Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એકવખત યુધિષ્ઠીર સિવાયના ચાર પાંડવો


એકવખત યુધિષ્ઠીર સિવાયના ચાર પાંડવો ભગવાન શ્રીકૃષ્ણને મળવા માટે ગયા હતા. ચારે પાંડવોએ કળયુગમાં માણસ કેવી રીતે જીવતો હશે અને કળીયુગમાં કેવી સ્થિતી પ્રવર્તતી હશે એ જાણવાની ઇચ્છા બતાવી એટલે ભગવાન શ્રીકૃષ્ણએ ચારે દિશાઓમાં એક એક બાણ છોડ્યુ અને પછી ચારે ભાઇઓને એ બાણ શોધી લાવવા માટે આજ્ઞા કરી.

અર્જુન જે દિશામાં બાણ લેવા ગયો ત્યાં એણે એક વિચિત્ર ઘટના જોઇ. એક કોયલ મધુર અવાજે ગીતો ગાતી હતી. અર્જુનના પગ થંભી ગયા એણે કોયલ તરફ જોયુ તો આશ્વર્યથી આંખો પહોળી થઇ ગઇ. મધુર કંઠે ગીતો ગાનારી કોયલ એક સસલાનું માંસ પણ ખાતી જતી હતી. સસલુ દર્દથી કણસતુ હતુ અને કોયલ ગીત ગાતા ગાતા એનું માંસ ખાતી હતી.

ભીમ જે દિશામાં બાણ લેવા ગયો ત્યાં એને પણ એક કૌતુક જોયુ. એક જગ્યાએ પાંચ કુવાઓ હતા. ચાર કુવાઓ પાણીથી ઉભરાતા હતા. આ ચારે કુવાની બરોબર વચ્ચે પાંચમો કુવો હતો જે સાવ ખાલી હતો. ભીમને એ ન સમજાણું કે ચાર કુવાઓ ઉભરાય છે તો વચ્ચેનો પાંચમો કુવો સાવ ખાલી કેમ છે ?

નકુલ જે દિશામાં બાણ લેવા ગયો હતો ત્યાં તેણે એક ગાયને બચ્ચાને જન્મ આપતા જોઇ. બચ્ચાને જન્મ આપ્યા બાદ ગાય એને ચાટવા લાગી. થોડીવારમાં બચ્ચાના શરીર પરની ગંદકી સાફ થઇ ગઇ આમછતા પણ ગાયે ચાટવાનું ચાલુ જ રાખ્યુ. હવે તો નાના બચ્ચાની કોમળ ચામડીમાંથી લોહી નીકળવા લાગ્યુ તો પણ ગાયે ચાટવાનું ચાલુ જ રાખ્યુ.

સહદેવ જે દિશામાં બાણ લેવા ગયા ત્યાં એમણે પણ એક આશ્વર્યજનક ઘટના જોઇ. કોઇ મોટા પર્વત પરથી શીલા નીચે પડી રહી હતી. નીચે ગબડતી આ શીલા રસ્તામાં આવતા નાના-મોટા પથ્થરો અને વૃક્ષોને ધરાશયી કરતી તળેટી તરફ આગળ વધી રહી હતી પણ એક નાનો છોડ વચ્ચે આવ્યો અને શીલા અટકી ગઇ.

ચારે પાંડવોએ પરત આવીને એમણે જોયેલી ઘટનાની વાત ભગવાન શ્રીકૃષ્ણને કરી અને એનો મતલબ સમજાવવા વીનંતી કરી. ભગવાન શ્રીકૃષ્ણએ કહ્યુ કે ‘”આ ચારે ઘટના કળયુગમાં કેવી સ્થિતી હશે તે બતાવે છે. સાધુઓ કોયલની જેમ મીઠા અવાજે વાતો કરશે અને સસલા જેવા ભોળા અનુયાયીઓનું દર્દ દુર કરવાના બહાને એનું શોષણ કરશે. ચાર કુવાઓ પાણીથી ઉભરાતા હતા છતા બાજુમાં જ રહેલા કોરા કુવાને એક ટીપુ પાણી આપતા નહોતા એમ કળીયુગમાં અમીરોને ત્યાં સંપતિની રેલમછેલ હશે પણ એ એક પૈસો પણ આજુબાજુની જરૂરીયાતમંદ વ્યક્તિઓને નહી આપે. ગાયે એના બચ્ચાને ચાટી ચાટીને ચામડી પણ ઉતરડી નાંખી તેમ કળયુગમાં મા-બાપ પોતાના સંતાનોને જરુરથી વધારે લાડલડાવીને માયકાંગલા કરી નાંખશે અને પોતાના જ સંતાનોને હાની પહોંચાડશે. પર્વત પરથી પડતી શીલાની જેમ કળીયુગમાં માણસનું ચારિત્ર્ય પણ સતત નીચે પડતું રહેશે. નીચે પડતા આ ચારીત્ર્યને બીજુ કોઇ નહી અટકાવી શકે પણ જો માત્ર પ્રભુના આશરા રૂપી કે સત્સંગ રૂપી નાનો છોડ હશે તો એનાથી ચારિત્ર્ય નીચે પડતું અટકી જશે.”

ચારે પાંડવોને કળીયુગમાં કેવી સ્થિતી હશે તે બરોબર સમજાય ગયુ.

Posted in બાળ ગીતો

દફતર લઈને દોડવું…!!


દફતર લઈને દોડવું…!!
તૂટેલી ચપ્પલ નું જોડવું…!!

નાશ્તા ના ડબ્બાઓ…!!
શર્ટ પર સહીના ધબ્બાઓ…!!

ખોબે ખોબે પીવાતું પાણી…!!
રીસેસ ની વિશેષ ઉજાણી…!!

બેફામ રમાતા પકડ દાવ…!!
ઘૂંટણ એ પડતા આછા ઘાવ…!!

બાયોં થી લુંછાતા ચેહરા…!!
શેરીઓમાં અસંખ્ય ફેરાં…!!

ઉતરાણ ની રાત જાગી…!!
પકડાયલા પતંગ ની ભાગી…!!

ભાડાં ની સાયકલ નાં ફેરાં…!!
મહોલ્લાના ઓટલા પર ડેરા…!!

મંજી ની રેલમ છેલ…!!
ગીલ્લી ડંડા નો એ ખેલ…!!

ચાર ઠીકડી ને આટા પાટા…!!
લાઈટના થાંભલે ગામગપાટા…!!

વરસાદે ભરપૂર પલળવું…!!
ખુલ્લા પગે રખડવું…!!

બોર આમલી નાં ચટાકા…!!
પીઠ પર માસ્તર ના ફટાકા…!!

બિન્દાસ્ત ઉજવાતું વેકેશન…!!
નાં ટ્યુશન નાં ટેન્શન…!!

વાત સાચી લાગી…!! કે નહિ મિત્રો…!!!! બધું ભૂલાઈ ગયું…!! આ મોર્ડન લાઈફ ની લાઇ માં…!!
કેવાં હતાં આપણે બધાં પાસે-પાસે?

જો ને નીકળી ગયા સહુ જીંદગીના પ્રવાસે..!

માળો બનાવવામાં એવા મશગુલ થઇ ગયા;

ઉડવા માટે પાંખ છે એજ ભૂલી ગયા..!!

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वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने


वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने….. अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया।

लगभग बीस वर्षों तक
चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ।थ अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा…..

जाहिर सी बात है कि सवाल यही होगा कि आप युद्ध कैसे जीते या अमेरिका को कैसे झुका दिया ??

पर उस प्रश्न का दिए गए उत्तर को सुनकर आप हैरान रह जायेंगे और आपका सीना भी गर्व से भर जायेगा।
दिया गया उत्तर पढ़िये।

सभी देशों में सबसे शक्ति शाली देश अमेरिका को हराने के लिए मैंने एक महान व् श्रेष्ठ भारतीय राजा का चरित्र पढ़ा।
और उस जीवनी से मिली प्रेरणा व युद्धनीति का प्रयोग कर हमने सरलता से विजय प्राप्त की।

आगे पत्रकार ने पूछा…
“कौन थे वो महान राजा ?”

मित्रों जब मैंने पढ़ा तब से जैसे मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया आपका भी सीना गर्व से भर जायेगा।

वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष ने
खड़े होकर जवाब दिया…
“वो थे भारत के राजस्थान में मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप सिंह !!”

महाराणा प्रताप का नाम
लेते समय उनकी आँखों में एक वीरता भरी चमक थी। आगे उन्होंने कहा…

“अगर ऐसे राजा ने हमारे देश में जन्म लिया होता तो हमने सारे विश्व पर राज किया होता।”

कुछ वर्षों के बाद उस राष्ट्राध्यक्ष की मृत्यु हुई तो जानिए उसने अपनी समाधि पर क्या लिखवाया…

“यह महाराणा प्रताप के एक शिष्य की समाधि है !!”

कालांतर में वियतनाम के
विदेशमंत्री भारत के दौरे पर आए थे। पूर्व नियोजित कार्य क्रमानुसार उन्हें पहले लाल किला व बाद में गांधीजी की समाधि दिखलाई गई।

ये सब दिखलाते हुए उन्होंने पूछा ” मेवाड़ के महाराजा महाराणा प्रताप की समाधि कहाँ है ?”

तब भारत सरकार के अधिकारी चकित रह गए, और उनहोंने वहाँ उदयपुर
का उल्लेख किया। वियतनाम के विदेशमंत्री उदयपुर गये, वहाँ उनहोंने महाराणा प्रताप की समाधि के दर्शन किये।

समाधी के दर्शन करने के बाद उन्होंने समाधि के पास की मिट्टी उठाई और उसे अपने बैग में भर लिया इस पर पत्रकार ने मिट्टी रखने का कारण पूछा !!

उन विदेशमंत्री महोदय ने कहा “ये मिट्टी शूरवीरों की है।
इस मिट्टी में एक महान् राजा ने जन्म लिया ये मिट्टी मैं अपने देश की मिट्टी में
मिला दूंगा …”

“ताकि मेरे देश में भी ऐसे ही वीर पैदा हो। मेरा यह राजा केवल भारत का गर्व न होकर सम्पूर्ण विश्व का गर्व होना चाहिए।”

(अपेक्षा की जाती है कि यह पोस्ट आप अभिमान के साथ सभ मित्रों के साथ शेयर करेंगे।)

शत शत नमन महान वीर को। जय हो महाराणा प्रताप की।

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एक पिता ने अपनी बेटी की सगाई करवाई,


एक पिता ने अपनी बेटी की सगाई करवाई,
लड़का बड़े अच्छे घर से था।
लड़की के पिता बहुत खुश हुए। 💜
लड़के और लड़के के माता-पिता का स्वभाव
बड़ा अच्छा था…।
लड़की के पिता के सिर से तो मानों बड़ा बोझ उतर गया।💝
एक दिन शादी से पहले लड़के वालों ने लड़की के पिता को खाने पे बुलाया।

लड़की के पिता की तबीयत ठीक नहीं थी फिर भी वह लड़के वालों को मना ना कह सके! 💝
लड़के वालों ने बड़े ही आदर सत्कार से उनका स्वागत किया।
फ़िर लडकी के पिता के लिए चाय आई…!
शुगर की वजह से लड़की के पिता को चीनी वाली चाय से दूर रहने को कहा गया था।
.
लेकिन लड़की के पिता, लड़की की होने वाली ससुराल के घर में थे इसलिए चुप रहकर चाय हाथ में ले ली!
चाय की पहली चुस्की लेते ही वो चौंक से गए!
चाय में चीनी बिल्कुल ही नहीं थी…।💜
और ईलायची भी डली हुई थी। 💜

वो सोच में पड़ गए… कि ये लोग भी हमारी जैसी ही चाय पीते हैं।

दोपहर में खाना खाया तो वो भी बिल्कुल उनके घर जैसा,
दोपहर में आराम करने के लिए दो तकिये पतली चादर।उठते ही सौंफ का पानी पीने को दिया गया।💜
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वहाँ से विदा लेते समय उनसे रहा नहीं गया तो पूछ बैठे-
“मुझे क्या खाना है, क्या पीना है, मेरी सेहत के लिए क्या अच्छा है? ये परफेक्टली आपको कैसे पता है?”
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तब बेटी की सास ने धीरे से कहा कि-
“कल रात को ही आपकी बेटी का फ़ोन आ गया था कि- मेरे पापा स्वभाव से बड़े सरल हैं 💜 बोलेंगे कुछ नहीं,!प्लीज अगर हो सके तो आप उनका ध्यान रखियेगा।”
💜💜
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लड़की के पिता की आँखों में वहीं पानी आ गया।
जब वे अपने घर पहुँचे तो घर के हाल में लगी
अपनी स्वर्गवासी माँ के फोटो से हार निकाल दिया।
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जब पत्नी ने पूछा कि- “ये क्या कर रहे हो?”
तो लड़की के पिता बोले – “मेरा ध्यान रखने वाली मेरी माँ इस घर से कहीं नहीं गयी है। 💜💜 बल्कि वो तो मेरी बेटी के रूप में इस घर में ही रहती है।” 💜💜
.
और फिर पिता की आँखों से आँसू झलक गए और वो फफक-फफक कर रो पड़े, औऱ रोते हुए बोले-💜
.
“दुनिया में सब कहते हैं ना ! कि बेटी है, एक दिन इस घर को छोड़कर चली जाएगी। 😢
.मगर मैं दुनिया के सभी माँ-बाप से ये कहना चाहता हूँ
कि बेटी कभी भी अपने माँ-बाप के घर से नहीं जाती।
बल्कि वो हमेशा उनके दिल में रहती है।

💜”पापा की परी होती हैं बेटियाँ।”💜 योगी अंश रमेशचंद्र भार्गव

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एक साधु और एक वेश्या


एक साधु और एक वेश्या की एक साथ मृत्यु हुई, एक ही दिन। आमने-सामने घर था। मृत्यु के दूत लेने आए, तो दूत बड़ी मुश्किल में पड़ गए। उन्हें फिर जाकर हेड आफिस में पता लगाना पड़ा कि मामला क्या है! क्योंकि संदेश में कुछ भूल मालूम पड़ती है। साधु को ले जाने की आज्ञा हुई है नर्क, और वेश्या को आज्ञा हुई है स्वर्ग! तो उन्होंने कहा, इसमें जरूर कहीं भूल हो गई है! साधु बड़ा साधु था, वेश्या भी कोई छोटी वेश्या नहीं थी। मामला सीधा साफ है, गणित में कोई गड़बड़ है। वेश्या को नर्क जाना चाहिए, साधु को स्वर्ग जाना चाहिए।
काश, जिंदगी इतनी सीधी होती, तो सभी वेश्याएं नर्क चली जातीं और सभी साधु स्वर्ग चले जाते। लेकिन जिंदगी इतनी सीधी नहीं है, जिंदगी बहुत जटिल है।
ऊपर से पता लगाकर लौटे। खबर मिली कि वही ठीक आज्ञा है, वेश्या को स्वर्ग ले आओ, साधु को नर्क। उन्होंने पूछा, थोड़ा हम समझ भी लें, क्योंकि हम बड़ी दुविधा में पड गए हैं। तो दफ्तर से उन्हें खबर मिली कि तुम जरा नए दूत हो; तुम्हें अनुभव नहीं है। पहले ही दिन डयूटी पर गए थे। पुरानों से पूछो! यह सदा से होता आया है; यही नियम है। फिर भी उन्होंने कहा, थोड़ा हम समझ लें। तो पता चला कि जब भी साधु के घर में सुबह कीर्तन होता, तो ! वेश्या रोती अपने घर में। सामने ही घर था। रोती, रोती इस मन से कि मेरा जीवन व्यर्थ गया। कब वह क्षण आएगा सौभाग्य का कि ऐसे कीर्तन में मैं भी सम्मिलित हो जाऊं! मन भी होता, तो कभी द्वार के बाहर निकल आती। साधु के मंदिर के पास कान लगाकर खड़ी हो जाती दीवाल के। लेकिन मन में ऐसा. लगता कि मुझ जैसी पापी मंदिर में कैसे प्रवेश करे! तो कहीं साधु पता न चल जाए, इसलिए चुपचाप छिप-छिपकर कीर्तन सुन। मंदिर की सुगंध उठती, धूप जलती, मंदिर के फूलों की खबर आती, मंदिर का घंटा बजता, और चौबीस घंटे, पूरे जीवन वेश्या मंदिर में रही। चित्त मंदिर में घूमता रहा, घूमता रहा, घूमता रहा। और एक ही कामना थी कि अगले जन्म में चाहे बुहारी ही लगानी पड़े, पर मंदिर में ही जन्म हो। मंदिर के द्वार पर ही!
साधु भी कुछ पीछे न थे वेश्या से। जब भी वेश्या के घर रात। राग-रंग छिड़ जाता वे सोचते, सारी दुनिया मजा लूट रही है। हम कहां फंस गए! इसलिए ध्यान रहे, पुजारी परमात्मा से जितने दूर रह जाते हैं, उतना शायद ही कोई रह पाता हो। क्योंकि पुजारी को प्रयोजन ही नहीं रह जाता। उसका मतलब कुछ और है। यह उसके लिए धंधा है।
उपासना आप उधार नहीं करवा सकते, आपको ही करनी पड़ेगी। और ऐसी उपासना का कोई मूल्य नहीं है कि मंदिर में तो परमात्मा के निकट होते हों और मंदिर के बाहर निकलते ही परमात्मा खो जाता हो। ऐसी उपासना से क्या होगा? अगर वह है, तो सब जगह है। और अगर नहीं है, तो कहीं भी नहीं है, मंदिर में भी नहीं है। अगर नहीं है, तो सब मंदिर व्यर्थ हैं। और अगर है, तो सारी पृथ्वी, सारा जगत उसका मंदिर है।
ओशो

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श्री राम जन्म भूमि


मुसलमानो द्वारा श्री राम जन्म भूमि के उद्धार का प्रयास 
सन 1857 की अंग्रेज़ो के खिलाफ हुई क्रांति मे बहादुर शाह जफर को सम्राट घोषित करके विद्रोह का नारा बुलंद किया गया। उस समय अयोध्या के हिन्दू राजा देवी बख्श सिंह ,गोंडा के नरेश एवं बाबा  राम चरणदास की अध्यक्षता मे संगठित हो गए । उस समय समय बागी मुसलमानो के नेता थे आमिर अली। आमिर अली ने अयोध्या के समस्त मुसलमानो को इकट्ठा करके कहा कि विरादरे वतन बेगमों के जेवरातों को बचाने मे हमारे हिन्दू भाइयों ने जिस परकर बहुदृपूर्व युद्ध किया है उसे हम भुला नहीं सकते । सम्राट बहादुरशाह जफर को अपना सम्राट मानकर हमारे हिन्दू भाई अपना खून बहा रहे हैं। इसलिए ये हमारा फर्ज बनता है कि हिंदुओं के खुदा श्रीरामचंद्र जी कि पैदायिसी जगह जो बाबरी मस्जिद बनी है, वह हम इन्हे बख़ुशी सपुर्द कर दे क्यूकी हिन्दू मुसलमान नाइत्फ़ाकी कि सबसे बड़ी जड़ यह बाबरी मस्जिद ही है । ऐसा करके हम इनके दिल पर फतह पा जाएंगे ।

ये बात भी सत्य है कि आमिर अली के इस प्रस्ताव का सभी मुसलमानो ने खुले दिल से एक स्वर से समर्थन किया । यहाँ एक बात जो ध्यान देने योग्य है कि आमिर अली के इस प्रस्ताव के बाद ये बात स्पष्ट हो जाती है कि मुसलमान भी जानते और मानते थे कि बाबरी ढांचा रामलला के जन्मभूमि पर बने मंदिर को ध्ब्वंस करके ही बनाया गया है। चूकी मुसलमान यह बात समझ चुके थी कि हिंदु कभी किसी के अस्तित्व के लिए खतरा नहीं हो सकता मगर अंग्रेज़ उनके समूल विनाश के उद्देश मे लगे हुए थे अतः इस बात पर एक सहमति बनती नजर आई ।
यह बात जब अङ्ग्रेज़ी सरकार को पता चली कि मुसलमान बाबरी मस्जिद हिंदुओं के हवाले करने का मन बना चुके हैं तो उनमे घबराहट फैल गयी। इस घबराहट का प्रमाण हम कर्नल मार्टिन कि एक रिपोर्ट मे देख सकते हैं जो जो सुल्तानपुर गजेटियर के पृष्ठ 36 पर छपी थी
“अयोध्या कि बाबरी मस्जिद को मुसलमानो द्वारा हिंदुओं को दिये जाने कि खबर सुनकर हम लोगो मे घबराहट फैल गयी है और यह विश्वास हो गया है कि हिंदुस्तान से अंग्रेज़ अब खतम हो जाएंगे । लेकिन अच्छा हुआ कि गदर का पासा पलट गया और आमिर अली तथा बलवाई बाबा राम चरण दास को फांसी पर लटका दिया गया जिससे फैजाबाद के बलवाइयों कि कमर टूट गयी और पूरे फैजाबाद जिले पर हमारा रोब जम गया क्यूकी गोंडा के राजा देवीबख्श सिंह पहले ही फरार हो चुके थे ॥
मुसलमानो द्वारा आमिर अली के रूप मे किया गया जमभूमि के उद्धार हेतु यह सतप्रयत्न अंग्रेज़ो कि कुटिल चल और दमनचक्र के कारण विफल हो गया ।

18 मार्च सन 1858 को कुबेर टीला स्थित एक इमली के पेड़ मे बाबा राम चरण दास और आमिर अली दोनों को एक साथ अंग्रेज़ो ने फांसी पर लटका दिया । मुसलमानो ने हिंदुओं पर चाहे कितने भी जुल्म किए हो मगर हिन्दू जनता मुसलमानो के इस एकमात्र प्रयास को भूली नहीं और बहुत डीनो तक आमिर अली और  बाबा राम चरण दास कि याद मे उस इमली के पेड़ पर पुजा अर्चना और अक्षत चढ़ाती रही। जब अंग्रेज़ो ने ये देखा कि ये पेड़ देशभक्तों एवं रामभक्तों के लिए एक स्मारक के रूप मे विकसित हो रहा है तब उन्होने इस पेड़ को कटवा कर इस आखिरी निशानी को भी मिटा दिया…

इस प्रकार अंग्रेज़ो की कुटिल नीति के कारण मुसलमानो का हिंदुओं को बाबरी ढांचा सौपने का यह एकमात्र प्रयास विफल हो गया …
इसके बाद अङ्ग्रेज़ी राज मे कुछ छिटपुट घटनाएँ एवं प्रतिरोध होते रहे। आजादी के बाद के घटनाक्रम का वर्णन करने से पूर्व सर्वप्रथम कुछ अन्य घटनाओं और स्थलों का वर्णन करना प्रासंगिक है,जिससे बाबरी ढांचे मे प्राचीन मंदिर के चिन्ह दर्शनीय होते हैं

“आशुतोष नाथ तिवारी”

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वेलेंटाइन डे


वैलेंटाइन डे की असलियत –
पुराने समय से आज तक यूरोप और अमेरिका का समाज  “लिव ईन” सम्बन्ध में विश्वास करता है शादी में नहीं।  इसका मतलब होता है कि “बिना शादी के पति-पत्नी की तरह से साथ रहना” |
शादी की प्रथा इन संस्कृति मे तो थी ही नही। स्त्रीयों को शारीरिक सुख भोगने कि एक वस्तु माना जाता था। वहां एक पत्नि जैसा कुछ होता नहीं था | और वहाँ के सभी दार्शनिकों का तो कहना था कि “स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती” “स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये ” |
पर यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1700 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था -सेन्ट वैलेंटाइन |
ये बात ईशा की मृत्यु के कुछ साल बाद की है। उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि “हम यूरोप के लोग जानवरों की तरह से शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं। ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग होते हैं।
वैलेंटाइन चर्च के पादरी थे और चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, की “भारत के जैसे विवाह कर के ही पति-पत्नी के तरह साथ रहो। शारीरिक संबंधो को विवाह के बाद ही शुरू करो।  रोज उनका यही भाषण चलता था  |
लोग उनसे पूछते थे कि ये नयी बात आप में कहाँ से घुस गई, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि “आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो सही है, और इसिलए मैं चाहता हूँ कि आप लोग भी इसे मानो।
कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो वे उनकी शादियाँ चर्च में कराते थे और उन्होंने इस प्रकार सैकड़ों शादियाँ करवाई थी |
जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, क्लौड़ीयस ने कहा कि “ये पादरी वैलेंटाइन हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवा रहा है। ये तो हमारी भोगने की संस्कृति को नष्ट कर रहा है।
क्लौड़ीयस को डर था शादीशुदा लोग अच्छे सैनिक नही बन सकते क्यूँकि वो पारिवारिक सम्बन्धो मे बंध जाएगे।
उसने आदेश दिया कि “जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ “ उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये |
क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन से कहा कि “ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अपसंस्कृति ला रहे हो” तो वैलेंटाइन ने कहा कि “मुझे लगता है कि ये ही संस्कृति ठीक है”।
क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी जोडो को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 269 ईःवी को फाँसी दे दी गई |
जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइनकी दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है |
ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार | अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अचरज लगता है।
वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में और कॉलजों में बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़िकयां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं| और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है ” Would You Be My Valentine” जिसका मतलब होता है “क्या आप मुझसे शादी करेंगे” |
मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें येकार्ड देना चाहिए।
इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपिनयाँ लग गयी हैं जिनको कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको चाकलेट बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुआधार प्रचार कर दिया |
ये सब लिखने के पीछे का उद्देँशय यही है कि यूरोप की नक़ल करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में क्यों मनाते हैं ??????
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वैलेंटाइन डे की कहानी

यूरोप (और अमेरिका)  का समाज जो है वो रखैलों (Kept) में विश्वास करता है पत्नियों में नहीं, यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या महिला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परंपरा है उनके यहाँ | आपने एक शब्द सुना होगा “Live in Relationship” ये शब्द आज कल हमारे देश में भी नव-अभिजात्य वर्ग में चल रहा है, इसका मतलब होता है कि “बिना शादी के पति-पत्नी की तरह से रहना” | तो उनके यहाँ, मतलब यूरोप और अमेरिका में ये परंपरा आज भी चलती है, खुद प्लेटो (एक यूरोपीय दार्शनिक) का एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा, प्लेटो ने लिखा है कि “मेरा 20-22 स्त्रियों से सम्बन्ध रहा है” अरस्तु भी यही कहता है, देकार्ते भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि “एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता, It’s Highly Impossible” | तो वहां एक पत्नीव्रत जैसा कुछ होता नहीं | और इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि “स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती” “स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये ” | तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर कड़ी टिप्पणी की | उन कुछ लोगों में से एक ऐसे ही यूरोपियन व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था – वैलेंटाइन | और ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद |

उस वैलेंटाइन नाम के महापुरुष का कहना था कि “हमलोग (यूरोप के लोग) जो शारीरिक सम्बन्ध रखते हैं कुत्तों की तरह से, जानवरों की तरह से, ये अच्छा नहीं है, इससे सेक्स-जनित रोग (veneral  disease) होते हैं, इनको सुधारो, एक पति-एक पत्नी के साथ रहो, विवाह कर के रहो, शारीरिक संबंधो को उसके बाद ही शुरू करो” ऐसी-ऐसी बातें वो करते थे और वो वैलेंटाइन महाशय उन सभी लोगों को ये सब सिखाते थे, बताते थे, जो उनके पास आते थे, रोज उनका भाषण यही चलता था रोम में घूम-घूम कर | संयोग से वो चर्च के पादरी हो गए तो चर्च में आने वाले हर व्यक्ति को यही बताते थे, तो लोग उनसे पूछते थे कि ये वायरस आपमें कहाँ से घुस गया, ये तो हमारे यूरोप में कहीं नहीं है, तो वो कहते थे कि “आजकल मैं भारतीय सभ्यता और दर्शन का अध्ययन कर रहा हूँ, और मुझे लगता है कि वो परफेक्ट है, और इसलिए मैं चाहता हूँ कि आप लोग इसे मानो”, तो कुछ लोग उनकी बात को मानते थे, तो जो लोग उनकी बात को मानते थे, उनकी शादियाँ वो चर्च में कराते थे और एक-दो नहीं उन्होंने सैकड़ों शादियाँ करवाई थी | जिस समय वैलेंटाइन हुए, उस समय रोम का राजा था क्लौड़ीयस, आप उसे चक्रवर्ती सम्राट की श्रेणी में रख सकते हैं | क्लौड़ीयस ने कहा कि “ये जो आदमी है-वैलेंटाइन, ये हमारे यूरोप की परंपरा को बिगाड़ रहा है, हम बिना शादी के रहने वाले लोग हैं, मौज-मजे में डूबे रहने वाले लोग हैं, और ये शादियाँ करवाता फिर रहा है, ये तो अपसंस्कृति फैला रहा है, हमारी संस्कृति को नष्ट कर रहा है”, तो क्लौड़ीयस ने आदेश दिया कि “जाओ वैलेंटाइन को पकड़ के लाओ “, तो उसके सैनिक वैलेंटाइन को पकड़ के ले आये | क्लौड़ीयस ने वैलेंटाइन से कहा कि “ये तुम क्या गलत काम कर रहे हो ? तुम अधर्म फैला रहे हो, अपसंस्कृति ला रहे हो” तो वैलेंटाइन ने कहा कि “मुझे लगता है कि ये ठीक है” , क्लौड़ीयस ने उसकी एक बात न सुनी और उसने वैलेंटाइन को फाँसी की सजा दे दी, आरोप क्या था कि वो बच्चों की शादियाँ कराते थे, मतलब शादी करना जुर्म था | क्लौड़ीयस ने उन सभी बच्चों को बुलाया, जिनकी शादी वैलेंटाइन ने करवाई थी और उन सभी के सामने वैलेंटाइन को 14 फ़रवरी 498 ईस्वी को फाँसी दे दिया गया | पता नहीं आपमें से कितने लोगों को मालूम है कि पुरे यूरोप में 1950 ईस्वी तक खुले मैदान में, सार्वजानिक तौर पर फाँसी देने की परंपरा थी |  तो जिन बच्चों ने वैलेंटाइन के कहने पर शादी की थी वो बहुत दुखी हुए और उन सब ने उस वैलेंटाइन की दुखद याद में 14 फ़रवरी को वैलेंटाइन डे मनाना शुरू किया तो उस दिन से यूरोप में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | मतलब ये हुआ कि वैलेंटाइन, जो कि यूरोप में शादियाँ करवाते फिरते थे, चूकी राजा ने उनको फाँसी की सजा दे दी, तो उनकी याद में वैलेंटाइन डे मनाया जाता है | ये था वैलेंटाइन डे का इतिहास और इसके पीछे का आधार |
अब यही वैलेंटाइन डे भारत आ गया है जहाँ शादी होना एकदम सामान्य बात है यहाँ तो कोई बिना शादी के घूमता हो तो अद्भुत या अचरज लगे लेकिन यूरोप में शादी होना ही सबसे असामान्य बात है | अब ये वैलेंटाइन डे हमारे स्कूलों में कॉलजों में आ गया है और बड़े धूम-धाम से मनाया जा रहा है और हमारे यहाँ के लड़के-लड़कियां बिना सोचे-समझे एक दुसरे को वैलेंटाइन डे का कार्ड दे रहे हैं | और जो कार्ड होता है उसमे लिखा होता है ” Would You Be My Valentine” जिसका मतलब होता है “क्या आप मुझसे शादी करेंगे” | मतलब तो किसी को मालूम होता नहीं है, वो समझते हैं कि जिससे हम प्यार करते हैं उन्हें ये कार्ड देना चाहिए तो वो इसी कार्ड को अपने मम्मी-पापा को भी दे देते हैं, दादा-दादी को भी दे देते हैं और एक दो नहीं दस-बीस लोगों को ये ही कार्ड वो दे देते हैं | और इस धंधे में बड़ी-बड़ी कंपनियाँ लग गयी हैं जिनको ग्रीटिंग कार्ड बेचना है, जिनको गिफ्ट बेचना है, जिनको मिठाइयाँ बेचनी हैं और टेलीविजन चैनल वालों ने इसका धुआधार प्रचार कर दिया | ये सब लिखने के पीछे का उद्देश्य यही है कि नक़ल आप करें तो उसमे अकल भी लगा लिया करें | उनके यहाँ साधारणतया शादियाँ नहीं होती है और जो शादी करते हैं वो वैलेंटाइन डे मनाते हैं लेकिन हम भारत में ??????
सम्मानीय राजीव दीक्षित
Posted in खान्ग्रेस

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