Posted in भारतीय शिक्षा पद्धति

अपूज्या; यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादर त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षँ,मरणँ भयम


आर्य पुष्पेन्द्र सिंह

अपूज्या; यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादर
त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षँ,मरणँ भयम

अर्थात::
जहा पर अयोग्यों को पूजा जाता है और विद्वानो का निरादर किया जाता है
वहा तीन चीजे प्रवेश कर जाती है-१.भुखमरी २. मृत्यु ३. भय

गुरुकुल शिक्षा पद्धति नस्ट होने पर आज भारत वर्ष में सच्चे सन्यासी और देशभक्तो का अनादर होता आ रहा है और उनके स्थान पर पाखंडी दुस्टो की पूजा होंने से राष्ट्र व धर्म की दुर्गति हो रही है ।

विवेकानंद, रवीन्द्रनाथ टैगोर , गांधी , नेहरू जैसे अंग्रेज़ो के एजेंटो ने बहुत मुर्ख बनाया हिन्दू समाज को नपुंसकता , माँसाहार , शराब और भी जाने क्या क्या अवगुण महान शिक्षाओ के रूप में दे दिए ।

नियमित रूप से मांस खाने वाले , सिगरेट पीने वाले, पशुबलि करने वाले, गौमांस का समर्थन करने वाले, मोहमद और ईसा जैसे आतंकी व्याभिचारी को महान संत कहने वाले विवेकानन्द को आदर्श हिन्दू संत कहना कितना बड़ा अभिशाप है

आधुनिक काल में चक्रपाणि महाराज, प्रमोद कृष्णन जैसे काग्रेसी के पालतू साधू मुल्लो के तलवे चाटते है , हिन्दुओ को कल्कि अवतार के भृम में कर्तव्य हीन बना रहे है , कैराना में जाकर मात्र 2 दिनों में एक झूठी जांच रिपोर्ट इन्होंने दी और कहा की किसी हिन्दू का पलायन नहीं हुआ है ।

आशाराम, निर्मल बाबा, राधास्वामी, निरंकारी, ब्रह्मकुमारी , आशुतोष महाराज , रामपाल , रामदेव जैसे तथाकथित संत अरबो खरबो के मालिक है , हेलीकाप्टर में घूमते है और अपने को सन्यासी कहते है , ये कभी हिन्दू समाज को इस्लाम का सच नहीं बताते , उन्हें पाखंडो में फंसा कर रखते है और खूब लुटते है । कुरान को ईश्वरीय ग्रन्थ कहते है।
अकबर की आरतीयां अपनी किताबो में छापते है
अयोध्या में हिन्दुओ के दान के पैसो से इन संतो ने मस्जिद बनवा दी।
ये बापू संत , हमारे दान के पैसो से मुल्लो को हज पर भेजते है।

अपने आपको ईश्वर का अवतार बताने को होड़ लगी है

आज अनेको हिन्दू संघठनो में भी इन्ही अधर्मी संघठनो का सम्मान होता है जो मुल्लो को भी अपना भाई मानते है , उन्हें राष्ट्रवादी मानते है , उन्हें अपने संघठनो में सदस्यता देते है।

जब तक समाज धर्मात्माओं की जगह इन दुस्ट लोगो की पूजा करता रहेगा ,
जब तक वेद विज्ञान की जगह जादू टोनों चमत्कारो को महत्त्व दिया जाएगा

जब तक हिन्दू समाज सत्य असत्य को जाने बिना , सुनी सुनाई बातो को धर्म मानता रहेगा तब तक गुलाम ही बनकर रहेगा ।

अपना विवेक जगाओ , बुद्धि खोलो और अधर्मियों की पहचान करो, तभी धर्म की रक्षा हो पाएगी।

गुरुकुल के विद्वान राष्ट्रवादी आचार्यो द्वारा आयोजित 2 दिवीसीए लघु गुरुकुल की कक्षा को कीजिये और धर्म के वैज्ञानिक स्वरुप को जानिये

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One thought on “अपूज्या; यत्र पूज्यन्ते पूज्यानाम् च निरादर त्रीणि तत्र प्रविशन्ति,दुर्भिक्षँ,मरणँ भयम

  1. 😥सनातन धर्म का हार्स कर्ममूंडता से ही हो रहा है, 🙏

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