Posted in छोटी कहानिया - Chooti Kahaniya

ऐक शेठजी ने गांव से अलविदा होकर

ऐक शेठजी ने गांव से अलविदा होकर देशावर दूकान की धीरे धीरे समय गुजारता चला गया दूकान में
व्यापार चल निकला ।।।खाने के लिए समय नहीं था उनके पास उधर बच्चे पढने में मशगूल थे और दूसरी तरफ
शेठजी व्यापार में दिन दूगनी
रात चौगुनी प्रगति पर था।।।
समय गुजारता गया ।।शेठजी मालदार बन गए थे।।।सबकूठ भगवान की दया से था ।।।मगर बच्चों के हाव भाव ओर भाषा से पूरी तरह बदल गये थे।।।रिश्तों नातो से दूरीया बहुत पूरानी हो चुकी थी ।।।ऐक बेटी जिसने वहीं लोकल परिवार में लव मैरिज कर ली थी।।
ऐक बेटे की उम्र 30 हो चुकी थी समाज से जूडाव व दूर दराज बसने से सगपण नहीं आ रहे थे।।।आखिरकार 35
वर्ष बाद गांव आये थे।।।।
गाँव पूरा खाली था ऐक भी
परिवार नहीं था ।।।।
रिश्तों नातो को फोन कर संपर्क किया ।।।।गाँव की
समाज की मिटिंग में हाजिरी 36 वर्ष बाद लगाई ।।।चढावे चढाये।।।मगर ना जान ना पहचान ।।।पहली बार अपनी गलती का अहसास हुआ था।।।गाँव व सामाजिक व्यवस्था से बिछडने का दर्द
व सामाजिक व्यवस्था के जीवन में जूडाव के अमृत रस के आनंद को अनुभव करने का मौका जो मिला था।।।।
मगर समय की मार से बचने के उपाय काम नही आये।।।
बेटे की शादी वहीं दूसरी दिगंबरी में कर दी ।।।।।।
पाच वर्ष गूजरते चले गए
बच्चे व बहू के व्यवहार में
रात दिन का अंतर था।।।।
आपस में सामंजस्य नहीं बैठ
रहा था ।।।शरीर बूढा हो चुका था ।।।परिस्थिति या साथ नहीं दे रही थी।।।।।
रिश्तों नातो में दूरीया व मैल मिलाप नहीं होने से सबकूछ
निष्क्रिय हो चुके थे।।।।।
आज शेठजी व शेठानीजी ऐक
वृधाषरम में जीवन व्यतीत कर रहे हैं ।।।।समाज के सवरग व बिना समाज के नरक का अनुभव कर रहे हैं।।।
अपने बच्चों को समाज के हर
कार्यक्रम का हिस्सा बनाये
गांव व समाज से जूडे रहिये
रिश्ते नाते मैं अपने पन के भाव रखिये ।।।समाज के प्रति अपनी आस्था व जिम्मेदारी को समझे।।।।।
ये अमूल्य धरोहर हमारे पूर्वजों ने हमें दी है यही आधार स्तंभ है हमारी संस्कृति व संस्कारो का।।।
इसमें घूल जाओ शक्कर बनकर।।।।।।पैसे आज है
कल नहीं।।।मगर समाज रहा तो सबका साथ सबका विकास ।।।।समाज को बिखरने से बचाये।।।।।
पेड से टूटि टहनी से पूछे बिछडने का दर्द ।।।।।।

Satu Bhai

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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