Posted in राजनीति भारत की - Rajniti Bharat ki

Narendra Modi


Sachin Patil

लालू को “वोट” दिया तो भी सरकार “कांग्रेस” की.
मुलायम को “वोट” दिया तो भी सरकार”कांग्रेस” की
मायावती को “वोट” दिया तो भी सरकार “कांग्रेस” की
ममता को “वोट” दिया तो भी सरकार “कांग्रेस” की
करूणानिधि को “वोट”दिया तो भी सरकार “कांग्रेस” की
पवार को “वोट” दिया तो भी सरकार “कांग्रेस” की
तभी “ये चोर” “वो चोर” “सब चोर” “फलाना चोर” “ढिकना चोर” चिल्लाते
चिल्लाते एक नयी पार्टी आयी. उसे वोट दिया फिर भी सरकार कांग्रेस की ?🚫
अब मैंने कसम खा ली है मेरा वोट सिर्फ और
सिर्फ Narendra Modi को ! !इसलिए अपना वोट सिर्फ “कमल” को
कमल ..👍
या
खतना ..😠
गज़वा ऐ हिन्द पिछले 30 सालो से चल रहै है पर जब तारिक फ़तेह ने गज़वा ऐ हिन्द पे मुस्लिमो के छुपे एजंडे को खुला करदिया तो हिन्दू ओ की आँख खुल गयी और मुस्लिम की पोल खुल गयी भारत के हर शहर के आऊटर पर शांतीदूत सुनयोजित ढंग से बसाये गये है।
अबकी बार अगर जनता की आँखे नही खुली तो खून के आंसू रोयँगे सब हिन्दू और आज भी रो रहे है.
मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि भाजपा ऐसा या वैसा क्यों कर रही है!!
जब आपके बच्चे बीमार होते है ,
तो अपनी जाति के डॉक्टर नहीं देखते हो आप?
जब भूख लगती है तो अपनी जाति का होटल मे नहीं जाते है साहेब ?
जब व्यापार करना हो तब अपनी जाति वालों से लेनदेन नहीं करते हो जनाब?
जब अपने बच्चो को स्कूल भेजते हो तब अपनी जाति का मास्टर नहीं देखते हो जी?
जब बेंक से लोन लेना हो तब अपनी जाति का बेंक नहीं देखते हो क्या?
तो वोट देते समय क्यो जनाब अपनी जाति का नेता देखते हो ।
मेरा एक ही सवाल है –
“हिंदू यदि भाजपा को वोट न दे तो किसे दे?”
क्या कोई और है जो राष्ट्रीय स्तर पर विकल्प दे सके?
यदि नहीं
तो क्या हम आज भाजपा का विरोध करके मुस्लिमपरस्त पार्टियों का ही भला नहीं कर रहे?
एक ओर माया मुलायम ममता लालू को कोसते हैं और जब चुनाव आते हैं तो संगठित होने की जगह भ्रम फैलाकर उन्हीं की मदद करने का काम करते हैं!
ऐसा करके हम कौन सा और किसका हित साध रहे हैं?
मोदीजी के विरोधियों दिल पर हांथ रखकर एक बात बता दो क्या पुरे देश में मोदीजी के जैसा नेता है क्या? मोदीजी नहीं तो और किसको सत्ता दें ताकि हमारा भला होगा?दिल्ली की विकासपुरी के डॉक्टर नारंग को मुसलमानो ने घर में घुसकर मारा तो ग़ाज़ियाबाद के यादव चुप थे। नारंग ना तो यादव थे, ऊपर से UP में अखिलेश भैया को वोट देते है मुसलमान तो, और अखिलेश भैया यादवों को सरकारी चपरासी व पुलिस में सिपाही बनाते है, व सस्ती दाल देते है।
अब परिवार की महिलाओं की छेड़खानी का विरोध करने पर ग़ाज़ियाबाद के सिंहासन यादव को घर में घुसकर मार डाला मुसलमानो ने।
तो बाक़ी UP के यादव चुप रहेंगे।
आख़िर बोले तो मुसलमान नाराज़ हो जाएँगे और अखिलेश भैया हार जाएँगे।
ग़ाज़ियाबाद के बाक़ी हिंदू भी चुप रहेंगे। यादव मुसलमान का गठजोड़ है, झगड़ा भी उन्ही में है, नौकरी भी उन्ही को मिलती है, हम क्यूँ बोले। बाक़ी UP के हिंदू भी इसी कारण चुप रहेंगे।
20% है घर में घुसकर मार रहे है। थोड़ा और बढ़ेंगे तो घर में घुसकर बलात्कार करेंगे। फिर थोड़ा और बढ़ेंगे तो सड़क पर खींचकर बलात्कार करेंगे।
आप चुप रहिएगा। आप की जाति का गठजोड़ है मुसलमान से। नहीं तो आपकी प्रतिद्वंद्वी जाति का है और आप ख़ुश है कि उनको सबक़ सिखाया मुसलमानो ने ही।
लेकिन उसके लिए आप सब काफ़िर है और आप सबका नाम उसकी लिस्ट में है। https://www.facebook.com/sashkttabharat/posts/1669972283245158https://www.facebook.com/sashkttabharat/photos/a.1500830570159331.1073741827.1500581043517617/1828458257396559/?type=3
https://www.facebook.com/sashkttabharat/photos/a.1500830570159331.1073741827.1500581043517617/1830783537164031/?type=3

No automatic alt text available.
No automatic alt text available.
Image may contain: 1 person
No automatic alt text available.

अगर आज नही जागे तो एक दिन हमारे भारत की तसबिर भी एसी होगी

मुसलमानो के अंदर औरंगजेब जाग चुका है।
हिन्दू भी अपने अंदर के शिवाजी को जगा लो।
वर्ना कल पछताओगे

किस अवतार की प्रतीक्षा मे हैं हिन्दू ?
महाभारत काल मे धर्म की हानि हुई , पांडवों को अपमान , पीड़ा , वनवास , अज्ञातवास और अंत मे युद्ध की विभीषिका को क्यूँ झेलना पड़ा ?
क्यूंकी वो धर्म के मार्ग पर अडिग रहे और अंततः धर्म की स्थापना कर पाने मे सफल भी हुये।
अब बात आती है अवतार की –
उस समय कृष्ण ने अवतार लिया ,
क्या कृष्ण के अस्त्र – शस्त्र उठाए ?
नहीं …
यदि कृष्ण हथियार उठा लेते तो महाभारत का युद्ध केवल एक ही दिन मे समाप्त हो जाता।
कृष्ण ने सारथी बनकर पांडवों का साथ दिया …
समय समय पर उनको उचित मार्गदर्शन दिया ,
विजय प्राप्ति के अवसर खोने नहीं दिये ,
साथ ही पांडवों को उनकी शक्ति और सामर्थ्य को पहचानने और प्रयोग मे लाने के लिए पूर्ण समर्थन भी दिया ।
ये सत्य है कि कृष्ण ईश्वर के अवतार के रूप मे ही आए थे …
किन्तु क्या सब कुछ उन्होने ही किया … ?
नहीं …
उन्होने केवल उनका ही मार्ग प्रशस्त किया जो धर्म के मार्ग पर थे और समाज मे धर्म की स्थापना करना चाहते थे।
प्रभु के धरा पर आगमन के फलस्वरूप ही अधार्मिक शक्तियों का विनाश और धार्मिक शक्तियों की ’ पुनर्स्थापना ’ होती है।
किन्तु यह स्थिति सदा के लिए नहीं बनी रह सकती है।
” यह तभी तक संभव होता है, जब तक धार्मिक शक्तियाँ सबल बनी रहें तथा अधार्मिक शक्तियों को फिर से सिर न उठाने दें। ”
साहस – मन का आभूषण है ,
वीरता – तन का आभूषण है और
शौर्य आत्मा का आभूषण होता है ।
” जिसने भी मन से आत्मा तक की ये यात्रा कर ली … वही अजेय है !! ”
आज भी यदि हम ईश्वर के किसी अवतार की प्रतीक्षा मे हैं …
तो हमसे बड़ा कोई मूर्ख नहीं।
कर्म हमे ही करना है …
ईश्वर तो बस हमारा मार्ग प्रशस्त करेंगे ,
हमे स्वयं को किसी भी हाल मे जीवित और सुरक्षित करना है,
हम जीवित रहेंगे तो धर्म भी जीवित रहेगा …

लेबनान की कहानी….

70 के दशक में लेबनान अरब का एक ऐसा मुल्क था जिसे अरब का स्वर्ग कहा जाता था और इसकी राजधानी बेरुत को अरब का paris । अरब में व्याप्त इस्लामिक जहालत के बावजूद लेबनान एक Progressive, Tolerant और Multi cultural सोसाइटी थी ……..
ठीक वैसे ही जैसे भारत है । लेबनान में दुनिया की बेहतरीन Universities थीं जहां पूरे अरब से बच्चे पढने आते थे और फिर वहीं रह जाते थे । काम करते थे । मेहनत करते थे । लेबनान की banking दुनिया की श्रेष्ट banking व्यवस्थाओं में शुमार थी । Oil न होने के बावजूद लेबनान एक शानदार economy थी ।
60 के दशक में वहाँ इस्लामिक ताकतों ने सिर उठाना शुरू किया ………
70 में जब Jordan में अशांति हुई तो लेबनान ने फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए
दरवाज़े खोल दिए ……..

आइये स्वागत है ।
1980 आते आते लेबनान की ठीक वही हालत थी जो आज सीरिया की है ।
लेबनान की christian आबादी को मुसलामानों ने ठीक उसी तरह मारा जैसे सीरिया के ISIS ने मारा । पूरे के पूरे शहर में पूरी christian आबादी को क़त्ल कर दिया गया । कोई बचाने नहीं आया ।
Brigette Gabriel उसी लेबनान की एक survivor हैं जिन्होंने वो कत्लेआम अपनी आखों से देखा है । Brigette किसी तरह भाग के पहले Israel पहुंची और फिर वहाँ से अमेरिका । आजकल वो पूरी दुनिया में इस्लामिक साम्राज्य वाद और इस्लामिक आतंकवाद से लोगों को सचेत करती हैं।
एक सभा में एक लड़की ने उनसे पूछ लिया ………
सभी मुसलमान तो जिहादी नहीं ? ज़्यादातर peace loving और law abiding citizens हैं। जिहाद तो एक मानसिकता है । आखिर एक मानसिकता का मुकाबला गोली बन्दूक से कैसे किया जा सकता है ?
Brigette ने उत्तर दिया ……..
40 के दशक में Germany की अधिकाँश प्रजा भी peace loving थी । इसके बावजूद मुट्ठी भर उन्मादियों नें 6 करोड़ लोग दुनिया भर में मारे ।
Russia की जनता भी अमन पसंद थी । इसके बावजूद वहाँ के चंद उन्मादियों ने 2 करोड़ लोग मारे ।
China की जनता भी अमन पसंद बोले तो peace loving law abiding थी । चीन के उन्मादियों ने 7 करोड़ लोगों को मारा ।
जापान तो बेहद सभ्य सुशिक्षित सुसंस्कृत मुल्क है न । वहाँ की peace loving जनता तो पूरी दुनिया में अपने संस्कारों के लिए जानी जाती है । वहाँ उन्मादियों के एक छोटे से समूह ने सवा करोड़ लोगों का क़त्ल किया ।
अमेरिका के 23 लाख मुस्लिम आबादी भी तो peace loving ही है पर सिर्फ 19 लोगों के एक उन्मादी जिहादी समूह ने अकेले 9 /11 में 3000 से ज्यादा अमेरिकियों का क़त्ल किया ।
किसी समाज का एक छोटा सा हिस्सा भी उन्मादी जिहादी हो जाए तो फिर शेष peace loving society का कोई महत्त्व नहीं रहता । वो irrelevent हो जाते हैं ।
आज दुनिया भर में peace loving मुस्लमान irrelevant हो चुके है
कमान उन्मादियों के हाथ में है ।
लेबनान की कहानी ज़्यादा पुरानी नहीं । सिर्फ 25 – 30 साल पुरानी है ।
लेबनान और सीरिया से बहुत कुछ सीखने की जरुरत है ।

क्या करोगे हिन्दुओं इतनी संपत्ति कमाकर…?

– एक दिन पूरे काबूल (अफगानिस्तान) का व्यापार सिक्खों
का था, आज उस पर तालिबानों का कब्ज़ा है |
– सत्तर साल पहले पूरा सिंध सिंधियों का था, आज उनकी पूरी
धन संपत्ति पर पाकिस्तानियों का कब्ज़ा है |
– एक दिन पूरा कश्मीर धन धान्य और एश्वर्य से पूर्ण पण्डितों
का था, तुम्हारे उन महलों और झीलों पर आतंक का कब्ज़ा हो
गया और तुम्हे मिला दिल्ली में दस बाय दस का टेंट..|
– एक दिन वो था जब ढाका का हिंदू बंगाली पूरी दुनियाँ में
जूट का सबसे बड़ा कारोबारी था | आज उसके पास सुतली बम
भी नहीं बचा |
– ननकाना साहब, लवकुश का लाहोर, दाहिर का सिंध,
चाणक्य का तक्षशिला, ढाकेश्वरी माता का मंदिर देखते ही
देखते सब पराये हो गए | पाँच नदियों से बने पंजाब में अब केवल दो
ही नदियाँ बची |
– यह सब किसलिए हुआ ? केवल और केवल असंगठित होने के कारण|
इस देश के मूल समाज की सारी समस्याओं की जड़ ही संगठन
का अभाव है |
– आज भी इतना आसन्न संकट देखकर भी बहुतेरा समाज गर्राया
हुआ है | कोई व्यापारी असम के चाय के बागान अपना समझ रहा
है, कोई आंध्र की खदानें अपनी मान रहा है | तो कोई सोच रहा
है ये हीरे का व्यापार सदा सर्वदा उसी का रहेगा |
कभी कश्मीर की केसर की क्यारियों के बारे में भी हिंदू यही
सोचा करता था |
– तू अपने घर भरता रहा और पूर्वांचल का लगभग पचहत्तर प्रतिशत
जनजाति समाज विधर्मी हो गया | बहुत कमाया तूने बस्तर के
जंगलों से…आज वहाँ घुस भी नहीं सकता |

आज भी आधे से ज्यादा समाज को तो ये भी समझ नहीं कि उस
पर संकट क्या आने वाला है | बचे हुए समाज में से बहुत सा अपने
आप को सेकुलर मानता है | कुछ समाज लाल गुलामों का
मानसिक गुलाम बनकर अपने ही समाज के खिलाफ कहीं बम
बंदूकें, कहीं तलवार तो कहीं कलम लेकर विधर्मियों से ज्यादा
हानि पहुंचाने में जुटा है |
ऐसे में पाँच से लेकर दस प्रतिशत समाज ही बचता है जो अपने धर्म
और राष्ट्र के प्रति संवेदनशील है | धूर्त सेकुलरों ने उसे असहिष्णु
और साम्प्रदायिक करार दे दिया |

भारत के पाँच महापुरुष और उनकी बातें –
इनका पालन करना हमारा कर्तव्य है…!!
महाराणा प्रताप :~ ” किसी की दासता से कहीं अच्छा है कि उससे लड़ो,मारो,जीतो,
या शहीद हो जाओ ! जीना है तो गर्व से,दासता में जीने से कहीं अच्छा है.1 पल गर्व से जीना ”

शिवाजी महाराज :~ ” हिन्दू है तो हिन्दू धर्म की रक्षा कर , देश पर धर्म का राज कर,हिंदवी राज्य ही ईश्वर की इच्छा , उठा तलवार , शांति के लिये युद्ध जरुरी है, घुस कर मार ”

गुरु गोविंद सिंह :~ ” हाथ को तेल के डिब्बे में कोहनी तक डालो , फिर उस हाथ को तिल की बोरी में डालो , जितने तिल हाथ से चिपके उतनी बार भी मुस्लिम कसम खाये तो
भरोसा मत करना ”

वीर सावरकर :~ ” हिन्दु राष्ट्र से ही भारत का विकास संभव ….
अगर किसी ने दूसरे गाल पर भी थप्पड मार दिया तो तीसरा गाल कहां से लाओगे ,
जुल्म सहोगे तो जुल्म एक दिन खा जायेगा ”

नाथूराम गोडसे :~ “जो तुम्हारे देश के खिलाफ बोलता है,उसे तोड़ने की बात करता है,तोड़ता है उसे मार दो …
धर्म से ही देश बनता है और देश के लिये प्राण लेना देना छोटी बात हैं ॥”

तो देश को बर्बाद करने वाले जेहादियों को गोली मारने के लिए सोच-विचार की क्या आवश्यकता है…?

इसलिए आजादी के बाद एक बार फिर हिंदू समाज दोराहे पर
खड़ा है | एक रास्ता है, शुतुरमुर्ग की तरह आसन्न संकट को
अनदेखा कर रेत में गर्दन गाड़ लेना तथा दूसरा तमाम संकटों को
भांपकर सारे मतभेद भुलाकर संगठित हो संघर्ष कर अपनी धरती
और संस्कृति बचाना |
और कोई सीखे न सीखे हिन्दूस्थान को तो सीख ही लेना चाहिए ।

Author:

Buy, sell, exchange old books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s