Posted in भारत का गुप्त इतिहास- Bharat Ka rahasyamay Itihaas

पद्मावती


चंद कागज़ के टुकड़ों के लिए खुल्लम खुल्ला अपने बॉब्स और जांघे दिखाने वाली लड़की …….. एक क्षत्राणी के किरदार को भला जी सकती है क्या ?? …….. बिन दाढ़ी मुच्छों वाला भांड सा चिकना कभी बाजीराव के किरदार को जी सकता है क्या ?? ………
ये महारानी पद्मावती ने चीतोड़ पर खिलजी के आक्रमण के दौरान सहायता के लिए हुमायूँ को किस सन में भला राखी भेजी थी …….. ऐसा मैंने बचपन में राजस्थान शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में पढ़ा था …….. क्या हमारे वीर पूर्वजों के दिन इतने बुरे आ गये थे जो हुमायूँ से सहायता मांगेंगे …….. जो बाबर की मृत्यु के बाद खुद दर दर का हो रखा था ……..
जोधा अकबर पर फिल्म बनाने वाले फिल्मकारों ने कभी पन्नाधाय पर कोई फिल्म क्यों नहीं बनायी ?? …….. जिसने अपने पुत्र चंदन का बलिदान देकर महाराणा प्रताप के पिता राणा उदय सिंह जी के प्राणों की रक्षा की थी ……..
बाजीराव जैसे वीर योद्धा को देवदास बना के दिखा दिया …….. पद्मावती जैसी वीरांगना के इश्क़ करते हुए दृश्य राजपूताने की धरती पर फिल्मायें जा रहे हैं …….. अब ये इतिहास बतायेंगे/
सिखायेंगे क्या हम हमारी आज की नस्ल को ……..
राजपूताने की धरती तो महाराणा कुंभा …. महाराणा सांगा राणा उदय सिंह …. महाराणा प्रताप …. महाराणा अमर सिंह …. महाराज सूरज सिंह …. वीर दुर्गादास …. राव जोधा …. राव शेखा …. राव बिका …. वीर तेजा …. रूणिचा के बाबा रामदेव …. कुंवर केसरिया …. जाहर वीर गोगा …. मीरा पन्नाधाय पद्मिनी की धरती है ……..
ये सब इश्कजादे तो नहीं थे आखिर ?? ……..
फिर क्यों हिंदुओं की भावनाओं के साथ बार बार कला और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर चंद भांड खिलवाड़ करते हैं ?? ……..
हमारी इस दुर्दशा का सबसे बड़ा कारण है सेक्युलर भांड हिन्दू और वामपंथी समाज …….. जो इनको बढ़ावा देते हैं ……..
हमारे लिए वीरांगना झाँसी की रानी भी उतनी ही सम्मानीय है …….. जितनी सम्मानीय है महारानी पद्मिनी …….. साक्षी संधू साइना उषा ……… भारत की हर बेटी वीरांगना है …….. देश का मान सम्मान अभिमान है ……… भारत माता के माथे की बिंदिया है …….. इनका अपमान सहा नहीं जायेगा ………
फ्रांस के एक प्रसिद्ध इतिहासकार ने अपनी भारत यात्रा के दौरान राजस्थान भ्रमण के बाद लिखा था …….. “राजस्थान की धरती पे पाँव रखने का साहस नहीं होता ……… पत्ता नहीं पाँव के नीचे किस वीर/वीरांगना का थान (समाधि) हो” ………
सोने सी चमकती बालू रेत के हर एक कण कण में एक वीरगाथा लिखी है ……..
गढ़ चित्तौड़ मेहरानगढ़ मंडोर नाहरगढ़ तो राजपूताने की ही नहीं हिंदुस्तान की आन बान और शान है …….
कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर हमारे इतिहास से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं होगी ……… संघर्ष जारी रहेगा !!!! ….
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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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