Posted in यत्र ना्यरस्तुपूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:

Women’s day


Women’s day
धन्य है वह समाज जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है
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“ओम् नमो भगवते वासुदेवायः”

प्रिय भक्तों यह एक विडम्बना ही है कि जिस सनातन धर्म में स्त्रियों को दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती आदि के रूप में पूजा की जाता है उसी समाज में स्त्रियों के ऊपर आए दिन अत्याचार होते हैं| पग पग पर उनको नियंत्रित किया जाता है| स्त्री क्या कपडे पहनती है? कहाँ जाती है? किसके साथ जाती है? कब जाती है इसका हिसाब लिया जाता है| हर एक चौराहे, गली नुक्कड़ और बाज़ारों में उनके साथ छेड़छाड़ की जाती है|

जिस समाज स्त्रियों के साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया जाता है वह समाज कभी सुखी और समृद्ध नहीं हो सकता |

(मनुस्मृति अध्याय ३, श्लोक ५६-६०)
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।56।।
[यत्र तु नार्यः पूज्यन्ते तत्र देवताः रमन्ते, यत्र तु एताः न पूज्यन्ते तत्र सर्वाः क्रियाः अफलाः (भवन्ति) ।]

जहाँ नारियों का सम्मान होता है वहाँ देवता निवास करते हैं| जहाँ स्त्रियों का सम्मान नहीं होता वहाँ सब काम निष्फल होते हैं ।

(अर्थात जहाँ स्त्रियों का सम्मान होता है वहाँ देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और सभी सुख और समृधि प्राप्त होती है, और जहाँ नारियों का अपमान होता है वहाँ सभी कार्य विफल होते हैं और सुख-समृधि का अभाव होता है)

शोचन्ति जामयो यत्र विनश्यत्याशु तत्कुलम् ।
न शोचन्ति तु यत्रैता वर्धते तद्धि सर्वदा ।।।57।।
[यत्र जामयः शोचन्ति तत् कुलम् आशु विनश्यति, यत्र तु एताः न शोचन्ति तत् हि सर्वदा वर्धते ।]

जिस कुल में पारिवारिक स्त्रियां [दुर्व्यवहार के कारण] शोक-संतप्त रहती हैं उस कुल का शीघ्र पतन हो जाता है, उसकी अवनति होने लगती है । इसके विपरीत जहां ऐसा नहीं होता है और स्त्रियां प्रसन्नचित्त रहती हैं, वह कुल प्रगति करता है । (परिवार की पुत्रियों, बधुओं, नवविवाहिताओं आदि जैसे निकट संबंधिनियों को ‘जामि’ कहा गया है ।)

जामयो यानि गेहानि शपन्त्यप्रतिपूजिताः ।
तानि कृत्याहतानीव विनश्यन्ति समन्ततः ।।58।।

[अप्रतिपूजिताः जामयः यानि गेहानि शपन्ति, तानि कृत्या आहतानि इव समन्ततः विनश्यन्ति ।]

जिन घरों में पारिवारिक स्त्रियां निरादर-तिरस्कार के कारण असंतुष्ट रहते हुए शाप देती हैं, यानी परिवार की अवनति के भाव उनके मन में उपजते हैं, वे घर कृत्याओं के द्वारा सभी प्रकार से बरबाद किये गये-से हो जाते हैं । (कृत्या उस अदृश्य शक्ति की द्योतक है जो जादू-टोने जैसी क्रियाओं के किये जाने पर लक्षित व्यक्ति या परिवार को हानि पहुंचाती है ।)

तस्मादेताः सदा पूज्या भूषणाच्छादनाशनैः ।
भूतिकामैर्नरैर्नित्यं सत्कारेषूत्सवेषु च ।।59।।

[तस्मात् भूतिकामैः नरैः एताः (जामयः) नित्यं सत्कारेषु उत्सवेषु च भूषणात्
आच्छादन-अशनैः सदा पूज्याः ।]

अतः ऐश्वर्य एवं उन्नति चाहने वाले व्यक्तियों को चाहिए कि वे पारिवारिक संस्कार-कार्यों एवं विभिन्न उत्सवों के अवसरों पर पारिवार की स्त्रियों को आभूषण, वस्त्र तथा सुस्वादु भोजन आदि प्रदान करके आदर-सम्मान व्यक्त करें ।

सन्तुष्टो भार्यया भर्ता भर्त्रा भार्या तथैव च ।
यस्मिन्नेव कुले नित्यं कल्याणं तत्र वै ध्रुवम् ।।60।।
[यस्मिन् एव कुले नित्यं भार्यया भर्ता सन्तुष्टः, तथा एव च भर्त्रा भार्या, तत्र वै कल्याणं ध्रुवम् ।]

जिस कुल में प्रतिदिन ही पत्नी द्वारा पति संतुष्ट रखा जाता है और उसी प्रकार पति भी पत्नी को संतुष्ट रखता है, उस कुल का भला सुनिश्चित है । ऐसे परिवार की प्रगति अवश्यंभावी है ।
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स्त्री तो माँ दुर्गा, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती, माता यशोदा, माता कौशल्या, देवी सीता, सती अनसूया है |

स्त्री का अपमान धर्म का अपमान है| स्त्रियों का जहाँ सम्मान होता है वह समाज सुख और समृधि से पूर्ण होता है|

“श्री हरि ओम् तत् सत्”

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