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1 -मुहम्मद गौरी ने 17 बार कुरआन की कसम खाई थी कि भारत पर हमला नहीं करेगा, लेकिन हमला किया.
2 -अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोड़ के राणा रतन सिंह को दोस्ती के बहाने बुलाया फिर क़त्ल कर दिया.
3 -औरंगजेब ने शिवाजी को दोस्ती के बहाने आगरा बुलाया फिर धोखे से कैद कर लिया .
4 -औरंगजेब ने कुरआन की कसम खाकर श्री गोविन्द सिघ को आनद पुर से सुरक्षितजाने देने का वादा किया था. फिर हमला किया था.
5 -अफजल खान ने दोस्ती के बहाने शिवाजी की ह्त्या का प्रयत्न किया था .

६-मित्रता की बातें कहकर पाकिस्तान ने कारगिल पर हमला किया था .”अगर हम इतिहास से सबक नहीं लेकर मुसलमानों की शांति और दोस्ती की बातोंमे आते रहेतो हमेशा नुकसान उठाते रहेंगे.

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એક ગુજરાતી ગુજરી ગયો. યમનાં દૂત પોતાના ખાસ વિમાનમાં આવીને જીવ લઇ ગયા – Sayani Kamal


એક ગુજરાતી ગુજરી ગયો. યમનાં દૂત પોતાના ખાસ વિમાનમાં આવીને જીવ લઇ ગયા…

જન્મનાં સાઇઠ વરસ બાદ મૃત્યુ પછી પણ હવાઇ સફરનો લાભ મેળવવામાં સફળ થયેલો ગુજરાતી ચિત્રગુપ્તની ઓફિસમાં રજૂ થયો.

ગુજરાતી : મેં સાંભળ્યું છે કે હવે ઉપર પણ બધો વહીવટ કમ્પ્યુટરાઇઝ્ડ થઇ ગયો છે અને ચિત્રગુપ્ત હવે દર દિવાળીએ ચોપડાને બદલે કમ્પ્યુટર ઉપર ચાંદલા કરે છે.

ચિત્રગુપ્તે ગુજરાતીનું ગુપ્ત ચિત્ર જોવાં માટે કમ્પ્યુટર ઓન કર્યું.

પ્રથમ ચિત્રગુપ્તે ગુજરાતીનાં પુણ્યની એન્ટ્રી તપાસીને કહ્યું : તમે તો ઘણાં પુણ્ય કર્યાં છે.

આ સાંભળી હરખાઇ ગયેલો ગુજરાતી બોલ્યો : “ચિત્રગુપ્તભાઇ, પુણ્ય તો કરવા જ પડે ને ? અમે ગુજરાતીઓ દરરોજ કરતાં વધારે જમીને ઉપવાસ કરીએ છીએ. ત્રણ ટંક જેટલું એક જ ટંકમાં આરોગીને એકટાણાં કરીએ છીએ. વ્યથાની વાર્તા કરતાં-કરતાં કથા સાંભળીએ છીએ અને વરસમાં એકાદ વખત હનીમૂન કરવા નીકળ્યાં હોય એ રીતે તીર્થયાત્રા પણ કરીએ છીએ.”

ત્યાર બાદ ચિત્રગુપ્તે ગુજરાતીનાં પાપની એન્ટ્રીઓ ચેક કરીને કહ્યું : “તમે પાપ કરવામાં પણ પાછું વળીને જોયું નથી.”

આ સાંભળીને થોથવાઇ ગયેલો ગુજરાતી બોલ્યો : “અમને જન્મથી જ ડરાવવામાં આવે છે કે જો પાપ કરશો તો નર્કમાં જશો એટલે અમે જાણીબૂઝીને ક્યારેય પાપ કરતા જ નથી. હું એમ કહેતો નથી કે તમે ખોટું બોલો છો, મારાથી જે કાંઇ પાપ થઇ ગયા છે એ ભૂલથી થયા હશે.”

એટલે ચિત્રગુપ્ત બોલ્યા : “તમે ગુજરાતીઓ ‘એક્સક્યુઝ’ શોધવામાં એક્સપર્ટ છો. મને બરાબર ખબર છે કે તમે પાણી ઉકાળીને પીઓ છો અને લોહી જેમનું તેમ પીઓ છો. આખો દિવસ અહિંસાને ધર્મ માનીને જીવો છો અને રાત્રે ઘરમાં હોય એટલા મચ્છર મારીને ઘસઘસાટ ઊંઘી જાઓ છો. ચંદ્રકાંત બક્ષી નામનાં એક લેખક અહીં આવ્યા ત્યારે મને કહેતા હતા કે ગુજરાતી એવી વેપારી પ્રજા છે કે એને નામાનાં ચોપડામાં રસ છે એટલો સાહિત્યની ચોપડીમાં રસ નથી.”

આ સાંભળી ગુજરાતી બોલ્યો : “રૂપિયા એટલે લક્ષ્મી અને લક્ષ્મી એટલે
માતાજી, લક્ષ્મીજી પ્રત્યેના અમારા અહોભાવને અમારો સદગુણ ગણવો જોઇએ. આ સદગુણના કારણે તો અમે ગુજરાતીઓ વિશ્વનાં તમામ દેશના નાનામાં નાના ગામ સુધી પહોંચી ગયા છીએ અને અક્કલ અને હોશિયારીથી સામ્રાજ્ય ઊભાં કરીને લક્ષ્મીજીની કૃપા મેળવવામાં સફળ થયા છીએ.”

એટલે ચિત્રગુપ્તે તરત જ કહ્યું : “તેં પાપથી ડરીને પુણ્ય કર્યા છે અને પુણ્ય પામવા માટે પાપ કર્યા છે.
આમ પાપ અને પુણ્ય બંને કર્યા છે, માટે થોડાં વરસ સ્વર્ગમાં રહેવા દઇશ અને થોડા વરસ નર્કમાં પણ રહેવું પડશે.”

પૃથ્વી ઉપર દરરોજ બપોરે થાળી ભરીને દાળ-ભાત ખાધાં પછી બે કલાક સુધીની દીર્ઘ વામકુક્ષી કરનાર માટલા જેવી ફાંદના માલિક એવા ગુજરાતી ભાઇએ સીધો સવાલ કર્યો : “હું મારા સ્વર્ગનો લાભ રાજીખુશીથી જતો કરવા તૈયાર છું. જો તમે નર્કની સજા માફ કરતાં હો તો.”

ગુજરાતીની શરતી વાણી સાંભળીને ચિત્રગુપ્તને પરસેવો છૂટી ગયો કારણ આવો અઘરો જીવ આ અગાઉ કોઇ આવ્યો નહોતો. ચિત્રગુપ્તે પૂછ્યું : “તમને સ્વર્ગ પણ ન આપું અને નર્ક પણ ન આપું તો હું શું આપું?”

ત્યારે ગુજરાતી ના મ્રુત્યુ પછી પણ માંહ્યલો જીવીત વેપારી જીવ બેધડક બોલ્યો : “સ્વર્ગ અને નર્કનો રસ્તો જ્યાં મળે છે, તે ચોકમાં દુકાન થાય તેટલી જગ્યા આપો !!!”

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नालंदा


आखिर क्यों एक मुगल शासक ने जलवा दी थी विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी:- नालंदा

जी हाँ नालंदा वो जगह है जो छठी शताब्दी में पूरे वर्ल्ड में नॉलेज का सेंटर थी। कोरिया, जापान, चीन, तिब्बत और तुर्की से यहां स्टूडेंट्स और टीचर्स पढ़ने-पढ़ाने आते थे, लेकिन बख्तियार खिलजी नाम के एक सिरफिरे की सनक ने इसको तहस-नहस कर दिया। उसने नालंदा यूनिवर्सिटी में आग लगवा दी, जिससे इसकी लाइब्रेरी में रखीं बेशकीमती किताबें जलकर राख हो गईं। खिलजी ने नालंदा के कई धार्मिक लीडर्स और बौद्ध भिक्षुओं की भी हत्या करवा दी।

यहां थे 10 हजार छात्र, 2 हजार शिक्षक:-

छठी शताब्दी में हिंदुस्तान सोने की चिडिया कहलाता था। यह सुनकर यहां मुस्लिम आक्रमणकारी आते रहते थे। इन्हीं में से एक था- तुर्की का शासक इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी। उस समय हिंदुस्तान पर खिलजी का ही राज था। नालंदा यूनिवर्सिटी तब राजगीर का एक उपनगर हुआ करती थी। यह राजगीर से पटना को जोड़ने वाली रोड पर स्थित है। यहां पढ़ने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स विदेशी थे। उस वक्त यहां 10 हजार छात्र पढ़ते थे, जिन्हें 2 हजार शिक्षक गाइड करते थे।
महायान बौद्ध धर्म के इस विश्वविद्यालय में हीनयान बौद्ध धर्म के साथ ही दूसरे धर्मों की भी शिक्षा दी जाती थी। मशहूर चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी यहां साल भर शिक्षा ली थी। यह वर्ल्ड की ऐसी पहली यूनिवर्सिटी थी, जहां रहने के लिए हॉस्टल भी थे।

कहा जाता है कि एक बार बख्तियार खिलजी बुरी तरह बीमार पड़ा। उसने अपने हकीमों से काफी इलाज करवाया, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। तब किसी ने उसे नालंदा यूनिवर्सिटी की आयुर्वेद शाखा के हेड (प्रधान) राहुल श्रीभद्र जी से इलाज करवाने की सलाह दी, लेकिन खिलजी किसी हिंदुस्तानी वैद्य (डॉक्टर) से इलाज के लिए तैयार नहीं था। उसे अपने हकीमों पर ज्यादा भरोसा था। उसका मन ये मानने को तैयार नहीं था कि कोई हिंदुस्तानी डॉक्टर उसके हकीमों से भी ज्यादा काबिल हो सकता है।

श्री भद्र ने खिलजी का किया अनूठा इलाज:-

दरअसल, जब श्रीभद्र जी ने उन्हें कुछ दवाई लेने को कहा तो खिलजी ने साफ़ इंकार कर दिया और दवाई को फेंक दिया फिर श्रीभद्र जी के दीमक में एक आईडिया आया और उन्होंने खिलजी से कुरान पढ़ने के लिए कहा, तब राहुल श्रीभद्र ने कुरान के कुछ पन्नों पर एक दवा का लेप लगा दिया था। खिलजी थूक के साथ उन पन्नों को पढ़ता गया और इस तरह धीरे-धीरे ठीक होता गया, लेकिन पूरी तरह ठीक होने के बाद उसने हिंदुस्तानी वैद्य के अहसानों को भुला दिया। उसे इस बात से जलन होने लगी कि उसके हकीम फेल हो गए जबकि एक हिंदुस्तानी वैद्य उसका इलाज करने में सफल हो गया। तब खिलजी ने सोचा कि क्यों न ज्ञान की इस पूरी जड़ (नालंदा यूनिवर्सिटी) को ही खत्म कर दिया जाए। इसके बाद उसने जो किया, उसके लिए इतिहास ने उसे कभी माफ नहीं किया।

जलन के मारे खिलजी ने नालंदा यूनिवर्सिटी में आग लगाने का आदेश दे दिया। कहा जाता है कि यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में इतनी किताबें थीं कि यह तीन महीने तक जलता रहा। इसके बाद भी खिलजी का मन शांत नहीं हुआ। उसने नालंदा के हजारों धार्मिक लीडर्स और बौद्ध भिक्षुओं की भी हत्या करवा दी। बाद में पूरे नालंदा को भी जलाने का आदेश दे दिया। इस तरह उस सनकी ने हिंदुस्तानी वैद्य के अहसान का बदला चुकाया।

यूनिवर्सिटी में थे 7 बड़े- 300 छोटे कमरे:-

नालंदा यूनिवर्सिटी की स्थापना गुप्त वंश के शासक कुमारगुप्त प्रथम ने 450-470 ई. के बीच की थी। यूनिवर्सिटी स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना थी। इसका पूरा कैम्पस एक बड़ी दीवार से घिरा हुआ था जिसमें आने-जाने के लिए एक मुख्य दरवाजा था। नॉर्थ से साउथ की ओर मठों की कतार थी और उनके सामने अनेक भव्य स्तूप और मंदिर थे। मंदिरों में भगवान बुद्ध की मूर्तियां थीं। यूनिवर्सिटी की सेंट्रल बिल्डिंग में 7 बड़े और 300 छोटे कमरे थे, जिनमें लेक्चर हुआ करते थे। मठ एक से अधिक मंजिल के थे। हर मठ के आंगन में एक कुआं बना था। 8 बड़ी बिल्डिंग्स, 10 मंदिर, कई प्रेयर और स्टडी रूम के अलावा इस कैम्पस में सुंदर बगीचे और झीलें भी थीं। नालंदा को हिंदुस्तानी राजाओं के साथ ही विदेशों से भी आर्थिक मदद मिलती थी। यूनिवर्सिटी का पूरा प्रबंध कुलपति या प्रमुख आचार्य करते थे जिन्हें बौद्ध भिक्षु चुनते थे।

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ताजमहल से जुडी शाहजहाँ और मुमताज़ की प्रेमकहानी झूठी थी


ताजमहल से जुडी शाहजहाँ और मुमताज़ की प्रेमकहानी झूठी थी ! सच्ची कहानी आपको सुन्न कर देगी !

आगरा के ताजमहल को शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी का प्रतीक कहा जाता है.

लेकिन शाहजहाँ और मुमताज की प्रेम कहानी को इतिहासकार शुरू के नकारते आयें हैं. शाहजहाँ और मुमताज की कोई प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि इनके जीवन की सच्चाई प्रेम कहानी से बिलकुल अलग थी.

आइये जानते है शाहजहाँ और मुमताज़ की प्रेमकहानी से जुड़ी कुछ सच्चाई

  • मुमताज का असली नाम अर्जुमंद-बानो-बेगम” था, जो शाहजहाँ की पहली पत्नी नहीं थी.
  • मुमताज के अलावा शाहजहाँ की 6  और पत्नियां भी थी और इसके साथ उसके हरम में 8000 रखैलें भी थी.
  • मुमताज शाहजहाँ की चौथे नम्बर की पत्नी थी. मुमताज से पहले शाहजहाँ 3 शादियाँ कर चुका था. मुमताज से शादी करने के बाद 3 और लड़कियों से विवाह किया था.
  • मुमताज का विवाह शाहजहाँ से होने से पहले मुमताज शाहजहाँ के  सूबेदार शेर अफगान खान की पत्नी थी. शाहजहाँ ने मुमताज का हरम कर विवाह किया.
  • मुमताज से विवाह करने के लिए शाहजहाँ ने मुमताज के पहले पति की हत्या करवा दी थी.
  • शाहजहाँ से विवाह के पहले मुमताज का शेर अफगान खान से एक बेटा भी था.
  • मुमताज शाहजहाँ के बीवियों में सबसे खुबसूरत नहीं थी. बल्कि उसकी पहली पत्नी इशरत बानो सबसे खुबसूरत थी.
  • मुमताज की मौत  उसके 14 वे बच्चे के जन्म के बाद हुई थी.
  • मुमताज के मौत के तुरंत बाद शाहजहाँ ने मुमताज की बहन फरजाना से विवाह कर लिया था.
  • शाहजहाँ इतना ज्यादा वासना लिप्त था कि उसने अपनी स्वयं की बेटी जहाँआरा के साथ शारीरिक संबंध बना लिया था.
  •  जहाँआरा मुमताज और शाहजहाँ की बड़ी पुत्री थी.
  • जहाँआरा की शक्ल मुमताज की हुबहू थी. इसलिए शाहजहाँ ने अपनी ही बेटी को अपनी रखैल बना लिया. और कभी भी  जहाँआरा का कहीं और निकाह नहीं होने दिया.
  • शाहजहाँ ने अपने इस नाजायज संबंध को जायज दिखाने  के लिए ईमाम और मौलवियों की सभा बुलाकर इस रिश्ते को जायज़ करार दिलवाया था .
  • शाहजहाँ की इस घटिया हरकत का समर्थन करते हुए ईमाम और मौलवियों ने कहा : – “माली को अपने द्वारा लगाये पेड़ का फल खाने का हक़ है…”.
  •  जहाँआरा जब प्रेम संबंध में थी तो उसके  प्रेमी के पकडे जाने पर  शाहजहाँ ने उस लड़के को  तंदूर में बंद कर जिन्दा जला दिया था.

ये थी शाहजहाँ और मुमताज़ की प्रेमकहानी की सच्चाई.

अगर दोनों में प्रेम होता तो शहजाहं की इतनी रखैलें न होती और शाहजहाँ मुमताज के मौत के बाद उसकी बहन से और अपनी बेटी से शारीरिक संबंध नहीं बनाता.

सच कहा जाए तो शाहजहाँ ना ही औरत की इज्ज़त करता था और ना ही मुमताज़ से प्रेम.

शाहजहाँ ने अपनी हवस और अहंकार के लिए मुमताज से विवाह किया था. शाहजहाँ और मुमताज़ की प्रेमकहानी झूठ के अलावा कुछ नहीं.

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रेल टिकट


R.k. Neekhara

प्रेरक कहानी :

रेल टिकट
राम और श्याम दो मित्र थे। किसी समय दोनों एक ही स्कूल में पढ़ते थे। मगर दोनों की आर्थिक स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क था। राम के पिता एक बड़े व्यापारी थे और उनकी बदौलत राम बिना कुछ किए ही मालामाल हो गया।

कहावत है कि पैसा ही पैसे को खींचता है। राम ने भी जब पिता का व्यवसाय सँभाला तो उसकी संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ने लगी। वहीं दूसरी ओर श्याम के पिता अत्यंत गरीब थे। स्कूल से मिले वजीफे के सहारे श्याम ने जैसे-तैसे स्कूल की पढ़ाई पूरी की। कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के लिए श्याम को आकाश-पाताल एक करना पड़ा। मदद माँगने पर सभी रिश्ते नातेदारों ने उसे अँगूठा दिखा दिया।

अंत में उसने ट्‍यूशन ‍लेने तथा अखबार बाँटने जैसा पार्टटाइम काम किया एवं इस तरह लोहे के चने चबाते हुए कॉलेज की फीस की व्यवस्था की एवं पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी धाक जमा दी।

राम भी पास होकर स्नातक हो गया और उसके घर में घी के दिये जलाए गए। मगर श्याम के घर ऊँट के मुँह में जीरे के बराबर तेल भी नहीं था। अत: उसने तेते पाँव पसारिये, जेती लांबी सौर वाली लोकोक्ति पर अमल करते हुए फिल्मी गीत पर डांस ही कर लिया। स्नातक होने के बाद श्याम ने नौकरी पाने के लिए दस जगह की खाक छानी। मगर कहीं भी उसकी दाल नहीं गली। अंतत: उसने बैंक से लोन लेकर एक पावरलूम मशीन डाल ली।

शुरू में इतनी कठिनाइयाँ आई मानो सिर मुँडाते ही ओले पड़ गए हों। मगर धीरे-धीरे उसका काम चल निकला जो लोग गरीबी के कारण उसकी नाक में दम किए रहते थे, उसे नीचा दिखाते रहते थे। उन्होंने भी उसकी काबिलियत का लोहा मान लिया।

राम का एक बेटा अमित था जो उसकी आँखों का तारा था। श्याम का भी एक बेटा सुमित था जो कि उसके कलेजे का टुकड़ा था। संयोग से दोनों मित्रों के ये पुत्र एक ही स्कूल में पढ़ते थे। उनकी मित्रता देखकर लोग दंग रह जाते थे कि कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगू तेली। मगर मित्रता अमीरी-गरीबी नहीं देखती।

एक दिन अमित के मामा का फोन आया। उन्होंने उसे घूमने के लिए शहर बुलाया था। अमित ने सुमित को भी अपने साथ चलने के लिए तैयार कर लिया। नियत दिन अमित के पिता राम अमित व सुमित को रेलवे स्टेशन छोड़ने आए। जिसके पास बिना मेहनत का ज्यादा पैसा होता है उसकी धन कमाने और बचाने की लालसा बढ़ती ही जाती है। अमित के पिता ने भी दोनों मित्रों को बिना टिकट रेल में बैठाकर समझाया कि किस तरह शहर पहुँचकर उन्हें स्टेशन के एक छोर ‍पर स्थित टूटी हुई ग्रिल के रास्ते से बाहर निकलना है कि कट चेकर से बचा जा सके। अमित के पिता के जाते ही उसने अमित को खूब खरी-खोटी सुनाई।

उसे उसके पिता के दिए संस्कारों ने बिना टिकट यात्रा करने की अनुमति नहीं दी। दोनों मित्रों ने अगला कदम तय किया और भागकर टिकट खिड़की पहुँच गए। वहाँ यात्रियों की इतनी लंबी कतार लगी थी मानो कि एक अनार सौ बीमार जैसे-तैसे टिकट लेकर वे रेल में सवार हुए। थोड़ी ही देर बाद एक व्यक्ति ने उनसे पूछा कि बेटा मिठाई खाओगे। मिठाई देखकर सुमित के मुँह में पानी आ गया। उसने हाथ आगे बढ़ाया था कि अमित ने उसका हाथ खींच लिया। फिर धीरे से कानाफूसी करते हुए समझाया कि यात्रा में किसी भी अजनबी से लेकर कोई चीज खाना-पीना नहीं चाहिए।

ऐसे लोग बदमाश हो सकते हैं जो अपना जाल बिछाकर सहय‍ात्रियों को बेहोश करके लूट लेते हैं। ऐसे लोगों के मुँह में राम तथा बगल में छुरी होती है।

शहर पहुँचने के बाद दोनों मित्र स्टेशन के बाहर सिर उठाकर पूरी निडरता के साथ आए क्योंकि जेब में टिकट जो रखा था। बाद में इस घटना का पता चलने पर अमित के पिता शर्म से पानी-पानी हो गए। वहीं सुमित के पिता को उस पर बहुत गर्व हुआ। किसी ने ठीक ही कहा है कि साँच को आँच नहीं। अर्थात सच्चे मनुष्य को कोई हानि नहीं पहुँचा सकता।

विशेष : दोस्तो, क्या आप बता सकते हैं कि इस कहानी में कितने मुहावरों का प्रयोग हुआ है, चलिए गिनती शुरू ‍कीजिए, फिलहाल हम आपको बताते हैं कि इस कहानी में 28 मुहावरे छुपे हुए हैं।

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ये हैं श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में 15 बेहद अद्भुत तथ्य


ये हैं श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में 15 बेहद अद्भुत तथ्य, शायद ही कोई हिन्दू जानता हो, जरूर शेयर करें…

श्रीमद्भगवद्गीता (Shrimad Bhagavad Gita)  हिंदुओं का सबसे पवित्र ग्रंथ है, इस ग्रंथ में भगवान कृष्ण और उनके सखा के बीच महाभारत के युद्ध के समय का वार्तालाप है। यह वार्तालाप बहुत ही अनमोल और ज्ञान से प्रेरित है इसमें भगवान कृष्ण अपने सखा अर्जुन को कर्म, धर्म, सन्यास और बहुत से बिंदुओं पर ज्ञान देते हैं। गीता हिन्दुओं के सभी घर में होती है और हर कोई रोज उसका पाठ करता है 700 श्लोक में वर्णित यह ग्रंथ सभी का सार है। इस ग्रन्थ में जीवन का पूरा सार दिया गया है। आज हम आपको गीता के बारे में जानकारी देगे उम्मीद है आपके काम आए।

1. गीता महाभारत में छन्दों का सबसे महत्वपूर्ण संग्रह है।

2. पूरी दुनिया में हिंदू भगवद् गीता से परिचित हैं और हम सबने हमारी पीढ़ियों से इसकी महानता के बारे में सुना है।

3. गीता भगवान श्री कृष्ण द्वारा युद्ध और जीवन के अर्थ को समझाने के लिए अर्जुन को दिए गए उपदेश की एक श्रृंखला है।

4. यह पांडव राजकुमार अर्जुन और उसके सारथी बने भगवान श्री कृष्ण के बीच एक महाकाव्य संवाद है।

5. महाभारत इस बात की पुष्टि करता है कि भगवान कृष्ण ने 3137 ई.पू. कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था विशेष ज्योतिषीय संदर्भों के अनुसार, 35 साल की लड़ाई के बाद वर्ष 3102 ई.पू. में कलियुग की शुरुआत हुई।

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6. भगवद् गीता में 18 अध्याय हैं जिसमे कुल 700 छंद हैं और यह तीन हिस्सों में विभाजित है जिसमे प्रत्येक हिस्से में 6-6 अध्याय हैं।

7. यह देखा जा सकता है कि नंबर अठारह महाभारत में कई जगह प्रयोग हुआ है नम्बर अठारह का मतलब संस्कृत में “जया” होता है जिसका शाब्दिक अर्थ बलिदान से हैं 18 त्योहार, गीता में 18 अध्याय अक्षौहिणी अथार्त 18 जरासंध का 18 बार आक्रमण और कहा जाता है कि पांडवों के पास 11 अक्षौहिणी सेना थी और कौरवों के पास 7 अक्षौहिणी तो कुल मिला कर हुई 18 इस प्रकार 18 अंक का महाभारत में बहुत महत्व है।

8. अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपने जीवन के आखिरी वर्षो में भगवद गीता में निहित बुद्धिमता में आत्मसात शुरू कर दिया! उसने कहा कि मुझे अपने जीवन के प्रारंभिक दिनों में ही भगवद् गीता में लिप्त हो जाना चाहिए था ऐसा ना करने का मुझे बहुत खेद है।

9. भगवद् गीता का पहला अंग्रेजी अनुवाद 1785 में चार्ल्स विल्किंस ने लंदन में किया था।

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10. बहुत कम लोगो को ये भगवद् गीता का निष्कर्ष पता होगा कृष्णा-वाणी अनुसार “धर्म कि सभी किस्मों को त्याग कर मुझे और सिर्फ़ मुझे अपने आप को आत्म समर्पित कर दें” बहुत कम लोग इस निष्कर्ष को समझ पाते है इसीलिये यह तथ्य बहुत से लोगो को पता नही है।

11. भगवद् गीता को गीत क्यों कहा जाता है जबकि यह तो एक उपदेश है? क्योंकि यह एक ऐसे स्केल पर बोला गया जिसे Anushtup कहा जाता है प्रत्येक छंद में 32 अक्षर हैं मूलतः ये चार चार पक्तियों में विभाजित हैं जिसमे आठ अक्षर हैं एक विशेष छंद में Trishtup स्केल का प्रयोग किया गया है जिसमे हर चार पंक्तियों में 11-11 अक्षर हैं।

12. न केवल अर्जुन बल्कि 3 और लोगो ने सीधे कृष्णा से गीता का उपदेश सुना।

  • संजय (क्योकि उसे उपहार में दिव्य शक्ति मिली हुई थी)
  • हनुमान (क्योकि वह अर्जुन के रथ पर थे)
  • बर्बरीक (घटोत्कच का पुत्र)जो यह सब एक पहाड़ी के ऊपर से देख रहा था।

13. भगवद् गीता मूलतः शास्त्रीय संस्कृत में लिखी गयी है परन्तु इसे अब तक 175 भाषाओं में अनुवादित किया जा चुका है।

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14. अदालत में गीता और कुरान की कसमें सिर्फ फिल्मों में दिखाई जाती है। हकीकत में ऐसा कुछ नही है… दरअसल यह सब 170 साल पहले खत्म हो चुका है लेकिन फिल्मों में आज भी ये सिलसिला चला आ रहा है। अंग्रेजों ने सोचा इस देश के लोग कल्चर के प्रति ज्यादा भावुक हैं इसलिए गीता या कुरान की कसम खाकर झूठ नहीं बोल सकते। इसलिए ये सब शुरू किया गया था।

गीता से हमें क्या-क्या सीख मिलती है।

  • मानसिक शांति और सौहार्द हासिल करने के लिए अपनी इच्छाओं को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए।
  • मौत से डरना बेकार है मौत का अर्थ सिर्फ आत्मा का भौतिक संसार से आध्यात्मिक संसार में जाना है।
  • कर्म अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमेशा परिणाम के बारे में चिंता किए बिना पूरे समर्पण के साथ कार्य करना चाहिए।
  • भगवान हमेशा हमारे साथ और हमारे आसपास होता है भले ही हम कहीं भी हो या कुछ भी कर रहे हो।
  • अन्य प्राणियों की ओर इंसान के मन में बुरी भावनाये इंसान के विनाश का कारण है। इनसे बचा जाना चाहिए।
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For All Married Couple


​પતિ-પત્નીના જીવનને સ્પર્શ કરતી એક સરસ વાત જે સંસાર ત્યાગી ચુકેલા એક જૈન મુની પાસે સાંભળી હતી 
_ For All Married Couple
લગ્નની પચીસી વટાવી ચૂકેલું એક દંપતી લગ્નની વર્ષગાંઠની પૂર્વ સંધ્યાએ એક બીજા સામે બેસીને એક બીજાના ગમા – અણગમાની ફરિયાદ કરે છે, ત્યાં પતિ એક સરસ પ્રસ્તાવ મુકે છે :
“આપણે બંને એક બીજાને એક એક નોટબૂક ભેટ આપીએ – તે નોટબૂકમાં આપણે રોજેરોજ એક બીજાની કયી વાત ના ગમી તે ટાંકતા રહેવાનું અને આવતી વર્ષગાંઠે એકબીજા સામે બેસીને એક બીજાની ખામીઓ વાંચવાની…. વર્ષ દરમ્યાન જે ખામી નજર આવે – આગામી વર્ષોમાં પ્રયત્ન કરવાનો તે ખામીઓ દુર કરવાનો – તે ભૂલનું પુનરાવર્તન ના થાય તે જોવાનું !!”
પતિની આ વાત સાંભળી પત્ની પણ સંમત થઈ અને એક બીજાને નોટેબૂક્ની   આપ – લે કરી લીધી…….
વર્ષ વીતતું ગયું….વાતો – ભૂલો – ખામીઓ લખાતી રહી….
એક વર્ષના વહાણાં વાઈ ગયા….
ફરી લગ્નની વર્ષગાંઠે પતિ – પત્ની સામસામે બેઠા… એક બીજાની નોટબુકની આપ – લે કરી લીધી….
પહેલ આપ પઢો…ની હુંસાતુંસી જામી….આખરે મહિલા પ્રથમના ધોરણે પત્નીએ લખેલી નોંધ પતિએ વાંચવાની શરુઆત કરી…
પ્રથમ પાનું….બીજું પાનું…ત્રીજું પાનું…
ફિલ્મ જોવાનો વાયદો કરી મોડા આવ્યા….

બહાર જમવાનો વાયદો કરી ના લઇ ગયા….

મારા પિયરીયા આવ્યા ત્યારે સારી રીતે વાત ના કરી 

મારા માટે ભંગાર સાડી ઉપાડી લાવ્યા…
આવી અનેકો રોજ-બરોજની ફરિયાદી પતિદેવે વાંચી….
પતિની આંખોમાંથી અશ્રુઓની ધાર વહેવા માંડી….
આખરે છેલ્લું પાનું પૂરું કરી પતિએ પત્નીને કહ્યું :
“તારી બધી ફરિયાદો હું કબુલ કરું છું અને આગામી વર્ષોમાં તેનું પુનરાવર્તન ન થાય તેનું હું ધ્યાન રાખીશ…..
હવે પત્નીએ પતિની રોજનીશીના પાના ફેરવવા શરુ કર્યા….
પ્રથમ દિવસ….બીજો દિવસ….ત્રીજો દિવસ….કોરું ધાકોર….પછી…

બે ચાર દિવસો એક સાથે ફેરવ્યા…..ત્યાં પણ કોરું ધાકોર…..

મહિના ફેરવ્યા…. ત્યાં પણ કોરું ધાકોર…….

આખરે પત્નીએ કંટાળી વર્ષનું છેલ્લું પાનું ખોલ્યું…

ત્યાં પતિએ લખ્યું હતું….
“હું તારા મોઢે ગમે તેટલી ફરિયાદો કરું પણ તે મારા માટે કરેલા ત્યાગ અને આપેલા અનહદ પ્રેમ બાદ જેને યાદ રાખી હું લખી શકું તેવી કોઈ ખામી દેખાઈ નથી.- તારા પ્રેમ અને ત્યાગે તારી બધી ખામીઓને મારી નજરમાં આવવા જ દીધી નથી……તું દરેક ભૂલ અને ખામીઓથી પર છે…કેમકે તે મારી અક્ષમ્ય ખામીઓ પછી પણ દરેક ડગલે અને પગલે તેં મારો સાથ આપ્યો છે….મારા પડછાયાનો વાંક ક્યાં દેખાય મને…..
હવે અશ્રુની ધારનો વારો પત્નીનો હતો. તેને પતિના હાથમાંથી પોતાની રોજનીશી લઇ તેને કચરા ટોપલીમાં સ્વાહા કરી દીધી…..સાથે સાથે ગમા – અણગમાઓને પણ….
નવપલ્લિત બની…નવપરણિત યુગલની જેમ મહેકી ઉઠ્યું તેમનું જીવન – જીવનની ઢળતી સંધ્યાએ….
એક – બીજાની ખામીઓ શોધવાને બદલે એક – બીજાએ પરસ્પર શું ત્યાગ કર્યું તેનો વિચાર માત્ર આપના જીવનને નવપલ્લિત કરી મુકે છે….

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હનુમાન પ્રશ્નાવલિ ચક્ર: આનાથી મળશે દરેક સવાલનો જવાબ


હનુમાન પ્રશ્નાવલિ ચક્ર: આનાથી મળશે દરેક સવાલનો જવાબ

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આવામાં હનુમાન જ્યોતિષના માધ્યમથી દરેક પ્રશ્નોના ઉત્તર સરળતાથી જાણી શકાય છે.આ આર્ટિકલની સાથે હનુમાન પ્રશ્નાવલી ચક્ર પ્રકાશિત કરી રહ્યા છીએ. આમાં તમારા પ્રશ્નનો જવાબ છુપાયેલો છે.

ઉપયોગ વિધિ

જેને પણ પોતાના પ્રશ્નનો જવાબ જોઇએ તેણે સૌ પ્રથમ સ્નાનાદિથી પવિત્ર થવું.

પાંચ વાર ऊँ रां रामाय नम: મંત્રનો જાપ કર્યા બાદ 11 વાર ऊँ हनुमते नम: મંત્રનો જાપ કરવો.

તેના પછી આંખો બંધ કરી હનુમાનજીનું સ્મરણ કરતા પ્રશ્નાવલિ ચક્ર પર કરસર ફેરવતા રોકી દો.

જે કોષ્ટક પર કરસર રોકાઇ જાય તે કોષ્ટકમાં લખેલા અંકને જોઇને પોતાના પ્રશ્નનો જવાબ જુઓ.

કોષ્ટકો ના અંક અનુસાર ફળાદેશ

1 – તમારૂં કાર્ય જલ્દી પુરૂં થશે.

2 – તમારા કાર્યમાં સમય લાગશે. મંગળવારે વ્રત કરવું.

3 – દરરોજ હનુમાન ચાલીસાનો પાઠ કરશો તો કાર્ય જલ્દી પુરૂં થશે.

4 – કાર્ય પુરૂં નહી થાય,

5 – કાર્ય જલ્દી થશે, પરંતુ અન્ય વ્યક્તિની સહાય લેવી પડશે.

6 – કોઇ વ્યક્તિ તમારા કાર્યોમાં અડચણો નાખશે, બજરંગ બાણનો પાઠ કરો.

7 – તમારા કાર્યમાં કોઇ સ્ત્રીની સહાયતા અપેક્ષિત છે.

8 – તમારૂં કાર્ય નહી થાય, કોઇ અન્ય કાર્ય કરો.

9 – કાર્ય સિદ્ધિ માટે યાત્રા કરવી

10 – મંગળવારનું વ્રત રાખો અને હનુમાનજીને ચોળા ચઢાવશો તો મનોકામના પુર્ણ થશે.

11 – તમારી મનોકામના જલ્દી પુરી થશે. સુંદરકાંડનો પાઠ કરો.

12 – તમારા દુશ્મનો બહુ છે. કાર્ય થવા નહી દે.

13 – પીપળાના વૃક્ષની પૂજા કરો. એક માસ બાદ કાર્ય સિદ્ધ થશે.

14 – તમને શીધ્ર લાભ થવાનો છે. મંગળવારે ગાયને ગોળ અને ચણા ખવડાવો.

15 – શરીર સ્વસ્થ રહેશે, ચિંતાઓ દુર થશે.

16 – પરિવારમાં વૃદ્ધિ થશે. માતા – પિતાની સેવા કરો અને રામચરિતમાનસના બાલકાંડનો પાઠ કરો.

17 – અમુક દિવસો ચિંતા રહેશે. ऊँ हनुमते नम મંત્રની દરરોજ એક માળાનો જાપ કરો

18 – હનુમાનજીના પૂજન અને દર્શનથી મનોકામના પુર્ણ થશે.

19 – તમને વ્યવસાય દ્વારા લાભ થશે. દક્ષિણ દિશામાં વ્યાપારિક સંબંધો વધારો.

20 – ઋણથી છુટકારો, ધનની પ્રાપ્તિ તથા સુખની ઉપલબ્ધિ શીઘ્ર થનારી છે. હનુમાન ચાલીસાનો પાઠ કરો.

21 – શ્રી રામચંદ્રની કૃપાથી ધન મળશે. શ્રી સીતારામના નામની પાંચ માળા રોજ કરો.

22 – હમણાં મુશ્કેલીઓનો સામનો કરવો પડશે પણ અંતે વિજય તમારો જ થશે.

23 – તમારો દિવસ ઠીક નથી. રોજ હનુમાનજીનો પૂજન કરો. મંગળવારે ચોળા ચઢાવો. સંકટોથી મુક્તિ મળશે.

24 – તમારા ઘરવાળા જ વિરોધમાં છે. તેમને અનુકુળ કરવા પુનમનું વ્રત કરો.

25 – તમને જલ્દી શુભ સમાચાર મળશે.

26 – દરેક કામ વિચારી – સમજીને કરો.

27 – સ્ત્રી પક્ષથી તમને લાભ થશે.દુર્ગાસપ્તશતીનો પાઠ કરો.

28 – હમણાં અમુક મહિનાઓ સુધી પરેશાની છે.

29 – હમણાં તમારા કાર્યની સિદ્ધિમાં વિલંબ છે.

30 – તમારા મિત્ર જ તમને દગો આપશે.સોમવારનું વ્રત કરો.

31 – સંતાનથી સુખ પ્રાપ્ત થશે.શિવની આરાધના કરો અને શિવમહિમ્નસ્તોત્રનો પાઠ કરો.

32 – તમારા દુશ્મનો તમને હેરાન કરે છે. સોમવારે બ્રાહ્નણને ભોજન કરાવો.

33 – કોઇ સ્ત્રી તમને દગો આપશે. સાવધ રહેવું.

34 – તમારા ભાઇ – ભાંડુઓ વિરોધ કરી રહ્યા છે. ગુરૂવારે વ્રત રાખો.

35 – નોકરીથી તમને લાભ થશે. પદોન્નતિ સંભવ છે, પુનમનું વ્રત રાખી કથા કરો.

36 – તમારા માટે યાત્રા શુભદાયી રહેશે. તમારા સારા દિવસો આવી ગયા છે.

37 – પુત્ર તમારી ચિંતાનું કારણ બનશે.રોજ રામ નામની પાંચ માળાનો જાપ કરો.

38 – તમારે હમણાં થોડાં દિવસો હજી પરેશાની રહેશે. યથાશક્તિ દાન –પુણ્ય અને કીર્તન કરો.

39 – તમને રાજકાર્ય અને ન્યાયિક કેસમાં સફળતા મળશે. શ્રી સીતારામનું પૂજન કરવાથી લાભ મળશે.

40 – અતિશીઘ્ર તમને યશ મળશે. હનુમાનની ઉપાસના અને રામનામનો જાપ કરો

41 – તમારી મનોકામના પુર્ણ થશે.

42- હમણા સમય સારો નથી.

43- તમને આર્થિક કષ્ટનો સામનો કરવો પડશે.

44 – તમને ધનની પ્રાપ્તિ થશે.

45 – દામ્પત્ય સુખ મળશે.

46 – સંતાનસુખની પ્રાપ્તિ થવાની છે.

47 – અભી દુર્ભાગ્ય સમાપ્ત નથી થયો. વિદેશ યાત્રાથી અવશ્ય લાભ થશે.

48 – તમારો સારો સમય આવવાનો છે. સામાજિક અને વ્યવસાયિક ક્ષેત્રમાં લાભ મળશે.

49 – તમારો બહુ જ સારો સમય આવી રહ્યો છે. તમારી દરેક મનોકામના પુરી થશે.

ऊँ हनुमते नम:
Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

शाहजहां


​शाहजहां को उसके बेटे औरंगजेब ने 7 वर्ष तक कारागार में रखा था। वह उनके पीने के लिए नपा-तुला पानी एक फूटी हुई मटकी में भेजता था । तब शाहजहाँ ने अपने बेटे औरंगजेब को पत्र लिखा जिसकी अंतिम पंक्तियां थी-
“ऐ पिसर तू अजब मुसलमानी

ब पिदरे जिंदा आब तरसानी,

आफरीन बाद हिंदवान सद बार,

मैं देहदं पिदरे मुर्दारावा दायम आब”….
अर्थात् 
हे पुत्र! तू भी विचित्र मुसलमान है जो अपने जीवित पिता को पानी के लिए भी तरसा रहा है। शत शत बार प्रशंसनीय हैं  वे ‘हिन्दू’ जो अपने मृत पूर्वजो को भी पानी देते हैं।

रामचंद्र आर्या

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बलिदानी पुत्र देवायत


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जूनागढ़ का पतन हो रहा था। राजा वीरता से युद्ध करते हुए रणक्षेत्र में सो चुके थे। महल में हाहाकार मच रहा था, किन्तू फिर भी पट्टन की सेनाएं दुर्ग को घेरे हुए थीं। सेना अंदर घुसकर राजा के पुत्र युवराज नौघड़ को पकड़कर मार डालना चाहती थी।

राजमंत्री ने दुर्ग का गुप्त द्वार खोला और रानी को राजकुमार के साथ बाहर निकाल दिया। रात्रि के घने अंधकार में अपने पुत्र को शत्रु के सैनिकों की आंखों से बचाती हुई रानी एक गरीब अहीर के द्वार पर खड़ी थी। उसका नाम देवायत था।
‘मुझे पहचानते हो भैया!’ रानी ने गृहपति से पूछा।
‘अपनी रानी माता को कौन नहीं पहचानेगा?’देवायत ने उत्तर दिया।
‘और इसे?’ रानी ने नौघड़ की ओर संकेत करते हुए देवायत से प्रश्न किया।
‘हां-हां क्यों नहीं?’ युवराज हैं न। कहिए, कैसे आगमन हुआ मेरी झोंपड़ी में? क्या आज्ञा है मेरे लिए? उसने हाथ जोड़कर प्रश्न किया।
‘हम…

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