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हिंदू विवाह में सात फेरे सात वचन और इनका महत्व – Ajay awasthi Ajju


हिंदू विवाह में सात फेरे सात वचन और इनका महत्व

हिन्दू समाज में शादी को एक बहुत ही पवित्र बन्धन माना गया है. शादी को विवाह के नाम से भी जाना जाता है. विवाह का शाब्दिक अर्थ है उत्तरदायित्व का वहन करना. विवाह पति पत्नी के मध्य होने वाला जन्म-जन्मांतरों का सम्बंध होता है. अग्नि देवता जी शाक्षी मानकर कन्या व वर एक पवित्र बंधन में बंध जाते हैं

विवाह के समय पति-पत्नी अग्नि को साक्षी मानकर एक-दूसरे को सात वचन देते हैं जिनका दांपत्य जीवन में काफी महत्व होता है. इन सात वचनों को लेने से वैवाहिक जीवन में आने वाली कई समस्याओं आसानी से समाप्त हो जाती है. तो आइये जानते हैं वे कौन से वचन हैं जिन्हें हिन्दू धर्म में विवाह के समय लिया जाता है.

सात फेरों के सात वचन

विवाह के समय कन्या तथा सात वचन लेते है. आइये जानते हैं कौन से है वे सात वचन.

पहला वचन

तीर्थव्रतोद्यापन यज्ञकर्म मया सहैव प्रियवयं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति वाक्यं प्रथमं कुमारी !!

पहले वचन में कन्या वर से कहती है कि यदि आप कभी तीर्थयात्रा को जाओ तो मुझे भी अपने साथ लेकर जाना. कोई व्रत-उपवास अथवा अन्य धर्म कार्य आप करें तो आज की भांति ही मुझे अपने वाम भाग में अवश्य स्थान दें. यदि आप इसे स्वीकार करते हैं तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.

दूसरा वचन

पुज्यौ यथा स्वौ पितरौ ममापि तथेशभक्तो निजकर्म कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं द्वितीयम !!

दूसरे वचन में कन्या वर से कहती है जिस प्रकार आप अपने माता-पिता का सम्मान करते हैं, उसी प्रकार मेरे माता-पिता का भी सम्मान करें तथा कुटुम्ब की मर्यादा के अनुसार धर्मानुष्ठान करते हुए ईश्वर भक्त बने रहें तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.

तीसरा वचन

जीवनम अवस्थात्रये मम पालनां कुर्यात,
वामांगंयामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं तृ्तीयं !!

तीसरे वचन में कन्या यह वचन मांगती है कि आप जीवन की तीनों अवस्थाओं (युवावस्था, प्रौढावस्था, वृद्धावस्था) में मेरा पालन करते रहेंगे, तो ही मैं आपके वामांग में आने को तैयार हूँ.

चौथा वचन

कुटुम्बसंपालनसर्वकार्य कर्तु प्रतिज्ञां यदि कातं कुर्या:,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं चतुर्थं !!

चौथे वचन में कन्या चौथा यह वचन मांगती है कि अब तक आप घर-परिवार की चिन्ता से पूर्णत: मुक्त थे. अब जबकि आप विवाह बंधन में बँधने जा रहे हैं तो भविष्य में परिवार की समस्त आवश्यकताओं की पूर्ति का दायित्व आपके कंधों पर है. यदि आप इस भार को वहन करने की प्रतीज्ञा करें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हू.

पाचवाँ वचन

स्वसद्यकार्ये व्यवहारकर्मण्ये व्यये मामापि मन्त्रयेथा,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: पंचमत्र कन्या !!

अपने पांचवे वचन में कन्या यह वचन मांगती है की अपने घर के कार्यों में, विवाहादि, लेन-देन अथवा अन्य किसी हेतु खर्च करते समय यदि आप मेरी भी मन्त्रणा लिया करेंगे तो मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.

छठा वचन

न मेपमानमं सविधे सखीनां द्यूतं न वा दुर्व्यसनं भंजश्चेत,
वामाम्गमायामि तदा त्वदीयं ब्रवीति कन्या वचनं च षष्ठम !!

अपने छठे वचन में कन्या कहती है कि यदि मैं अपनी सखियों अथवा अन्य स्त्रियों के बीच बैठी हूँ तब आप वहाँ सबके सम्मुख किसी भी कारण से मेरा अपमान नहीं करेंगे. यदि आप जुआ अथवा अन्य किसी भी प्रकार के दुर्व्यसन से अपने आप को दूर रखें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.

सातवाँ वचन

परस्त्रियं मातृसमां समीक्ष्य स्नेहं सदा चेन्मयि कान्त कुर्या,
वामांगमायामि तदा त्वदीयं ब्रूते वच: सप्तममत्र कन्या !!

अपने सातवे व् अंतिम वचन में कन्या ये वर मांगती है कि आप पराई स्त्रियों को माता के समान समझेंगें और पति-पत्नि के आपसी प्रेम के मध्य अन्य किसी को भागीदार न बनाएंगें. यदि आप यह वचन मुझे दें तो ही मैं आपके वामांग में आना स्वीकार करती हूँ.

Posted in हास्यमेव जयते

ગાંઠિયા સૌરાષ્ટ્રની મહાન પારિવારીક વાનગી છે … લોક ફૂડ એટલે કે લોકખાણું છે.વિદ્યાર્થીના લંચ બોક્સથી માંડીને વૃદ્ધાશ્રમમાં થતા દાન ધર્માદામાં ગાંઠિયા હાજર હોય છે. લગ્ન હોય અને જાન આવે એટલે વેવાઈને ગાંઠિયા-જલેબીનો નાસ્તો 1957માં અપાતો અને આજે 2017માં પણ અપાય છે. કોઈના મૃત્યુ પછીના જમણમાં પણ ગાંઠિયા અને અન્નકૂટના પ્રસાદમાં પણ ગાંઠિયા હોય છે. આ ધરા ઉપર કેટલુંક […]

via ગાંઠીયા – એક નિબંધ — crthakrar

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

मीरा


http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%AE%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%88

https://meerabai.wordpress.com/

मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई
जाके सिर मोर मुकुट मेरो पति सोई
तात मात भ्रात बंधु आपनो न कोई
छांड़ी दई कुलकी कानि कहा करिहै कोई
संतन ढिग बैठि बैठि लोक लाज खोई
चुनरी के किये टूक ओढ़ लीन्ही लोई
मोती मूंगे उतार बनमाला पोई
अंसुवन जल सीचि सीचि प्रेम बेलि बोई
अब तो बेल फैल गई आंनद फल होई

दूध की मथनियां बड़े प्रेम से बिलोई
माखन जब काढ़ि लियो छाछ पिये कोई
भगति देखि राजी हुई जगत देखि रोई
दासी मीरा लाल गिरधर तारो अब मोही

शब्दार्थ:

कानि- इज्जत, मान, लाज, परंपरा

संतन ढिग- संतों के साथ बैठ कर ( यहा मीरां रैदास के बारे में कहना चाहती है जो जन्म से चमार थे, जूते बनाते हुए भजन गाते थे,परन्तु बहुत ही माने हुए विद्वान संत थे)

लोई- एक प्रकार का कंबल

मथनियां: एक प्रकार का पात्र जिसमें गाँवों में आज भी दही बिलो कर मक्खन निकाला जाता है।

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एक सामान्य वर्ग के गरीब छात्र


 

एक सामान्य वर्ग के गरीब छात्र
का मोदी जी के नाम खुला ख़त …

आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र
मोदी जी…..
मै एक सामान्य वर्ग का छात्र हूँ , मेरे पिता का देहांत हो जाने
की वजह से मेरी माँ को घर चलाने में बहुत दिक्कते
आयीं। मैंने अपने गाँव के सरकारी स्कूल फिर कॉलेज
में पढाई की। सरकारी स्कूल
की फीस तक जुटाने में हमे हमेशा दिक्कत
होती थी जबकि मैंने देखा की कुछ वर्ग
विशेष के बच्चो को, आर्थिक रूप से संपन्न होने बावजूद भी,
फीस माफ़ थी और
वजीफा भी मिला करता था। मै पढ़ाई में अच्छा था।
इंटरमीडिएट पास करने के बाद मैंने मेडिकल फील्ड
चुना। एंट्रेंस एग्जाम के लिए फॉर्म खरीदा 650 रुपये
का जबकि सौरभ भारतीय नाम के मेरे दोस्त
को वही फॉर्म 250 का मिला। उसके पिता डॉक्टर हैं। एंट्रेंस
एग्जाम का रिजल्ट आया। सौरभ भारतीय का नंबर मेरे नंबर से
काफी कम था, पर उसे सिलेक्शन मिल गया, मुझे
नहीं। अगले साल मै भी सेलेक्ट हुआ। मैंने
देखा की बहुत से पिछड़े जाति के लोग, अनुसूचित जाति के
जनजाति के लोग जो हर मामले में मुझसे कहीं ज्यादा सुविधासंपन्न
हैं, उनको मुझसे बहुत कम फीस देनी पड़
रही है। उनके स्कॉलरशिप्स भी मुझे मिल
रही स्कालरशिप से बहुत ज्यादा है और उनका हॉस्टल
फीस भी माफ़ है। इंटर्नशिप बीतने के
बाद मुझे लगा की अब हम सब एक लेवल पर आ गए, अब
कम्पटीशन बराबर का होगा। पर मै गलत था। पोस्टग्रेजुएशन के
लिए प्रवेश परीक्षा में मेरा सहपाठी प्रकाश पासवान
मुझसे काफी कम नंबर पाते हुए मुझसे बहुत
अच्छी ब्रांच उठाता है।
प्रधानमंत्री जी ऐसा नौकरी के वक़्त
भी होगा।
प्रधानमंत्री जी मैंने आजतक कोई भेदभाव
नहीं किया। किसी को मंदिर में जाने से
नहीं रोका, किसी को कुएं से
पानी पीने से नहीं रोका,
किसी से छुआछूत नहीं की, अरे हम
सब लोग तो साथ साथ एक थाली में खाना खाते थे , इतिहास में
किसने किया, क्या किया उस बात के लिए मै दोषी क्यों? मुझसे क्यूँ
बदला लिया जा रहा है? मै तो खुद जीवन भर से
जातीय भेदभाव का शिकार होता रहा हूँ। क्या ऐसे में मैं जातिवाद से
दूर हो पाऊंगा? ऐसा मै इसलिए पूंछ रहा हूँ की जातिवाद ख़तम
करने की बात हो रही है तो जाति के आधार पर दिए
जा रहे आरक्षण के होते हुए जातिवाद ख़तम हो पायेगा? मुझे कतई
बुरा नहीं लगेगा अगर किसी गरीब
को इसका फायदा हो, लेकिन मैंने स्वयं देखा है की इसका 95
प्रतिशत लाभ उन्ही को मिलता है जिन्हें
इसकी जरुरत नहीं है। शिक्षित वर्ग से
उम्मीद की जाती है
की वो समाज को बटने से रोके। जातिगत आरक्षण खुद शिक्षित
समाज को दो टुकड़े में बाँट रहा है।
प्रधानमंत्री जी कम से कम इस बात
की विवेचना तो होनी चाहिए की आरक्षण
का कितना फायदा हुआ और किसको हुआ? अगर इसका लाभ गलत
लोगों को मिला तो सही लोगों तक पहुचाया जाना चाहिए। और अगर
लाभ नहीं हुआ तो इसका क्या फायदा, और अगर फायदा हुआ
तो फिर 67 सालों बाद भी इसकी जरुरत
क्यों बनी हुयी है?
प्रधानमंत्री जी ‘जाति के आधार पर
दिया जा आरक्षण’ साफ़ साफ़ योग्यता का हनन है, इससे हर वर्ग
की गुणवत्ता प्रभावित हुयी है। अगर जातिगत
आरक्षण इतना ही जरुरी है तो फ़ौज में, खेलों में,
राजनीतिक पार्टियों के अध्यक्ष के पद में,
मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के पदों के लिए
आरक्षण का प्रावधान क्यों नहीं किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री जी हमने आपको बहुत
ही साहसिक फैसले लेते हुए देखा है। शुद्ध
राजनीति से प्रभावित इस मुद्दे पर भी साहसिक फैसले
की जरुरत है। उम्मीद सिर्फ आपसे है।
आशा है की ये पत्र कभी आप तक पहुचे तो आप
‘साहसी’ बने रहेंगे।
आपके देश का एक गरीब सामान्य वर्ग का छात्र….!

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

भगवान श्री गणेश को तुलसी नहीं चढ़ती


जब श्री गणेश ने तुलसी को और
तुलसी ने गणेश जी को शाप दिया।
पढ़ें कथा ।

भगवान श्री गणेश को तुलसी नहीं चढ़ती। इसके पीछे पुराणों में एक रोचक कथा मिलती है। एक समय में धर्मात्मज नाम के राजा हुआ करते उनकी कन्या तुलसी यौवनावस्था में थी। अपने विवाह की इच्छा लेकर तुलसी तीर्थ यात्रा पर निकल पड़ी।
उन्होंनें कई जगह की यात्रा कि एक स्थान पर उन्हें तरुणावस्था में भगवान श्री गणेश को तपस्या में लीन देखा। भगवान गणेश का रुप अत्यंत मोहक और आकर्षक था। तुलसी भगवान गणेश के इस रूप पर मोहित हो गई और अपने विवाह का प्रस्ताव उनके समक्ष रखने के लिए उनका ध्यान भंग कर दिया।

भगवान गणेश ने स्वयं को ब्रह्मचारी बताते हुए तुलसी का विवाह प्रस्ताव ठुकरा दिया। तुलसी को भगवान गणेश के इस रुखे व्यवहार और अपना विवाह प्रस्ताव ठुकराए जाने से बहुत दुख हुआ और उन्होंने आवेश में आकर भगवान गणेश को दो विवाह होने का शाप दे दिया।

इस पर श्री गणेश ने भी तुलसी को असुर से विवाह होने का शाप दे डाला।

बाद में तुलसी को अपनी भूल का अहसास हुआ और भगवान गणेश से क्षमा मांगी।

ना तुम्हारा शाप खाली जाएगा ना मेरा। मैं रिद्धि और सिद्धि का पति बनूंगा और तुम्हारा भी विवाह राक्षस जलंधर से अवश्य होगा लेकिन अंत में तुम भगवान विष्णु और श्री कृष्ण की प्रिया बनोगी और कलयुग में भगवान विष्णु के साथ तुम्हें पौधेे के रूप में पूजा जाएगा लेकिन मेरी पूजा में तुलसी का प्रयोग नहीं किया जाएगा।

Dev Sharma

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महाभारत प्रकरण: यक्ष-युधिष्ठिर संवाद – महाजनो येन गतः सः पन्थाः


महाकाव्य महाभारत में ‘यक्ष-युधिष्ठिर संवाद’ नाम से एक पर्याप्त चर्चित प्रकरण है । संक्षेप में उसका विवरण यूं है: पांडवजन अपने तेरह-वर्षीय वनवास पर वनों में विचरण कर रहे थे । तब उन्हें एक बार प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश हुई । पानी का प्रबंध करने का जिम्मा प्रथमतः सहदेव को सोंपा गया । उसे पास में एक जलाशय दिखा जिससे पानी लेने वह वहां पहुंचा । जलाशय के स्वामी अदृश्य यक्ष ने आकाशवाणी के द्वारा उसे रोकते हुए पहले कुछ प्रश्नों का उत्तर देने की शर्त रखी, जिसकी सहदेव ने अवहेलना कर दी । यक्ष ने उसे निर्जीव (संज्ञाशून्य?) कर दिया । उसके न लौट पाने पर बारी-बारी से क्रमशः नकुल, अर्जुन एवं भीम ने पानी लाने की जिम्मेदारी उठाई । वे उसी जलाशय पर पहुंचे और यक्ष की शर्तों की अवज्ञा करने के कारण सभी का वही हस्र हुआ । अंत में युधिष्ठिर स्वयं उस जलाशय…

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कठोपनिषद् के नीति वचन – श्रेयस् (कल्याणप्रद) एवं प्रेयस् (चित्ताकर्षक) में चुनाव


कठोपनिषद् में ऋषिकुमार बालक नचिकेता और यम देवता के बीच प्रश्नोत्तरों की कथा का वर्णन है । नचिकेता की शंकाओं का समाधान करते हुए यम उपदेश देते हैं कि मनुष्य दो प्रकार के कर्मों से बंधा रहता है, प्रथम वे जो कल्याणकारी होते हैं और द्वितीय वे जो उसको प्रिय लगते हैं तथा उसे अपनी ओर खींचते हैं । तद्विषयक ये दो मंत्र विशेष तौर पर उल्लेखनीय हैं:

अन्यच्छ्रेयोऽन्यदुतैव प्रेयस्ते उभे नानार्थे पुरुषंसिनीतः ।
तयोः श्रेय आददानस्य साधु भवति हीयतेऽर्थाद्य उ प्रेयो वृणीते ।।

(कठोपनिषद्, अध्याय १, बल्ली २, मंत्र १)
[अन्यत् श्रेयः उत अन्यत् (च) एव प्रेयः, ते उभे पुरुषम् नाना अर्थे सिनीतः; तयोः श्रेयः आददानस्य साधुः भवति, यः उ प्रेयः वृणीते (सः) अर्थात् हीयते ।]

एक वह कर्म है जिसमें उसका हित निहित रहता है और दूसरा वह है जो उसे प्रिय लगता है । ये दोनों ही उसे विभिन्न प्रयोजनों से बांधे रहते हैं । इन दो…

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सैनिको पर पत्थर


कल रात में NEWS 18 INDIA पर चर्चा के दौरान भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा नें ”जय श्रीराम” बोलकर चैलेंज किया कि कांग्रेस ,सपा, बसपा, के प्रवक्ता भी जय श्रीराम बोलकर दिखाएं ! जबकि तीनों पार्टियों के प्रवक्ता हिन्दू थे राजीव त्यागी (कांग्रेस), अनिल यादव (सपा), सुधीन्द्र भदौरिया (बसपा) सनातनी होने के बावजूद इन सेकुलरों ने जय श्रीराम बोलने से बचते रहे और आखिर तक ”जय जय श्री राम” नहीं बोल सके ! अरे जिसे अपने अराध्य भगवान् का नाम लेने की दिक्कत है वो क्या हम हिन्दुओं की भावनाओं को कभी सम्मान देंगे ? न, कभी नहीं ! सनातनी मित्रों धिक्कार है उन हिन्दुओं पर जो इन पार्टियों को वोट देते हैं !
सैनिको पर पत्थर – अहिंसक आंदोलन
भारत तेरे टुकडे – अभिव्यक्ति आजादी
भंसाली को थप्पड़ – हिन्दू आतंकवाद
गौमांस भक्षण – भोजन का अधिकार
ईद पर बकरा काटना – धार्मिक स्वतंत्रता
तीन तलाक हलाला – धार्मिक अंदरूनी मामला
दीवाली पटाखे – पर्यावरण प्रदूषण
न्यू इयर पटाखे – आक्सीजन निकलता है
मटकी फोड छोटे बच्चे नही- गलत बात है
खतना मे बच्चे – धार्मिक अंदरूनी मामला
प्लेटफार्म पर नमाज – धार्मिक अधिकार
सड़क पर पंडाल – सड़क जाम का केस
मस्जिद लाउडस्पीकर। – धार्मिक स्वतंत्रता
मंदिर मे लाउडस्पीकर – ध्वनि प्रदूषण
करवाचौथ ढकोसला
वैलेंटाइनडे प्यार का पर्व
चार शादियां धार्मिक स्वतंत्र
हिन्दू दो शादी केस दर्ज
गणेश विसर्जन, होली जल प्रदूषण
ताजिया विसर्जन संविधान अधिकार
देवताओ देवी अपमान कला की अभिव्यक्ति
मोहम्मद पर बयान रासुका धारा, तोडफोड
ये है भारत की सच्चाई

Vishnu Arodaji