा कि आप जरा बताइये अगर इस्लाम में गाय को कत्ल करना धार्मिक अधिकार होता तो बाबर तो कट्टर इस्लामी था 5 वक्त की नमाज पढ़ता था हिमायु और #औरंगजेब तो सबसे ज्यादा कट्टर थे तो इन्होंने क्यों नहीं गाय का कत्ल करवाया ??

क्यों गाय का #कत्ल रोकने के लिए कानून बनवाए ?? क्यों हेदर अली ने कहा कि वो गाय का कत्ल करने वाले का गर्दन काट देगा ??

तो #राजीव भाई ने कोर्ट से कहा कि आप हमे आज्ञा दें तो हम ये कुरान #शरीफ, #हदीस,आदि जितनी भी पुस्तकें हैं हम ये कोर्ट मे पेश करते हैं और कहाँ लिखा है गाय का कत्ल करो ये जानना चाहतें है ।

इस्लाम की कोई भी धार्मिक पुस्तक में नहीं लिखा है कि गाय का कत्ल करो ।

हदीस में तो लिखा हुआ है कि गाय की #रक्षा करो क्यूंकि वो तुम्हारी रक्षा करती है । पैंगबर मुहमद साहब का #Statement है कि गाय अबोल जानवर है इसलिए उस पर दया करो और एक जगह लिखा है गाय का कत्ल करोगे तो नरक में भी जमीन नहीं मिलेगी।

राजीव भाई ने कोर्ट से कहा अगर कुरान ये कहती है मुहम्मद साहब ये कहते हैं हदीस ये कहती है तो फिर ये #गाय का कत्ल करना धार्मिक अधिकार कब से हुआ??

पूछो इन कसाईयो से ??

तो कसाई बोखला गए और राजीव भाई ने कहा अगर मक्का मदीना में भी कोई किताब हो तो ले आओ उठा के ।

अंत में कोर्ट ने उनको 1 महीने का पर्मिशन दिया कि जाओ और दस्तावेज ढूंढ के लाओ जिसमें लिखा हो गाय का कत्ल करना इस्लाम का मूल अधिकार है । हम मान लेंगे ।

और एक महीने तक भी कोई #दस्तावेज़ नहीं मिला । कोर्ट ने कहा अब हम ज्यादा समय नहीं दे सकते और अंत 26 अक्तूबर 2005 Judgement आ गया और आप चाहें तो Judgement की copy www. supremecourtcaselaw . com पर जाकर Download कर सकते हैं ।

यह 66 पन्ने का #Judgement है सुप्रीम कोर्ट ने एक इतिहास बना दिया और उन्होंने कहा कि गाय को काटना संवैधानिक पाप है धार्मिक पाप है और सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गौ रक्षा करना,सर्वंधन करना देश के प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक कर्त्तव्य है । सरकार का तो है ही नागरिकों का भी कर्तव्य है ।

अब तक जो संवैधानिक कर्तव्य थे जैसे , संविधान का पालन करना, #राष्ट्रीय ध्वज ,का सम्मान करना, #क्रांतिकारियों का सम्मान करना, देश की एकता, अखंडता को बनाए रखना आदि आदि अब इसमें गौ की रक्षा करना भी जुड़ गया है ।

#सुप्रीम_कोर्ट ने कहा कि भारत के सभी राज्यों की सरकार की जिम्मेदारी है कि वो गाय का कत्ल अपने अपने राज्य में बंद कराये और किसी राज्य में गाय का कत्ल होता है तो उस राज्य के #मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी है #राज्यपाल की जवाबदारी, चीफ सेकेट्री की जिम्मेदारी है, वो अपना काम पूरा नहीं कर रहे है तो ये राज्यों के लिए #संवैधानिक जवाबदारी है और नागरिको के लिए संवैधानिक कर्त्तव्य है ।

ये तो केवल गाय के गोबर और गौ मूत्र की बात की गई । अगर उसके दूध की बात करे तो कितने करोड़ का आंकड़ा पहुँच जायेगा ।

अब कई तथाकथित मीडिया वाले या सेकुलर बोलेंगे कि हम गाय की बात नही करते है हम भैंस आदि #पशु की बात करते हैं तो भैस के गोबर और मूत्र को खेत में डालने से अधिक धान, सब्जी आदि पैदा किये जाते हैं तो उससे गोबर और #मूत्र से भी पैसा कमा सकते हैं और उसके दूध आदि से भी करोड़ो रूपये कमा सकते हैं और एक #भैंस की कीमत 70,000 से 80,000 गिने तो भी उसके मीट, खून, हड्डियां, चमड़ा आदि बेचने से कई अधिक पैसा होता है ।

मीट खाने से कई #बीमारियां भी होती है और उसका दूध पीने से व्यक्ति स्वस्थ रहता है अतः कत्लखाने बन्द करना ही उचित होगा ।

जय गौमाता…!!

Posted in हिन्दू पतन

टुंडे कबाब


उत्तर प्रदेश के हिन्दू भैंसे का मांस (बड़ा ) नहीं खाते | गौ मांस की तरह इसे भी वर्जित माना जाता है | जब रोक भैंस के काटने ( गैर क़ानूनी ) पर लगी है तो “टुंडे कबाब” के बंद होने या मांस आपूर्ति में समस्या आने का प्रश्न ही नहीं उठता | पर दुकान का बंद होना और चिल्ला – चिल्ला कर रोना , चोर की दाढ़ी का तिनका दिखा रहा है |
आँख खोलो ….२४० मसालों के नाम पर ऐ “टुंडा कबाब” आपको बकरा बता कर भैंसा खिला रहा था | सबसे पहले तो इसकी ढंग से मरम्मत होनी चाहिए उसके बाद क़ानूनी कार्यवाई | हमारे अवधी में कहा जाता है ..
यद्धपि फरै बबुल मा बेल , बालू मा से निकले तेल |
कूकुर पानी पिए सुरुक्का , तबै न मानै बात तुरुक्का ||
यह बात पूर्वजों ने ऐसे ही नहीं कह दी ..इसके पीछे उनका सदियों का अनुभव था , उनका अपना सामाजिक विज्ञान था , जिसके आधार पर मलेक्षों के घर – हाथ का भोजन वर्जित था |
कुछ नवधनाड्यों ने अग्रेजी के चार शब्द क्या सीख लिए , मानो इन्हें मुँह पे पावडर पोत कर पूर्वजों के बनाए नियमों को तोड़ने का अधिकार मिल गया | और ..पहुँच गए बाप – दादा के नियमों को ताख पर रख कर “टुंडे कबाब ” खाने और खा आये भैंसा ..क्या पता ससुरे ने और क्या – क्या खिला दिया हो | जय हो योगी बाबा की वरना दो आखों की अंधी कौम को यह सच्चाई कभी न दिखती …
कुछ दिन पहले , हैदरावाद के एक अति विश्वस्त सज्जन ने भी बताया था कि किस तरह वहाँ पर हलीमा के नाम पर गौ मांस खिलाया जा रहा है | यही हाल सभी हैदरावादी विरयानी की दुकानों का भी है |
ऐ बिरयानी और कबाब की दावत और इसका चस्का लगवाना आप के पतन की पहली सीढ़ी है , लव – जिहाद और सेकुलर बनाने का खेल यहीं से प्रारम्भ होता है | जो दोस्त आपको इन अड्डों पर ले जाता है वो आपके साथ कभी झटका या पोर्क खाएगा ?? कभी नहीं …| तो फिर, क्या आप की जीभ इतनी विवश हो गई है कि स्वाद के नाम पर कुछ भी खा लेंगे ? इस पूरे प्रकरण में सीख यह है कि आज से खाने – पीने के मामले में थोडा सोच – समझ के | ज्यादा उदारता इन्शान को कहीं का नहीं छोडती |
जो ज्यादा तेज रुदाली कर रहा हैं उनसे कहिए कि अब बड़े की जगह पोर्क (सूअर ) का कबाब खाएं , आखिर बामपंथ के हिसाब से मांस तो मांस ही होता है न ..प्रोटीन तो सुअर के मांस में भी भरपूर है और सुना है कि उसमे तेल की बचत भी खूब होती है !!

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हम सबको मिलकर यह सोचना चाहिए कि


हम सबको मिलकर यह सोचना चाहिए कि

बाबर ने राममन्दिर क्यूँ तोड़ा ??????
क्या बाबर का भगवान राम से कोई झगड़ा हुआ था

मोहहमद गजनवी ने भगवान शंकर का सोमनाथ का मन्दिर क्यूँ तोड़ा ??????
क्या गजनवी का भगवान शंकर से झगड़ा हुआ था

औरंगजेब ने काशी विश्वनाथ क्यूँ तोड़ा ?????????

औरंगजेब ने कृष्ण जन्मभूमि क्यूँ तोड़ी ?????????

मोहम्म्द आली जिन्ना और उसके सहयोगीयो मुसलमानो ने हमारी भारत माता क्यूँ तोड़ी ???????

मुंबई के ट्रेन में सफर करने वाले यात्री क्या किसी के दुश्मन थे ???????

काशी के संकटमोचन हनुमान में दर्शन करने वाले क्या किसी के शत्रु थे ???????

इन सभी प्रश्नो का उत्तर जब तक नहीं ढूँढेंगे तब तक इस धरती पर हिन्दू सुरक्षित नहीं रहेगा और हिन्दू राष्ट्र भी सुरक्षित नहीं रहेगा..

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मैं रूठा , तुम भी रूठ गए फिर मनाएगा कौन ?


मैं रूठा ,
तुम भी रूठ गए
फिर मनाएगा कौन ?

आज दरार है ,
कल खाई होगी
फिर भरेगा कौन ?

मैं चुप ,
तुम भी चुप
इस चुप्पी को फिर तोडेगा कौन ?

बात छोटी को लगा लोगे दिल से ,
तो रिश्ता फिर निभाएगा कौन ?

दुखी मैं भी और तुम भी बिछड़कर ,
सोचो हाथ फिर बढ़ाएगा कौन ?

न मैं राजी ,
न तुम राजी ,
फिर माफ़ करने का बड़प्पन
दिखाएगा कौन ?

डूब जाएगा यादों में दिल कभी ,
तो फिर धैर्य बंधायेगा कौन ?

एक अहम् मेरे ,
एक तेरे भीतर भी ,
इस अहम् को फिर हराएगा कौन ?

ज़िंदगी किसको मिली है सदा के लिए ?
फिर इन लम्हों में अकेला
रह जाएगा कौन ?

मूंद ली दोनों में से गर किसी दिन
एक ने आँखें….
तो कल इस बात पर फिर
पछतायेगा कौन ?

अमीत पाठक

Posted in हिन्दू पतन

अप्रैल फूल


अप्रैल फूल” किसी को कहने से पहले
इसकी
वास्तविक सत्यता जरुर जान ले.!!
पावन महीने की शुरुआत को मूर्खता दिवस
कह रहे
हो !!
पता भी है क्यों कहते है अप्रैल फूल (अप्रैल फुल
का
अर्थ है – हिन्दुओ का मूर्खता दिवस).??
ये नाम अंग्रेज ईसाईयों की देन है…
मुर्ख हिन्दू कैसे समझें “अप्रैल फूल” का मतलब बड़े
दिनों से बिना सोचे समझे चल रहा है अप्रैल फूल,
अप्रैल फूल ???
इसका मतलब क्या है.?? दरअसल जब ईसाइयत अंग्रेजो
द्वारा हमे 1 जनवरी का नववर्ष थोपा गया तो उस
समय लोग विक्रमी संवत के अनुसार 1 अप्रैल से
अपना
नया साल बनाते थे, जो आज भी सच्चे हिन्दुओ
द्वारा मनाया जाता है, आज भी हमारे बही
खाते
और बैंक 31 मार्च को बंद होते है और 1 अप्रैल से शुरू
होते है, पर उस समय जब भारत गुलाम था तो ईसाइयत
ने विक्रमी संवत का नाश करने के लिए साजिश करते
हुए 1 अप्रैल को मूर्खता दिवस “अप्रैल फूल” का नाम
दे दिया ताकि हमारी सभ्यता मूर्खता लगे अब आप
ही सोचो अप्रैल फूल कहने वाले कितने
सही हो
आप.?
यादरखो अप्रैल माह से जुड़े हुए इतिहासिक दिन और
त्यौहार
1. हिन्दुओं का पावन महिना इस दिन से शुरू होता है
(शुक्ल प्रतिपदा)
2. हिन्दुओ के रीति -रिवाज़ सब इस दिन के कलेण्डर
के अनुसार बनाये जाते है।
6. आज का दिन दुनिया को दिशा देने वाला है।
अंग्रेज ईसाई, हिन्दुओ के विरुध थे इसलिए हिन्दू के
त्योहारों को मूर्खता का दिन कहते थे और आप
हिन्दू भी बहुत शान से कह रहे हो.!!
गुलाम मानसिकता का सुबूत ना दो अप्रैल फूल लिख
के.!!
अप्रैल फूल सिर्फ भारतीय सनातन कलेण्डर, जिसको
पूरा विश्व फॉलो करता था उसको भुलाने और
मजाक उड़ाने के लिए बनाया गया था। 1582 में पोप
ग्रेगोरी ने नया कलेण्डर अपनाने का फरमान
जारी
कर दिया जिसमें 1 जनवरी को नया साल का प्रथम
दिन बनाया गया।
जिन लोगो ने इसको मानने से इंकार किया, उनको 1
अप्रैल को मजाक उड़ाना शुरू कर दिया और धीरे-
धीरे
1 अप्रैल नया साल का नया दिन होने के बजाय मूर्ख
दिवस बन गया।आज भारत के सभी लोग अपनी ही
संस्कृति का मजाक उड़ाते हुए अप्रैल फूल डे मना रहे
है।
जागो हिन्दुओ जागो।।
अपने धर्म को पहचानो।
इस जानकारी को इतना फैलाओ कि कोई भी इस आने वाली 1 अप्रैल से मूर्खता का परिचय न दे और और अंग्रेजों द्वारा प्रसिद्ध किया गया ये हिंदुओं का मजाक बंद होजाये ।

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अक्लमंद हंस


अक्लमंद हंस

एक विशाल पेड था । उसपर सहस्र हंस रहते थे । उनमें एक बुद्धिमानऔर दूरदर्शी हंस था । उन्हें सभी आदरपूर्वक ‘ताऊ’ कहकर बुलाते थे ।पेडके तने पर जडके निकट नीचे लिपटी हुई एक बेलको देखकर ताऊने कहा ‘‘देखो, इस बेलको नष्ट करदो । एक दिन यह बेल हम सभीके लिए कष्टदायी सिद्ध होगी ।’’एक युवा हंस हंसते हुए बोला ‘‘ताऊ, यह छोटी-सी बेल हम सभीके लिए कैसे कष्टदायी सिद्ध हो सकती है ?’’

ताऊने समझाया-‘‘धीरे-धीरे यह पेडके तनेसे चिपककर एक बडा रूप धारणकर नीचेसे ऊपर तक, पेडपर चढनेके लिए सीढी बन जाएगी । कोई भी आखेटक इसके सहारे चढकर हम तक पहुंच जाएगा और हम सभी मारे जाएंगे ।’’किसीको भी विश्वास नहीं हुआ कि ‘एक छोटी सी बेल सीढी कैसे बनेगी ?’समय बीतता रहा । ताऊने जैसे कहा था, वैसा होता गया । एक दिन जब सभी हंस दानाचुगने बाहर गए हुए थे, तब एक आखेटक उधर आया । पेडपर बनी लता रूपी सीढीको देखते ही पेडपर चढ गया और जाल बिछाकर चला गया । सांयकलके समयहंसोंके पेडपर बैठते ही वे आखेटकके बिछाए जालमें बुरी तरह फंस गए । तब सभीको अपनी चूकका भान हुआ ।

एक हंसने कहा ‘‘ताऊ, हमें क्षमा करें, हम सबसे चूक हो गई, इस संकटसे निकलनेका सुझाव आप ही बताएं ।’’ सभी हंसोंद्वारा चूक स्वीकार होनेपर, ताऊने उन्हें बताया‘‘मेरी बात ध्यानसे सुनो । सुबह जब आखेटक आएगा, तब सभी मृतावास्थामें पडेरहना, आखेटक तुम्हें मृत समझकर जालसे निकाल कर धरतीपर रखता जाएगा ।जैसे ही वह अंतिम हंसको नीचे रखेगा, मैं सीटी बजाऊंगा । मेरी सीटी सुनते ही सब उड जाना ।’’

प्रात: काल आखेटक आया । सभी हंसोने वैसा ही किया, जैसा ताऊने समझाया था आखेटक हंसोंको मृत समझकर धरतीपर रखता गया । सीटीकी आवाजके साथ हीसारे हंस उड गए । आखेटक आश्चर्यचकित होकर देखता रह गया ।

सीख : इस कथासे हमें यह सीख मिलती है कि बडोका परामर्श गंभीरतासे लेना चाहिए ।

Dinesh Kadel

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भारत के 10 आविष्कारक ऋषि | Bharat ke 10 aavishkaarak rishi


भारत के 10 आविष्कारक ऋषि  | 

Bharat ke 10 aavishkaarak rishi

http://dharmik.in/blog/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-10-%E0%A4%86%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%95-%E0%A4%8B%E0%A4%B7%E0%A4%BF/

भारत के 10 आविष्कारक ऋषिवेदों में ज्ञान-विज्ञान की बहुत सारी बातें भरी पड़ी हैं। आज का विज्ञान जो खोज रहा है वह पहले ही खोजा जा चुका है। बस फर्क इतना है कि आज का विज्ञान जो खोज रहा है उसे वह अपना आविष्कार बता रहा है और उस पर किसी पश्चिमी देशों के वैज्ञानिकों का लेबल लगा रहा है।

हालांकि यह इतिहास सिद्ध है कि भारत का विज्ञान और धर्म अरब के रास्ते यूनान पहुंचा और यूनानियों ने इस ज्ञान के दम पर जो आविष्कार किए और सिद्धांत बनाए उससे आधुनिक विज्ञान को मदद मिली। यहां प्रस्तुत है भारत के उन दस महान ऋषियों और उनके आविष्कार के बारे में संक्षिप्त में जानकारी। दसवें ऋषि के बारे में जानकार निश्चित ही आपको आश्चर्य होगा।

परमाणु सिद्धांत के आविष्कारक : परमाणु बम के बारे में आज सभी जानते हैं। यह कितना खतरनाक है यह भी सभी जानते हैं। आधुनिक काल में इस बम के आविष्कार हैं- जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 कई वैज्ञानिकों ने काम किया और 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया।

हालांकि परमाणु सिद्धांत और अस्त्र के जनक जॉन डाल्टन को माना जाता है, लेकिन उनसे भी 2500 वर्ष पर ऋषि कणाद ने वेदों वे लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।

भारतीय इतिहास में ऋषि कणाद को परमाणुशास्त्र का जनक माना जाता है। आचार्य कणाद ने बताया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं। कणाद प्रभास तीर्थ में रहते थे।

विख्यात इतिहासज्ञ टीएन कोलेबु्रक ने लिखा है कि अणुशास्त्र में आचार्य कणाद तथा अन्य भारतीय शास्त्रज्ञ यूरोपीय वैज्ञानिकों की तुलना में विश्वविख्यात थे।

ऋषि भारद्वाज : राइट बंधुओं से 2500 वर्ष पूर्व वायुयान की खोज भारद्वाज ऋषि ने कर ली थी। हालांकि वायुयान बनाने के सिद्धांत पहले से ही मौजूद थे। पुष्पक विमान का उल्लेख इस बात का प्रमाण हैं लेकिन ऋषि भारद्वाज ने 600 ईसा पूर्व इस पर एक विस्तृत शास्त्र लिखा जिसे विमान शास्त्र के नाम से जाना जाता है।

प्राचीन उड़न खटोले : हकीकत या कल्पना?

भारद्वाज के विमानशास्त्र में यात्री विमानों के अलावा, लड़ाकू विमान और स्पेस शटल यान का भी उल्लेख मिलता है। उन्होंने एक ग्रह से दूसरे ग्रह पर उड़ान भरने वाले विमानों के संबंध में भी लिखा है, साथ ही उन्होंने वायुयान को अदृश्य कर देने की तकनीक का उल्लेख भी किया।

बौधायन : बौधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र तथा श्रौतसूत्र के रचयिता हैं। पाइथागोरस के सिद्धांत से पूर्व ही बौधायन ने ज्यामिति के सूत्र रचे थे लेकिन आज विश्व में यूनानी ज्या‍मितिशास्त्री पाइथागोरस और यूक्लिड के सिद्धांत ही पढ़ाए जाते हैं।

दरअसल, 2800 वर्ष (800 ईसापूर्व) बौधायन ने रेखागणित, ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज की थी। उस समय भारत में रेखागणित, ज्यामिति या त्रिकोणमिति को शुल्व शास्त्र कहा जाता था।

शुल्व शास्त्र के आधार पर विविध आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाई जाती थीं। दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में परिवर्तन करना, इस प्रकार के अनेक कठिन प्रश्नों को बौधायन ने सुलझाया।

भास्कराचार्य (जन्म- 1114 ई., मृत्यु- 1179 ई.) : प्राचीन भारत के सुप्रसिद्ध गणितज्ञ एवं खगोलशास्त्री थे। भास्कराचार्य द्वारा लिखित ग्रंथों का अनुवाद अनेक विदेशी भाषाओं में किया जा चुका है। भास्कराचार्य द्वारा लिखित ग्रंथों ने अनेक विदेशी विद्वानों को भी शोध का रास्ता दिखाया है। न्यूटन से 500 वर्ष पूर्व भास्कराचार्य ने गुरुत्वाकर्षण के नियम को जान लिया था और उन्होंने अपने दूसरे ग्रंथ ‘सिद्धांतशिरोमणि’ में इसका उल्लेख भी किया है।

गुरुत्वाकर्षण के नियम के संबंध में उन्होंने लिखा है, ‘पृथ्वी अपने आकाश का पदार्थ स्वशक्ति से अपनी ओर खींच लेती है। इस कारण आकाश का पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है।’ इससे सिद्ध होता है कि पृथ्वी में गुत्वाकर्षण की शक्ति है।

भास्कराचार्य द्वारा ग्रंथ ‘लीलावती’ में गणित और खगोल विज्ञान संबंधी विषयों पर प्रकाश डाला गया है। सन् 1163 ई. में उन्होंने ‘करण कुतूहल’ नामक ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में बताया गया है कि जब चन्द्रमा सूर्य को ढंक लेता है तो सूर्यग्रहण तथा जब पृथ्वी की छाया चन्द्रमा को ढंक लेती है तो चन्द्रग्रहण होता है। यह पहला लिखित प्रमाण था जबकि लोगों को गुरुत्वाकर्षण, चन्द्रग्रहण और सूर्यग्रहण की सटीक जानकारी थी।

पतंजलि : योगसूत्र के रचनाकार पतंजलि काशी में ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी में चर्चा में थे। पतंजलि के लिखे हुए 3 प्रमुख ग्रंथ मिलते हैं- योगसूत्र, पाणिनी के अष्टाध्यायी पर भाष्य और आयुर्वेद पर ग्रंथ। पतंजलि को भारत का मनोवैज्ञानिक और चिकित्सक कहा जाता है। पतंजलि ने योगशास्त्र को पहली दफे व्यवस्था दी और उसे चिकित्सा और मनोविज्ञान से जोड़ा। आज दुनियाभर में योग से लोग लाभ पा रहे हैं।

पतंजलि एक महान चिकित्सक थे। पतंजलि रसायन विद्या के विशिष्ट आचार्य थे- अभ्रक, विंदास, धातुयोग और लौहशास्त्र इनकी देन है। पतंजलि संभवत: पुष्यमित्र शुंग (195-142 ईपू) के शासनकाल में थे। राजा भोज ने इन्हें तन के साथ मन का भी चिकित्सक कहा है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्था (एम्स) ने 5 वर्षों के अपने शोध का निष्कर्ष निकाला कि योगसाधना से कर्करोग से मुक्ति पाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि योगसाधना से कर्करोग प्रतिबंधित होता है।

आचार्य चरक : अथर्ववेद में आयुर्वेद के कई सूत्र मिल जाएंगे। धन्वंतरि, रचक, च्यवन और सुश्रुत ने विश्व को पेड़-पौधों और वनस्पतियों पर आधारित एक चिकित्साशास्त्र दिया। आयुर्वेद के आचार्य महर्षि चरक की गणना भारतीय औषधि विज्ञान के मूल प्रवर्तकों में होती है।

ऋषि चरक ने 300-200 ईसापूर्व आयुर्वेद का महत्वपूर्ण ग्रंथ ‘चरक संहिता’ लिखा था। उन्हें त्वचा चिकित्सक भी माना जाता है। आचार्य चरक ने शरीरशास्त्र, गर्भशास्त्र, रक्ताभिसरणशास्त्र, औषधिशास्त्र इत्यादि विषय में गंभीर शोध किया तथा मधुमेह, क्षयरोग, हृदयविकार आदि रोगों के निदान एवं औषधोपचार विषयक अमूल्य ज्ञान को बताया।

चरक एवं सुश्रुत ने अथर्ववेद से ज्ञान प्राप्त करके 3 खंडों में आयुर्वेद पर प्रबंध लिखे। उन्होंने दुनिया के सभी रोगों के निदान का उपाय और उससे बचाव का तरीका बताया, साथ ही उन्होंने अपने ग्रंथ में इस तरह की जीवनशैली का वर्णन किया जिसमें कि कोई रोग और शोक न हो।

आठवीं शताब्दी में चरक संहिता का अरबी भाषा में अनुवाद हुआ और यह शास्त्र पश्चिमी देशों तक पहुंचा। चरक के ग्रंथ की ख्याति विश्वव्यापी थी।

महर्षि सुश्रुत : महर्षि सुश्रुत सर्जरी के आविष्कारक माने जाते हैं। 2600 साल पहले उन्होंने अपने समय के स्वास्थ्य वैज्ञानिकों के साथ प्रसव, मोतियाबिंद, कृत्रिम अंग लगाना, पथरी का इलाज और प्लास्टिक सर्जरी जैसी कई तरह की जटिल शल्य चिकित्सा के सिद्धांत प्रतिपादित किए।

आधुनिक विज्ञान केवल 400 वर्ष पूर्व ही शल्य क्रिया करने लगा है, लेकिन सुश्रुत ने 2600 वर्ष पर यह कार्य करके दिखा दिया था। सुश्रुत के पास अपने बनाए उपकरण थे जिन्हें वे उबालकर प्रयोग करते थे।

महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखित ‘सुश्रुत संहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। इस ग्रंथ में चाकू, सुइयां, चिमटे इत्यादि सहित 125 से भी अधिक शल्य चिकित्सा हेतु आवश्यक उपकरणों के नाम मिलते हैं और इस ग्रंथ में लगभग 300 प्रकार की सर्जरियों का उल्लेख मिलता है।

 नागार्जुन : नागार्जुन ने रसायन शास्त्र और धातु विज्ञान पर बहुत शोध कार्य किया। रसायन शास्त्र पर इन्होंने कई पुस्तकों की रचना की जिनमें ‘रस रत्नाकर’ और ‘रसेन्द्र मंगल’ बहुत प्रसिद्ध हैं।

रसायनशास्त्री व धातुकर्मी होने के साथ-साथ इन्होंने अपनी चिकित्सकीय ‍सूझ-बूझ से अनेक असाध्य रोगों की औषधियाँ तैयार कीं। चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में इनकी प्रसिद्ध पुस्तकें ‘कक्षपुटतंत्र’, ‘आरोग्य मंजरी’, ‘योग सार’ और ‘योगाष्टक’ हैं।

नागार्जुन द्वारा विशेष रूप से सोना धातु एवं पारे पर किए गए उनके प्रयोग और शोध चर्चा में रहे हैं। उन्होंने पारे पर संपूर्ण अध्ययन कर सतत 12 वर्ष तक संशोधन किया। नागार्जुन पारे से सोना बनाने का फॉर्मूला जानते थे। अपनी एक किताब में उन्होंने लिखा है कि पारे के कुल 18 संस्कार होते हैं। पश्चिमी देशों में नागार्जुन के पश्चात जो भी प्रयोग हुए उनका मूलभूत आधार नागार्जुन के सिद्धांत के अनुसार ही रखा गया।

नागार्जुन की जन्म तिथि एवं जन्मस्थान के विषय में अलग-अलग मत हैं। एक मत के अनुसार इनका जन्म 2री शताब्दी में हुआ था तथा अन्य मतानुसार नागार्जुन का जन्म सन् 931 में गुजरात में सोमनाथ के निकट दैहक नामक किले में हुआ था। बौद्धकाल में भी एक नागार्जुन थे।

पाणिनी : दुनिया का पहला व्याकरण पाणिनी ने लिखा। 500 ईसा पूर्व पाणिनी ने भाषा के शुद्ध प्रयोगों की सीमा का निर्धारण किया। उन्होंने भाषा को सबसे सुव्यवस्थित रूप दिया और संस्कृत भाषा का व्याकरणबद्ध किया। इनके व्याकरण का नाम है अष्टाध्यायी जिसमें 8 अध्याय और लगभग 4 सहस्र सूत्र हैं। व्याकरण के इस महनीय ग्रंथ में पाणिनी ने विभक्ति-प्रधान संस्कृत भाषा के 4000 सूत्र बहुत ही वैज्ञानिक और तर्कसिद्ध ढंग से संग्रहीत किए हैं।

अष्टाध्यायी मात्र व्याकरण ग्रंथ नहीं है। इसमें तत्कालीन भारतीय समाज का पूरा चित्र मिलता है। उस समय के भूगोल, सामाजिक, आर्थिक, शिक्षा और राजनीतिक जीवन, दार्शनिक चिंतन, खान-पान, रहन-सहन आदि के प्रसंग स्थान-स्थान पर अंकित हैं।

इनका जन्म पंजाब के शालातुला में हुआ था, जो आधुनिक पेशावर (पाकिस्तान) के करीब तत्कालीन उत्तर-पश्चिम भारत के गांधार में हुआ था। हालांकि पाणिनी के पूर्व भी विद्वानों ने संस्कृत भाषा को नियमों में बांधने का प्रयास किया लेकिन पाणिनी का शास्त्र सबसे प्रसिद्ध हुआ।

19वीं सदी में यूरोप के एक भाषा विज्ञानी फ्रेंज बॉप (14 सितंबर 1791- 23 अक्टूबर 1867) ने पाणिनी के कार्यों पर शोध किया। उन्हें पाणिनी के लिखे हुए ग्रंथों तथा संस्कृत व्याकरण में आधुनिक भाषा प्रणाली को और परिपक्व करने के सूत्र मिले। आधुनिक भाषा विज्ञान को पाणिनी के लिखे ग्रंथ से बहुत मदद मिली। दुनिया की सभी भाषाओं के विकास में पाणिनी के ग्रंथ का योगदान है।

महर्षि अगस्त्य : महर्षि अगस्त्य एक वैदिक ॠषि थे। निश्चित ही बिजली का आविष्कार थॉमस एडिसन ने किया लेकिन एडिसन अपनी एक किताब में लिखते हैं कि एक रात मैं संस्कृत का एक वाक्य पढ़ते-पढ़ते सो गया। उस रात मुझे स्वप्न में संस्कृत के उस वचन का अर्थ और रहस्य समझ में आया जिससे मुझे मदद मिली।

महर्षि अगस्त्य राजा दशरथ के राजगुरु थे। इनकी गणना सप्तर्षियों की जाती है। ऋषि अगस्त्य ने ‘अगस्त्य संहिता’ नामक ग्रंथ की रचना की।

आश्चर्यजनक रूप से इस ग्रंथ में विधुत उत्पादन से संबंधित सूत्र मिलते हैं-

संस्थाप्य मृण्मये पात्रे
ताम्रपत्रं सुसंस्कृतम्‌।
छादयेच्छिखिग्रीवेन
चार्दाभि: काष्ठापांसुभि:॥
दस्तालोष्टो निधात्वय: पारदाच्छादितस्तत:।
संयोगाज्जायते तेजो मित्रावरुणसंज्ञितम्‌॥
-अगस्त्य संहिता

अर्थात : एक मिट्टी का पात्र लें, उसमें ताम्र पट्टिका (Copper Sheet) डालें तथा शिखिग्रीवा (Copper sulphate) डालें, फिर बीच में गीली काष्ट पांसु (wet saw dust) लगायें, ऊपर पारा (mercury‌) तथा दस्त लोष्ट (Zinc) डालें, फिर तारों को मिलाएंगे तो उससे मित्रावरुणशक्ति (Electricity) का उदय होगा।

अगस्त्य संहिता में विद्युत का उपयोग इलेक्ट्रोप्लेटिंग (Electroplating) के लिए करने का भी विवरण मिलता है। उन्होंने बैटरी द्वारा तांबा या सोना या चांदी पर पॉलिश चढ़ाने की विधि निकाली अत: अगस्त्य को कुंभोद्भव (Battery Bone) कहते हैं।