Posted in Bollywood

पद्मावती

संजय भंसाली से प्रश्न है कि उसे खिलजी से इतनी ही मुहब्बत है तो अपनी क्रिएटिविटी को धरातल पर पंख क्यों नही देते है? क्यों नही लैला – मजन ,शीरी-फरहाद इत्यादि की तर्ज़ पर ‘कफूर – खिलजी: एक अमर प्रेम’ बनाते है? क्यों क्यों हमारे गौरवशाली इतिहास को गलत तरीके से पेश जर रहे हैं?? भंसाली को कहानी नही मालूम तो हम सूना देते है। यह कहानी किसी लेखक की कल्पना नही है बल्कि यह कहानी इतिहास में ही दर्ज है।

अलाउद्दीन खिलजी के गुजरात पर चढ़ाई के दौरान एक लड़के को पकड़ कर गुलाम बनाया गया था। कहते है वह बेहद खूबसूरत बच्चा था। उसको जब पकड़ा गया तो उसके टट्टे(टेस्टिकल्स) काट कर हिजड़ा बनाया गया और उसको इस्लाम कबूल करवाया गया। उसका नया नाम मलिक कफूर रक्खा गया। अलाउद्दीन खिलजी एक व्यभिचारी सुल्तान तो था ही वह समलिंगी भी था, उसे लौंडेबाजी का शौक था, उसकी जब निगाह उस पर पड़ी तो वह अपना दिल दे बैठा। खिलजी ने उस गुलाम लड़के को अपनी यौन इच्छा के लिए 1000 दीनार में खरीद लिया था, इसी लिए यह मलिक कफूर, इतिहास में ‘हज़ार दीनार कफूर’ के नाम से भी जाना जाता है। खिलजी इस कफूर की मुहब्बत में इतना गिरफ्तार था कि उसे पहले सिपाही और बाद में उसे अपनी फौज का सेनापति बना दिया था। फिर इसी कफूर ने बाद में 1316 में अलाउद्दीन खिलजी को मरवा कर खुद सत्ता हथिया ली थी लेकिन अंत में खिलजी के तीसरे बेटे मुबारक के हाथों मारा गया था।

संजय भंसाली, कहानी में दम है लेकिन मैं जानता हूँ की तुम नही बना पाओगे क्योंकि तब तुम्हारी सारी प्रगतिशीलता और क्रिएटिविटी, तुम्हारे टट्टों (टेस्टिकिल्स) में उतर आयेगी और मलिक कफूर बनाये जाने के डर से तुम्हारी सारी सिनेमैटिक क्रिएटिविटी कपूर बन उड़ जायेगी।

यदि संजयलीला भंसाली या अनुराग कश्यप जैसे सपोलों को सांप बनने से पहले ही कुचला होता तो आज अजगर बनकर पूरी हिन्दू सभ्यता और अस्मिता को नहीं लील रहे होते ! खैर देर आये दुरुस्त आये !
हिन्दू बाहुल्य हिंदुस्तान में सब कुछ सेक्युलरवादी विधान और कानून के हवाले नहीं छोड़ सकते ! जब कोई हिन्दू स्मिता पर चोट करे ! जब कोई नारी का बलात्कार करने की कोशिश करे ! जब कोई तिरंगे को जलाये तो क्या देश का राष्ट्रवादी और मानवतावादी समाज पुलिस का इन्जार करता रहे ? शायद पुलिस के आने तक सब कुछ ख़त्म हो चुका होगा !
वामपंथियों और देशद्रोहियों के तलवे चाटने वाले फिल्मकार जब राजपूत स्मिता और इतिहास से छेड़छाड़ करे तो राजपूत ही क्या पूरा हिन्दू समाज आक्रोशित होगा क्योंकि मुग़लों ने सबसे अधिक जुल्म राजपूतों पर ही किये फिर भी राजपूतों को झुका न सके।

अब गेंद महाराणा और वीर शिवाजी के वंशजो के पाले में है कि वे ऐसे फिल्मकारों को वीर भूमि में फिल्म बनाने की इजाजत न दें।

आज यदि अभिव्यक्ति के नाम पर हिन्दू विरोधियों का बचाव किया गया तो फिर वह सत्ता और सरकार भी मुग़लों के तलवे चाटने वाली मानी जायेगी !

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s