Posted in संस्कृत साहित्य

ब्रह्ममुहूर्त’ में जागने से फायदे….


ॐ..🙏: ब्रह्ममुहूर्त’ में जागने से फायदे….

 

हिन्दु धर्मानुसार जीवन में सुखद और बेहतर नतीजों की प्राप्ति के लिए प्रतिदिन एक खास वक्त में जागना बहुत ही शुभ माना गया है। यह विशेष समय ब्रह्ममुहूर्त कहलाता है ।


दरअसल, ब्रह्ममुहूर्त का धार्मिक , अध्यात्मिक , मानसिक वा शारीरिक सभी नजरिए से बहुत महत्व माना गया है। हिन्दु ऋषि मुनियों, योग गुरुओं के अनुसार अगर कोई भी इंसान जीवन के हर क्षेत्र में मनवाँछित परिणाम चाहता है तो वह नित्य ब्रह्म मुहूर्त में जागना शुरू करें उसे निश्चित ही बेहतर नतीजे प्राप्त होंगे ।

आम भाषा में ब्रह्म मुहूर्त का समय सुबह सूर्योदय से पहले चार– पांच बजे के बीच का माना जाता है। किंतु हमारे धर्म शास्त्रों में के अनुसार रात के आखिरी प्रहर का तीसरा हिस्सा या चार घड़ी तड़के तक ही ब्रह्ममुहूर्त होता है।

मान्यता है कि ब्रह्म मुहूर्त में जागकर अपने इष्ट देव की ध्यान , पूजा, अध्ययन और किसी भी शुभ कर्मों को करना बहुत ही शुभ होता है। कहते है की इस समय ईश्वर ज्ञान, विवेक, सुख, शांति , सद्बुद्धि, निरोग और सुंदर शरीर, प्रदान करते हैं। इस समय भगवान की पूजा अर्चना के बाद दही, घी, आईना, अपने माता पिता, पत्नी, बच्चो और फूलमाला के दर्शन भी बहुत पुण्य प्रदान करते हैं।

ब्रह्म मुहूर्त में वेद मन्त्रों के उच्चारण से वातावरण बहुत शुद्ध हो जाता है और मन को असीम शांति एवं पुण्य की प्राप्ति होती है । वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान श्री हनुमान माता सीता को ढूंढते हुए ब्रह्ममुहूर्त में ही अशोक वाटिका पहुंचे थे, जहां पर उन्होंने वेदों के मंत्र उच्चारण की आवाज सुनी थी और उनका मन प्रफुल्लित हो गया था ।


अच्छी सेहत, मानसिक एवं शारीरिक दृढ़ता पाने के लिए भी ब्रह्ममुहूर्त सबसे उपर्युक्त समय है, क्योंकि इस समय वातावरण में प्राणवायु , आक्सीजन की मात्रा अधिक होती है।

: सुबह जल्दी उठने से प्राप्त होते हैं ये पांच लाभ…ये भी है

वर्णं कीर्तिं मतिं लक्ष्मीं स्वास्थ्यमायुश्च विदन्ति।

ब्राह्मे मुहूर्ते संजाग्रच्छि वा पंकज यथा॥

अर्थात– ब्रह्म मुहूर्त में उठने से व्यक्ति को 1. सुंदरता, 2. लक्ष्मी, 3. बुद्धि, 4. स्वास्थ्य, 5. आयु आदि की प्राप्ति होती है। ऐसा करने से शरीर कमल की तरह सुंदर हो जाता है।

क्या लिखा है शास्त्रों में?

वेदों में भी ब्रह्म मुहूर्त में उठने का महत्व और उससे होने वाले लाभ का उल्लेख किया गया है।

प्रातारत्नं प्रातरिष्वा दधाति तं चिकित्वा प्रतिगृह्यनिधत्तो।

तेन प्रजां वर्धयुमान आय रायस्पोषेण सचेत सुवीर:॥

– ऋग्वेद-1/125/1

अर्थात- सुबह सूर्य उदय होने से पहले उठने वाले व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा रहता है। इसीलिए बुद्धिमान लोग इस समय को व्यर्थ नहीं गंवाते। सुबह जल्दी उठने वाला व्यक्ति स्वस्थ, सुखी, ताकतवाला और दीर्घायु होता है।

यद्य सूर उदितोऽनागा मित्रोऽर्यमा। सुवाति सविता भग:॥

– सामवेद-35

अर्थात- व्यक्ति को सुबह सूर्योदय से पहले शौच व स्नान कर लेना चाहिए। इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना करना चाहिए। इस समय की शुद्ध व निर्मल हवा से स्वास्थ्य और संपत्ति की वृद्धि होती है।

उद्यन्त्सूर्यं इव सुप्तानां द्विषतां वर्च आददे।

अथर्ववेद- 7/16/२

अर्थात- सूरज उगने के बाद भी जो नहीं उठते या जागते उनका तेज खत्म हो जाता है।

अच्छे स्वास्थ्य का रहस्य

हमारे धर्मग्रंथों में ब्रह्म मुहूर्त में उठने का सबसे बड़ा लाभ अच्छा स्वास्थ्य बताया गया है। क्या है इसका रहस्य? दरअसल सुबह चार बजे से साढ़े पांच बजे तक वायुमंडल में यानी हमारे चारों ओर ऑक्सीजन अधिक होती है। वैज्ञानिक खोजों में भी पता चला है कि इस समय ऑक्सीजन गैस की मात्रा अधिक होती है। सूर्योदय के बाद वायुमंडल में ऑक्सीजन कम होने लगती है और कार्बन डाईआक्साइड बढऩे लगती है। ऑक्सीजन हमारे सम्पूर्ण कोशिकाओं को नई स्फूर्ति और ताज़गी प्रदान करती है ।..आध्यात्मिक ,मानसिक ,बौद्धिक व सर्वांगीण विकास का आधार है ..ब्रह्म मुहूर्त में उठना।

Posted in भारत गौरव - Mera Bharat Mahan

બંધારણ વિશે જાણવા જેવું


🇮🇳 બંધારણ વિશે જાણવા જેવું 🇮🇳

🇮🇳 26 જાન્યુઆરી 🇮🇳
🇮🇳 બંધારણ વિશેષ 🇮🇳

(1) 🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણા દેશનું બંધારણ પ્રિન્ટ કે ટાઇપ થયેલું નથી, પણ હાથેથી ઇંગ્લીશ અને હિન્દી બંન્ને ભાષામાં લખાયું છે. આ બંધારણની ઓરિજિનલ
કોપીઝ પાલૉમેનટની લાઇબ્રેરીમાં હીલિયમ ગેસથી ભરેલ સ્પેશિયલ બૉક્સમાં રાખવામાં આવી છે

(2)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
જે દિવસે બંધારણ પર હસ્તાક્ષર કરવામાં આવ્યા, એ દિવસે બહાર પુષ્કળ વરસાદ પડતો હતો. લોકોએ આ દિવસને સારા ભવિષ્યનું પ્રતીક ગણયો.

(3)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
ભારતનું બંધારણ વિશ્વનું સૌથી લાંબુ બંધારણ છે, જયારે અમેરિકાનું બંધારણ વિશ્વનું સૌથી નાનું બંધારણ છે.

(4)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણા દેશના નેતઓએ દેશના બંધારણમાં આખા વિશ્વના બંધારણની સારી બાબતો લીધી છે. જેમકે, આઝાદી અને સમાનતા ફ્રેન્ચ ના બંધારમાંથી લીધી છે. પંચવર્ષીય યોજનાઓ સોવિયેત સંધના બંધારણ અને સુપ્રીમ કોટૅની કાયૅપ્રણાલી જાપાનના બંધારણની છે. આપણા બંધારણની ધણી મહત્વની બાબતો ઇંગ્લેન્ડના બંધારણમાંથી લેવામાં આવિ છે.

(5)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
2 વષૅ, 11મહિના અને 18 દિવસ થયા બંધારણ લખવામાં ડ્રાફિટંગ કમિટીએ સબમિટ કરયા પછી પણ લખવામાં આટલો લાંબો સમય થયો.

(6)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
284 સભ્યોએ (બંધારણસભાના) આ
બંધારણ પર હસ્તાક્ષર કયૅા એમાં 15
લેડીઝ હતી.

(7)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
આપણું બંધારણ આજે પણ વિશ્વનું સૌથી
સરસ બંધારણ ગણાય છે

(8)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
29 ઑગસ્ટ, 1947ના રોજ ડો. ભીમરાવ આંબેડકર બંધારણ સમિતિના અધ્યાક્ષ
તરીકે પસંદગી પામ્યા.

(9)🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
24 જાન્યુઆરી, 1950, બંધારણ સભાના
સભ્યોએ એના ઉપર હસ્તાક્ષર કયાૅ.
🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳
મિત્રો આ હતું દેશ નું બંધારણ
પસંદ આવેતો લાઇક કરજો
અને આગળ મોકલજો જેથી બધા ને જાણવા મળે

Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

समुद्र में से राई का दाना निकालना सम्भव है ?


समुद्र में से राई का दाना निकालना सम्भव है ?

कठिन है | लेकिन महापुरुषों ने क्या कर दिया कि इतने बड़े साहित्यरुपी समुद्र में से गीतारूपी राई का दाना निकालकर रख दिया और उस राई के दानेमें भी सारे जगत को ज्ञान देने की ताकत ! ७०० श्लोकों का छोटा – सा ग्रंथ | १८ अध्याय, ९४११ पद और २४,४४७ शब्द गीता में हैं | गीता एक ऐसा सदग्रंथ है जो प्राणिमात्र का उद्धार करने का सामर्थ्य रखता है | गीता के एकाध श्लोक के पाठ से, भगवन्नाम – कीर्तन से और आत्मतत्त्व में विश्रांति पाये साधु-पुरुष के दर्शनमात्र से करोड़ों तीर्थ करने का फल माना गया है |
गीताया: श्लोकपाठेन गोविन्दस्मृतिकीर्तनात |

साधूदर्शनमात्रेण तीर्थकोटिफलं लभेत् ||
गीता भगवान के श्रीमुख से निकला अमृत है |
गीताका एक – एक श्लोक तो क्या एक – एक शब्द मंत्र है – मन तर जाय ऐसा है और नित्य नवीन भाव, नित्य नवीन रस प्रकट कराता है | गीता के विषय में संत ज्ञानेश्वर महाराज कहते हैं :
“विरागी जिसकी इच्छा करते हैं, संत जिसकाप्रत्यक्ष अनुभव करते हैं और पूर्ण ब्रह्मज्ञानी जिसमें‘अहमेव ब्रह्मास्मि’की भावना रखकर रमन करते हैं, भक्त जिसका श्रवण करते हैं, जिसकी त्रिभुवन में सबसे पहले वंदनाहोती है, उसे लोग‘भगवद्गीता’कहते हैं |”

ख्वाजाजी ने कहा है :
“यह उरफानी मजमून (ब्रह्मज्ञान के विचार) संस्कृत के ७०० श्लोकों में बयान किया गया है | हर श्लोक एक रंगीन फूल है | इन्हीं ७०० फूलों की माला का नाम गीता है | यह माला करोड़ों इंसानों के हाथों में पहुँच चुकी है लेकिन ताहाल इसकी ताजगी, इसकी खुशबू में कोई फर्क नहीं आया।

”गीता ऐसा अद्भुत ग्रंथ है कि थके, हारे, गिरे हुए को उठाता है, बिछड़े को मिलाता है, भयभीत को निर्भय, निर्भय को नि:शंक, नि:शंक को निर्द्वन्द्व बनाकर नारायण से मिला के जीते –जी मुक्ति का साक्षात्कार कराता है |

भगवान श्रीकृष्ण जिसके साथ हैं ऐसा अर्जुन सामाजिक कल्पनाओं से, सामाजिक कल्पित आवश्यकताओं से, ‘मैं – मैं, तू – तू’ के तड़ाकों – धड़ाकों से इतना तो असमंजस में पड़ा कि ‘मुझे क्या करना चाहिए, क्या नहीं करना चाहिए ? ….’ किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया | भगवान ने विराट रूप का दर्शन कराया तो अर्जुन भयभीत हो गया | भगवानने सांख्य योग का उपदेश किया तो अर्जुन ने शंका की :
तत्किं कर्मणि घोरे मां नियोजयसि केशव | (गीता:३.१ )
आप तो कहते हैं कि संन्यास ऊँची चीज है, संसार स्वप्न है, मोहजाल है | इससे जगकर अपने आत्मा को जान के मुक्त होना चाहिए फिर आप मेरे को घोरकर्म में क्यों धकेलते हो ?संन्यास अर्थात सारी इच्छाओं का त्याग करके आत्मा में आना तो ऊँचा है लेकिन इस समय युद्ध करना तेरा कर्तव्य है | सुख लेने के लिए नहीं बल्कि व्यवस्था भंग करनेवाले आतताइयों ने जब समाज को घेर लिया है, निचोड़ डाला है तो वीर का, बहादुर का कर्तव्य होता है कि बहुजनहिताय – बहुजनसुखाय अपनी योग्यताओं का इस्तेमाल करे, यही उसके लिए इस समय उचित है | अपना पेट भरने के लिए तो पशु भी हाथ – पैर हिला देता है | अपने बच्चों की चोंच में तो पक्षी भी भोजन धर देता है लेकिन श्रेष्ठ मानव वह है जो सृष्टि के बाग़ को सँवारने के लिए, बहुतों के हित के लिए, बहुतों की उन्नति के लिए तथा बहुतों में छुपा हुआ जो एक ईश्वर है उसकी प्रसन्नता के लिए कर्म करे और और फल उसीके चरणों में अर्पण कर दे जिसकी सत्ता से उसमें कर्म करने की योग्यता आयी है |
🌷🌷🌷🌷🌷🌷
गीता एक दिन में पढ़कर रख देने की पुस्तक नहीं है | गीता पढ़ो गीतापति से मिलने के लिए और गीतापति तुम्हारे से १ इंच भी दूर नहीं जा सकता |

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कैलकुलेटर का धोका


कैलकुलेटर का धोका

एक डॉक्टर के पास एक बेहाल मरीज़ गया।

मरीज़: डॉ. साहब पेट में बहुत दर्द हो रहा है।

डॉ: अच्छा, ये बताओ आखिरी बार खाना कब खाया था?

मरीज़: खाना तो रोज ही खाता हूँ।

डॉ: अच्छा-अच्छा, (2 ऊँगली उठाते हुए ) आखिरी बार कब गए थे?

मरीज़: जाता तो रोज ही हूँ पर होता नहीं है।

डॉकटर समझ गए कि कब्ज़ है। अन्दर बहुत सारी बोतलें पड़ी थी उस में से एक उठा लाये और साथ ही केल्क्युलेटर भी लेते आये। फिर पूछा, “घर कितना दूर है तुम्हारा?”

मरीज़: 1 किलोमीटर।

डॉक्टर ने केलकुलेटर पे कुछ हिसाब किया और फिर बोतल में से चार चम्मच दवाई निकाल कर एक कटोरी में डाली।

डॉ: गाडी से आये हो या चल कर?

मरीज़: चल कर।

डॉ: जाते वक्त भाग के जाना।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से बाहर निकाल ली।

डॉ: घर कौन सी मंज़िल पे है?

मरीज़: तीसरी मंज़िल पे।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉ: लिफ्ट है या सीढियाँ चढ़ के जाओगे?

मरीज़: सीढियां।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉ: अब आखिरी सवाल का जवाब दो। घर के मुख्य दरवाजे से टॉयलेट कितना दूर है?

मरीज़: करीब 20 फुट।

डॉक्टर ने फिर से केलकुलेटर पे हिसाब किया फिर थोड़ी दवाई कटोरी में से और बाहर निकाल ली।

डॉ: अब मेरी फीस दे दो मुझे पहले फिर ये दवाई पियो और फटाफट घर चले जाओ, कहीं रुकना नहीं और फिर मुझे फोन करना।

मरीज़ ने वैसा ही किया। आधे घंटे बाद मरीज़ का फोन आया और एकदम ढीली आवाज में बोला, “डॉक्टर साहब, दवाई तो बहुत अच्छी थी आपकी पर आप अपना केलकुलेटर ठीक करवा लेना। हम 10 फुट से हार गये।

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एक लडका 🍊टमाटर से भरी टोकरी


एक लडका 🍊टमाटर
से भरी टोकरी

साइकिल पर लेकर जा रहा था
की
In
पत्थर से टकराने से टोकरी गिर गयी और

बहुत से 🍊टमाटर फुट गये।

भीड़ ईक्कठी हुई
और

सब चिल्लाने लगे,
देख कर चलो भाई,
कितनी गंदगी कर दी!!

तभी एक प्राईमरी के मास्टर ने भीड़ से कहा,
अरे भाई
इतना चिल्ला रहे

लेकिन
गन्दगी तो फिर भी साफ़ हो जाएगी पर

ये सोचो इसका मालिक इसकी क्या हालत करेगा
इसकी पगार मे से पैसे काट लेगा,

इस बेचारे की कुछ मदद करो,
ये लो,
मेरी तरफ़ से 10 रू..

सभी ने सुहानुभुती दिखाते हुए 10-10 रू दिये,

लडका बहुत खुश हुआ
क्यूकि

मिली हुई रकम 🍊 टमाटर की कींमत से बहुत ज्यादा थी!!

सभी के चले जाने के बाद
एक व्यक्ति ने उस लडके से कहा,

अगर वो मास्टर ना आता तो
तू
अपने मालिक को क्या जवाब देता??

लड़का. :—-
वो मास्टर ही तो मेरा मालिक है
और
ये सड़े 🍅 टमाटर
मास्टर ने सब्जी मंडी से
दस हजार
की शर्त लगा कर ख़रीदे थे
कि
वो इसे फेंक के भी प्राफिट निकाल देगा …

😜😜😂😂😜😜

एक मास्टर

जो हिला दे सारी दुनिया…..

हर हर मास्टर
घर घर मास्टर

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एक दूरदराज के गाँव में एक राजनेता का भाषण था।


एक दूरदराज के गाँव में एक राजनेता का भाषण था।

करीब 25 मील के सड़क प्रवास के पश्चात जब वो सभा स्थल पर पहुँचे तो देखा कि
वहाँ सिर्फ एक किसान उन्हें सुनने के लिए बैठा हुआ था।

उस अकेले को देख नेताजी निराश भाव से बोले—
” भाई, तुम तो एक ही हो।
समझ नहीं आता,
अब मैं भाषण दूँ या नहीं ? ”

किसान बोला—
” साहब, मेरे घर पर 20 बैल हैं।
मैं उन्हें चारा डालने जाऊँ और वहाँ एक ही बैल हो तो
बाकी 19 बैल नहीं होने के कारण क्या उस एक बैल को उपवास करा दिया जाए ? ”

किसान का बढ़िया जवाब सुन नेताजी खुश हो गए
और फिर मंच पर जाकर उस एक किसान को 2 घंटे तक भाषण दिया।

भाषण ख़त्म होने पर नेताजी बोले—
” भाई, तुम्हारी बैलों की उपमा
(उदहारण) मुझे बहुत पसंद आई।
तुम्हें मेरा भाषण कैसा लगा ? ”

किसान ने जवाब दिया—
“साहब, 19 बैलों की गैरहाजिरी में 20 बैलों का चारा एक ही बैल को नहीं डालना चाहिए,
इतनी अक्ल मुझमे है।
लेकिन आप में नहीं है। ”

नेता जी बेहोश

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ખૂબ જ હોંશિયાર એવો અતિશ્રીમંત ઘરનો એક


ખૂબ જ હોંશિયાર એવો અતિશ્રીમંત ઘરનો
એક
નવયુવક કૉલેજના અંતિમ
વરસની પરીક્ષાની તૈયારી કરી રહ્યો
હતો.
એના પિતા એ વિસ્તારના સૌથી ધનવાન
અને
પ્રતિષ્ઠિત ઉદ્યોગપતિ હતા.
એના પિતાએ પૂછયું કે
પરીક્ષાની તૈયારીઓ કેવી ચાલે છે ?
દીકરાએ
જવાબ આપ્યો કે કદાચ યુનિવર્સિટીમાં
પ્રથમ
નંબર આવી જાય તો પણ નવાઈ નહીં. બાપ

સાંભળીને
ખૂબ ખુશ થયો. થોડી વાર પછી એ યુવકે
ફરી પૂછ્યું
કે, ‘પિતાજી, જો મારો પ્રથમ નંબર આવે
તો ફલાણા શૉરૂમમાં રાખવામાં આવેલી
હોન્ડાની નવી સ્પોર્ટસ
કાર મને ભેટમાં આપશો ખરા ?’
બાપે હા પાડી. એના માટે
તો આવી કારની ખરીદી એ
રમતવાત હતી. પેલો યુવક ખૂબ રાજી થઈ
ગયો.
એ કાર ખરેખર તો એના માટે ડ્રીમ કાર
હતી.
એનો વાંચવાનો ઉત્સાહ અનેક ગણો વધી
ગયો.
મહેનતુ અને હોશિયાર તોએ હતો જ. રોજ
કૉલેજથી આવતાં જતાં એ પેલા શૉ-રૂમ પાસે
ઊભો રહી હોન્ડા-સ્પૉર્ટસ-કારને બેક્ષણ
જોઈ
લેતો. થોડા દિવસો પછી જ આ કારના
સ્ટિયરિંગ પર
પોતાની આંગળીઓ ફરતી હશે એ
વિચારમાત્ર એને
રોમાંચિત કરી દેતો. એની પરીક્ષા ખૂબ
જ સરસ
રહી.
યુનિવર્સિટીમાં એ પ્રથમ આવ્યો છે એવી
જાણ
થતાં જ એણે કૉલેજ પરથી પોતાના
પિતાને ફોન
કરી દીધો. પોતાની ભેટની વાત પણ
યાદ કરી. ઘર
નજીક એ ઘરે પહોંચ્યો.
કમ્પાઉન્ડનો દરવાજો ખોલીને
આંગણામાં એણે નજર નાખી, પણ પેલી કાર
ક્યાંય
દેખાઈ નહીં. એ થોડોક નિરાશ અને ઉદાસ
થઈ
ગયો.
કદાચ કારની ડિલિવરી પછી લેવાની
હશે તેમ
વિચારીને એ ઘરમાં દાખલ થયો. નોકરે
એને
આવીને કહ્યું કે ‘શેઠ સાહેબ
એમના રૂમમાં એના આવવાની રાહ જુએ છે.”
દોડતો એ પિતાજીના રૂમમાં પહોંચ્યો.
એના પિતાજી જાણે એના આવવાની રાહ જ
જોઈ
રહ્યા હોય તેવું લાગ્યું. એના આવતાં જ
એમણે
ઊભા થઈ એ યુવકને ગળે વળગાડ્યો. અમીર
બાપનો દીકરો હોવા છતાં બાપના પૈસે
તાગડધિન્ના કરવાને બદલે દિલ દઈને
ભણવાવાળા દીકરા માટે એમને કેટલું બધું
ગૌરવ છે
એવું પણ કહ્યું. પછી સુંદર કાગળમાં
વીંટાળેલું એક
નાનકડું બૉક્સ એને આપીને કહ્યું ; ‘દીકરા,
આમ
જ આગળ વધતો રહે એવા મારા આશીર્વાદ
છે. આ લે
તારા માટે મારા તરફથીઉત્તમ ભેટ !’
એટલું
કહી બૉક્સ દીકરાના હાથમાં આપી તેઓ
પોતાના કામે જવા નીકળી ગયા.
પિતાના ગયા પછી દીકરાએ બૉક્સ
ખોલ્યું. જોયું
તો એમાં પાકા પૂઠાંવાળું સોનેરી
અક્ષરોથી લખાયેલું
રામાયણ હતું. રામાયણ બંને હાથમાં
પકડીને એ
થોડી વાર એની સામે જોઈ રહ્યો. એને
અત્યંત
ગુસ્સો આવ્યો. રામાયણ એમ જ ટેબલ પર
મૂકીને
એ વિચારમાં પડી ગયો. ઘરમાં અઢળક
પૈસો હોવાછતાં પોતાની એક જ
માગણી પૂરી કરવામાં બાપનો જીવ ન
ચાલ્યો એ
વાત એને હાડોહાડ કોરી ખાતી હતી.
સ્પોર્ટસ કાર
અપાવવાની હા પાડ્યા પછી પણ
પિતાનો જીવ ન
ચાલ્યો એનું એને ખૂબ જ લાગી આવ્યું.
એ પોતે પણ સ્વમાની હતો. એટલે બીજી
વખત
પિતા પાસે માગવાનો કે એમને યાદ
અપાવવાનો તો સવાલ જ નહોતો પેદા
થતો.
ઘણો વખત વિચાર કર્યા પછી એણે કાગળ
લીધો.
એમાં ટૂકમાં એટલું જ લખ્યું કે, ‘પૂજ્ય
પિતાજી,
સ્પૉર્ટસ કારને બદલે રામાયણ
આપવામાં આપનો કોઈ શુભ ઈરાદો જ હશે
એમ
માનું છું. પણ મારે સ્પૉર્ટસકાર જોઈતી
હતી. હું
ઘરેથી જાઉં છું. ક્યાં જાઉં છું તે નહીં કહું.
જ્યારે
તમારી સમકક્ષ પૈસાદાર બની જઈશ
ત્યારે જ હવે
તમને મોં બતાવીશ. એ જ… પ્રણામ.’
ચિઠ્ઠી રામાયણના બૉક્સ પર મૂકી એ
ઘરેથી નીકળી ગયો.
વરસો વીતી ગયાં. યુવકનાં નસીબ ખૂબ
સારાં હતાં.
મહેનતુ અને હોશિયાર તો એ હતો એટલે એણે
જે
બિઝનેસ શરૂ કર્યો તેમાં તેને
અણધારી સફળતામળી અને એ અતિશ્રીમંત
બની ગયો. સુંદર મજાનું ઘર બનાવી એણે
લગ્ન
પણ કરી લીધાં. વચ્ચે વચ્ચે એને પોતાના
પ્રેમાળ
પિતા યાદ આવી જતા.પરંતુ એ પ્રેમાળ
ચહેરા પાછળ રહેલો કંજૂસ માણસનો ચહેરો
એને
તરત જ દેખાતો. માતાના મૃત્યુ પછી પોતે
આટલા વરસમાં એક સ્પોર્ટસ-કાર જ
માગી અને
અઢળક પૈસો હોવા છતાં એના પિતાએ
કારને બદલે
ફિલૉસૉફી ઝાડવા ફકત રામાયણ જ
આપ્યું, એ યાદ આવતાં જ એનું મન
કડવાશથી ભરાઈ જતું.
પરંતુ એક દિવસ વહેલી સવારથી જ ન જાણે
કેમ
એને એના પિતાની યાદ ખૂબ જ આવતી
હતી. હવે
તો એ ઘણા વૃદ્ધ પણ થઈ ગયા હશે. કંઈ
નહીં તો એમની સાથે વાત તો કરવી જ
જોઈએ.
વૃદ્ધ માણસોને સંતાનોના અવાજથી પણ
શાતા વળતી હોય છે. પિતા સાથે ફોન
પર વાત
કરવાની એને અતિતીવ્ર ઈચ્છા થઈ આવી.
આમેય
સમયની સાથે દરેક ગુસ્સાનું કારણ નાનું
થતું જાય છે
અને એકાદ દિવસ એવો પણ આવે કે માણસને
એમ
થાય કે, ‘અરે ! આવા નાનાઅને વાહિયાત
કારણ માટે
આપણે આટલા બધા ગુસ્સે થયા હતા ?!’ આવું જ
કંઈક એ યુવાનની સાથે બની રહ્યું હતું. એણે
ફોન
લઈ પોતાના ઘરનો નંબર ઘુમાવ્યો.
સામા છેડે જ્યારે કોઈએ ફોન ઊંચક્યો
ત્યારે
એના ધબકારા ખૂબ વધી ગયા હતા.
પિતાજી સાથે
પોતે કઈ રીતે વાત કરી શકશે એની અવઢવ
સાથે
એણે ‘હેલો !’ કહ્યું. પણ એને નિરાશા
સાંપડી.
સામા છેડે એના પિતાજી નહોતા પણ
ઘરનો નોકર
હતો. નોકરે કહ્યું કે : ‘શેઠ સાહેબતો
અઠવાડિયા
પહેલાં અવસાન પામ્યા. તમે પોતાનું
સરનામું જણાવેલ નહીં એટલે તમને જાણ શી
રીતે
કરી શકાય ? પણ મરતાં સુધી તમને યાદ
કરીને
રડતા હતા. એમણે કહેલું કે તમારો ફોન
ક્યારેય પણ
આવે તો તમને બધો કારોબાર સંભાળવા
બોલાવી લેવા.
એટલે તમે આવી જાવ !’
પેલા યુવક પર તો જાણે વજ્રઘાત થયો.
પોતાના પિતાને એમની છેલ્લી ક્ષણોમાં
પણ
મળી ન શકાયું એ વાતની વેદનાએ એના
હૈયાને
વલોવી નાખ્યું. પણ હવે શું થાય ?
પોતાના ઘરે
પાછા જવાની ઈચ્છા સાથે એણે સહકુટુંબ
વતન
તરફ પ્રયાણ કર્યું. ઘરે આવીને સીધો જ એ
પોતાના પિતાના રૂમમાં ગયો. એમની
છબી સામે
ઊભા રહેતાં જ એની આંખો વરસી પડી.
થોડી વાર
આંખો બંધ કરીને એ એમ જ ઊભો રહ્યો.
પછી પોતાના રૂમમાં આવ્યો.
એવામાં એની નજર પોતાના ટેબલ પર પડેલ
સોનેરી અક્ષરવાળા રામાયણ પર પડી, આ
એ જ
રામાયણ હતું જેના કારણે એણે ઘર છોડ્યું
હતું.
એના મનમાંથી પિતાજી માટેની બધી જ
કડવાશ
ગાયબ થઈ ગઈ હતી. એણે રામાયણ હાથમાં
લઈ
ખોલ્યું. પ્રથમ પાના પર જ એના પિતાએ
લખ્યું હતું:
‘હે ભગવાન ! મારા દીકરા જેવા ઉત્તમ
સંતાનને
ભેટ કઈ રીતે આપવી તે તું મને શિખવાડજે.
એણે
માગેલ વસ્તુઓ સાથે એને ઉત્તમ સંસ્કારોનો
વારસો
પણ આપી શકું એવું કરજે.’
એ યુવકને આજે પોતાના પિતાએ લખેલ આ
શબ્દો રામાયણના શબ્દો જેટલા જ મહાન
લાગ્યા.
એ શબ્દોને ચૂમવા એણે રામાયણને હોઠે
લગાડ્યું.
એજ વખતે એનાં પાનાંઓ વચ્ચે ક્યાંક
છુપાયેલ એક
નાનકડું કવર નીચે જમીન પર પડ્યું.
પેલા યુવાને એ કવર ખોલ્યું. એમાં
હોન્ડા સ્પૉર્ટસ-કારની ચાવી અને
સંપૂર્ણ
ચૂકતે લખેલું પેલા શૉ-રૂમનું બિલ હતું. એના
પર
તારીખ હતી : એ પ્રથમ નંબરે પાસ થઈને
આવ્યો હતો એ જ દિવસની….!કંઈકેટલીય
વાર
સુધી એ નીચે બેસી રહ્યો. પછી હૃદય
ફાટી જાય
એટલું બધું રડ્યો. ધ્રુસકે ધ્રુસકે. એ
પછી કલાકો સુધી સૂનમૂન બની એ
પોતાનાપિતાજીની છબી સામે જોતો
રહ્યો.
ભેટ આપણે ધારીએ એ રીતે મળે તો જ આપણે
એનો સ્વીકાર કરીએ એ તો કેવું ? વડીલો
તો ઠીક,
ભગવાન તરફથી જુદી જુદી રીતે પૅકિંગ
કરાયેલ
આવી કેટલી બધી ભેટોનો આપણે અસ્વીકાર
કરતાં હોઈશું ? કારણ એક જ કેઆપણી
ધારણા પ્રમાણે એનું પૅકિંગ થયું નથી હોતું.
બસ ! એટલું જ !!

માતાપિતાનું સન્માન કરો.

Posted in हास्यमेव जयते

पहले के जवांई के जब आने का पता चलता


1. पहले के जवांई के जब आने का पता चलता तो ससुर जी दाढ़ी बनाकर और नए कपङे पहनकर स्वागत के लिए कम्पलीट रहते थे।
😂😂
2. जवांई आ जाते तो बहुत मान मनवार मिलती और छोरी दौड़कर रसोई में घुस जाती थी। सासुजी पानी पिलाती और धीरे से कहती :- “आग्या कांई” ?
😄😄
3. आने का समाचार मिलते ही गली मोहल्ले के लोग चाय के लिए बुलाते थे,
और
काकी सासुजी या भाभियां तो आटे का हलवा भी बनाती थी ।
😝😝
4. जवांई खुद को ऐसा महसूस करता था कि वो पूरे गांव का जवांई है ।
😛
5. जवांई के घर में आने के बाद घर के सब लोग डिसिप्लिन में आ जाते थे ।
😝
6. जवांई बाथरूम से निकलते तो उनके हाथ सन्तूर साबुन से धुलवाते, भले खुद उजाला साबुन से नहाते थे ।
😜
7. जवांई अगर रात में रुक जाते तो सुबह उनका साला पेस्ट और ब्रश हाथ में लेकर आस पास घूमता रहता था ।
😂
8. जब जवांई का अपनी बीवी को लेकर जाने का समय हो जाता तो वो स्कूटर को पहले गैर में डालकर भन्ना भोट निकालते थे, जिससे उनका ससुराल में प्रभाव बना रहता था ।
😁
.
अब आज के जवांई की दुर्दशा :-
.
1. आज के जवांई से कोई भी लुगाई लाज नहीं करती है,खुद की बीवी भी सलवार कुर्ते में आस पास घूमती रहती है ।
😚😚.
काकी सासुजी और भाभी कोई दूसरी रिश्तेदारी निकाल कर बोलती हैं :- ”अपने तो जवांई वाला रिश्ता है ही नहीं”
😮😮
2. साला अगर कुंवारा है और अगर उसकी सगाई नहीं हो पा रही है तो इसका ताना जवांई को सुनाया जाएगा :-
“तुम्हारा हो गया इसका भी तो कुछ सेट करो ।”
😎😎
3. पानी पीना हो तो खुद रसोई में जाना पड़ेगा, कोई लाकर देने वाला नहीं है ।
😀😀
4. ससुराल पक्ष की किसी शादी में जवांई को इसीलिए ज्यादा मनवार करके बुलाया जाता है ताकि जवांई बच्चों को संभाल सके, बीवी और सासुजी आराम से महिला संगीत में डांस कर सके।
😁😁
5. जरा सा अगर बीवी को ससुराल में कुछ कह दिया तो सासुजी की तरफ से तुरंत जवाब आता हैं –
”एक से एक रिश्ते आऐ थे, पर ये ही मिला था छोरी को दुखी करने के लिए,

वक्त वक्त की बात है ……!

Soni Pareek
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जवाहर लाल नेहरु ने अपनी पत्नी के साथ जो किया वो इतना भयावह था की जान कर आप नेहरु से नफरत करने लगेंगे.. ======================== टीवी चैनेलो पर कांग्रेस पार्टी के नेताओ को अक्सर ये आरोप लगते हुए सुना जाता है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पत्नी को छोड़ दिया …लेकिन आज हम कांग्रेस के सबसे […]

via जवाहर लाल नेहरु ने अपनी पत्नी के साथ जो किया वो इतना भयावह था की जान कर आप नेहरु से नफरत करने लगेंगे.. — પ્રહલાદ પ્રજાપતિ