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अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो अम्बेडकर को कभी भी ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष न बनाता—-सरदार वल्लभ भाई पटेल

सरदार पटेल और अम्बेडकर संवाद

संविधान निर्माण चल रहा था।। इसमें सरदार पटेल भी संविधान निर्माताओ की लिस्ट में शामिल थे। अम्बेडकर ने आरक्षण की भीख का तुर्रा छोड़ दिया।

सरदार पटेल–आरक्षण गलत है,इसको हटाओ

अम्बेडकर–नहीं,ये मेरी कौम के लोगो के लिए है

सरदार—कौन सी तुम्हारी कौम?? हम सब भारतीय है,आज़ादी के बाद आज देश का हर वर्ग भूँखा नंगा है…इसलिए किसी वर्ग विशेष को ये सुविधा देना गलत है…

अम्बेडकर(कुत्ते की तरह चीखते हुए)–मैं आरक्षण देना चाहता हु,अगर मुझे रोका गया तो मैं कानून मंत्री के पद से स्तीफा दे दूंगा

सरदार पटेल— देखो भीमराव,तुम वो नहीं देख पा रहे जो मैं देख पा रहा हु,स्वार्थ की राजनीति ने तुम्हारी आँखों में पट्टी बाँध दी है। अगर आज किसी जाति विशेष को आरक्षण दिया गया तो भविष्य के भारत में रोज एक नई जाति आरक्षण मांगेगी और देश की अखंडता पर खतरा उत्पन्न होगा….जो दलित और गरीब है उनके लिए हम दूसरे हर तरह के उपाय करने को तैयार है..जैसे मुफ़्त शिक्षा,मुफ़्त स्कूल,उनके लिए सस्ते घर,रोजगार इत्यादि….हम उन्हें इतना काबिल बनाये ताकि वो खुद के दम पर आगे बढ़ सके … न की आरक्षण की बैशाखी से या मुफ्तखोरी से….तुम किसी अयोग्य को सत्ता पर बैठाकर देश को बर्बाद क्यों करना चाहते हो???

अम्बेडकर(चीखते हुए)— आरक्षण होकर रहेगा…..

ये सुनकर लौह पुरुष सरदार पटेल,जो कभी किसी के आगे नहीं झुकते थे मजबूरी में उन्हें अम्बेडकर के कमरे से बाहर आना पड़ा और नेहरू से उन्होंने कहा था कि “”ये आपने किस बीमार मानसिकता वाले व्यक्ति को ड्राफ्टिंग कमिटी का अध्यक्ष बना दिया,ये तो मानसिक उन्मादी प्रतीत होता है,इसमें दूरदर्शिता की भारी कमी और अंग्रेज़ियत मानसिकता की गन्दगी भरी है,अगर मैं भारत का प्रधानमंत्री होता तो इसे कब का इसके पद से हटा चूका होता,ये व्यक्ति भारत का दुर्भाग्य साबित होगा,तन से ज्यादा इसका मन काला है,हम हर गरीब दलित के हक़ की बात करने को तैयार है लेकिन इसका अर्थ ये तो नहीं की भूंखे मर रहे सवर्णों की क़ुरबानी दे दी जाये???”

ये सुनकर नेहरू मौन थे…उनके पास कोई जवाब न था…

1950 को सरदार पटेल ने अंतिम साँस ली और अखंड भारत के जनक सरदार की मृत्यु हो गयी। जानकार कहते है की अगर सरदार ज़िंदा होते तो भारत का वो संविधान जो अम्बेडकर ने पेश किया था,वो लागू न हो पाता क्योंकि वो सबिधान देश को बर्बाद करने वाला एक कीटाणु था।

आरक्षण एक दीमक है देश में लगा हुआ ..

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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