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राजपूत


jai hind….

इस हिन्दू राजपूत राजा ने अरबी मुस्लिमो को गाजर मूली की तरह काटा, 400 साल भारत से दूर रहे मुसलमान हमलावर
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इस हिन्दू राजपूत सम्राट ने अरबों को इस तरह खदेड़ा कि 400 साल तक भारत की ओर नहीं मुड़े थे अरब अन्य राष्ट्रों समेत हिन्दू बहुल भारत की धरती पर हिन्दुओ के “इतिहास” के साथ हमेशा अन्याय किया गया हैं। न जाने, हिन्दुओं का इतिहास मिटाने और छिपाने के कितने ही प्रयास किये गए।मगर सच कभी छिपता नहीं!
महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी, पुष्यमित्र शुंग, राजा दाहिर के नाम तो अक्सर सुनने को मिल जाते हैं, मगर वीर बप्पा रावल के नाम को शायद ही कोई जनता हो! बप्पा रावल एक ऐसे हिन्दू सम्राट रहे हैं, जिनके नाम भर मात्र से दुश्मनों के हाथ पाँव ठन्डे पड़ जाते थे। जब भारत पर 734 ईसवी में अरबों ने आक्रमण किया, तब राजस्थान में एक ऐसा योद्धा पैदा हुए जिन्होंने उन्हें मार मार के वापस उनके देश तक खदेड़ा था।
उन्होंने अरबी, तुर्क और फारसी मुस्लिमों के दिल में इतनी दहशत भर दी थी कि मुसलमानों ने अगले 400 साल तक हिंदुस्तान की ओर आँख उठा के नहीं देखा। ऐसे योद्धा थे मेवाड़ वंश के संथापक, कालभोज के राजकुमार ‘बाप्पा रावल’! साथ ही शिव के एकलिंग रूप के भक्त और चितौड़ के किले के निर्माता!
उनके पिता महेंद्र रावल द्वितीय की आक्रमणकारियों के हत्या की थी और उनकी माता जी अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए सती हो गयी थी। बप्पा रावल का पालन पोषण उनके कुलपुरोहित ने बड़े प्यार से किया और एकलिंग जी की भक्ति के साथ साथ समस्त युद्ध लालाओ में निपुण बनाया। बप्पा रावल ने अपना खोया हुआ राज्य मात्र 21 साल की उम्र में वापस ले लिया था और एक कुशल शासक के रूप में अपने को स्थापित किया।
बाद में जब अरब, तुर्कों और फारसियो ने आक्रमण किया तो बप्पा रावल ने न केवल उन्हें युद्ध में हराया, बल्कि अरबो को वापस उनके देश तक खदेड़ा। ऐसा था बप्पा रावल का खौफ कि मुसलमानों ने अगले 400 साल भारत की ओर आँख उठा कर देखने तक की हिम्मत नहीं की।
मगर भारत के वामपंथी एवं भाड़े के इतिहासकारों ने उनके नाम को मिटाने और छिपाने की कोशिश की!रावलपिण्डी का नामकरण बप्पा रावल के नाम पर हुआ था। इससे पहले तक रावलपिंडी को गजनी प्रदेश कहा जाता था। तब कराची का नाम भी ब्रह्माणावाद था।
गजनी प्रदेश में बप्पा ने सैन्य ठिकाना स्थापित किया था। वहां से उनके सैनिक अरब सेना की गतिविधियों पर नजर रखते थे। उनकी वीरता से प्रभावित गजनी के सुल्तान ने अपनी पुत्री का विवाह भी उनसे किया था। मेवाड़ में बप्पा व दूसरे प्रदेशों में इस वीर शासक को बापा भी पुकारा जाता था।
ईडर के गुहिल वंशी राजा नागादित्य की हत्या के बाद उनकी पत्नी तीन साल के पुत्र बप्पा को लेकर बडऩगरा (नागर) जाति के कमलावती के वंशजों के पास ले गईं। उनके वंशज गुहिल राजवंश के कुल पुरोहित थे। भीलों के आतंक से फलस्वरूप कमला के वंशधर ब्राह्मण, बप्पा को लेकर भांडेर नामक स्थान पर आ गए। यहां बप्पा गायें चराने लगे।
इसके बाद नागदा आए और ब्राह्मणों की गायें चराने लगे। बप्पा जिन गायों को चराते थे, उनमें से एक बहुत अधिक दूध देती थी। शाम को गाय जंगल से वापस लौटती थी तो उसके थनों में दूध नहीं रहता था। बप्पा दूध से जुड़े हुए रहस्य को जानने के लिए जंगल में उसके पीछे चल दिए। गाय निर्जन कंदरा में पहुंची और उसने हारीत ऋषि के यहां शिवलिंग अभिषेक के लिए दुग्धधार करने लगी।
इसके बाद बप्पा हारीत ऋषि की सेवा में जुट गए। इन ऋषि के आशीर्वाद से ही बप्पा मेवाड़ के राजा बने। हारीत ऋषि द्वारा बताए गए स्थान से बप्पा को 15 करोड़ मूल्य की स्वर्ण मुद्राएं मिलीं। बप्पा ने इस धन से सेना निर्माण कर मोरियों से चित्तौड़ का राज्य लिया। यहीं से मेवाड़ राजवंश की नींव पड़ी।
अत: हम समझ सकते हैं कि इतने महान शासक के साथ इतिहास ने कितना अन्याय किया है!!!

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लीला भंसाली


jai hind…

Vande Mataram Jai Hind Jai Aazad Bharat

जयपुर में संजय लीला भंसाली की ‘लीला’ सूजा दी लठ मार मार कर !
इसके पीछे का कारण पढिये-

ये 25 अगस्त 1303 ई० की भयावह काली रात थी …
स्थान मेवाड़ दुर्ग राजस्थान ….राजा रतन सिंह जी की रियासत …राजा रतन सिंह की धर्मपत्नी रानी पद्मावती सहित 200 से ज्याद राजपूत स्त्रियाँ उस दहकते हवन कुंड के सामने खड़ी थी

दुर्दांत आक्रान्ता अल्लौद्दीन खिलजी दुर्ग के बंद द्वार पर अपने सेना के साथ खड़ा था …..अलाउद्दीन वही शख्स था जो परम रूपवती रानी पद्मावती को पाना चाहता था और अपने हरम की रानी बना कर रखना चाहता था ….

रानी पद्मावती को प्राप्त करने के लिए उसने दो बार मेवाड़ पर हमला किया … लेकिन वीर राजपूतों के आगे उसकी सेना टिक ना सकी …
लेकिन इस बार मामला उलट चूका था …..
अलाउद्दीन लम्बी चौड़ी सेना के साथ मेवाड़ के दुर्ग के बाहर अपना डेरा दाल चूका था ….
ज्यादा तर राजपूत सेना वीरगति को प्राप्त हो चुकी थी……
सबको समझ में आ चूका था की अब इन हरामियों से बचना मुस्किल हैं ..

मुस्लमान ना सिर्फ युद्ध में हिन्दू राजाओं को मरते थे बल्कि उनकी औरतों को साथ बलात्कार भी करते और अंत में उन्हें गजनी के मीना बाज़ार लाकर बेच दिया जाता था …..

तभी एक तेज़ आवाज के साथ मुस्लमान सैनिकों ने दुर्ग का विशाल दरवाजा तोड़ दिया ..मुस्लिम सेना तेज़ी से महल की तरफ बढ़ चली ..
जहाँ पर महान जौहर व्रत चल रहा था वो महल का पिछला हिस्सा था …..
राजपूत रणबाकुरों का रक्त खौलने लगा ..तलवारे खीच गयी मुट्ठियाँ भीच गयी ..

हर हर महादेव के साथ 500 राजपूत रणबाकुरे उस दस हज़ार की मुस्लिम सेना से सीधे भिड गये …महा भयंकर युद्ध की शुरुवात हो गयी जहाँ दया और करुणा के लिए कोई स्थान नहीं था ..हर वार एक दुसरे का सर काटने के लिए था ….
नारे ताग्बीर अल्लाहो अकबर और हर हर महा देव के गगन भेदी नारों से मेवाड़ का नीला आसमान गूँज उठा ……

हर राजपूत सैनिक अपनी अंतिम सांस तक लड़ा ..मुसलमानों के रास्ते में जो भी औरतें आई उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया अंत में वो कालजयी क्षण आ गया जब महान सुन्दरी और वीरता और सतीत्व का प्रतीक महारानी पद्मावती उस रूई घी और चंदन की लकड़ियों से सजी चिता पे बैठ गयी ..
बची हुइ नारियां अपने श्रेष्ठतम वस्त्र-आभूषणों से सुसज्जित थी…..
अपने पुरुषों को अश्रुपूरित विदाई दे रही थी….अंत्येष्टि के शोकगीत गाये जा रही थी.

महिलाओं ने रानी पद्मावती के नेतृत्व में चिता की ओर प्रस्थान किया…..और कूद पड़ी धधकती चित्ता में….अपने आत्मदाह के लिए….जौहर के लिए….देशभक्ति और गौरव के उस महान यज्ञ में अपनी पवित्र आहुति देने के लिए.
जय एकलिंग…….,
आकाश हर हर महादेव के उदघोषों से गूँज उठा था…..आत्माओं का परमात्मा से मिलन हो रहा था.

अगस्त 25, 1303 ई ० की भोर थी,.चिता शांत हो चुकी थी …..राजपूत वीरांगनाओं की चीख पुकार से वातावरण द्रवित हो चूका था …..राजपूत पुरुषों ने केसरिया साफे बाँध लिए….अपने अपने भाल पर जौहर की पवित्र भभूत से टीका किया….मुंह में प्रत्येक ने तुलसी का पता रखा….दुर्ग के द्वार खोल दिए गये….हर हर महादेव कि हुंकार लगाते राजपूत रणबांकुरे मेवाड़ी टूट पड़े अलाउदीन की सेना पर……हर कोई मरने मारने पर उतारू था ….दया का परित्याग कर दिया गया ..मुसलमानों को उनकी औकात दिखा दी गयी …..राजपूतों रणबाकुरों ने आखिरी दम तक अपनी तलवारों को मुस्लिम सैनिको का खून पिलाया और अंत में लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गये. अल्लाउद्दीन खिलज़ी की जीत उसकी हार थी, क्योंकि उसे रानी पद्मिनी का शरीर हासिल नहीं हुआ, मेवाड़ कि पगड़ी उसके कदमों में नहीं गिरी. चातुर्य और सौन्दर्य की स्वामिनी रानी पद्मिनी ने उसे एक बार और छल लिया था.

ये खुनी रात की वो कहानी है जिसे किसी इतिहास में हमे नहीं पढ़ाया जाता

एक वीरांगना के इस अतुल्य बलिदान पर बॉलीवुड का माधरचोद रंडी की औलाद संजय लीला भंसाली फिल्म बना रहा है जिसका थीम है अलाउद्दीन और रानी पद्मावती का प्रेम ……
अबे माधर चोद रंडी के जने सांय लीला भंसाली ..
अबे तुम क्या जानो रानी पद्मावती क्या थी बे ?
रंडी के जाने एक ऊँगली में आग लग जाती है तो दस दिन अपनी अम्मी के भोसड़े में छिपे रहते हो …और तुम माधरचोद खिलजी की वासना और दुश्चरित्रता को एक प्रेमकहानी दिखा रहे हो ?

ऐ महा हरामज्यादे संजय लीला भंसाली ..मुसलमानों के हरम से निकली औलाद सुन ..तू एक हिन्दू पतिव्रता स्त्री की शक्ति को कदाचित पहचनता नहीं है …..

आज अवसर और परिस्थितियाँ मेरे बस में नहीं हैं ..
नहीं तो मै ये पोस्ट नहीं लिखता दोगले सीधे महानगरी एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आता और तेरे फ्लैट पर ही आकर तेरे दो टुकड़े कर देता ..
लेकिन टू चिंता ना कर आज नहीं तो कल तुझे जोधा अकबर और पद्मावती को बनाने के लिए सजा मिलेगी ..जरुर मिलेगी!
रानी पद्मावती भारतीय महिलाओं की आदर्श है किसी कटमुल्ले की माशूका नही😡😡

भंसाली शुक्र मान राणा_की_धरती से सिर्फ थप्पड़ों में निकल गया..क्योंकि पीड़ा यह है कि सिर्फ करणी सेना ही इसका विरोध कर रही थी संपूर्ण हिन्दू समाज नहीं और उससे भी बड़ी पीड़ा यह है कि तुझ जैसा भड़वा भी हिन्दू समाज का ही सेक्युलर कुत्ता है जो ऐसी बकवास सोच रख के उसे फिल्म में उतारता है ।।

ये हरामी काँग्रेसियोँ का 70 साल के कर्मों का नतीजा है.
इन हरामी काँग्रेसियोँ का तोफा है.भारत को.इन हरामी काँग्रेसियोँ ने कटुल्लोँ को भाव देकर देश का सत्यानाश कर दिया है

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ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो.


ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो…
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी…
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन…
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….

ये दौलत भी ले लो ये शौहरत भी ले लो…
भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी…
मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन…
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….

मोहल्ले की सबसे निशानी पुराणी..
वो बुधिया जिसे बच्चे कहते थे नानी…
वो नानी की बातों में परिओं का डेरा..
वो चहरे की झुरियों में सदियों का फेरा…
भुलाएँ नहीं भूल सकता हैं कोई
वो छोटी सी रातें वो लम्बी कहानी…

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….

कड़ी धुप में अपने घर से निकलना…
वो चिडियां वो बुलबुल वो तितली पकड़ना…
वो बुधिया की शादी पे लड़ना झगड़ना..
वो झूलों से गिरना, गिरकर संभलना…
वो पीतल के छलों के प्यारे से तोफे,
वो टूटी हुई चूडियों की निशानी…

वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….
वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी….

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आठ सिद्धियां, नौ निधियां और दस गौण सिद्धियां – Prasad Davrani – हम और हमारी संस्कृति


आठ सिद्धियां, नौ निधियां और दस गौण सिद्धियां…………….
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चौपाई:-अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता । अस बर दीन्ह जानकी माता ।। (31)

यह हनुमान चालीसा की एक चौपाई जिसमे तुलसीदास जी लिखते है कि हनुमानजी अपने भक्तो को आठ प्रकार की सिद्धयाँ तथा नौ प्रकार की निधियाँ प्रदान कर सकते हैं ऐसा सीतामाता ने उन्हे वरदान दिया । यह अष्ट सिद्धियां बड़ी ही चमत्कारिक होती है जिसकी बदौलत हनुमान जी ने असंभव से लगने वाले काम आसानी से सम्पन किये थे। आइये अब हम आपको इन अष्ट सिद्धियों, नौ निधियों और भगवत पुराण में वर्णित दस गौण सिद्धियों के बारे में विस्तार से बताते है।
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आठ सिद्धयाँ :

हनुमानजी को जिन आठ सिद्धियों का स्वामी तथा दाता बताया गया है वे सिद्धियां इस प्रकार हैं-

1.अणिमा: इस सिद्धि के बल पर हनुमानजी कभी भी अति सूक्ष्म रूप धारण कर सकते हैं।
इस सिद्धि का उपयोग हनुमानजी तब किया जब वे समुद्र पार कर लंका पहुंचे थे। हनुमानजी ने अणिमा सिद्धि का उपयोग करके अति सूक्ष्म रूप धारण किया और पूरी लंका का निरीक्षण किया था। अति सूक्ष्म होने के कारण हनुमानजी के विषय में लंका के लोगों को पता तक नहीं चला।
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2. महिमा: इस सिद्धि के बल पर हनुमान ने कई बार विशाल रूप धारण किया है।
जब हनुमानजी समुद्र पार करके लंका जा रहे थे, तब बीच रास्ते में सुरसा नामक राक्षसी ने उनका रास्ता रोक लिया था। उस समय सुरसा को परास्त करने के लिए हनुमानजी ने स्वयं का रूप सौ योजन तक बड़ा कर लिया था।

इसके अलावा माता सीता को श्रीराम की वानर सेना पर विश्वास दिलाने के लिए महिमा सिद्धि का प्रयोग करते हुए स्वयं का रूप अत्यंत विशाल कर लिया था।
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3. गरिमा: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी स्वयं का भार किसी विशाल पर्वत के समान कर सकते हैं।

गरिमा सिद्धि का उपयोग हनुमानजी ने महाभारत काल में भीम के समक्ष किया था। एक समय भीम को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। उस समय भीम का घमंड तोड़ने के लिए हनुमानजी एक वृद्ध वानर रूप धारक करके रास्ते में अपनी पूंछ फैलाकर बैठे हुए थे। भीम ने देखा कि एक वानर की पूंछ से रास्ते में पड़ी हुई है, तब भीम ने वृद्ध वानर से कहा कि वे अपनी पूंछ रास्ते से हटा लें। तब वृद्ध वानर ने कहा कि मैं वृद्धावस्था के कारण अपनी पूंछ हटा नहीं सकता, आप स्वयं हटा दीजिए। इसके बाद भीम वानर की पूंछ हटाने लगे, लेकिन पूंछ टस से मस नहीं हुई। भीम ने पूरी शक्ति का उपयोग किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इस प्रकार भीम का घमंड टूट गया।

4. लघिमा: इस सिद्धि से हनुमानजी स्वयं का भार बिल्कुल हल्का कर सकते हैं और पलभर में वे कहीं भी आ-जा सकते हैं।

जब हनुमानजी अशोक वाटिका में पहुंचे, तब वे अणिमा और लघिमा सिद्धि के बल पर सूक्ष्म रूप धारण करके अशोक वृक्ष के पत्तों में छिपे थे। इन पत्तों पर बैठे-बैठे ही सीता माता को अपना परिचय दिया था।

5. प्राप्ति: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी किसी भी वस्तु को तुरंत ही प्राप्त कर लेते हैं। पशु-पक्षियों की भाषा को समझ लेते हैं, आने वाले समय को देख सकते हैं।

रामायण में इस सिद्धि के उपयोग से हनुमानजी ने सीता माता की खोज करते समय कई पशु-पक्षियों से चर्चा की थी। माता सीता को अशोक वाटिका में खोज लिया था।

6. प्राकाम्य: इसी सिद्धि की मदद से हनुमानजी पृथ्वी गहराइयों में पाताल तक जा सकते हैं, आकाश में उड़ सकते हैं और मनचाहे समय तक पानी में भी जीवित रह सकते हैं। इस सिद्धि से हनुमानजी चिरकाल तक युवा ही रहेंगे। साथ ही, वे अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देह को कारण कर सकते हैं। इस सिद्धि से वे किसी भी वस्तु को चिरकाल तक प्राप्त कर सकते हैं।

इस सिद्धि की मदद से ही हनुमानजी ने श्रीराम की भक्ति को चिरकाल का प्राप्त कर लिया है।

7. ईशित्व: इस सिद्धि की मदद से हनुमानजी को दैवीय शक्तियां प्राप्त हुई हैं।

ईशित्व के प्रभाव से हनुमानजी ने पूरी वानर सेना का कुशल नेतृत्व किया था। इस सिद्धि के कारण ही उन्होंने सभी वानरों पर श्रेष्ठ नियंत्रण रखा। साथ ही, इस सिद्धि से हनुमानजी किसी मृत प्राणी को भी फिर से जीवित कर सकते हैं।

8. वशित्व: इस सिद्धि के प्रभाव से हनुमानजी जितेंद्रिय हैं और मन पर नियंत्रण रखते हैं।

वशित्व के कारण हनुमानजी किसी भी प्राणी को तुरंत ही अपने वश में कर लेते हैं। हनुमान के वश में आने के बाद प्राणी उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य करता है। इसी के प्रभाव से हनुमानजी अतुलित बल के धाम हैं।

नौ निधियां :

हनुमान जी प्रसन्न होने पर जो नव निधियां भक्तों को देते है वो इस प्रकार है

1. पद्म निधि : पद्मनिधि लक्षणो से संपन्न मनुष्य सात्विक होता है तथा स्वर्ण चांदी आदि का संग्रह करके दान करता है ।

2. महापद्म निधि : महाप निधि से लक्षित व्यक्ति अपने संग्रहित धन आदि का दान धार्मिक जनों में करता है ।

3. नील निधि : निल निधि से सुशोभित मनुष्य सात्विक तेजसे संयुक्त होता है। उसकी संपति तीन पीढीतक रहती है।

4. मुकुंद निधि : मुकुन्द निधि से लक्षित मनुष्य रजोगुण संपन्न होता है वह राज्यसंग्रह में लगा रहता है।

5. नन्द निधि : नन्दनिधि युक्त व्यक्ति राजस और तामस गुणोंवाला होता है वही कुल का आधार होता है ।

6. मकर निधि : मकर निधि संपन्न पुरुष अस्त्रों का संग्रह करनेवाला होता है ।

7. कच्छप निधि : कच्छप निधि लक्षित व्यक्ति तामस गुणवाला होता है वह अपनी संपत्ति का स्वयं उपभोग करता है ।

8. शंख निधि : शंख निधि एक पीढी के लिए होती है।

9. खर्व निधि : खर्व निधिवाले व्यक्ति के स्वभाव में मिश्रीत फल दिखाई देते हैं ।

दस गौण सिद्धियां :

इसके अलावा भगवत पुराण में भगवान कृष्ण ने दस गौण सिद्धियों का वर्णन और किया है जो निम्न प्रकार है-

1. अनूर्मिमत्वम्
2. दूरश्रवण
3. दूरदर्शनम्
4. मनोजवः
5. कामरूपम्
6. परकायाप्रवेशनम्
7. स्वछन्द मृत्युः
8. देवानां सह क्रीडा अनुदर्शनम्
9. यथासंकल्पसंसिद्धिः
10. आज्ञा अप्रतिहता गतिः

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16 सिद्धियाँ की जानकारी. – Prasad Davrani


16 सिद्धियाँ की जानकारी……
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1. वाक् सिद्धि : –
जो भी वचन बोले जाए वे व्यवहार में पूर्ण हो, वह वचन कभी व्यर्थ न जाये, प्रत्येक शब्द का
महत्वपूर्ण अर्थ हो, वाक् सिद्धि युक्त व्यक्ति में
श्राप अरु वरदान देने की क्षमता होती हैं.
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2. दिव्य दृष्टि सिद्धि:-
दिव्यदृष्टि का तात्पर्य हैं कि जिस व्यक्ति के
सम्बन्ध में भी चिन्तन किया जाये, उसका भूत,
भविष्य और वर्तमान एकदम सामने आ जाये, आगे क्या कार्य करना हैं, कौन सी घटनाएं घटित होने वाली हैं, इसका ज्ञान होने पर व्यक्ति
दिव्यदृष्टियुक्त महापुरुष बन जाता हैं.
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3. प्रज्ञा सिद्धि : –
प्रज्ञा का तात्पर्य यह हें की मेधा अर्थात
स्मरणशक्ति, बुद्धि, ज्ञान इत्यादि! ज्ञान के
सम्बंधित सारे विषयों को जो अपनी बुद्धि में
समेट लेता हें वह प्रज्ञावान कहलाता हें! जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से सम्बंधित ज्ञान के साथ-साथ
भीतर एक चेतनापुंज जाग्रत रहता हें.
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4. दूरश्रवण सिद्धि :-
इसका तात्पर्य यह हैं की भूतकाल में घटित कोई भी घटना, वार्तालाप को पुनः सुनने की
क्षमता.
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5. जलगमन सिद्धि:-
यह सिद्धि निश्चय ही महत्वपूर्ण हैं, इस सिद्धि
को प्राप्त योगी जल, नदी, समुद्र पर इस तरह
विचरण करता हैं मानों धरती पर गमन कर रहा
हो.
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6. वायुगमन सिद्धि :-
इसका तात्पर्य हैं अपने शरीर को सूक्ष्मरूप में
परिवर्तित कर एक लोक से दूसरे लोक में गमन कर सकता हैं, एक स्थान से दूसरे स्थान पर सहज तत्काल जा सकता हैं.
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7. अदृश्यकरण सिद्धि:-
अपने स्थूलशरीर को सूक्ष्मरूप में परिवर्तित कर अपने आप को अदृश्य कर देना! जिससे स्वयं की इच्छा बिना दूसरा उसे देख ही नहीं पाता हैं.
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8. विषोका सिद्धि :
इसका तात्पर्य हैं कि अनेक रूपों में अपने आपको परिवर्तित कर लेना! एक स्थान पर अलग रूप हैं, दूसरे स्थान पर अलग रूप हैं.
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9. देवक्रियानुदर्शन सिद्धि :-
इस क्रिया का पूर्ण ज्ञान होने पर विभिन्न
देवताओं का साहचर्य प्राप्त कर सकता हैं! उन्हें
पूर्ण रूप से अनुकूल बनाकर उचित सहयोग लिया जा सकता हैं.
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10. कायाकल्प सिद्धि:-
कायाकल्प का तात्पर्य हैं शरीर परिवर्तन! समय
के प्रभाव से देह जर्जर हो जाती हैं, लेकिन
कायाकल्प कला से युक्त व्यक्ति सदैव तोग्मुक्त
और यौवनवान ही बना रहता हैं.
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11. सम्मोहन सिद्धि :-
सम्मोहन का तात्पर्य हैं कि सभी को अपने
अनुकूल बनाने की क्रिया! इस कला को पूर्ण
व्यक्ति मनुष्य तो क्या, पशु-पक्षी, प्रकृति को
भी अपने अनुकूल बना लेता हैं.
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12. गुरुत्व सिद्धि:-
गुरुत्व का तात्पर्य हैं गरिमावान! जिस व्यक्ति
में गरिमा होती हैं, ज्ञान का भंडार होता हैं,
और देने की क्षमता होती हैं, उसे गुरु कहा जाता हैं! और भगवन कृष्ण को तो जगद्गुरु कहा गया हैं.
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13. पूर्ण पुरुषत्व सिद्धि:-
इसका तात्पर्य हैं अद्वितीय पराक्रम और निडर,
एवं बलवान होना! श्रीकृष्ण में यह गुण बाल्यकाल से ही विद्यमान था! जिस के कारन से उन्होंने ब्रजभूमि में राक्षसों का संहार किया! तदनंतर कंस का संहार करते हुए पुरे जीवन शत्रुओं का संहार कर आर्यभूमि में पुनः धर्म की स्थापना की.
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14. सर्वगुण संपन्न सिद्धि:-
जितने भी संसार में उदात्त गुण होते हैं, सभी कुछ उस व्यक्ति में समाहित होते हैं, जैसे – दया, दृढ़ता, प्रखरता, ओज, बल, तेजस्विता, इत्यादि! इन्हीं गुणों के कारण वह सारे विश्व में श्रेष्ठतम व अद्वितीय मन जाता हैं, और इसी प्रकार यह विशिष्ट कार्य करके संसार में लोकहित एवं जनकल्याण करता हैं.
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16. इच्छा मृत्यु सिद्धि :-
इन कलाओं से पूर्ण व्यक्ति कालजयी होता हैं,
काल का उस पर किसी प्रकार का कोई बंधन
नहीं रहता, वह जब चाहे अपने शरीर का त्याग कर नया शरीर धारण कर सकता हैं.

16. अनुर्मि सिद्धि:-
अनुर्मि का अर्थ हैं. जिस पर भूख-प्यास, सर्दी – गर्मी और भावना-दुर्भावना का कोई प्रभाव नहो.

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મુસીબતો થી બચવા દરેક જણ નું રાશી ભવિષ્ય


(૧) મેષ (અ. લ. ઈ.) (Aries):

** તમારી રાશિવાળાઓએ મોઢા પર મેશનું ટીલું કરવું.

** યુવકોને બેકારીના યોગ છે. શીર્ષાસન કરીને, પાણીપુરી ખાવી.

** ગાયને રોટલી નાખવી અને ઢાંઢો ઢીંક મારે, તો શુકન સમજવા.

** માથે ટાલ પડે તો urea ખાતરનું માલીશ કરવું. મબલખ પાકની શક્યતા.

** Katrina Kaif નું item song, દિવસમાં એક વાર સાંભળવાથી, બુરી નજર ટળશે, અને પ્રભુ-કૃપા થશે.

 

(૨) મિથુન (ક. છ. ઘ.) (Gemini):

** મિથુન ચક્રવર્તીની માળા રોજ એક વાર ગણવી. Dance માસ્ટર થવાના ઉજળા સંજોગો.

** ગધેડાની ઉંધી પ્રદક્ષિણા કરો. ધનપ્રાપ્તિ થશે.

** કાગડો માથા પર ચરકે, તો દૂધપાક ખાજો. સાળી સાથે સમાધાન થશે.

** ગૃહિણીઓએ તમામ પ્રકારના ‘બાબા’ઓથી દુર રહેવું. ફક્ત પોતાના ઘરના બાબાને સંભાળવા.

 

(૩) કર્ક (ડ. હ.) (Cancer):

** તમારે સફેદ કપડા પહેરવા, અને બોલપેનનું ઢાંકણું ખુલ્લું ન રાખવું.

** જુગારીઓને પૈસા ઉછીના આપવાથી, પૈસા ડૂબી જવાના યોગ.

** બહેનોએ, માથે ટાલ પડે ત્યારે સોનું ખરીદવું. નક્ષત્રની રાહ ન જોવી.

** દીકરાની સગાઇ તૂટે તો દીવેલ પીવું.

** વહુઓ લસણનું જ્યુસ પીવાથી, એમના સાસુને પેટમાં ફાયદો.

** કોલેજ કે પડોશની કન્યાને લીફ્ટ ન આપવી. એના ભાઈઓ તરફથી અસ્થિભંગના સંજોગો.

** ફાટેલું ગંજી પહેરીને, જગજીત સિંહની ગઝલો સાંભળવાથી, અઢળક ધનલાભ.

 

(૪) વૃષભ (બ. વ. ઉ.) (Taurus):

** બળદિયાની આ રાશિમાં જન્મેલા લોકોએ રોજ એક અડદિયો, ખુંટિયાને ખવડાવવો. Foreign જવાના chances વધુ.

** બારીમાંથી પડોશણને જોતી વખતે, માથા પર ગરોળી પડે તો લાભ થાય, પરંતુ સ્વરૂપવાન પડોશણને જોવામાં, દાઢી છોલાવાના યોગ.

** દૂધ ફાટી જવાના પ્રબળ સંજોગો, એટલે ભૈયાને કહીંને, ભેંસને બરફના ગોળા ખવડાવવા.

 

(૫) સિંહ (મ. ટ.) (Leo):

** ઊંટડીના દુધમાં દુધી બોળીને પહેરવાથી, નજર નહીં લાગે.

** સાસુ રોકાવા આવે ત્યારે પતિ દ્વારા માર ખાવાના ઉજળા સંજોગો.

** બકરીના કપાળે ચાંલ્લો કરવાથી, સિંહ રાજી થાય.

** બહેનોને કીડી કરડવાથી, ધનુર્વા ઉપડે, તો ગાજરનો હલવો ખાવો.

** સસરાને હાર્ટ-એટેક આવે તો પૂરો વારસો મળે.

** TV પર તારક મહેતાના “ઉલટા ચશ્મા” જોવાથી, ગ્રહદશા સુધરશે. ફક્ત આડોશ પાડોશની બબિતાઓથી ચેતજો.

 

(૬) કન્યા (પ. ઠ. ણ.) (Virgo):

** ઘરજમાઈ થવાના ઉજળા સંજોગો. આળસુ માણસને સધ્ધર સાસરું મળશે.

** સસરાના પગ ૩ વાર દબાવવાથી, બીજા સાઢુ કરતા વધારે વારસો મળે.

** રસ્તામાં ભૂંડ બચકું ભરે તો સોનું મળશે.

** Baygon spray વાંસામાં છાંટવાથી, ઘરમાંથી વાંદા નાબુદ થશે.

** Harry Potter ની ૭ CD’s જોવાથી ચમત્કારિક ફાયદો.

 

(૭) તુલા (ર. ત.) (Libra):

** લાત્યું ખાવાના યોગ છે. એટલે ૧૪ લવિંગનો હાર, બકરીના દુધમાં બોળીને ભૂંડના ગળામાં પહેરાવવો.

** Valentine’s Day એ સાસરીયાઓને જમાડવાથી, કન્યાપ્રાપ્તિ થાય.

** બહેનોએ કડવાચોથના દિવસે સસરાની ૪ વાર પ્રદક્ષિણા કરવાથી બુરી નજર ટળશે.

** રાત્રે નદીકાંઠે ભૂતનો અનુભવ થશે, માટે સફેદ પેન્ટ ન પહેરવું.

** દેશી દારૂની કોથળી ભારોભાર, કોઈ જુના દારુડીયાને જોખવાથી, આવતા જન્મે દાંત ફક્ત ૨, પણ લીવર ૩૨ મળશે.

 

(૮) વૃશ્ચિક (ન. ય.) (Scorpio):

** તમે સગાઇ કરશો, તો police case થશે. એટલે કોઈ બ્રહ્મચારી બાપુના પરિવારને જમાડજો.

** હડકાયું કુતરું કરડવાથી રૂપાળા થવાના સંજોગો.

** ડુંગળીનો રસ આંખમાં આંજવાથી દ્રષ્ટિ સુધરે.

** સલમાનની ફિલ્મો જોવાથી, વાંઢાઓનો આત્મવિશ્વાસ વધશે.

 

(૯) ધન (ધ. ફ. ભ. ઢ.) (Sagittarius):

** તમારા ગ્રહો ઉચ્ચના છે, પણ માનસિકતા નીચની છે.

** Cricket નો સટ્ટો રમવાથી ભીખ માંગવાનો વારો આવે.

** જયા-પાર્વતીના વ્રત કરવાથી, રાતના ઉજાગરાઓમાં રાહત.

** ઊંટના દાંત ગણવાથી pyorrhea નાબુદ થાય.

** લસણની ચટણી આંખમાં આંજવાથી, અટકેલી બેંક લોન પાસ થાય.

** iPhone અને twitter ના ઉપયોગથી સંતાનપ્રાપ્તિ થશે.

 

(૧૦) મકર (ખ. જ.) (Capricorn):

** પતિને બળેલી રોટલી Burnol ચોપડીને ખવડાવવાથી, પતિ કન્ટ્રોલમાં રહેશે.

** સંતાનોના FB accounts તાત્કાલિક બંધ કરાવો. ભાગી જવાના યોગ છે.

** ભેંસના પોદળા પર પગ પડવાથી શેરબજારમાં ફાયદો.

** રોજ એક વાર balm ની ન્હાંસ લેવાથી, સોનું ખરીદી શકશો.

** શકીરાબેનના ગીતો પર નાચવાથી કમ્મરના દુખાવામાં રાહત.

 

(૧૧) કુંભ (ગ. સ. શ. ષ.) (Aquarius):

** કુંભના મેળામાં ચોક્કસ જવું, જ્યાં નાગા બાવાઓના ખિસ્સા કાપવાથી લાભ મળશે.

** વાંઢાઓએ સવાર સાંજ કંસાર ખાવો. લગ્નના કોઈ chances નહીં રહે.

** પણ સૂર્યોદયના સમયે કૂતરાની પુંછડીને અડવાથી અટકેલી સગાઇ થશે.

** ભેંસના શિંગડે વાંહો (પીઠ) ઘસવાથી ધનલાભ.

 

(૧૨) મીન (દ. ચ. જ. થ.) (Pisces):

** રોજ સવારે દયાભાભી અને જેઠાલાલની માળા કરવાથી, છૂટાછેડાનો case પાછો ખેંચાશે.

** બકરીને પાણીપુરી ખવડાવવાથી, સાઢુભાઈ સાથેના જુના કજિયાનું સમાધાન.

** કુતરાને રોજ dosa ખવડાવવાથી તમારી તિજોરીમાં પૈસા ઘટશે નહીં.

** કાળસર્પ યોગ ટાળવા માટે, કોઈને પણ Blackberry ફોન દાનમાં આપો.

** ભયંકર પનોતી ચાલી રહી છે, માટે વાસી bread પર મરચાંનો sauce લગાડીને ખાઓ.

** દિવાળીમાં ગધેડાની પુંછડીએ રોકેટ બાંધવાથી, તમામ પ્રકારની ઉપાધિઓમાંથી છુટકારો.

[30/11 10:25 PM] Varsha Ashodiya: कुछ महिला साहित्यकारो को भी अवार्ड लौटाना था पर

 

 

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સાચી ભેંટ.


સાચી ભેંટ.

એક કુટુંબમાં પતિ પત્ની અને એક દીકરી રહેતાં હતાં .

પતિને રોજ ઓફિસેથી આવવાનો સમય અને દીકરી ને એને મળવાની ઉત્કંઠા,

ઘણીવાર રાત્રે દસ થઇ જતાં છતાં નિંદર બહેનને દૂર રાખવા જાતે જ આંખે પાણીની છાલક મારીને માતાનાં ખોળામાં બેસી જાય.

” મમ્મી , ગીત ગાને .”
એ જેવી પપ્પાને આવતાં

જુએ કે દોડીને પપ્પાનાં ખભા પર ચઢી જાય .
” પપ્પા , ચાલો જલદી ઘોડો બનો – આજે તમે સહેલ નથી કરાવી ! ”

પપ્પા દીકરીનો આદેશ માથે ચઢાવે અને શરુ થાય બાપ- દીકરીનો મસ્તીનો દોર .

એક દીવસ રાત્રે પત્નીએ દીકરીને સુવડાવ્યા પછી , પતિને કહ્યું ,

” તમે ક્યારેક દીકરી માટે ચોકલેટ કે રમકડાં લઇ આવો તો તેમને કેટલું ગમશે !

” સાવ ખાલી આવવું એ પત્નીને ન હોતું ગમતું .
ચિડાયા વિના પતિએ જવાબ આપ્યો , ”

જ્યારે હું તેમને માટે ચોકલેટ કે રમકડાં લાવીશ ત્યાર પછી મારી દીકરી – મારી નહીં પરંતુ ચોકલેટ કે રમકડાંની રાહ જોતી થઈ જશે

. પછી ક્યારેક કશું નહીં લવાય ત્યારે તેનાં ચહેરા ઉપર જે આનંદ જોવા મળે છે એનાં કરતાં દુ:ખ જોવા મળશે .”

પતિની આ અંતરનાં ઊંડાણની વાતે
પત્નીની આંખ ઉઘાડી નાખી .

આખા સમાજને આજે આવા સમજદાર માબાપની જરૂર છે…

– Maa Baap… Baccho ki demand puri karte hai.. Magar sirf Demand puri karne ke liye hi Maata pita nahi hai.

Posted in हास्यमेव जयते

Second wife


husband called wife on phone and said
today no need to cook i will bring dinner from Second Wife ..🍪☕
Husband came home and knocked at the door.
Wife opened the door and thats only thing husband remembered
👋👊
Husband in ICU now…🚑

Second wife Photo

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નાણાંની બચત


http://gujarati.moneycontrol.com/news/financial-planning/money-manager-financial-planning-through-proverbs_28679.html

 

નાણાંની બચત અને ખર્ચ એ દરેક વ્યક્તિ માટે રોજીંદી બાબત છે. દરરોજ આપણે ખર્ચ પણ કરીએ છીએ અને બચત માટે આપણે સભાન પણ છીએ, છતાં ઘણી વખત એવુ બનતુ હોય છે કે જીવનનાં કોઇ પડાવ પર આપણને એવુ લોગે છે કે આયોજનમાં ક્યાંક ચૂકી ગયા. તો તમે તમારા નાણાંકિય આયોજનમાં ન ચૂકો તેના માટે તમામ એવી જરૂરી માહિતી પર ચર્ચા કરીશું.

 

2017 શરૂ થઈ ગયું છે. નવા વર્ષમાં નવા રોકાણ કરવાના હોય, નવી રીતે આયોજન કરવાનું હોય અને જૂના આયોજનનો રિવ્યૂ કરવાનો હોય. ત્યારે આજે અમે તમને એવી જ રીતે રિવ્યૂ કરાવીએ અથવા તો કહી શકાય કે રિ-વિઝીટ કરાવીએ અને રિમાઈન્ડ કરાવીએ એ દરેક ગુજરાતી કહેવતોને જે આપણા સાહિત્યમાં જોડાઈને વર્ષોથી આપણને નાણાંકિય આયોજનની ટીપ્સ આપે છે. અને આ ચર્ચા કરવા આપણી સાથે જોડાઈ રહ્યાં છે યોગિક વેલ્થ પુસ્તકના લેખક અને સર્ટિફાઈડ ફાઈનાન્શિયલ પ્લાનર ગૌરવ મશરૂવાલા

સ્નાનથી તન, દાનથી ધન, સહનશીલતાથી મન અને ઈમાનદારીથી જીવન શુદ્ધ બને છે. આ કહેવમાં લક્ષ્મીને વાસ હોય છે. આપણી લક્ષ્મીને માણવી હોય તો પહેલા તન્દુરૂસ્તિ જોઇએ. અને સમાજ જોડે એને વેચવુ જોઇએ. જો કોઇ પણ ધનને પકડી રાકો તો કનજુસનું ધન કાકરા બરાબર હોય છે. આપણા પાસે ઘણો ઝન હોવા છતા મણસને સુખ નથી મળી રહ્યું. બીજુ સમાજ જોડે વેબચીને ખાવું જોઇએ. દરેક પરિસ્થિતીને સંભાળીને આયોજન કરવું જોઇએ. સ્વાસ્થ્યને સંભાલવા માટે હેલ્થ ઇન્શયોરન્સ લેવું જોઇએ.

 

જે મનુષ્ય પારકા ધનની, રૂપની, કૂળની, વંશની, સુખની અને સન્માનની ઇર્ષા કરે છે તેને પાર વિનાની પીડા રહે છે. આપણે આપણા નાણાંકિય આયોજનમાં કેઇ સાથે સરખામણી ન કરવી જોઇએ. કારણે કે એના થકી મનુષ્ત ઘણો દુખી થાતો હોય છે. કોઇ પણ વ્યક્તિએ પોતાની સંપત્તિ ભેગી કરી હોય છે. આપણે લક્ષ્મીને આપણી માતાનું હરજો આપ્યો છે. અને એની સરખામણી કોઇના જોડે ન કરવી જોઇએ. કોઇ પણ રોકામ ન કરવો જોઇએ. આપણા રોકાણ સાથે બીજાનું રોકાણ સહખાવવું ન જોઇએ.

 

ખરો રૂપિયો કદી ખોટો થતો નથી. જેની પાસે કાળુ નાણું હોય તેનો ચિંતા રહે છે. સાચી રીતે કમાયેલા નાણાં જેને કમાયેલા ગોય તેને ચિંતા રહેતી નથી. જો કોઇ માણસએ લોકોના નાણાં ખોટા તરીકે થી લીધા હોય કે ખોટા માર્ગથી નાણાનું આવન ક્યું હોય તો એ નાણા વધારે ટકતો નથી. આપણા ઘરમાં કાળો ધના કોઇ દિવસ રાખોવો નહી.

 

આગ લાગે ત્યારે કૂવો ખોદવા ન જવાય. ઇમરજન્સી માટે આયોજન પહેલાથી કરવું જોઇએ. કોઇ પણ દિવસે તકલીફ આવે તો એના માટે આપણી પુરે પુરી ત્યારી રહેવી જોઇએ. હેલ્થ ઇન્શ્યારન્સ કે લાઇફ ઇન્શ્યોરન્સ પહેલાથી લેતા ફાયદો થાય છે.

 

ઉધાર આલે એટલે હાથી ના બંધાય, રોકડે થી બકરી લેવાય- જેટલું હોય તે પ્રમાણે ખર્ચ કરવો. આપણે કોઇ પણ દિવસ ઉધાર નાણાં રાખી કે લલચામણી ઓફરમાં ફસાવું ન જાઇએ. જેટલું હોય તે પ્રમાણે ખર્ચ કરવો જોઇએ. માત્ર શોખ માટે લોન ન લેવી જોઇએ યોગ્ય જરૂરીચાત પ્રામાણે વર્તવું જોઇએ. કોઇ પણ વસ્તુ લીધું હયો ઝીરો ઇંટ્રેસ્ટ પર અને એના હફતા ભરતા ઇંટ્રેસ્ટ પણ ચુક્વિ નાખ્યો છે.

 

રૂપિયાના ત્રણ અડધા શોધે, એમાં બે ખોટા આવે. આમારા માટે સારી સ્કીમ સારી હોય તો એજ સ્કીમમાં જ રોકાણ કરવો જોઇએ. ખોટી સ્કીમમાં રોકાણ કરો તો નુક્સાન ચોક્કસ પણે થાય છે. આપણે કોઇ પણ રોકામ કરવો હોચ તો ફાઇનાન્શિયર પાસે એડવાઇસ લેવી જરૂરથી લઇ. કંઇ સ્કીમમાં રોકાણ કરો છો તેની પુરતી માહિતી લેવી જોઇએ.

 

ટીપે ટીપે સરોવર બંધાય, કાંકરે કાંકરે પાડ બંધાય. ધીમે ધીમે રોકાણ કરોએ તો લાંબા ગાળે મોટો ફાયદો થાય છે. આપણે ટોવ પાડવી પડો છે. એના થકી રોકાણ કરવાનો મન બને છે. જો ફટાફટ નાણાં કમાણા ન કરી શકો અને એના થી જે રકમ આમણી જમા હોય છે. એ પણ ખર્ચાય છે. નાની રકમનું પણ રોકાણ કરી શકાય, રોકાણ કરવા રાહ ન જાવી જોઇએ. નાણું મળશે પણ ટાણું નઇ મળે છે. આપણા આયોજન માટે આપણે જ સમય કાઢવો જોઇએ.

Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

भगवत गीता


भगवत गीता के विदेशमें लोग प्रियता

भगवद गीता के विषय में विख्यात अमरीकी भौतिकशास्त्री रोबर्ट ओपेन्हाईमर ने कहा था,
“ गीता उन महानतम ग्रंथों में से एक है जिसने मेरे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित किया है.”

विख्यात ऑस्ट्रिअन दार्शनिक रुडोल्फ स्टेनर ने गीता को अद्भुत प्रेरणादायी ग्रन्थ बताते हुए कहा था कि इसे समझने के लिए ये आवश्यक है कि हम अपने अंतर्मन को उसके लिए लयबद्ध करें ।

तुर्की के तत्कालीन प्रधानमंत्री ब्युलेंत एसेवित ने बीबीसी को दिए इंटरव्यू में भगवद गीता को अपनी शक्ति और समझ का स्त्रोत बताया था ।

अमरीकी कवि और दार्शनिक हेनरी डेविड थोर भी ने कहा था, “सुबह-सुबह मैं अपनी बुद्धिमत्ता को गीता के विलक्षण और ब्रम्हांड-उत्त्पत्तीय दर्शन से सींचता हूँ, जिसकी तुलना में हमारा आधुनिक विश्व और आधुनिक साहित्य अदना और नगण्य प्रतीत होता है.”

प्रशियन दार्शनिक-विद्वान विल्हेम हम्बोल्ट ने गीता को विश्व का सबसे दार्शनिक और दुनिया को बताने लायक सबसे गहरा ज्ञान कहा था.

उर्दू के विख्यात दार्शनिक शायर इकबाल ने भी कहा था, “मानव-बौद्धिकता के इतिहास में श्री कृष्ण का नाम हमेशा ही महान श्रद्धा और सम्मान के साथ लिया जाएगा.”

विश्व की कई और विभूतियों समेत गांधी, विनोबा भावे, अरबिंदो, सुनीता विलिअम्स आदि अन्य प्रख्यात व्यक्तियों ने भगवद गीता की महानता पर भूतकाल में अपने उदगार व्यक्त किये हैं ।